# उत्तराखंड और राजस्थान में शुरू हुआ भारतीय व अमेरिकी सेना का साझा युद्धाभ्यास

> औली और महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में दोनों देशों के 1200 जवान जटिल भौगोलिक परिस्थितियों में सैन्य तालमेल और आधुनिक युद्ध तकनीकों को परख रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** अमेरिका · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/america/uttarakhand-aura-rajasthan-men-shuru-hua-indian-va-us-sena-ka-sajha-yuddhabhyasa-34343 · **Language:** Hindi
**Tags:** युद्ध अभ्यास 2026, भारतीय सेना, अमेरिकी सेना, सैन्य युद्धाभ्यास, औली, महाजन फील्ड फायरिंग रेंज, रक्षा समाचार

भारतीय थलसेना और यूनाइटेड स्टेट्स आर्मी के बीच द्विपक्षीय सैन्य साझेदारी को मजबूत करने के मकसद से वार्षिक साझा अभ्यास का 22वां संस्करण आरंभ हो चुका है। इस बड़े रक्षा अभ्यास का औपचारिक शुभारंभ देवभूमि उत्तराखंड के सीमावर्ती पर्वतीय क्षेत्र औली स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड पर आयोजित एक भव्य समारोह के साथ किया गया। इस बार के युद्धाभ्यास की रूपरेखा बेहद व्यापक रखी गई है, जिसमें उत्तरी हिमालयी ढलानों से लेकर पश्चिमी रेगिस्तानी भूभाग तक एक साथ समन्वित गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

## शीर्ष सैन्य कमान की मौजूदगी और भागीदारी का पैमाना
प्रशिक्षण सत्र की शुरुआत के अवसर पर दोनों देशों के उच्च सैन्य अधिकारियों ने शिरकत की। भारतीय दल का नेतृत्व 14 इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल अमरेश गुंजन ने किया, जबकि अमेरिकी सैन्य टुकड़ी की कमान 11वीं एयरबोर्न डिवीजन से संबद्ध पहली इन्फैंट्री ब्रिगेड कॉम्बैट टीम के कमांडर कर्नल बेंजामिन जैकमैन के हाथों में रही। सैन्य मोर्चे पर दोनों ही पक्षों की बराबरी सुनिश्चित करते हुए भारत और अमेरिका ने लगभग 600-600 जांबाज जवानों को मैदान में उतारा है। इस तरह कुल 1200 प्रशिक्षित सैनिक मिलकर युद्ध कौशल का साझा प्रदर्शन कर रहे हैं।

## पर्वतीय और ऊंचे ढलानों पर एकीकृत रणनीति
इस संयुक्त ड्रिल का प्राथमिक लक्ष्य विषम, पहाड़ी तथा अर्ध-पहाड़ी क्षेत्रों में इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स के व्यावहारिक संचालन की साझा दक्षता को नई ऊंचाई देना है। दुर्गम चोटियों पर पैदल सेना की त्वरित तैनाती, आक्रामक अभियानों और सामरिक मोर्चेबंदी पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। प्रशिक्षण गतिविधियों के माध्यम से दोनों सशस्त्र बल अपने पुराने रणनीतिक अनुभवों का आदान-प्रदान कर रहे हैं, ताकि किसी भी अप्रत्याशित संकट के समय साझा नियोजन और धरातल पर सटीक कार्रवाई का समन्वय त्रुटिहीन बना रहे।

## ड्रोन, स्वायत्त प्रणालियां और आधुनिक हथियारों का परीक्षण
बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप इस संस्करण में अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों के एकीकरण को प्राथमिकता दी गई है। टोही गतिविधियों, अग्रिम निगरानी तथा वास्तविक समय की खुफिया जानकारी जुटाने के लिए मानव रहित ड्रोन और ऑटोनॉमस प्रणालियों का सघन अभ्यास किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, राजस्थान के बीकानेर स्थित महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में अत्याधुनिक मारक हथियार प्रणालियों की लाइव फायरिंग और तकनीकी क्षमता का व्यापक प्रदर्शन तय किया गया है।

## मल्टी-डोमेन वॉरफेयर और भविष्य की संयुक्त चुनौतियां
रेगिस्तानी और बर्फीले दोनों प्रकार के भूगोल में एक साथ युद्धाभ्यास आयोजित करने का उद्देश्य बहुआयामी वातावरण में अंतर-संचालनीयता का विस्तार करना है। दोनों देशों के रक्षा रणनीतिकार मल्टी-डोमेन वॉरफेयर की नई बारीकियों और आधुनिक युद्धकला के आयामों पर गंभीर विचार-विमर्श में जुटे हैं। इस रणनीतिक साझेदारी से सैनिकों को एक-दूसरे की मानक संचालन प्रक्रियाओं और युद्ध प्रणालियों को गहराई से समझने का अवसर मिल रहा है, जिससे भविष्य के संयुक्त अभियानों में सैन्य तालमेल को नई मजबूती मिलेगी।

## इसका आप पर असर
यह सैन्य अभ्यास दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच रक्षा तालमेल को मजबूत करता है और क्षेत्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से काफी अहम है।

- **सामरिक सुरक्षा:** हिमालयी और रेगिस्तानी सीमाओं पर आधुनिक युद्ध कौशल का अभ्यास देश की रक्षा तैयारियों को अधिक पुख्ता करता है। इससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच किसी भी साझा अभियान के समय बेहतर तालमेल संभव हो सकेगा।
- **आधुनिक तकनीक का प्रसार:** ड्रोन और ऑटोनॉमस निगरानी प्रणालियों के परीक्षण से थलसेना के तकनीकी आधुनिकीकरण को गति मिलेगी। इसका प्रत्यक्ष लाभ अग्रिम चौकियों पर तैनात सुरक्षा बलों की कार्यक्षमता और निगरानी क्षमता बढ़ाने में होगा।
- **उत्तराखंड में:** औली और आसपास के सीमांत क्षेत्रों में सेना की इस स्तर की हलचल से स्थानीय कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स और आपातकालीन बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलती है। स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियों को भी दुर्गम इलाकों में सेना के साथ समन्वय का अप्रत्यक्ष लाभ मिलता है।
- **राजस्थान में:** महाजन फायरिंग रेंज के आसपास सुरक्षा सतर्कता और निगरानी तंत्र को उच्च स्तर पर रखा जाता है। सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य मौजूदगी से स्थानीय सुरक्षा का माहौल मजबूत होता है।

## ऐसा क्यों हुआ
भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने और दोनों सेनाओं की साझा युद्धक क्षमताओं को परखने के लिए इस वार्षिक अभ्यास का आयोजन किया जा रहा है।

- **सामरिक अनिवार्यता:** दोनों देशों के बीच बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों और नई रक्षा चुनौतियों को देखते हुए नियमित सैन्य समन्वय आवश्यक हो गया है। इसी आवश्यकता के तहत यह 22वां द्विपक्षीय प्रशिक्षण चक्र आयोजित किया जा रहा है।
- **भौगोलिक विविधता में तैयारी:** बर्फीले पहाड़ों और तपते रेगिस्तानों में एक साथ अभियान चलाने की क्षमता विकसित करने के लिए औली और महाजन का चयन किया गया। इससे सैनिकों को दो भिन्न चरम भौगोलिक परिस्थितियों में एक साथ सामरिक संतुलन बनाने का व्यावहारिक अनुभव मिलता है।
- **तकनीकी आधुनिकीकरण की मांग:** आधुनिक युद्धकला में ड्रोन और मल्टी-डोमेन प्रणालियों की बढ़ती भूमिका ने दोनों सेनाओं को नई तकनीकें साझा करने के लिए प्रेरित किया है। यही कारण है कि इस बार के अभ्यास में पारंपरिक अभियानों के साथ स्वायत्त प्रणालियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. भारत और अमेरिका के बीच कौन सा सैन्य अभ्यास शुरू हुआ है?
दोनों देशों की सेनाओं के बीच वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास 'युद्ध अभ्यास 2026' का 22वां संस्करण शुरू हुआ है।

### 2. यह युद्धाभ्यास किन स्थानों पर आयोजित किया जा रहा है?
यह अभ्यास उत्तराखंड के औली फॉरेन ट्रेनिंग नोड और राजस्थान की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में एक साथ हो रहा है।

### 3. इस अभ्यास में कुल कितने सैनिक भाग ले रहे हैं?
इस अभ्यास में भारत और अमेरिका दोनों पक्षों से करीब 600-600 सैनिक शामिल हैं, यानी कुल लगभग 1200 जवान भाग ले रहे हैं।

### 4. इस अभ्यास में किन वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने भाग लिया?
उद्घाटन समारोह में मेजर जनरल अमरेश गुंजन और अमेरिकी सेना की 11वीं एयरबोर्न डिवीजन के कर्नल बेंजामिन जैकमैन शामिल हुए।

### 5. सैन्य अभ्यास के दौरान किस तरह की तकनीकों पर जोर दिया जा रहा है?
अभ्यास में निगरानी और टोह लेने के लिए ड्रोन और ऑटोनॉमस सिस्टम के साथ आधुनिक हथियार प्रणालियों के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है।

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