# जन्मसिद्ध नागरिकता और बर्थ टूरिज्म पर लगाम लगाने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दस्तखत किए दो नए एग्जीक्यूटिव ऑर्डर

> राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता को सीमित करने और बर्थ टूरिज्म रोकने के लिए ओवल ऑफिस से दो नए एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर दस्तखत किए हैं। हालांकि आंकड़े बताते हैं कि ऐसे मामले कुल जन्मों के मुकाबले बेहद कम हैं और इस फैसले को कानूनी चुनौती मिलना तय माना जा रहा है।

**Type:** article · **Category:** अमेरिका · **Published:** 2026-08-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/america/janmasiddha-nagarikata-aura-bartha-turijma-para-lagama-lagane-ke-lie-rashtrapati-donald-trump-ne-dastakhata-kie-do-nae-egjikyutiva-14564 · **Language:** Hindi
**Tags:** डोनाल्ड ट्रंप, जन्मसिद्ध नागरिकता, बर्थ टूरिज्म, अमेरिका, सुप्रीम कोर्ट, स्टीफन मिलर, 14वां संशोधन, एग्जीक्यूटिव ऑर्डर

अमेरिका में जन्म के आधार पर मिलने वाली स्वतः नागरिकता को लेकर एक बार फिर बड़ा संवैधानिक और राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। जून में देश की शीर्ष अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट से झटका मिलने के बावजूद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस नीति को बदलने के अपने इरादे पर कायम हैं। ओवल ऑफिस से गुरुवार को घोषणा करते हुए उन्होंने दो नए कार्यकारी आदेशों (एग्जीक्यूटिव ऑर्डर) पर दस्तखत किए हैं, जिनके जरिए इसी नीति पर परोक्ष रूप से पाबंदी लगाने की रणनीति तैयार की गई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यह कदम बहुत पहले ही उठाया जाना चाहिए था, लेकिन अब उनकी सरकार इसे मजबूती से लागू कर रही है।

 

## दोनों कार्यकारी आदेशों में क्या हैं नए कड़े प्रावधान?

राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षरित पहला एग्जीक्यूटिव ऑर्डर उन गैर-नागरिकों की श्रेणी को अधिक सख्त और स्पष्ट बनाता है, जिनके बच्चों को अमेरिकी धरती पर जन्म लेने के बाद भी स्वतः नागरिकता का अधिकार नहीं दिया जाएगा। इस नियम के दायरे में वे मामले आएंगे जहां बच्चे के माता-पिता में से कोई भी किसी विदेशी सरकार से जुड़ा हुआ हो, किसी आतंकवादी संगठन से संबंध रखता हो या फिर धोखाधड़ी और जाली दस्तावेजों के जरिए नागरिकता हासिल करने की कोशिश में लिप्त हो।

वहीं दूसरा एग्जीक्यूटिव ऑर्डर उस प्रथा को सीधे तौर पर निशाना बनाता है जिसे आमतौर पर 'बर्थ टूरिज्म' के नाम से जाना जाता है। इसके तहत विदेशी गर्भवती महिलाएं केवल अपने नवजात बच्चे को अमेरिका की नागरिकता दिलाने के उद्देश्य से पर्यटक वीजा पर देश में प्रवेश करती हैं और यहां बच्चे को जन्म देती हैं। व्हाइट हाउस के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी स्टीफन मिलर ने इस स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि कई विदेशी नागरिक सिर्फ पर्यटक बनकर अमेरिका आते हैं, लेकिन उनका मुख्य उद्देश्य यहां बच्चा पैदा करके उसे नागरिक बनाना होता है। प्रशासन के मुताबिक, ऐसे बच्चे आगे चलकर अमेरिकी नागरिक होने के नाते देश की तमाम नागरिक सुविधाओं, अधिकारों और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाते हैं, जिसे प्रशासनिक स्तर पर व्यवस्था का दुरुपयोग माना जा रहा है।

 

## आंकड़ों का गणित और दावों में कितना अंतर?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन आदेशों की वकालत करते हुए दावा किया है कि इस तरह के माध्यमों से अब तक 'सैकड़ों हजार' बच्चे जन्म ले चुके हैं। हालांकि, आधिकारिक आंकड़े और स्वतंत्र शोध संस्थाओं के निष्कर्ष इस दावे से अलग तस्वीर पेश करते हैं। माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट नामक एक स्वतंत्र अनुसंधान संगठन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में हर साल बर्थ टूरिज्म या अस्थाई वीजा से जुड़े ऐसे मामलों की कुल संख्या लगभग 22,000 से 26,000 के बीच ही रहती है।

साल 2024 के उपलब्ध आंकड़ों पर नजर डालें तो पूरे वर्ष में केवल 9,600 ऐसे जन्म दर्ज किए गए थे, जिनमें बच्चे को जन्म देने वाली मां का स्थाई पता अमेरिका से बाहर का था। कानूनी और जनसांख्यिकी विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में हर साल होने वाले कुल जन्मों की तुलना में यह संख्या नगण्य है। इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के विधि प्राध्यापक प्रोफेसर गेब्रियल चिन ने कहा कि यह पूरी व्यवस्था और कुल जन्म दर के सामने 'समुद्र में एक बूंद' या 'बाल्टी में एक बूंद' के समान है।

 

## 150 साल पुराना 14वां संशोधन और कानूनी चुनौतियां

अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता का यह संवैधानिक अधिकार 14वें संशोधन के तहत पिछले लगभग 150 वर्षों से लगातार लागू है। इस ऐतिहासिक व्यवस्था के अनुसार, यदि कोई भी बच्चा अमेरिका की सीमा और उसके अधिकार क्षेत्र के भीतर पैदा होता है, तो उसे बिना किसी शर्त के तुरंत अमेरिकी नागरिकता प्राप्त हो जाती है। राष्ट्रपति ट्रंप के हालिया कदम सीधे तौर पर इसी बुनियादी संवैधानिक अधिकार को सीमित करने का प्रयास करते हैं, जिससे देश में एक बार फिर बड़ा कानूनी संकट खड़ा हो गया है।

कानूनी मामलों के जानकारों और संविधान विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के पास विदेशियों के देश में प्रवेश को नियंत्रित या सीमित करने के कुछ अधिकार जरूर होते हैं, लेकिन एक बार जब बच्चा अमेरिकी धरती पर जन्म ले लेता है, तो संविधान के 14वें संशोधन के तहत उससे नागरिकता का अधिकार छीनना बेहद मुश्किल काम है। ऐसे में माना जा रहा है कि इन दोनों नए एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के खिलाफ भी अदालतों में याचिकाएं दायर होना तय है और यह पूरा मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक पहुंचेगा।

## इसका आप पर असर
**पाठकों पर प्रभाव:**

- **अमेरिका यात्रा और वीजा चाहने वालों के लिए:** गर्भवती महिलाओं के पर्यटक या अस्थाई वीजा पर अमेरिका जाकर बच्चे को जन्म देने और स्वतः अमेरिकी नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया पर कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।

- **इमीग्रेंट परिवारों के लिए:** गैर-नागरिक या अस्थायी वीजा पर अमेरिका में रहने वाले अभिभावकों के बच्चों को मिलने वाली स्वचालित नागरिकता के नियमों में नई कानूनी शर्तें लागू हो सकती हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में क्या कदम उठाया है?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता को सीमित करने और बर्थ टूरिज्म पर रोक लगाने के लिए ओवल ऑफिस से दो नए कार्यकारी आदेशों (एग्जीक्यूटिव ऑर्डर) पर दस्तखत किए हैं।

### 2. बर्थ टूरिज्म क्या होता है?
बर्थ टूरिज्म वह प्रक्रिया है जिसमें विदेशी गर्भवती महिलाएं केवल अपने नवजात बच्चे को अमेरिका की नागरिकता दिलाने के उद्देश्य से टूरिस्ट या अस्थाई वीजा पर अमेरिका आकर बच्चे को जन्म देती हैं।

### 3. अध्ययनों के अनुसार अमेरिका में हर साल बर्थ टूरिज्म के कितने मामले सामने आते हैं?
माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट के अनुसार हर साल ऐसे मामलों की संख्या लगभग 22,000 से 26,000 के बीच होती है, जबकि 2024 में केवल 9,600 ऐसे जन्म दर्ज किए गए थे।

### 4. अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता किस संवैधानिक प्रावधान से सुरक्षित है?
अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता का अधिकार संविधान के 14वें संशोधन के तहत पिछले लगभग 150 वर्षों से लागू है।

### 5. क्या राष्ट्रपति ट्रंप के इन नए आदेशों को अदालत में चुनौती दी जा सकती है?
जी हां, संविधान विशेषज्ञों के अनुसार 14वें संशोधन के तहत नागरिकता अधिकार सुरक्षित होने के कारण इन दोनों नए कार्यकारी आदेशों के खिलाफ अदालतों में कानूनी चुनौती मिलना तय माना जा रहा है।

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