# मिडटर्म चुनाव से पहले रिपब्लिकन गढ़ों में घिरे डोनाल्ड ट्रंप, टैरिफ और महंगाई ने बढ़ाई मुश्किलें

> अमेरिका में मिडटर्म चुनावों से पहले टेक्सास जैसे मजबूत रिपब्लिकन राज्यों में वोटर्स का असंतोष सामने आ रहा है. आयात शुल्क, ईंधन की ऊंची दरों और बढ़ती महंगाई के बीच प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक बढ़त के संकेत मिल रहे हैं.

**Type:** article · **Category:** अमेरिका · **Published:** 2026-10-29 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/america/midatarma-chunava-se-pahale-republican-garhon-men-ghire-donald-trump-tairipha-aura-mahngai-ne-barhai-mushkilen-52840 · **Language:** Hindi
**Tags:** डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी चुनाव, मिडटर्म चुनाव, टेक्सास, रिपब्लिकन पार्टी, डेमोक्रेटिक पार्टी, महंगाई, अमेरिकी राजनीति

अमेरिकी मध्यावधि चुनावों की आहट के साथ ही राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं. जिन राज्यों को पारंपरिक रूप से रिपब्लिकन पार्टी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अभेद्य किला माना जाता रहा है, वहां से भी सत्ताधारी दल के लिए बेचैन करने वाले संकेत मिल रहे हैं. टेक्सास जैसे परंपरागत गढ़ में मतदाताओं का मिजाज पहले जैसा अनुकूल नहीं दिख रहा है. आयात शुल्क यानी टैरिफ को लेकर बनी तनातनी और ईरान के साथ सैन्य टकराव के फैसलों ने आम जनजीवन और स्थानीय कारोबारी तंत्र पर असर डाला है, जिससे मतदाताओं में असंतोष की लहर महसूस की जा रही है. चुनावी विश्लेषक यह संभावना जता रहे हैं कि निचले सदन यानी प्रतिनिधि सभा में विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी दोबारा बहुमत का आंकड़ा छू सकती है, हालांकि सीनेट के पटल पर दोनों खेमों के बीच जंग बेहद उलझी हुई बनी हुई है.

## रैलियों का दौर और पांच हजार डॉलर की पेशकश
मतदाताओं की नाराजगी को भांपते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने समर्थकों को एकजुट करने के लिए रैलियों का सिलसिला तेज कर दिया है. चुनावी सभाओं में भीड़ जुटाने और कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने के लिए उन्होंने कई बड़े लोकलुभावन वादे सामने रखे हैं. इन्हीं घोषणाओं के तहत उन्होंने यह एलान किया कि यदि मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को जीत मिलती है, तो प्रत्येक अमेरिकी वयस्क नागरिक को 5,000 डॉलर की राशि दी जाएगी. इसके अलावा अपनी पुरानी सख्त रणनीतियों से हटते हुए उन्होंने रूस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों में ढील देने के संकेत भी दिए हैं. ऊर्जा संकट और ईंधन की कीमतों से निपटने की दिशा में उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मिलकर डीजल खरीद समझौता करने की इच्छा भी सार्वजनिक तौर पर व्यक्त की है.

## पुराने सियासी गढ़ों पर दोबारा फोकस
चुनावी अभियान के इस अहम पड़ाव पर राष्ट्रपति ट्रंप मुख्य रूप से उन क्षेत्रों पर अपनी ताकत झोंक रहे हैं, जहां 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में उन्हें एकतरफा और भारी बढ़त हासिल हुई थी. इन आयोजनों को हालिया चर्चाओं में ‘ट्रंपापालूजा’ का नाम दिया गया है. पार्टी की घटती लोकप्रियता को थामने के लिए वह सीधे अपने पुराने समर्थकों के बीच उतर रहे हैं. वर्ष 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में टेक्सास के भीतर उन्होंने 14 प्रतिशत अंकों के बड़े अंतर से विजय प्राप्त की थी. इसके उलट वर्तमान में हालात बदले हुए हैं. टेक्सास की सीनेट दौड़ में रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्सटन अपने प्रतिद्वंद्वी डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स तालारिको से 1.5 प्रतिशत अंकों से पीछे चल रहे हैं. दशकों से रिपब्लिकन खेमे का मजबूत आधार रहे राज्य में इस प्रकार का झुकाव राजनीतिक रूप से काफी चौंकाने वाला माना जा रहा है.

इसी चुनावी रणनीति के तहत ट्रंप ने मिसिसिपी में एक बड़ी रैली को संबोधित किया. वर्ष 2024 के चुनाव में मिसिसिपी के मतदाताओं ने उन्हें 24 प्रतिशत अंकों के भारी अंतर से जीत दिलाई थी. उससे ठीक पहले रविवार को वह मिशिगन के मैदान में उतरे थे, जहां पिछले चुनाव में उनकी जीत का अंतर अपेक्षाकृत काफी कम रहा था. इसके अलावा वह फ्लोरिडा और आयोवा में भी रैलियां कर चुके हैं. इन दोनों राज्यों में वर्ष 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान उन्हें लगभग 13 प्रतिशत अंकों की बढ़त मिली थी. इन सभी राज्यों में लगातार रैलियां करने का मकसद अपने मूल वोट बैंक में हो रही सेंधमारी को समय रहते रोकना है.

## महंगाई और ईंधन की कीमतों का चौतरफा असर
अमेरिकी चुनावी इतिहास इस बात का गवाह रहा है कि मध्यावधि चुनावों में अक्सर सत्तासीन राष्ट्रपति की पार्टी को सीटों का नुकसान उठाना पड़ता है. आंकड़ों के मुताबिक वर्तमान में केवल 38.2 फीसदी लोग राष्ट्रपति ट्रंप के कामकाज को अपनी मंजूरी दे रहे हैं, जबकि 60.2 फीसदी जनता उनके प्रदर्शन से असंतुष्ट नजर आ रही है. मत सर्वेक्षणों से यह भी सामने आया है कि 57 फीसदी मतदाताओं का मानना है कि ट्रंप प्रशासन की आर्थिक नीतियों के चलते उनकी व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति पहले से अधिक कमजोर हो गई है. इस पूरे चुनाव में महंगाई सबसे केंद्रीय मुद्दा बनकर उभरी है. अगस्त के महीने में जहां महंगाई दर 3.4 फीसदी दर्ज की गई थी, वहीं पिछले महीने यह आंकड़ा बढ़कर 3.7 फीसदी तक पहुंच गया.

ईंधन की बढ़ती कीमतों और विदेशी वस्तुओं पर लगाए गए भारी आयात शुल्क ने आम अमेरिकी परिवारों के मासिक बजट को पूरी तरह बिगाड़ दिया है. पेट्रोल और डीजल की दरों में होने वाला इजाफा सीधे तौर पर परिवहन खर्च को बढ़ा देता है. जब माल ढुलाई महंगी होती है, तो उसका सीधा असर फल, सब्जी, राशन और अन्य दैनिक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़ता है. रोजमर्रा की सेवाओं की लागत बढ़ने से आम आदमी पर चौतरफा मार पड़ती है. दूसरी ओर आयात शुल्क की वजह से बाजार में मिलने वाले कई उपभोक्ता उत्पाद सीधे महंगे हो रहे हैं. यह आर्थिक दबाव मतदाताओं को सत्तापक्ष के खिलाफ लामबंद करने का काम कर रहा है.

## सदन के आंकड़े और चुनावी समीकरण
प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर अलग-अलग चुनावी अनुमान सामने आ रहे हैं. चुनावी विश्लेषणों के अनुसार डेमोक्रेटिक पार्टी 435 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में 227 सीटें हासिल कर सकती है, हालांकि इनमें से 25 सीटों पर दोनों दलों के बीच कांटे की टक्कर है. वहीं स्वतंत्र राजनीतिक विश्लेषणों में डेमोक्रेट्स को 220 सीटें मिलने का आकलन किया गया है, जबकि 17 सीटें ऐसी श्रेणी में रखी गई हैं जहां किसी भी दल का पलड़ा पूरी तरह तय नहीं है. एक अन्य बड़े चुनावी आकलन के मुताबिक डेमोक्रेटिक पार्टी 229 सीटें और रिपब्लिकन पार्टी 206 सीटें जीत सकती है.

सीनेट का गणित इससे कहीं अधिक जटिल है. सीनेट की कुल 100 सीटों में से केवल 35 सीटों पर इस बार मतदान हो रहा है, क्योंकि सीनेटरों का कार्यकाल छह वर्ष का होता है और सभी सीटों पर एक साथ चुनाव नहीं कराए जाते. जिन 65 सीटों पर इस बार चुनाव नहीं हो रहे हैं, उनमें से डेमोक्रेट्स के पास 46 और रिपब्लिकन पार्टी के पास 44 सीटें सुरक्षित हैं. बाकी बची 10 सीटों पर बेहद कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है. मौजूदा रुझानों और कांटे की टक्कर वाले राज्यों के मूड को देखते हुए अनुमान लगाया गया है कि अंतिम नतीजों में डेमोक्रेट्स को 52 और रिपब्लिकन पार्टी को 48 सीटें मिल सकती हैं.

## भविष्य की नीतियों पर नतीजों का प्रभाव
अर्थव्यवस्था और महंगाई को लेकर गहराते जनआक्रोश के बीच रिपब्लिकन पार्टी की चुनावी नैया पूरी तरह से डोनाल्ड ट्रंप के व्यक्तिगत जनसंपर्क और रैलियों पर टिकी है. मध्यावधि चुनावों के ये परिणाम केवल अमेरिकी संसद के शक्ति संतुलन को ही तय नहीं करेंगे, बल्कि यह भी निर्धारित करेंगे कि राष्ट्रपति के रूप में ट्रंप अपने शेष कार्यकाल में अपनी आर्थिक, व्यापारिक और विदेश नीतियों को कितनी स्वतंत्रता के साथ आगे बढ़ा पाएंगे. प्रतिनिधि सभा में बहुमत खोने की स्थिति में प्रशासन के विधायी प्रस्तावों पर सख्त ब्रेक लग सकता है.

## इसका आप पर असर
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में संभावित सत्ता परिवर्तन से वैश्विक व्यापार नीतियों और घरेलू उपभोक्ता लागतों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं.

- **वैश्विक निवेशकों के लिए:** अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक बहुमत बनने से राष्ट्रपति की मनमानी व्यापार और टैरिफ नीतियों पर विधायी अंकुश लग सकता है. इसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय बाजारों और आयात-निर्यात दरों में स्थिरता देखने को मिल सकती है.
- **आम उपभोक्ताओं के लिए:** ईंधन की कीमतों में इजाफे और 3.7 फीसदी तक पहुंची महंगाई से परिवारों की मासिक बचत घट रही है. यदि परिवहन लागत इसी प्रकार ऊंची बनी रही, तो रोजमर्रा की जरूरी खाद्य वस्तुओं के दाम और बढ़ सकते हैं.
- **अमेरिकी करदाताओं के लिए:** रिपब्लिकन जीत की स्थिति में प्रति वयस्क नागरिक 5,000 डॉलर देने का चुनावी प्रस्ताव रखा गया है. हालांकि सदन में बहुमत खोने की स्थिति में इस प्रकार के बड़े वित्तीय प्रस्तावों को मंजूरी मिलना व्यावहारिक रूप से कठिन होगा.
- **ऊर्जा बाजार और उद्योगों के लिए:** रूस से डीजल खरीद और प्रतिबंधों में ढील की बातचीत से अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति और शोधन मार्जिन प्रभावित हो सकते हैं. डीजल के दाम सामान्य होने से माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी कंपनियों को राहत मिल सकती है.

## ऐसा क्यों हुआ
सत्ताधारी पार्टी को अपने पारंपरिक गढ़ों में कड़े जनविरोध का सामना मुख्य रूप से बढ़ती महंगाई, आक्रामक व्यापारिक टैरिफ और ईंधन संकट की वजह से करना पड़ रहा है.

- **आर्थिक दबाव और महंगाई में तेजी:** अगस्त में 3.4 फीसदी रहने के बाद महंगाई दर बढ़कर 3.7 फीसदी पर पहुंच गई है, जिससे 57 फीसदी मतदाताओं का मानना है कि सरकारी नीतियों ने उनकी घरेलू माली हालत खराब की है. रोजमर्रा की वस्तुओं और सेवाओं पर बढ़ते खर्च ने आम जनता में असंतोष पैदा कर दिया है.
- **टैरिफ और विदेश नीति के फैसले:** विदेशी वस्तुओं पर लगाए गए भारी आयात शुल्क और ईरान के साथ सैन्य तनाव ने व्यापारिक अनिश्चितता बढ़ा दी है. इन सख्त कदमों के चलते उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें चढ़ गईं और स्थानीय उद्योग प्रभावित हुए हैं.
- **ईंधन और माल ढुलाई की बढ़ी लागत:** पेट्रोल और डीजल की बढ़ती दरों ने पूरी सप्लाई चेन को महंगा कर दिया है. ऊर्जा की ऊंची लागत से कृषि, परिवहन और खाद्य आपूर्ति क्षेत्रों से जुड़े पारंपरिक समर्थक वर्ग में नाराजगी पनपी है.
- **ऐतिहासिक मध्यावधि रुझान:** अमेरिकी राजनीतिक इतिहास में यह स्थापित पैटर्न रहा है कि मध्यावधि चुनावों में राष्ट्रपति की अपनी पार्टी को संसद की सीटों का नुकसान झेलना पड़ता है. मौजूदा 38.2 फीसदी की कमजोर अप्रूवल रेटिंग इस ऐतिहासिक रुझान को और मजबूत बना रही है.

## सवाल-जवाब

### 1. टेक्सास के सीनेट चुनाव में वर्तमान स्थिति क्या है?
टेक्सास सीनेट मुकाबले में रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्सटन अपने डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी जेम्स तालारिको से 1.5 प्रतिशत अंकों से पीछे चल रहे हैं.

### 2. डोनाल्ड ट्रंप ने मतदाताओं को रिझाने के लिए क्या घोषणा की है?
ट्रंप ने एलान किया है कि यदि मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी जीतती है, तो हर अमेरिकी वयस्क को 5,000 डॉलर की राशि दी जाएगी.

### 3. हालिया आंकड़ों के अनुसार अमेरिका में महंगाई दर कितनी दर्ज की गई है?
अगस्त में 3.4 फीसदी रहने के बाद पिछले महीने अमेरिका में महंगाई दर बढ़कर 3.7 फीसदी दर्ज की गई.

### 4. प्रतिनिधि सभा की सीटों को लेकर विश्लेषकों का क्या अनुमान है?
विश्लेषकों का अनुमान है कि 435 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक पार्टी 220 से 229 सीटें हासिल कर सकती है, जबकि 25 सीटों पर बेहद कड़ा मुकाबला है.

### 5. इस मध्यावधि चुनाव में सीनेट की कितनी सीटों पर मतदान हो रहा है?
सीनेट की कुल 100 सीटों में से इस बार केवल 35 सीटों पर चुनाव हो रहा है, क्योंकि सीनेटरों का कार्यकाल छह वर्ष का होता है.

### 6. राष्ट्रपति ट्रंप के कामकाज को लेकर मतदाताओं की क्या राय है?
सर्वेक्षणों के अनुसार 38.2 फीसदी लोग उनके काम को मंजूरी दे रहे हैं, जबकि 60.2 फीसदी लोग उनके प्रदर्शन से असंतुष्ट हैं.

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