अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में भारतवंशियों का डंका, मिशिगन और एरिजोना समेत कई राज्यों में मिली ऐतिहासिक जीत अमेरिकी राज्यों की विधानसभाओं और सीनेट के मध्यावधि चुनावों में भारतीय मूल के कई नेताओं ने शानदार जीत दर्ज की है, जिसमें मिशिगन और एरिजोना में शीर्ष विधायी पदों पर पहुंचने का रास्ता भी साफ हुआ है। संयुक्त राज्य अमेरिका में हुए मध्यावधि चुनावों के दौरान राज्य विधानसभाओं और सीनेट की बहसों में भारतीय मूल के प्रत्याशियों ने जबर्दस्त राजनीतिक ताकत दिखाई है। देश के विभिन्न इलाकों में हुए मुकाबलों में न केवल मौजूदा विधायकों ने अपनी सीटें बचाईं, बल्कि कई महत्वपूर्ण सीटों को विपक्षी पाले से छीनकर अपनी पार्टी की झोली में भी डाल दिया। इन नतीजों की बदौलत कुछ राज्यों में विधायी सदनों का पूरा शक्ति संतुलन ही बदल गया है। अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस से इतर प्रांतीय स्तर पर भारतीय समुदाय की यह बढ़ती मौजूदगी काफी अहम मानी जा रही है, खासकर तब जब पूरे देश में इस समुदाय की आबादी 50 लाख से अधिक आंकी गई है। मिशिगन में स्पीकर बनने की दहलीज पर रणजीव पुरी मिशिगन राज्य में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता रणजीव पुरी ने बड़े अंतर से अपने प्रतिद्वंद्वी को पछाड़कर जीत हासिल की। इस समय वह मिशिगन निचले सदन में अल्पसंख्यक नेता की अहम भूमिका निभा रहे हैं। सदन में मिली इस भारी जीत के बाद अब उन्हें विधानसभा स्पीकर पद की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा है। यदि सदन के सदस्यों द्वारा उन्हें चुन लिया जाता है, तो रणजीव पुरी मिशिगन प्रतिनिधि सभा के शीर्ष पद यानी स्पीकर बनने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी राजनेता का गौरव हासिल करेंगे। एरिजोना में 60 साल बाद डेमोक्रेट्स की वापसी और प्रिया सुंदरेशन एरिजोना राज्य से आई खबर राजनीतिक तौर पर बेहद चौंकाने वाली रही, जहां सीनेट के डिस्ट्रिक्ट 18 से प्रिया सुंदरेशन ने फिर से जीत दर्ज की। प्रिया सुंदरेशन राज्य सीनेट में अल्पसंख्यक नेता के तौर पर विपक्ष का नेतृत्व कर रही थीं। इस बार के नतीजों ने एरिजोना की विधायिका पर छह दशकों से चले आ रहे समीकरण को पलट दिया और डेमोक्रेट पार्टी ने 60 वर्षों में पहली बार राज्य के दोनों सदनों पर पूर्ण नियंत्रण हासिल किया। फोनिक्स में आयोजित विजय उत्सव के दौरान मंच से प्रिया सुंदरेशन का परिचय सदन की अगली सीनेट प्रेसिडेंट के रूप में कराया गया। इलिनॉय में नबीला सैयद और सबा हैदर का शानदार प्रदर्शन इलिनॉय राज्य की राजनीति में भी भारतीय मूल की महिलाओं ने नया इतिहास रचा है। इलिनॉय सीनेट की डिस्ट्रिक्ट 26 सीट पर डेमोक्रेट उम्मीदवार नबीला सैयद ने रिपब्लिकन प्रत्याशी डार्बी हिल्स को सीधे मुकाबले में पटखनी दी। यह सीट पहले रिपब्लिकन पार्टी के कब्जे में थी, जिसे नबीला ने छीन लिया। चुनाव आंकड़ों के मुताबिक नबीला सैयद को कुल मतदान का 57 प्रतिशत वोट हासिल हुआ, जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी डार्बी हिल्स को 43 प्रतिशत वोटों पर ही संतोष करना पड़ा। इसी राज्य के निचले सदन यानी स्टेट हाउस में भारत में जन्मी सबा हैदर ने जीत का परचम लहराया। सबा हैदर ने डिस्ट्रिक्ट 84 के चुनावी रण में रिपब्लिकन उम्मीदवार ब्रायन स्कोपा को मात दी। इलिनॉय में इन दोनों नेताओं की सफलता ने राज्य भर में डेमोक्रेटिक पार्टी के बढ़ते प्रभाव को और मजबूती दी है। मिनेसोटा में डॉक्टर से सीनेटर बने कृष सुब्रमण्यन मिनेसोटा राज्य की सीनेट सीट पर डेमोक्रेटिक पार्टी के कृष सुब्रमण्यन ने अपने रिपब्लिकन विरोधी डस्टिन डूफॉल्ट को चुनावी जंग में हरा दिया। कृष सुब्रमण्यन पेशे से बच्चों के डॉक्टर हैं और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में जाना-पहचाना नाम हैं। राजनीति में उतरने के साथ-साथ वह हेनेपिन हेल्थ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी पद की जिम्मेदारी संभालते हैं। इसके अलावा वह मिनेसोटा एयर नेशनल गार्ड में फ्लाइट सर्जन के रूप में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। न्यूयॉर्क में लीजा कौल और जेरेमी कूनी की जीत न्यूयॉर्क राज्य के चुनावी नतीजों में डेमोक्रेट प्रत्याशी लीजा कौल ने स्टेट सीनेट के डिस्ट्रिक्ट 39 में जीत दर्ज की। उन्होंने यह सीट रिपब्लिकन सदस्य रॉब रोलिसन को पराजित करके अपने नाम की। वहीं दूसरी तरफ जेरेमी कूनी ने डिस्ट्रिक्ट 56 से लगातार चौथी बार जीत दर्ज कर अपनी मजबूत पकड़ साबित की। जेरेमी कूनी का बचपन काफी संघर्षपूर्ण रहा था; कोलकाता के एक अनाथालय से गोद लिए जाने के बाद न्यूयॉर्क के उत्तरी इलाके में एक अकेली मां ने उनका पालन-पोषण किया था। मैरीलैंड, वरमोंट और जॉर्जिया में ऐतिहासिक सफलता मैरीलैंड राज्य के डिस्ट्रिक्ट 39 में डेमोक्रेट अमर मुकुंदा ने निर्विरोध चुनाव जीतकर सबको चौंका दिया। किसी भी विपक्षी उम्मीदवार के मैदान में न होने से अमर मुकुंदा की उच्च सदन में वापसी बेहद आसान रही। अमर मुकुंदा पेशे से इंजीनियर हैं और उनके पास सैन्य सेवा का लंबा अनुभव भी मौजूद है। वरमोंट राज्य की सीनेट में केशा राम हिंसडेल ने अपनी सीट बरकरार रखी। केशा राम हिंसडेल की मां यहूदी और पिता हिंदू हैं। वरमोंट से ही डेमोक्रेटिक पार्टी के निखिल गोयल भी राज्य सीनेट का चुनाव जीतने में कामयाब रहे। वहीं जॉर्जिया के चुनावी समर में ज्योत सिंह ने अपनी जीत के साथ दोहरा कीर्तिमान रचा; वह राज्य विधायिका के लिए चुने जाने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी होने के साथ-साथ पहले सिख-अमेरिकी विधायक भी बन गए हैं। पेंसिल्वेनिया, नॉर्थ कैरोलाइना और टेक्सास में दबदबा कायम अन्य राज्यों में पहले से काबिज कई प्रमुख चेहरे अपनी सीटें बचाने में पूरी तरह सफल रहे। पेंसिल्वेनिया के निचले सदन में डेमोक्रेट अरविंद वेंकट ने दोबारा जीत हासिल की। नॉर्थ कैरोलाइना के डिस्ट्रिक्ट 15 से सीनेट डेमोक्रेटिक व्हिप जय चौधरी ने अपनी सीट सुरक्षित रखी। टेक्सास राज्य के डिस्ट्रिक्ट 47 से डेमोक्रेट पूजा सेठी ने शानदार जीत दर्ज की और वह टेक्सास विधानसभा में पहुंचने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी निर्वाचित प्रतिनिधि बनीं। इन नतीजों ने साफ कर दिया है कि अमेरिका के अलग-अलग कोनों में भारतीय मूल के नेता केवल प्रतीकात्मक उपस्थिति नहीं दर्ज करा रहे, बल्कि नीति-निर्माण और शीर्ष विधायी भूमिकाओं में भी अपनी पकड़ लगातार मजबूत कर रहे हैं। इसका आप पर असर अमेरिकी राज्यों के स्तर पर भारतीय मूल के नेताओं की जीत से भारतीय समुदाय के सामाजिक और नीतिगत प्रभाव में बड़ा इजाफा होगा। • प्रवासी भारतीयों के लिए: स्थानीय कानून निर्माण और नीतियों में भारतीय प्रवासियों से जुड़े मुद्दों को अब बेहतर मंच मिलेगा। स्कूल पाठ्यक्रम, स्थानीय टैक्स और कारोबारी नियमों में समुदाय की आवाज अधिक मजबूती से सुनी जाएगी। • वैश्विक पहचान के स्तर पर: विधायी सदनों में नेतृत्वकारी पदों पर पहुंचने से अमेरिकी समाज में भारतीय नेतृत्व की स्वीकार्यता बढ़ेगी। यह सफलता राजनीति में उतरने की इच्छा रखने वाले भारतीय युवाओं के लिए नए अवसर और प्रेरणा तैयार करेगी। • द्विपक्षीय संबंधों पर: राज्यों के स्तर पर व्यापार और आर्थिक साझेदारी को भारत के साथ मजबूत करने में मदद मिलेगी। अमेरिकी राज्य स्तर पर भारतीय उद्योगपतियों और पेशेवरों के लिए नए रास्ते खुल सकते हैं। • नागरिक अधिकारों की सुरक्षा: विविधता और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर कड़े कानून बनाने में आसानी होगी। नस्लीय भेदभाव के खिलाफ राज्य स्तर पर अधिक प्रभावी नीतियां लागू हो सकेंगी। ऐसा क्यों हुआ यह चुनाव परिणाम पिछले कुछ वर्षों में भारतीय-अमेरिकी समुदाय की लगातार बढ़ती राजनीतिक सक्रियता और जनसांख्यिकीय बदलावों का परिणाम है। • मजबूत सामुदायिक जुड़ाव: भारतीय समुदाय ने केवल मतदान तक सीमित न रहकर जमीनी प्रचार और फंड जुटाने में बढ़-चढ़कर भाग लिया। उच्च शिक्षा और विभिन्न पेशेवर पृष्ठभूमियों के कारण इन उम्मीदवारों को व्यापक मतदाताओं का समर्थन मिला। • स्थानीय समीकरणों में बदलाव: इलिनॉय और एरिजोना जैसे राज्यों में उपनगरीय मतदाताओं का झुकाव डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों की तरफ बढ़ा। इस बदलाव ने नबीला सैयद और प्रिया सुंदरेशन जैसी युवा नेताओं को ऐतिहासिक जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। • अनुभवी उम्मीदवारों का चयन: चुने गए उम्मीदवारों में डॉक्टर, इंजीनियर और वकील शामिल हैं जिन्होंने पहले भी जनसेवा में नाम कमाया था। मतदाताओं ने उनके ठोस पेशेवर ट्रैक रिकॉर्ड और लोक कल्याणकारी प्राथमिकताओं पर भरोसा जताया। सवाल-जवाब 1. मिशिगन में रणजीव पुरी किस प्रमुख पद के दावेदार हैं? रणजीव पुरी मिशिगन के निचले सदन में माइनॉरिटी लीडर हैं और वह मिशिगन विधानसभा के पहले भारतीय-अमेरिकी स्पीकर बनने की दौड़ में सबसे आगे हैं। 2. एरिजोना में प्रिया सुंदरेशन की जीत क्यों खास है? प्रिया सुंदरेशन की जीत के साथ डेमोक्रेट्स ने 60 वर्षों में पहली बार एरिजोना विधायिका पर नियंत्रण पाया है, और वह अगली सीनेट प्रेसिडेंट बनने जा रही हैं। 3. इलिनॉय सीनेट सीट पर नबीला सैयद को कितने प्रतिशत वोट मिले? नबीला सैयद ने डिस्ट्रिक्ट 26 में 57 प्रतिशत वोट हासिल कर रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी डार्बी हिल्स (43 प्रतिशत) को पराजित किया। 4. जॉर्जिया राज्य में किसने ऐतिहासिक जीत दर्ज की? ज्योत सिंह जॉर्जिया राज्य की विधायिका के लिए निर्वाचित होने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी और पहले सिख-अमेरिकी बने हैं। 5. टेक्सास विधानसभा में पहुंचने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी कौन हैं? डेमोक्रेट पूजा सेठी ने टेक्सास के डिस्ट्रिक्ट 47 से जीत हासिल कर राज्य विधायिका में पहली भारतीय-अमेरिकी बनने का गौरव हासिल किया। 6. डॉ. कृष सुब्रमण्यन राजनीति के अलावा क्या जिम्मेदारी निभाते हैं? वह हेनेपिन हेल्थ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी हैं और मिनेसोटा एयर नेशनल गार्ड में फ्लाइट सर्जन के रूप में भी सेवारत हैं। प्रेरणा और सबक कोलकाता के अनाथालय से निकलकर अमेरिकी विधायिका तक पहुंचने और पहली बार सदन की दहलीज लांघने वाले इन नेताओं का सफर संघर्ष और दृढ़ संकल्प की अनूठी मिसाल है। • पृष्ठभूमि सीमा नहीं बनती: जेरेमी कूनी की कहानी सिखाती है कि विनम्र शुरुआत कभी भी आपके सपनों की सीमा तय नहीं कर सकती। अनाथालय में पले-बढ़े होने के बावजूद उन्होंने मेहनत से अपनी पहचान बनाई। • पेशेवर कौशल को जनसेवा से जोड़ना: डॉ. कृष सुब्रमण्यन और अमर मुकुंदा ने दिखाया कि चिकित्सा और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों से आकर भी राजनीति में सार्थक बदलाव लाया जा सकता है। समाज के हर क्षेत्र के विशेषज्ञों को जननीति में भागीदारी करनी चाहिए। • सकारात्मक बदलाव के लिए धैर्य जरूरी: एरिजोना में 60 साल बाद सत्ता परिवर्तन और टेक्सास में पहली बार भारतीय-अमेरिकी का चुना जाना साबित करता है कि निरंतर प्रयास से दशकों पुराने राजनीतिक ढर्रे को भी बदला जा सकता है। https://trendkia.com/america/us-madhyavadhi-chunava-men-indian-americans-ka-dnka-michigan-aura-arizona-sameta-kai-rajyon-men-mili-aitihasika-jita-56659 TrendKia — Har trend, sabse pehle.