# रिपब्लिकन रैलियों में तीखा विरोध, साउथ कैरोलिना में ट्रंप के सामने चले मुक्के और सिनसिनाटी में वेंस की सुरक्षा में सेंध

> साउथ कैरोलिना और ओहायो में रिपब्लिकन रैलियों के दौरान भारी हंगामा और हाथापाई हुई, जहां डोनाल्ड ट्रंप के मंच के पास झड़प हुई और जेडी वेंस के सुरक्षा घेरे में प्रदर्शनकारी घुस गया।

**Type:** article · **Category:** अमेरिका · **Published:** 2026-10-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/america/ripablikana-railiyon-men-tikha-virodha-south-carolina-men-trump-ke-samane-chale-mukke-aura-cincinnati-men-vance-ki-suraksha-men-se-50418 · **Language:** Hindi
**Tags:** डोनाल्ड ट्रंप, जेडी वेंस, मिडटर्म चुनाव, साउथ कैरोलिना, ओहायो, विवेक रामास्वामी, अमेरिकी राजनीति, सीक्रेट सर्विस

अमेरिका में होने वाले तीन नवंबर के मिडटर्म चुनावों के मद्देनजर प्रचार अभियान तेज होते ही राजनीतिक रैलियों में तनाव चरम पर पहुंच गया है। रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवारों के पक्ष में माहौल तैयार करने के लिए मैदान में उतरे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को मतदाताओं के कड़े विरोध और हंगामे का सामना करना पड़ रहा है। साउथ कैरोलिना से लेकर ओहायो तक चुनावी जनसभाओं में प्रदर्शनकारियों की ओर से लगातार नारेबाजी की जा रही है, जिसके चलते कई स्थानों पर स्थिति धक्का-मुक्की और मारपीट तक पहुंच गई। क्लेमसन यूनिवर्सिटी में ट्रंप के संबोधन के दौरान हिंसक झड़प देखने को मिली, वहीं सिनसिनाटी में सुरक्षा घेरा तोड़कर एक प्रदर्शनकारी सीधे मंच पर वेंस के पीछे तक पहुंच गया। गिरती मंजूरी रेटिंग और नीतिगत फैसलों पर उठते सवालों के बीच रैलियों में हो रहा यह व्यवधान पार्टी के अभियान के लिए नई चुनौतियां पेश कर रहा है।

## साउथ कैरोलिना में ट्रंप के संबोधन के दौरान झड़प और मुक्केबाजी
साउथ कैरोलिना स्थित क्लेमसन यूनिवर्सिटी के परिसर में 21 अक्टूबर की रात आयोजित रैली में माहौल उस वक्त गर्मा गया जब दर्जनों प्रदर्शनकारियों ने एक के बाद एक कई बार कार्यक्रम में खलल डाला। पूरे भाषण के दौरान कम से कम बारह लोगों ने ट्रंप की बातों का विरोध करते हुए जोरदार नारेबाजी की, जिसके कारण राष्ट्रपति को लगभग चार बार अपना वक्तव्य बीच में ही रोकना पड़ा। इसी बीच विरोध कर रहे लोगों और ट्रंप समर्थकों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। स्थिति तब और बिगड़ गई जब मंच के बेहद करीब विरोध दर्ज करा रहे एक प्रदर्शनकारी पर भीड़ में मौजूद एक उम्रदराज समर्थक टूट पड़ा और उसके चेहरे पर जोरदार मुक्का जड़ दिया। इसके अलावा सभागार के दूसरे हिस्से में भी एक बुजुर्ग व्यक्ति ने एक अन्य प्रदर्शनकारी के सिर पर थप्पड़ रसीद कर दिया।

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मंच के नजदीक मचे इस भारी बवाल के तुरंत बाद स्थानीय शेरिफ कार्यालय के अधिकारियों ने दखल देकर प्रदर्शनकारी को कार्यक्रम स्थल से बाहर किया। मंच से इस पूरे घटनाक्रम को देख रहे ट्रंप ने हमलावर समर्थक की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने उस बुजुर्ग समर्थक के मुक्के की तुलना मशहूर पेशेवर मुक्केबाज इवांडर होलीफील्ड से कर डाली। ट्रंप ने वहां मौजूद समर्थकों से कहा कि प्रदर्शनकारी को मुक्का पड़ा और इस तरह उनके चुनावी कार्यक्रमों में आकर हंगामा खड़ा करना हिम्मत का काम है। हालांकि इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है कि प्रदर्शनकारियों पर हाथ उठाने वाले समर्थकों के खिलाफ पुलिस ने कोई कानूनी कार्रवाई की या उन्हें गिरफ्तार किया। इस पूरे व्यवधान का दृश्य सोशल मीडिया मंच पर साझा किए गए वीडियो में भी सामने आया।

## सिनसिनाटी में जेडी वेंस के पास पहुंचा प्रदर्शनकारी, सुरक्षा पर उठे सवाल
बुधवार को ओहायो के सिनसिनाटी में आयोजित रिपब्लिकन सभा में भी सुरक्षा तंत्र की भारी विफलता सामने आई। इस जनसभा में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस सीनेट पद के उम्मीदवार जॉन हस्टेड और रिपब्लिकन नेता विवेक रामास्वामी के समर्थन में मतदाताओं से वोट की अपील करने पहुंचे थे। वेंस जब मंच से भाषण दे रहे थे, तभी दर्शकों के बीच मौजूद एक व्यक्ति वीआईपी सुरक्षा घेरे को पार करते हुए सीधे मंच पर वेंस की पीठ के ठीक पीछे जा खड़ा हुआ। वह व्यक्ति औपचारिक सूट और सिर पर लाल रंग की मागा टोपी पहने हुए था, जिससे सुरक्षाकर्मियों को शुरुआत में उस पर संदेह नहीं हुआ।

मंच पर पहुंचते ही उस व्यक्ति ने अपनी लाल टोपी उतारकर जमीन पर फेंक दी और तेज आवाज में चिल्लाते हुए वेंस पर गंभीर आरोप लगाने लगा। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए सीक्रेट सर्विस के विशेष एजेंटों ने तुरंत हरकत में आकर उसे दबोच लिया और जबरन खींचते हुए सभागार से बाहर कर दिया। उस दौरान हॉल में मौजूद भीड़ ने तालियों के साथ राष्ट्रभक्ति के नारे लगाने शुरू कर दिए। घटना के तुरंत बाद वेंस ने मंच से स्थिति को संभालते हुए प्रदर्शनकारी का मजाक उड़ाया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वह व्यक्ति मागा समर्थक होने का ढोंग कर रहा था और उसके बिखरे बाल देखकर साफ लग रहा था कि उसने महीनों से बाल नहीं धोए हैं, जो डेमोक्रेट्स की पहचान है। यह बयान सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो क्लिप में भी सुना गया। हालांकि इस बड़ी चूक के बाद उपराष्ट्रपति की व्यक्तिगत सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं जताई जाने लगी हैं।

## कई राज्यों में विरोध का दायरा और उठते नीतिगत मुद्दे
चुनावी सभाओं में विरोध की यह घटनाएं किसी एक राज्य तक सीमित नहीं हैं। पिछले कुछ हफ्तों के दौरान जॉर्जिया, नॉर्थ कैरोलिना, कंसास और ओहायो के विभिन्न शहरों में भी ट्रंप के कार्यक्रमों में तीखे विरोध प्रदर्शन दर्ज किए गए हैं। इन रैलियों में शामिल होने वाले प्रदर्शनकारी अलग-अलग मुद्दों पर प्रशासन की घेराबंदी कर रहे हैं। कई सभाओं में लोग कुख्यात एपस्टीन से जुड़ी गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक करने की मांग को लेकर तख्तियां दिखा रहे हैं, तो वहीं कई शहरों में वर्तमान इमिग्रेशन नीतियों और ईरान युद्ध के मसले पर सरकार की कार्यशैली का कड़ा विरोध किया जा रहा है। ट्रंप इन विरोध प्रदर्शनों को खारिज करते हुए हमेशा दावा करते हैं कि यह सब उनके राजनीतिक विरोधियों द्वारा भेजे गए भाड़े के प्रदर्शनकारी हैं।

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अपनी जनसभाओं में ट्रंप लगातार सीमा सुरक्षा, अवैध प्रवासियों के प्रवेश पर रोक और बड़े पैमाने पर टैक्स कटौती के वादों को केंद्र में रखकर भाषण दे रहे हैं। उनका तर्क है कि ये कदम अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए बेहद जरूरी हैं। इसके बावजूद रैलियों के भीतर और बाहर हो रही लगातार नारेबाजी और हंगामे के कारण पार्टी का मूल संदेश मतदाताओं तक स्पष्ट रूप से नहीं पहुंच पा रहा है। हर नई रैली में होने वाला व्यवधान पार्टी कार्यकर्ताओं के मनोबल पर भी असर डाल रहा है।

## गिरती लोकप्रियता और मिडटर्म चुनाव के मायने
आगामी तीन नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के शक्ति संतुलन का फैसला करेंगे। इन चुनावों में जनता हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट के सदस्यों का चुनाव करती है, जिसका सीधा असर मौजूदा प्रशासन की विधायी ताकत पर पड़ता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप के सामने केवल रैलियों में हो रहा विरोध ही चुनौती नहीं है, बल्कि उनकी गिरती लोकप्रियता भी एक बड़ा संकट बन चुकी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, ट्रंप की मौजूदा मंजूरी रेटिंग महज 31 से 33 प्रतिशत के आसपास सिमट गई है।

घरेलू स्तर पर महंगाई और आर्थिक सुस्ती के साथ-साथ विदेश नीति के मोर्चे पर ईरान युद्ध को लेकर आम जनता में बढ़ रहा असंतोष रिपब्लिकन पार्टी की चुनावी संभावनाओं पर भारी पड़ सकता है। यदि मिडटर्म चुनावों में पार्टी कांग्रेस के दोनों सदनों में अपनी पकड़ मजबूत नहीं रख पाती है, तो आने वाले समय में ट्रंप के लिए अपने बजटीय प्रस्तावों, सीमा सुरक्षा योजनाओं और महत्वपूर्ण आर्थिक कानूनों को पारित कराना लगभग असंभव हो जाएगा। सदन में बहुमत खोने की स्थिति में सरकार की नीतियों की विधायी समीक्षा और कड़ी हो जाएगी, जिसके चलते प्रशासन को गंभीर राजनीतिक गतिरोध का सामना करना पड़ सकता है।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के प्रचार में बढ़ती हिंसा और विरोध प्रदर्शनों से चुनावी माहौल में तनाव बढ़ रहा है, जिसका सीधा असर चुनावी नतीजों और नीतियों पर पड़ सकता है।

- **मतदाताओं की सुरक्षा:** राजनीतिक जनसभाओं में हिंसा और हाथापाई बढ़ने से आम नागरिकों और समर्थकों के लिए रैलियों में शामिल होना जोखिम भरा हो सकता है। चुनाव प्रचार के दौरान सुरक्षा एजेंसियों को सार्वजनिक कार्यक्रमों में जांच के नियम और कड़े करने पड़ेंगे।
- **नीतिगत फैसलों पर असर:** यदि मिडटर्म चुनावों में सत्ताधारी पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहता है, तो संसद में नए कानून पास कराना मुश्किल हो जाएगा। इसके चलते टैक्स दरों में कटौती और इमिग्रेशन सुधार जैसे बड़े फैसलों पर संसद में गतिरोध पैदा हो सकता है।
- **वैश्विक नीतियों की दिशा:** अमेरिकी संसद में बदलाव का असर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों, विशेषकर ईरान से जुड़े मामलों और विदेशी व्यापार नीतियों पर पड़ेगा। भारतीय व्यापार और कूटनीति पर नजर रखने वालों के लिए अमेरिकी संसद की नई शक्ति संरचना काफी महत्वपूर्ण होगी।
- **सार्वजनिक अभियानों में बदलाव:** उपराष्ट्रपति की सुरक्षा में हुई चूक के बाद राजनीतिक दलों के नेताओं की जनसभाओं में मंच के पास जाने पर सख्त पाबंदियां लगेंगी। आने वाले दिनों में जनता और नेताओं के बीच सीधा संवाद सीमित होकर डिजिटल माध्यमों तक सिमट सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह राजनीतिक टकराव और रैलियों में हंगामा इसलिए हो रहा है क्योंकि आगामी तीन नवंबर के मिडटर्म चुनाव दोनों प्रमुख दलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और प्रशासन के कई नीतिगत फैसलों से जनता में गहरा असंतोष है। गिरती अप्रूवल रेटिंग और संवेदनशील मुद्दों पर लोगों की नाराजगी इन सभाओं में खुलकर सामने आ रही है।

- **नीतियों को लेकर गहरा जनआक्रोश:** प्रशासन के वर्तमान इमिग्रेशन नियमों और ईरान युद्ध से जुड़े फैसलों पर मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग कड़ा ऐतराज जता रहा है। इसके अलावा एपस्टीन फाइलों को पूरी तरह सार्वजनिक करने की लंबे समय से चली आ रही मांग भी विरोध का मुख्य कारण बनी हुई है।
- **आर्थिक चुनौतियां और गिरती रेटिंग:** आर्थिक दबावों के बीच राष्ट्रपति की मंजूरी रेटिंग घटकर 31 से 33 प्रतिशत के निचले स्तर पर आ गई है। रेटिंग में आई इस भारी गिरावट ने असंतुष्ट गुटों और विरोधी समर्थकों को सीधे रैलियों में पहुंचकर विरोध करने का अवसर दिया है।
- **अत्यधिक ध्रुवीकृत चुनावी माहौल:** तीन नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनावों में कांग्रेस पर नियंत्रण की लड़ाई बेहद करीबी हो गई है। रिपब्लिकन पार्टी जहां सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखना चाहती है, वहीं विरोधी खेमा रैलियों में व्यवधान डालकर सरकार की कमजोरियों को उजागर करने की रणनीति अपना रहा है।
- **सुरक्षा प्रोटोकॉल में खामियां:** स्थानीय स्तर पर आयोजित विशाल चुनावी रैलियों में सुरक्षा घेरे की कमजोरियों के कारण प्रदर्शनकारी मंच के काफी करीब तक पहुंचने में सफल हो रहे हैं। सिनसिनाटी में मागा टोपी पहनकर पहुंचे प्रदर्शनकारी ने साबित किया कि सुरक्षा जांच में चूक हो रही है।

## सवाल-जवाब

### 1. साउथ कैरोलिना में ट्रंप की रैली के दौरान क्या घटना घटी?
क्लेमसन यूनिवर्सिटी में रैली के दौरान करीब 12 प्रदर्शनकारियों ने भाषण में बाधा डाली, जिसके बाद एक समर्थक ने प्रदर्शनकारी को मुक्का मार दिया और एक अन्य को थप्पड़ मारा गया।

### 2. उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की रैली में सुरक्षा चूक कैसे हुई?
ओहायो के सिनसिनाटी में एक व्यक्ति लाल मागा टोपी पहनकर सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए मंच पर वेंस के बिल्कुल पीछे पहुंच गया और नारे लगाने लगा, जिसे सीक्रेट सर्विस ने बाहर निकाला।

### 3. प्रदर्शनकारी किन प्रमुख मुद्दों को लेकर विरोध कर रहे हैं?
प्रदर्शनकारी मुख्य रूप से एपस्टीन फाइलों को सार्वजनिक करने, मौजूदा इमिग्रेशन नीतियों और ईरान युद्ध में अमेरिकी भूमिका को लेकर विरोध जता रहे हैं।

### 4. आगामी मिडटर्म चुनाव कब होने वाले हैं?
अमेरिका में कांग्रेस के सदस्यों के चुनाव के लिए तीन नवंबर को मिडटर्म चुनाव आयोजित किए जाएंगे।

### 5. ट्रंप की वर्तमान मंजूरी रेटिंग कितनी बताई जा रही है?
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप की मंजूरी रेटिंग गिरकर लगभग 31 से 33 प्रतिशत के बीच दर्ज की गई है।

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