आंध्र प्रदेश स्थानीय निकाय चुनावों में चंद्रबाबू नायडू के गठबंधन का दबदबा, वाईएसआरसीपी को गढ़ में लगा झटका आंध्र प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनावों में टीडीपी, जनसेना और बीजेपी गठबंधन ने 13 में से 9 नगर निगमों और 86 में से 75 नगरपालिकाओं पर जीत हासिल की है. वाईएस जगन मोहन रेड्डी के गृह जिले वाईएसआर कडप्पा और पुलिवेंदुला में भी वाईएसआरसीपी को करारी हार का सामना करना पड़ा है. आंध्र प्रदेश के शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में राज्य की सत्ता पर काबिज राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने भारी बहुमत के साथ शानदार प्रदर्शन किया है. मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की अगुवाई वाली तेलुगु देशम पार्टी, उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण की जनसेना पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के इस साझा मोर्चे ने राज्यभर में विपक्षी दल वाईएसआर कांग्रेस पार्टी को पीछे छोड़ते हुए अधिकांश निकायों की कमान अपने हाथ में ले ली है. घोषित नतीजों के मुताबिक, कुल 13 नगर निगमों में से 9 पर गठबंधन ने अपनी जीत का परचम लहराया है. इसके अलावा 86 नगरपालिकाओं और नगर पंचायतों में से 75 सीटों पर सत्तारूढ़ गठबंधन के प्रत्याशियों ने विजय प्राप्त की है. इसे राज्य के सियासी फलक पर मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के मजबूत होते जनाधार के तौर पर देखा जा रहा है. अदालती अड़चनें और निर्विरोध जीत के आंकड़े इस चुनावी प्रक्रिया के दौरान कानूनी विवादों के कारण दो शहरी क्षेत्रों में मतदान संपन्न नहीं कराया जा सका. इनमें श्रीकाकुलम नगर निगम और अमदालावलसा नगरपालिका शामिल हैं, जहां अदालत में मामले लंबित होने की वजह से चुनाव टालने पड़े. दूसरी तरफ, नेल्लिमर्ला और सालूर में टीडीपी के बागी उम्मीदवारों ने आधिकारिक प्रत्याशियों को पछाड़ते हुए अध्यक्ष पद की कुर्सी अपने नाम कर ली. गठबंधन की संगठनात्मक पकड़ का असर इस बात से भी साफ दिखा कि 17 नगरपालिकाओं और नगर पंचायतों में उसके अध्यक्ष पद के उम्मीदवार बिना किसी मुकाबले के निर्विरोध चुन लिए गए. इसके साथ ही मतगणना के शुरुआती दौर में कई अन्य शहरी निकायों में भी गठबंधन के प्रत्याशी लगातार बढ़त बनाए हुए थे. जगन मोहन रेड्डी के गृह जिले वाईएसआर कडप्पा में सियासी उलटफेर इन चुनाव परिणामों का सबसे बड़ा उलटफेर पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी के गृह क्षेत्र वाईएसआर कडप्पा जिले में देखने को मिला. लंबे समय से वाईएसआर कांग्रेस पार्टी का अभेद्य गढ़ माने जाने वाले इस जिले में पार्टी का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा. जिले के सभी 279 नगरपालिका वार्डों में वाईएसआरसीपी महज सात वार्डों में ही अपनी जीत दर्ज करा पाई. इसके विपरीत, टीडीपी गठबंधन ने जिले की छह नगरपालिकाओं में निर्विरोध जीत हासिल करके विपक्षी दल के सबसे मजबूत किले को पूरी तरह ढहा दिया. पुलिवेंदुला विधानसभा क्षेत्र में भी विपक्षी दल को शिकस्त वाईएस जगन मोहन रेड्डी के अपने विधानसभा क्षेत्र पुलिवेंदुला में भी वाईएसआरसीपी अपनी साख नहीं बचा सकी. यहां नगरपालिका अध्यक्ष पद के मुकाबले में टीडीपी उम्मीदवार तुगुतला गीता कुमारी ने 13,875 वोटों के भारी अंतर से निर्णायक जीत दर्ज की. पुलिवेंदुला के अंतर्गत आने वाले 20 वार्डों में मतदान हुआ था, जिनमें से 17 वार्डों पर टीडीपी गठबंधन ने कब्जा कर लिया, जबकि वाईएसआरसीपी को सिर्फ तीन वार्डों की जीत से ही संतोष करना पड़ा. हालांकि, विपक्षी दल ने अनंतपुर नगर निगम और नंदिकोटकुर नगरपालिका जीतकर कुछ हद तक अपनी मौजूदगी दर्ज कराई. इसके अतिरिक्त पार्टी नायडूपेटा और बेथमचेरला के चुनावी मुकाबले में भी बढ़त बनाए हुए थी. 2021 के मुकाबले पूरी तरह पलट गया चुनावी गणित साल 2021 के नगरपालिका चुनावों के आंकड़ों से तुलना करें तो इस बार के नतीजे अभूतपूर्व बदलाव को दर्शाते हैं. वर्ष 2021 में वाईएसआरसीपी ने राज्य के सभी 13 नगर निगमों में क्लीन स्वीप किया था और 87 में से 86 नगरपालिकाओं में एकतरफा जीत दर्ज की थी. इस बार पूरा चुनावी समीकरण उलट गया और शहरी निकायों की अधिकांश सीटें टीडीपी गठबंधन के पाले में चली गईं. इस ऐतिहासिक जीत के बाद टीडीपी प्रदेश अध्यक्ष पल्ला श्रीनिवास राव ने कहा कि यह जनादेश मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण और मंत्री नारा लोकेश के साझा नेतृत्व पर जनता के अटूट विश्वास का प्रमाण है. वहीं, मंत्री नारा लोकेश ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह जनादेश हमारे लिए किसी जश्न से ज्यादा जनसेवा की बड़ी जिम्मेदारी है. दूसरी ओर, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने चुनाव नतीजों को लेकर सवाल उठाते हुए पूरी चुनाव प्रक्रिया में धांधली और हेरफेर किए जाने के आरोप लगाए हैं. इसका आप पर असर आंध्र प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनावों में सत्तारूढ़ गठबंधन की भारी जीत से राज्य के शहरी प्रशासन और विकास नीतियों का सीधा नियंत्रण राज्य सरकार के साझा मोर्चे के पास आ गया है. • भारत में: राष्ट्रीय स्तर पर एनडीए गठबंधन के क्षेत्रीय जनाधार को मजबूती मिली है, जिससे केंद्र और राज्य के बीच विधायी तालमेल और शहरी विकास मिशनों के क्रियान्वयन को गति मिलेगी. विभिन्न राज्यों की राजनीति में क्षेत्रीय दलों के आंतरिक शक्ति संतुलन पर भी इसका मनोवैज्ञानिक असर देखने को मिल सकता है. • आंध्र प्रदेश में: राज्य के अधिकांश नगर निगमों और नगरपालिकाओं में अब सीधे राज्य सरकार से जुड़ा नेतृत्व काम करेगा, जिससे नागरिक सुविधाओं और नगर विकास योजनाओं के फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे. दूसरी ओर, विपक्षी पार्टी वाईएसआरसीपी के स्थानीय कार्यकर्ताओं और पार्षदों के प्रभाव में कमी आने से जमीनी स्तर की स्थानीय राजनीति में शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल जाएगा. • शहरी नागरिकों के लिए: 75 नगरपालिकाओं और 9 नगर निगमों में चुने गए नए बोर्ड बहुत जल्द स्थानीय टैक्स, स्वच्छता, पेयजल आपूर्ति और सड़क निर्माण के विकास प्रोजेक्ट्स पर प्रशासनिक बैठकें शुरू करेंगे. स्थानीय निवासियों को अपने वार्डों के लंबित कार्यों के लिए अब टीडीपी, जनसेना और बीजेपी के नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों से संपर्क करना होगा. • पुलिवेंदुला और कडप्पा के निवासियों के लिए: दशकों बाद इस क्षेत्र के शहरी निकायों का नेतृत्व विपक्षी खेमे के हाथों में गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर सत्ता और प्रशासनिक पहुंच के नए समीकरण बनेंगे. क्षेत्र की जनता के लिए नए नगर पार्षदों और अध्यक्षों से नए सिरे से काम कराने और प्राथमिकताओं को तय कराने का समय आ गया है. ऐसा क्यों हुआ आंध्र प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनावों में सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन की यह भारी जीत राज्य में हालिया सत्ता परिवर्तन, मजबूत तिहरे गठबंधन और विपक्षी पार्टी के संगठनात्मक बिखराव के कारण संभव हुई. • सीधा कारण: तेलुगु देशम पार्टी, जनसेना पार्टी और बीजेपी के साझा गठबंधन ने संगठित होकर चुनाव लड़ा, जिससे सरकार विरोधी मतों का विभाजन रुक गया और सत्ताधारी पक्ष को एकजुट समर्थन मिला. इसके चलते 17 निकायों में अध्यक्ष पद के उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए और गठबंधन को निर्णायक बढ़त मिल गई. • गठबंधन का अनुकूल वातावरण: राज्य में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के बाद चंद्रबाबू नायडू, पवन कल्याण और नारा लोकेश के नेतृत्व के प्रति जनता में बना सकारात्मक माहौल स्थानीय निकायों तक कायम रहा. मतदाताओं ने विकास और स्थानीय प्रशासन को राज्य सरकार की नीतियों के साथ जोड़ने को प्राथमिकता दी. • विपक्षी गढ़ में सेंधमारी: पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी के गृह जिले वाईएसआर कडप्पा और पुलिवेंदुला में स्थानीय स्तर पर पार्टी के कमजोर पड़ते प्रभाव और दलबदल के चलते वाईएसआरसीपी का पारंपरिक वोट बैंक बिखर गया, जिससे वह 279 में से केवल सात वार्डों में ही सिमट कर रह गई. • विपक्षी दल के आरोप: वाईएसआरसीपी ने अपनी हार के पीछे चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी और हेरफेर किए जाने का आरोप लगाया है, जबकि सत्ताधारी गठबंधन इसे सरकार के काम पर जनता की मुहर बता रहा है. सवाल-जवाब 1. आंध्र प्रदेश स्थानीय निकाय चुनावों में टीडीपी गठबंधन ने कितने नगर निगमों में जीत दर्ज की? सत्तारूढ़ टीडीपी गठबंधन ने कुल 13 नगर निगमों में से 9 पर जीत हासिल की है. 2. नगरपालिकाओं और नगर पंचायतों में गठबंधन का क्या प्रदर्शन रहा? गठबंधन ने कुल 86 नगरपालिकाओं और नगर पंचायतों में से 75 पर कब्जा जमाया है. 3. किन दो शहरी निकायों में कानूनी मामलों की वजह से मतदान नहीं हो सका? अदालती मामलों के कारण श्रीकाकुलम नगर निगम और अमदालावलसा नगरपालिका में चुनाव संपन्न नहीं हो सके. 4. वाईएसआर कडप्पा जिले के नगरपालिका वार्डों में वाईएसआरसीपी को कितनी सीटें मिलीं? जिले के कुल 279 नगरपालिका वार्डों में से वाईएसआरसीपी को केवल सात सीटों पर ही जीत मिल सकी. 5. पुलिवेंदुला में टीडीपी की अध्यक्ष पद की उम्मीदवार ने कितने वोटों से जीत हासिल की? पुलिवेंदुला में टीडीपी उम्मीदवार तुगुतला गीता कुमारी ने 13,875 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की. 6. किन निकायों में वाईएसआरसीपी ने जीत दर्ज कर अपनी मौजूदगी बनाए रखी? वाईएसआरसीपी ने अनंतपुर नगर निगम और नंदिकोटकुर नगरपालिका में जीत हासिल की. 7. साल 2021 के निकाय चुनावों में वाईएसआरसीपी का कैसा प्रदर्शन था? वर्ष 2021 में वाईएसआरसीपी ने सभी 13 नगर निगमों और 87 में से 86 नगरपालिकाओं में भारी जीत दर्ज की थी. 8. नेल्लिमर्ला और सालूर में किन प्रत्याशियों ने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की? नेल्लिमर्ला और सालूर में टीडीपी के बागी उम्मीदवारों ने अध्यक्ष पद के चुनाव में जीत दर्ज की. 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