यूएसएस अब्राहम लिंकन पर 208 दिनों की सी-तैनाती से भड़के परिवार, अमेरिकी नौसेना नेतृत्व से मांगे जवाब सैन डिएगो से रवाना हुए युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन पर मौजूद 5,000 नाविकों और मरीन के परिजनों ने नौसेना के शीर्ष अधिकारियों से भोजन, पानी और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं पर सीधे सवाल किए हैं। चीन के प्राचीन सैन्य रणनीतिकार सुन जू ने 'द आर्ट ऑफ वॉर' में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी थी कि किसी भी सैन्य अभियान को अनिश्चितकाल के लिए खींचना राष्ट्र के संसाधनों को नष्ट करता है और सैनिकों के मनोबल को पस्त कर देता है। मध्य पूर्व में पिछले छह महीनों से ईरान के साथ जारी तनावपूर्ण स्थिति के बीच यह ऐतिहासिक सीख अमेरिकी नौसेना पर सटीक बैठती है। अमेरिकी नौसेना के सबसे विशाल युद्धपोतों में से एक, यूएसएस अब्राहम लिंकन पर तैनात हजारों जवान इस समय गंभीर मानसिक और शारीरिक दबाव झेल रहे हैं। लगातार जारी कठिन परिस्थितियों के कारण अब सैनिकों के परिजन खुद सार्वजनिक रूप से सामने आकर नौसेना नेतृत्व से जवाब मांग रहे हैं। समुद्र में लगातार 208 दिन और बुनियादी सुविधाओं का घोर संकट यूएसएस अब्राहम लिंकन 21 नवंबर को सैन डिएगो बंदरगाह से रवाना हुआ था और अब तक कुल 259 दिनों की तैनाती पूरी कर चुका है। इस पूरे कार्यकाल के दौरान यह विशाल युद्धपोत केवल दो बार रुका, जिसमें 7 जुलाई को ओमान की एक संक्षिप्त यात्रा भी शामिल थी। सबसे चिंताजनक बात यह है कि जहाज पर सवार 5,000 नाविकों और मरीन सैनिकों ने लगातार 208 दिन समुद्र के बीच बिताए हैं और उन्होंने जमीन पर कदम तक नहीं रखा है। यही लंबा अलगाव और जमीनी संपर्क का अभाव परिजनों के आक्रोश का सबसे बड़ा कारण बनकर उभरा है। सैन डिएगो में परिजनों की सीधी भिड़ंत और गंभीर शिकायतें सैन डिएगो में बृहस्पतिवार को एक असाधारण दृश्य देखने को मिला, जब लगभग 200 परिजनों ने नौसेना के कार्यवाहक सचिव हुंग काओ का सीधे घेराव किया। आमतौर पर सैन्य परिवारों द्वारा इस तरह का सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन बेहद दुर्लभ माना जाता है। परिजनों ने जवानों की अत्यधिक थकावट, गिरते मानसिक स्वास्थ्य, घटिया और अपर्याप्त भोजन, पीने के पानी की संदिग्ध गुणवत्ता, खराब शौचालयों, शावर में जमा फफूंद, सुरक्षा खतरों और डाक वितरण में हो रही महीनों की देरी पर अधिकारियों को कटघरे में खड़ा किया। बैठक के दौरान सामने आई जानकारियों के अनुसार, जहाज पर टॉयलेट जाम होने और रहने वाले हिस्सों में नमी के कारण फफूंद फैलने की गंभीर समस्याएं पैदा हुई हैं। नौसेना अधिकारियों ने स्वीकार किया कि पाइपों में रुकावट के कारण कुछ हिस्सों में शौचालय प्रभावित हुए थे, जबकि वेंटिलेशन प्रणाली में खराबी की वजह से शावर क्षेत्रों में नमी और फफूंद की समस्या उत्पन्न हुई। इसके अलावा रसद आपूर्ति व्यवस्था भी बुरी तरह चरमरा गई, जिससे व्यक्तिगत देखभाल के सामान, ताजा भोजन और पत्राचार की डिलीवरी ठप हो गई। सप्लाई चेन की बाधाएं और नौसेना का आधिकारिक पक्ष इन व्यवस्थागत खामियों पर अपनी बात रखते हुए वाइस एडमिरल डगलस वेरिसिमो ने माना कि क्षेत्र में संघर्ष शुरू होने के बाद बहरीन के रास्ते होने वाली रसद आपूर्ति प्रणाली में भारी बैकलॉग बन गया था। वाइस एडमिरल वेरिसिमो ने कहा कि एक समय हालात बेहद खराब थे और यद्यपि अब स्थिति में सुधार हो रहा है, फिर भी सब कुछ पूरी तरह ठीक नहीं हुआ है। पीड़ित परिवारों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि युद्धपोत की वापसी कब होगी। हालांकि नौसेना ने संकेत दिया है कि यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को मध्य पूर्व भेजने की तैयारी की जा रही है ताकि वह लिंकन का स्थान ले सके, लेकिन वापसी की कोई निश्चित तिथि घोषित नहीं की गई है। अधिकारियों ने समय सीमा न बताने के पीछे ऑपरेशनल सिक्योरिटी यानी अभियानात्मक सुरक्षा का हवाला दिया है। शीर्ष सैन्य कमान में फेरबदल और अंदरूनी दबाव यूएसएस लिंकन पर पनप रहा यह असंतोष केवल एक जहाज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी सैन्य संरचना में बढ़ रहे तनाव का संकेत दे रहा है। हाल ही में अमेरिकी सेना के भीतर कई वरिष्ठ अधिकारियों को पदों से हटाया गया है, जिनमें लेफ्टिनेंट जनरल चार्ल्स कोस्टांजा शामिल हैं। उन्हें उनके निर्धारित कार्यकाल के समाप्त होने से लगभग दो महीने पहले ही पदमुक्त कर दिया गया। इसके साथ ही कई अन्य उच्चस्तरीय प्रशासनिक बदलाव भी किए गए हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि लंबी तैनाती का असर अब सैन्य नेतृत्व पर भी दिखने लगा है। इसका आप पर असर वैश्विक स्तर पर: मध्य पूर्व में अमेरिकी युद्धपोतों की लंबी तैनाती और सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और तेल की कीमतों पर असर डाल सकता है, जिससे दुनिया भर में ईंधन महंगा हो सकता है। भारत में: मध्य पूर्व में जारी अस्थिरता और नौसैनिक आपूर्ति में रुकावटों से फारस की खाड़ी के व्यापारिक मार्ग प्रभावित हो सकते हैं, जिससे भारतीय आयात-निर्यात और पेट्रोल-डीजल की दरों पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है। सवाल-जवाब 1. यूएसएस अब्राहम लिंकन कितने समय से समुद्र में तैनात है? यह युद्धपोत 21 नवंबर को सैन डिएगो से रवाना होने के बाद कुल 259 दिनों से तैनात है और लगातार 208 दिनों से समुद्र में बिना किनारे लगे तैर रहा है। 2. परिजनों ने नौसेना नेतृत्व के समक्ष कौन सी मुख्य समस्याएं उठाईं? परिजनों ने अत्यधिक मानसिक तनाव, खराब खाने-पीने की व्यवस्था, गंदे पानी, बंद टॉयलेट, शावर में फफूंद और डाकियों द्वारा मेल में देरी जैसे मुद्दों पर विरोध जताया। 3. क्या यूएसएस अब्राहम लिंकन को राहत देने के लिए कोई अन्य युद्धपोत भेजा जा रहा है? हां, अमेरिकी नौसेना यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को लिंकन की जगह लेने के लिए मध्य पूर्व भेजने की तैयारी कर रही है। 4. नौसेना अधिकारियों ने रसद आपूर्ति में देरी का क्या कारण बताया? वाइस एडमिरल डगलस वेरिसिमो के अनुसार, क्षेत्र में लड़ाई शुरू होने के बाद बहरीन के माध्यम से होने वाली आपूर्ति श्रृंखला में भारी बैकलॉग बन गया था। https://trendkia.com/america/uss-abraham-lincoln-para-208-dinon-ki-si-tainati-se-bharake-parivara-us-navy-netritva-se-mange-javaba-15325 TrendKia — Har trend, sabse pehle.