अमेरिकी नौसेना ने पेश की नई AIM-424 मैलिस मिसाइल, इंडो-पैसिफिक में चीन की चुनौतियों का करेगी मुकाबला अमेरिकी नौसेना ने टेलहुक सिम्पोजियम के दौरान अपनी लंबी दूरी की आधुनिक एयर-टू-एयर मिसाइल AIM-424 मैलिस को दुनिया के सामने पेश किया है। यह हथियार इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते मिसाइल खतरे को बेअसर करने और नौसैनिक बेड़ों को सुरक्षा देने के लिए तैयार किया गया है। अमेरिकी नौसेना ने टेलहुक सिम्पोजियम के दौरान अपनी अगली पीढ़ी की लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल AIM-424 मैलिस का अनावरण किया है। यह अत्याधुनिक हथियार इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की ओर से बढ़ती लंबी दूरी की मिसाइल चुनौतियों का मुकाबला करने और अमेरिकी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स की रक्षा प्रणाली को अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यह नया मिसाइल सिस्टम मौजूदा हथियारों की तुलना में मारक क्षमता, रेंज और युद्ध रणनीति के मामले में एक बड़ा जेनरेशनल लीप पेश करता है। कैरियर बेड़े की सुरक्षा और सामरिक लक्ष्य AIM-424 मैलिस का मुख्य उद्देश्य केवल दुश्मन के लड़ाकू विमानों को डॉगफाइट में मार गिराना नहीं है। इसे विशेष रूप से उन भारी बमवर्षकों और लॉन्च प्लेटफॉर्म्स को दूर से ही नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है, जो एयर-लॉन्च्ड एंटी-शिप बैलिस्टिक या क्रूज मिसाइलें लेकर अमेरिकी सतह के युद्धपोतों पर हमला कर सकते हैं। चीन की कुछ एंटी-शिप मिसाइलें कथित तौर पर 1,000 नॉटिकल मील से अधिक दूरी तक मार करने में सक्षम हैं, जिससे उनके लॉन्च एयरक्राफ्ट अमेरिकी जहाजों की मौजूदा रक्षात्मक सीमा से बाहर रहकर सुरक्षित दूरी से मिसाइल दाग सकते हैं। यह नई मिसाइल अमेरिकी नौसैनिक बेड़ों से काफी दूर रहकर ही दुश्मन के हमलों को इंटरसेप्ट करने की क्षमता प्रदान करती है। इससे कैरियर स्ट्राइक ग्रुप का सुरक्षा दायरा व्यापक होता है, दुश्मन की टारगेटिंग प्रक्रिया बाधित होती है और चीन की एंटी-एक्सेस/एरिया-डिनायल (A2/AD) रणनीति को सीधे तौर पर चुनौती दी जा सकती है। लड़ाकू विमानों के साथ एकीकरण और परीक्षण AIM-424 मैलिस का वर्तमान में F/A-18E सुपर हॉर्नेट और स्टेल्थ F-35 विमानों पर व्यापक परीक्षण किया जा रहा है। परीक्षण के दौरान सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान पर बाहरी रूप से चार मिसाइलें ले जाने की तस्वीरें सामने आई हैं, जो इसकी बेहतरीन मैगजीन क्षमता को प्रदर्शित करती हैं। इसके अलावा F-35C के आंतरिक बे में इस मिसाइल को लोड करने की पुष्टि की गई है। इसका अर्थ यह है कि F-35C अपने स्टेल्थ फीचर्स को नुकसान पहुंचाए बिना लंबी दूरी के अभियानों को अंजाम दे सकता है। यह मिसाइल वर्तमान सुपर हॉर्नेट्स, F-35C और भविष्य के छठी पीढ़ी के F/A-XX नौसैनिक लड़ाकू विमानों के बीच एक महत्वपूर्ण ऑपरेशनल ब्रिज की भूमिका निभाएगी। इस मिसाइल के विकास में आरटीएक्स की एडवांस्ड टेक्नोलॉजी टीम ने अहम योगदान दिया है। हालांकि अमेरिकी नौसेना ने सुरक्षा कारणों से इसके सटीक आकार, वजन, प्रोपल्शन सिस्टम, गाइडेंस और अधिकतम रेंज जैसे विशिष्ट विवरणों को गुप्त रखा है। चीन की PL-15 मिसाइल से तुलना इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की PL-15 और अगली पीढ़ी की PL-17 जैसी लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलें अमेरिकी नौसेना के लिए एक प्रमुख चुनौती रही हैं। चीनी PL-15 की अनुमानित रेंज लगभग 200 से 300 किलोमीटर या उससे अधिक मानी जाती है और यह एक्टिव रडार होमिंग के साथ बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) क्षमता से लैस है। AIM-424 मैलिस को विशेष रूप से इन चीनी मिसाइलों को ले जाने वाले लड़ाकू जहाजों को काफी पहले ही नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। जहां PL-15 मुख्य रूप से फाइटर-टू-फाइटर या साधारण विमान इंटरसेप्शन पर ध्यान केंद्रित करती है, वहीं मैलिस का मुख्य फोकस बेड़े की रक्षा करने और हवाई क्षेत्र में अपनी श्रेष्ठता को फिर से बहाल करने पर है। यह मिसाइल लंबी रेंज और मल्टी-प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन के जरिए चीनी A2/AD नेटवर्क को प्रभावी ढंग से ध्वस्त करने में सक्षम मानी जा रही है। ब्रह्मोस और AIM-424 मैलिस में अंतर हथियारों की दुनिया में अक्सर ब्रह्मोस और मैलिस की तुलना की जाती है, लेकिन दोनों बिल्कुल अलग श्रेणियों के हथियार हैं। ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक एंटी-शिप क्रूज मिसाइल है, जो मुख्य रूप से समुद्री और जमीनी लक्ष्यों को तबाह करने के लिए इस्तेमाल होती है। इसकी मारक क्षमता लगभग 300 से 500 किलोमीटर है और इसे जल, थल और नभ तीनों जगहों से लॉन्च किया जा सकता है। इसके विपरीत, AIM-424 मैलिस पूरी तरह से एयर-टू-एयर मिसाइल है, जिसका काम दुश्मन के विमानों को हवा में ही मार गिराना है। जहां ब्रह्मोस का काम सीधे दुश्मन के युद्धपोतों या विमानवाहकों पर हमला करना है, वहीं मैलिस का काम उन लड़ाकू विमानों को नष्ट करना है जो ब्रह्मोस जैसी एंटी-शिप मिसाइलें ले जा रहे हों। दोनों मिसाइलें अलग-अलग अभियानों के लिए बनाई गई हैं, जहां मैलिस हवाई प्रभुत्व स्थापित करती है, वहीं ब्रह्मोस सतह के युद्ध में मारक क्षमता प्रदान करती है। अंततः AIM-424 मैलिस अमेरिकी नौसेना की भावी वायु रणनीति का एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरेगी। इसका आप पर असर सामरिक प्रभाव: इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की यह नई मिसाइल शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है, जिससे नौसैनिक सुरक्षा और वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ सकता है। सवाल-जवाब 1. AIM-424 मैलिस मिसाइल क्या है? यह अमेरिकी नौसेना की अगली पीढ़ी की लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल है, जिसे कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स की सुरक्षा और दुश्मन के बॉम्बर्स को दूर ही नष्ट करने के लिए बनाया गया है। 2. AIM-424 मैलिस का मुख्य उद्देश्य क्या है? इसका मुख्य उद्देश्य उन दुश्मन विमानों को निशाना बनाना है जो अमेरिकी बेड़े पर एंटी-शिप क्रूज या बैलिस्टिक मिसाइलें दाग सकते हैं। 3. यह मिसाइल किन विमानों पर इस्तेमाल होगी? इस मिसाइल का परीक्षण F/A-18E सुपर हॉर्नेट और स्टेल्थ F-35C पर हो रहा है, तथा यह भविष्य के छठी पीढ़ी के F/A-XX विमानों के साथ भी एकीकृत होगी। 4. मैलिस मिसाइल चीन की PL-15 से कैसे अलग है? चीन की PL-15 मुख्य रूप से फाइटर इंटरसेप्शन के लिए है, जबकि मैलिस का फोकस PL-15 जैसी मिसाइलों को ले जाने वाले लॉन्च प्लेटफॉर्म्स को दूर से ही तबाह कर बेड़े को सुरक्षा देना है। 5. क्या AIM-424 मैलिस और ब्रह्मोस एक ही श्रेणी की मिसाइलें हैं? नहीं, ब्रह्मोस एक एंटी-शिप क्रूज मिसाइल है जो जहाजों और जमीनी ठिकानों पर हमला करती है, जबकि मैलिस एक एयर-टू-एयर मिसाइल है जो हवा में विमानों को निशाना बनाती है। https://trendkia.com/america/us-navy-ne-pesha-ki-nai-aim-424-malice-misaila-indo-pacific-men-china-ki-chunautiyon-ka-karegi-mukabala-20579 TrendKia — Har trend, sabse pehle.