रूसी बंदरगाह से अमेरिका के लिए रवाना हुए डीजल टैंकर, मॉस्को के साथ समझौते के बाद प्रतिबंधों पर भी नरमी मॉस्को से हुए ईंधन आपूर्ति समझौते के तहत 40 हजार टन डीजल लेकर तीन जहाज अमेरिका की तरफ बढ़ रहे हैं, जिसके बाद वाशिंगटन ने कड़े प्रतिबंधों के क्रियान्वयन को भी रोक दिया है। अमेरिकी ऊर्जा बाजार में ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच मॉस्को और वाशिंगटन के बीच हुए समझौते के बाद ईंधन आपूर्ति की प्रक्रिया औपचारिक रूप से जमीन पर उतरने लगी है। वर्ष 2023 के बाद पहली बार रूसी सीमा से पेट्रोलियम उत्पादों की सीधी खेप संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए भेजी गई है। लगभग 40 हजार टन डीजल से लदे तीन मालवाहक जहाज रूसी तट से रवाना हो चुके हैं और अब उत्तरी अमेरिका की दिशा में अपनी यात्रा पर हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई सीधी फोन बातचीत के बाद इस आपूर्ति सौदे की रूपरेखा सार्वजनिक की गई थी। इस कदम को अमेरिकी घरेलू बाजार में आम जनता को महंगी ऊर्जा दरों से राहत दिलाने की सुनियोजित राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। प्रिमोर्स्क बंदरगाह से अटलांटिक महासागर की ओर बढ़ता काफिला इस ऊर्जा आपूर्ति की तकनीकी और जमीनी प्रगति की पुष्टि करते हुए रूसी उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने बताया कि तीन विशेष टैंकर ईंधन भरकर उत्तरी अमेरिका के बंदरगाहों की तरफ बढ़ रहे हैं। यह काफिला रूस के प्रमुख ऊर्जा केंद्र प्रिमोर्स्क बंदरगाह से रवाना किया गया है। समुद्री निगरानी के आंकड़ों और नौवहन ट्रैकिंग के अनुसार, ये पोत अटलांटिक महासागर के पूर्वी तट के जलमार्ग से गुजर रहे हैं। जहाजों के नेविगेशन संकेतों के विश्लेषण से संकेत मिलता है कि इनमें से कम से कम एक पोत न्यूयॉर्क बंदरगाह की तरफ अग्रसर है, जिसकी 7 नवंबर तक गंतव्य पर पहुंचने की उम्मीद जताई गई है। इस अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आदान-प्रदान को धरातल पर उतारने में रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष यानी आरडीआईएफ की भूमिका काफी महत्वपूर्ण बताई गई है। उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक के अनुसार, शुरुआती चरण में रवाना किए गए इन तीन जहाजों में कुल मिलाकर लगभग 40 हजार टन डीजल भरा हुआ है। तेल गणना के मानकों के हिसाब से यह परिमाण लगभग 3 लाख बैरल के बराबर बैठता है। संयुक्त राज्य अमेरिका के ऊर्जा विभाग के संदर्भ में यह ध्यान देने योग्य है कि वहां रोजाना लगभग 40 लाख बैरल डीजल की खपत होती है। इस दैनिक जरूरत के अनुपात में रूस से आ रही यह पहली खेप अमेरिका के एक दिन के कुल डीजल उपयोग के करीब 7 फीसदी हिस्से के बराबर है। नियमित आपूर्ति की तैयारी और क्रेमलिन का रुख क्रेमलिन के आधिकारिक प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने भी ईंधन से भरे पहले टैंकर के रवाना होने की पुष्टि की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहला पोत खरीदारों तक पहुंचने के लिए जलमार्ग में है और आने वाले दिनों में यह आपूर्ति केवल एक बार का लेनदेन न रहकर नियमित आधार पर जारी रहेगी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते का ऐलान करते हुए पहले कहा था कि रूस तत्काल प्रभाव से 3 लाख टन से अधिक डीजल अमेरिका भेजेगा। इसके बाद के चरणों में नवंबर महीने के दौरान 5 लाख टन अतिरिक्त ईंधन भेजने और फिर जरूरत पड़ने पर तत्काल 10 लाख टन अतिरिक्त डीजल उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। इसके साथ ही अलेक्जेंडर नोवाक ने भी यह संकेत दिया था कि रूसी ऊर्जा कंपनियां अक्टूबर माह के भीतर ही 5 लाख मीट्रिक टन डीजल अमेरिका को उपलब्ध कराने की पूरी क्षमता रखती हैं। अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले ईंधन के दाम कम करना प्रशासन के लिए एक बड़ी प्राथमिकता बन चुका है। पंपों पर डीजल के बढ़े हुए दामों ने परिवहन लागत बढ़ा दी थी, जिससे सामान्य वस्तुओं की कीमतें भी प्रभावित हो रही थीं। ट्रंप प्रशासन का आकलन है कि रूस से होने वाला यह नियमित आयात आपूर्ति श्रृंखला को स्थिर करेगा और घरेलू बाजार में दामों पर लगाम लगाएगा। कीव में तीखा विरोध और वाशिंगटन के भीतर राजनीतिक घमासान रूस से भारी मात्रा में डीजल खरीदने के इस समझौते ने अंतरराष्ट्रीय और अमेरिकी घरेलू राजनीति में गहरा विवाद खड़ा कर दिया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इस समझौते पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इसे मजबूत सहयोगियों द्वारा लिया गया एक बेहद कमजोर और निराशाजनक फैसला करार दिया। यूक्रेन का मानना है कि रूस से ऊर्जा खरीदकर उसे आर्थिक रूप से मजबूत करना जारी संघर्ष को गलत दिशा में ले जाने जैसा है। अमेरिका के भीतर भी इस फैसले का भारी विरोध शुरू हो गया है। अमेरिकी कांग्रेस में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक, दोनों ही दलों के कई प्रमुख सांसदों और नेताओं ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है। कुछ आलोचकों ने तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर मौजूदा अमेरिकी कानूनों और प्रतिबंध नीतियों की अनदेखी करने के गंभीर आरोप भी लगाए हैं। यह पूरा घटनाक्रम ट्रंप प्रशासन की पिछली नीतियों से बिल्कुल उलट दिशा में उठाया गया कदम नजर आता है। पहले की नीतियों के तहत प्रशासन ने रूसी ऊर्जा खरीदने वाले मुल्कों पर कड़े आर्थिक दंडात्मक उपाय लागू करने की रूपरेखा तैयार की थी, लेकिन अब स्वयं अमेरिका ही रूसी ईंधन का सीधा खरीदार बन चुका है। यह आपूर्ति ऐसे नाजुक दौर में हो रही है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के आपसी संबंध पहले से ही तनावपूर्ण चल रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सार्वजनिक मंचों पर यह आरोप भी लगाया था कि वोलोदिमिर जेलेंस्की रूस के साथ चल रहे सैन्य टकराव को समाप्त करने की वास्तविक इच्छा नहीं रखते हैं। सख्त प्रतिबंधों पर लगी रोक और भारत जैसे साझेदारों को राहत डीजल समझौते के तुरंत बाद ट्रंप प्रशासन ने एक और बड़ा रणनीतिक कदम उठाते हुए रूस पर लगने वाले सख्त प्रतिबंधों के अमल को फिलहाल के लिए टाल दिया है। सीनेटर लिंडसे ओ. ग्राहम के नाम से जुड़े रूस और ईरान प्रतिबंध विधेयक के प्रावधानों को फिलहाल रोक दिया गया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने इस कानून को अपनी मंजूरी दे दी थी, जिसके तहत रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले पांच प्रमुख खरीदार देशों पर 100 फीसदी तक भारी टैरिफ लगाने का कड़ा प्रावधान था। इस दंडात्मक कानून का सीधा असर भारत जैसे उन प्रमुख देशों पर पड़ सकता था जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस से तेल का आयात करते हैं। यदि यह कानून प्रभावी हो जाता, तो रूस के प्रमुख आर्थिक साझेदारों पर बड़ा व्यापारिक संकट खड़ा हो सकता था। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने व्यापक राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा का हवाला देते हुए इन कड़े दंडात्मक उपायों को अगले आदेश तक ठंडे बस्ते में डाल दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा व्यापार में शामिल देशों को फौरी तौर पर एक बड़ी राहत मिली है। इसका आप पर असर रूस से अमेरिका को मिलने वाली डीजल आपूर्ति और प्रतिबंधों पर लगी रोक से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और उपभोक्ता अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ सकता है। • ईंधन की कीमतों पर प्रभाव: अमेरिकी बाजार में अतिरिक्त डीजल पहुंचने से वैश्विक स्तर पर रिफाइंड ईंधन की किल्लत में नरमी आ सकती है। इससे परिवहन लागत नियंत्रित होने से थोक महंगाई पर हल्का दबाव कम होगा। • भारत में प्रभाव: भारतीय तेल रिफाइनरियों के खिलाफ 100 फीसदी तक के अमेरिकी टैरिफ का खतरा फिलहाल टल गया है। भारत को रूसी कच्चा तेल खरीदने और अपनी घरेलू कीमतें स्थिर रखने की नीति में बड़ी राहत मिली है। • वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति: रूसी बंदरगाहों से प्रत्यक्ष निर्यात शुरू होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति तंत्र अधिक स्थिर होगा। इससे सर्दियों के मौसम में डीजल और हीटिंग ऑयल की कमी का जोखिम घटेगा। • व्यापार नीति में ढील: द्वितीयक प्रतिबंधों के टलने से विदेशी व्यापार में अनिश्चितता खत्म हुई है। वैश्विक ऊर्जा खरीदार बिना अमेरिकी दंडात्मक कार्रवाई के डर के व्यापार जारी रख सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी घरेलू बाजार में ईंधन की बढ़ती महंगाई को काबू करने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में लचीला रुख अपनाने के उद्देश्य से यह समझौता किया गया है। • घरेलू ईंधन संकट: संयुक्त राज्य अमेरिका में मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले डीजल और ऊर्जा के दाम काफी ऊपर चले गए थे। इस घरेलू आर्थिक दबाव को कम करने के लिए प्रशासन को बाहरी स्रोतों से तत्काल अतिरिक्त आपूर्ति की आवश्यकता थी। • शीर्ष स्तर पर कूटनीतिक संवाद: डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन के बीच फोन पर हुई बातचीत ने इस समझौते का रास्ता तैयार किया। दोनों देशों के बीच बने इस सीधे संपर्क के बाद रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष के सहयोग से आपूर्ति बहाल की गई। • प्रतिबंध कानून का व्यावहारिक संकट: सीनेटर लिंडसे ओ. ग्राहम वाले कानून के तहत भारत सहित पांच बड़े ऊर्जा खरीदारों पर भारी टैरिफ लगाने से वैश्विक बाजार में बड़ा व्यवधान आ सकता था। अमेरिकी प्रशासन ने अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए इन प्रतिबंधों के क्रियान्वयन को रोक दिया। सवाल-जवाब 1. रूस से अमेरिका के लिए कितना डीजल भेजा गया है? रूस के प्रिमोर्स्क बंदरगाह से तीन टैंकरों में कुल 40 हजार टन डीजल भेजा गया है, जो करीब 3 लाख बैरल के बराबर है। 2. अमेरिका प्रतिदिन कितने डीजल की खपत करता है? संयुक्त राज्य अमेरिका में रोजाना करीब 40 लाख बैरल डीजल की खपत होती है, और यह खेप दैनिक खपत का लगभग 7 प्रतिशत है। 3. क्या इस ऊर्जा समझौते का विरोध भी हुआ है? हाँ, यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ-साथ अमेरिकी संसद में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों दलों के कई नेताओं ने इस समझौते की कड़ी आलोचना की है। 4. प्रतिबंधों से जुड़े किस कानून के अमल को रोका गया है? लिंडसे ओ. ग्राहम के नाम वाले कानून के तहत भारत सहित पांच देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने के प्रावधान को अमेरिकी प्रशासन ने फिलहाल टाल दिया है। https://trendkia.com/america/russian-bndaragaha-se-america-ke-lie-ravana-hue-dijala-tainkara-moscow-ke-satha-samajhaute-ke-bada-pratibndhon-para-bhi-narami-51253 TrendKia — Har trend, sabse pehle.