# उत्तर कोरियाई गिरोह ने बाइनेंस से उड़ाई विशाल क्रिप्टो रकम, शोधन रोकने के लिए एफबीआई ने जारी की चेतावनी

> बाइनेंस से हुई 6.3 अरब डॉलर की डिजिटल मुद्रा चोरी के तार उत्तर कोरियाई साइबर समूह से जोड़ते हुए अमेरिकी जांच एजेंसी ने लेन-देन रोकने की अपील की है.

**Type:** article · **Category:** अमेरिका · **Published:** 2026-11-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/america/north-korea-giroha-ne-binance-se-urai-vishala-kripto-rakama-shodhana-rokane-ke-lie-fbi-ne-jari-ki-chetavani-54378 · **Language:** Hindi
**Tags:** बाइनेंस हैक, उत्तर कोरिया, एफबीआई, क्रिप्टो चोरी, बिटकॉइन, इथेरियम, डोनाल्ड ट्रंप

वैश्विक क्रिप्टोकरेंसी इतिहास की सबसे बड़ी लूट के पीछे अमेरिकी जांच एजेंसी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) ने उत्तर कोरिया के साइबर अपराधियों का हाथ बताया है. जांच एजेंसी के आधिकारिक बयान के मुताबिक, इस सप्ताह बाइनेंस मंच को निशाना बनाकर महज चंद मिनटों में अरबों डॉलर मूल्य की डिजिटल संपत्तियां उड़ा ली गईं. इस दुस्साहसिक हमले का संबंध कुख्यात हैकिंग समूह 'ट्रेडरट्रेटर' से जोड़ा गया है, जो पिछले वर्ष बायबिट से 1.5 अरब डॉलर की साइबर डकैती में भी संलिप्त रहा था.

## लूटे गए फंड्स को ठिकाने लगाने की जुगत में साइबर अपराधी
जांच पड़ताल में यह तथ्य सामने आया है कि साइबर गिरोह चोरी की गई रकम का बड़ा हिस्सा मुख्य रूप से इथेरियम टोकन में परिवर्तित करने में लगा हुआ है. इस अवैध धन के मूल स्रोत को मिटाने के उद्देश्य से अपराधी अब विकेंद्रीकृत वित्त (DeFi) मंचों के साथ-साथ त्वरित अदला-बदली की सुविधा देने वाली सेवाओं का सहारा लेने की तैयारी कर रहे हैं. इस खतरे को भांपते हुए जांच एजेंसी ने सभी डिजिटल मुद्रा एक्सचेंजों, ब्लॉकचेन ट्रैकिंग फर्मों और संबंधित वित्तीय संस्थानों से संदिग्ध वॉलेट पतों से जुड़ी किसी भी गतिविधि को तत्काल प्रभाव से ब्लॉक करने का अनुरोध किया है ताकि धन शोधन पर रोक लगाई जा सके.

## व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया और मार-ए-लागो में बयान
इस पूरे मामले पर फ्लोरिडा स्थित अपने मार-ए-लागो आवास पर आयोजित हैलोवीन उत्सव के दौरान पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अलग रुख व्यक्त किया. उन्होंने उत्तर कोरिया की प्रत्यक्ष संलिप्तता को लेकर संशय जाहिर किया. इस मसले पर बोलते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, 
> "मैं चिंतित नहीं हूं. हम इस बारे में जानकारी जुटा रहे हैं."
 उन्होंने यह भी जोड़ा कि जांच एजेंसियों को अभी पक्के तौर पर नहीं पता कि इसमें उत्तर कोरिया का हाथ है अथवा नहीं, हालांकि जांच आगे बढ़ने के साथ स्थिति स्पष्ट हो सकती है.

## बाजार विश्लेषकों का आकलन और हमले का दायरा
बृहस्पतिवार को अंजाम दिए गए इस साइबर हमले में दुनिया के सबसे बड़े एक्सचेंज बाइनेंस से बिटकॉइन समेत अन्य क्रिप्टोकरेंसी के रूप में कुल 6.3 अरब डॉलर की अभूतपूर्व रकम निकाली गई थी. अनेक साइबर विशेषज्ञों ने वारदात के तुरंत बाद ही इस प्रकार के संगठित हमले के पीछे उत्तर कोरियाई तत्वों के शामिल होने के संकेत दिए थे. क्रिप्टो विशेषज्ञ एरी रेडबोर्ड के अनुसार, जांच और निगरानी से बचने के लिए हैकर्स इस भारी-भरकम राशि को छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित कर सकते हैं. उनके मुताबिक, इन टुकड़ों को छोटे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से खपाने की कवायद आने वाले कई महीनों तक खिंच सकती है.

## इसका आप पर असर
क्रिप्टो परिसंपत्तियों के इतिहास की यह सबसे बड़ी चोरी वैश्विक डिजिटल वित्तीय तंत्र में सुरक्षा और तरलता के नए संकट पैदा कर सकती है.

- **क्रिप्टो निवेशकों के लिए:** एक्सचेंजों पर रखी संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर चौकसी और कड़े सत्यापन नियम लागू हो सकते हैं. व्यक्तिगत फंड्स को निजी कोल्ड वॉलेट में सुरक्षित रखना और संदिग्ध टोकन स्वैप से दूर रहना सबसे बेहतर उपाय होगा.
- **मार्केट लिक्विडिटी पर प्रभाव:** 6.3 अरब डॉलर की निकासी से विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर टोकन की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है. हैकर्स द्वारा इथेरियम और अन्य टोकन बेचने के प्रयासों से बाजार पर दबाव बन सकता है.
- **डीफाई और स्वैप सेवाओं पर:** विकेंद्रीकृत वित्त प्लेटफॉर्म्स पर अनुपालन और निगरानी के कड़े कदम उठाने का दबाव बढ़ेगा. नियमों के सख्त होने से आम उपयोगकर्ताओं के लिए तुरंत लेन-देन करना थोड़ा जटिल हो सकता है.
- **अंतरराष्ट्रीय साइबर सुरक्षा पर:** राज्य समर्थित साइबर गिरोहों द्वारा वित्तीय हमलों की रोकथाम के लिए वैश्विक एजेंसियों का सहयोग बढ़ेगा. एक्सचेंजों को अपने सिस्टम की सुरक्षा और सुरक्षा ऑडिट में भारी निवेश करना होगा.

## ऐसा क्यों हुआ
इस ऐतिहासिक साइबर डकैती के पीछे अत्याधुनिक डिजिटल घुसपैठ और राज्य-प्रायोजित साइबर गिरोहों के संगठित वित्तीय नेटवर्क की भूमिका सामने आई है.

- **सीधा कारण:** 'ट्रेडरट्रेटर' नामक साइबर गिरोह ने बाइनेंस की सुरक्षा प्रणाली में सेंध लगाकर महज कुछ ही मिनटों में 6.3 अरब डॉलर के डिजिटल टोकन अवैध रूप से ट्रांसफर कर लिए.
- **सक्षम बनाने वाली परिस्थितियां:** हैकर्स ने लेन-देन की गति और जटिल ब्लॉकचेन नेटवर्क्स का फायदा उठाकर फंड्स को तुरंत इथेरियम और विकेंद्रीकृत मंचों की ओर मोड़ना शुरू कर दिया.
- **पूर्व घटनाएं:** इसी समूह ने पिछले वर्ष बायबिट से 1.5 अरब डॉलर की भारी चोरी को अंजाम देकर पहले ही अपनी तकनीक का प्रदर्शन किया था.
- **आगे की संभावना:** एफबीआई और वैश्विक सुरक्षा एजेंसियां संदिग्ध डिजिटल पतों को सील करने का प्रयास कर रही हैं, जबकि हैकर्स महीनों तक इन फंड्स को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ने की कोशिश करेंगे.

## सवाल-जवाब

### 1. बाइनेंस से कुल कितनी रकम चोरी हुई है?
बाइनेंस से बिटकॉइन और अन्य डिजिटल मुद्राओं के रूप में कुल 6.3 अरब अमेरिकी डॉलर की चोरी की गई है.

### 2. एफबीआई ने किस समूह को इस चोरी के लिए जिम्मेदार ठहराया है?
जांच एजेंसी ने इसके लिए उत्तर कोरियाई साइबर समूह 'ट्रेडरट्रेटर' को जिम्मेदार बताया है.

### 3. क्या इस समूह ने पहले भी किसी बड़े क्रिप्टो प्लेटफॉर्म पर हमला किया था?
हां, इसी समूह ने पिछले वर्ष बायबिट मंच से 1.5 अरब डॉलर की डिजिटल मुद्रा चुराई थी.

### 4. हैकर्स चुराई गई संपत्ति का क्या कर रहे हैं?
जांच के अनुसार वे इन संपत्तियों को मुख्य रूप से इथेरियम में बदलकर डीफाई और त्वरित स्वैप सेवाओं से खपाने की कोशिश में हैं.

### 5. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया दी?
उन्होंने कहा कि वे चिंतित नहीं हैं और अधिकारी अभी इस मामले में तथ्य जुटा रहे हैं.

### 6. विशेषज्ञों के अनुसार हैकर्स चोरी की रकम को कैसे छुपा सकते हैं?
विशेषज्ञ एरी रेडबोर्ड के अनुसार हैकर्स इस रकम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर छोटे एक्सचेंजों के जरिए कई महीनों तक लेन-देन कर सकते हैं.

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