पश्चिम एशिया में भीषण युद्ध: ईरान पर हमलों के बाद नहीं थमी जंग, वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया अमेरिका और इजरायल के सैन्य एक्शन के महीनों बाद भी ईरान के साथ संघर्ष जारी है, जिससे दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहरा गया है और क्षेत्रीय तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर सैन्य हमले किए जाने के बाद से पश्चिम एशिया में शुरू हुआ व्यापक टकराव महीनों बीत जाने के बाद भी थमता नजर नहीं आ रहा है। इस निरंतर बढ़ते सैन्य तनाव के कारण एशिया से लेकर यूरोप तक वैश्विक स्तर पर गंभीर ऊर्जा संकट खड़ा हो गया है। पूर्व में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संघर्ष के महज कुछ ही दिनों के भीतर समाप्त होने की संभावना जताई थी, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट साबित हुई है और युद्ध के समाप्त होने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहे हैं। सैन्य अड्डों और रणनीतिक ठिकानों पर तीखा पलटवार इस टकराव के दौरान खाड़ी क्षेत्र में मौजूद सैन्य ठिकानों पर जोरदार हमले देखने को मिले हैं। कतर, कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को ईरान द्वारा भीषण हमलों का निशाना बनाया गया, जिससे क्षेत्र में भारी हलचल मच गई। इसके समानांतर, अमेरिकी सेना ने भी ईरानी ड्रोन और मिसाइल ठिकानों को नष्ट करने के लिए व्यापक हमले किए हैं, जिसके चलते किसी भी संभावित युद्धविराम की कोशिशों पर गहरा संकट मंडरा गया है। जलमार्गों में टकराव और समुद्री सुरक्षा पर असर रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य में दोनों पक्षों के बीच तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। जब अमेरिकी नौसेना के जंगी जहाज इस क्षेत्र में आगे बढ़े, तब ईरान ने घुसपैठ का आरोप लगाते हुए चेतावनी मिसाइलें दागीं। इस पूरे गतिरोध का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री नौवहन पर पड़ा है, जिसमें भारतीय नाविकों की सुरक्षा भी प्रभावित हुई है। तनाव के दौरान एक भारतीय नाविक की जान चली गई, जबकि 148 नाविक फंस गए। इसके अलावा, ईरान की सेना आईआरजीसी और अमेरिकी हथियारों से लैस कुर्द लड़ाकों के बीच सीमा पर हुई खूनी झड़पों ने एक नए मोर्चे के खुलने की आशंका को बढ़ा दिया है। आपूर्ति और संसाधनों से जुड़ी नई चुनौतियां लंबे खिंचते इस युद्ध ने दोनों पक्षों के सामने हथियारों और संसाधनों की नई समस्याएं खड़ी कर दी हैं। निरंतर मिसाइल दागने के बाद अब अमेरिका के सामने मिसाइलों की भारी कमी होने का जोखिम गहरा रहा है। वहीं दूसरी ओर, ईरान की वाणिज्यिक उड़ानों पर कड़े प्रतिबंधों का खतरा मंडरा रहा है, जहां अमेरिका उन तमाम पक्षों पर सख्त कार्रवाई की रूपरेखा तैयार कर रहा है जो ईरानी एयरलाइंस को किसी भी तरह की मदद पहुंचाएंगे। इसके साथ ही बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने से कुवैत जैसे देशों के जल स्रोतों पर भी संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इसका आप पर असर पश्चिम एशिया में जारी इस दीर्घकालिक युद्ध का सीधा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ईंधन की लागत और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर पड़ रहा है। • भारत में: कच्चे तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित होने से देश में ईंधन व ऊर्जा की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीय नागरिकों और समुद्री नाविकों के लिए सुरक्षा जोखिम अत्यधिक बढ़ गया है। • वैश्विक बाजार में: होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन बाधित होने से माल ढुलाई और समुद्री बीमा की दरों में भारी उछाल आएगा। इससे एशिया और यूरोप भर में उपभोक्ता वस्तुओं की महंगाई दर में तेजी आने का खतरा है। • यात्रा और एयरलाइंस: क्षेत्रीय उड़ानों पर प्रतिबंध और बढ़ते हवाई क्षेत्र के खतरों से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के मार्ग बदलेंगे। यात्रियों को लंबी यात्रा और अधिक महंगे विमान किराए का सामना करना पड़ेगा। • संसाधन और खाद्य सुरक्षा: खाड़ी देशों में पानी और आवश्यक बुनियादी ढांचे पर मंडराते खतरे से आपूर्ति श्रृंखला लड़खड़ा सकती है। आयात पर निर्भर देशों को तुरंत वैकल्पिक व्यापारिक मार्ग तलाशने होंगे। ऐसा क्यों हुआ यह संघर्ष अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के ठिकानों पर किए गए हमलों और उसके बाद ईरान द्वारा खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए जवाबी हमलों की श्रृंखला से भड़का है। • सीधे सैन्य हमले: अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरानी मिसाइल व ड्रोन ठिकानों पर की गई सैन्य कार्रवाई ने सीधे जवाबी हमलों को न्योता दिया। इसके जवाब में ईरान ने कतर, कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी बेस को निशाना बनाया। • होर्मुज में नौसैनिक तनाव: होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी युद्धपोतों की आवाजाही को ईरान ने घुसपैठ करार देकर चेतावनी मिसाइलें दागीं। इस घटनाक्रम ने रणनीतिक जलमार्ग में दोनों सेनाओं को सीधे टकराव के मुहाने पर ला खड़ा किया। • सीमा पर छद्म संघर्ष: ईरानी सेना आईआरजीसी और अमेरिकी हथियारों से लैस कुर्द बलों के बीच सीमा पर हुई खूनी मुठभेड़ों ने जमीनी तनाव को और भड़का दिया। इस तरह कई मोर्चों पर एक साथ शुरू हुई लड़ाइयों ने संघर्ष को लंबा खींच दिया है। • युद्धविराम की विफलता: दोनों पक्षों द्वारा लगातार जारी हमलों और कड़े आर्थिक व सैन्य प्रतिबंधों के कारण शांति समझौते की किसी भी संभावना पर पूर्ण विराम लग गया है। सवाल-जवाब 1. क्या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का युद्ध के जल्द खत्म होने का अनुमान सही साबित हुआ? नहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघर्ष के कुछ दिनों में समाप्त होने की बात कही थी, परंतु महीनों बीत जाने के बाद भी लड़ाई जारी है। 2. ईरान ने खाड़ी के किन देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया? ईरान ने कतर, कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भीषण हमले किए। 3. होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव क्यों बढ़ा? अमेरिकी नौसेना के जहाजों के प्रवेश पर ईरान ने घुसपैठ का आरोप लगाया और चेतावनी मिसाइलें दाग दीं। 4. इस संघर्ष से भारतीय नागरिकों पर क्या प्रभाव पड़ा? तनाव के दौरान एक भारतीय नाविक की मौत हो गई, जबकि 148 नाविक क्षेत्र में फंस गए। 5. लंबे युद्ध के कारण अमेरिका के सामने कौन सी बड़ी सैन्य चुनौती आ रही है? लगातार जारी हमलों और रक्षा अभियानों के कारण अमेरिका को मिसाइलों की गंभीर कमी का खतरा सता रहा है। https://trendkia.com/america/pashchima-eshiya-men-bhishana-yuddha-iran-para-hamalon-ke-bada-nahin-thami-jnga-vaishvika-urja-snkata-gaharaya-42571 TrendKia — Har trend, sabse pehle.