भीषण चक्रवाती तूफान मुरासु आंध्र प्रदेश तट से टकराया, केंद्र ने राहत कार्यों में पूरी मदद का दिया आश्वासन चक्रवात मुरासु 120 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार वाले झोंकों के साथ ओंगोल के निकट तट को पार कर चुका है, जहां राहत के लिए एनडीआरएफ तैनात है। बंगाल की खाड़ी से उठा गंभीर चक्रवाती तूफान मुरासु दक्षिण आंध्र प्रदेश के तटवर्ती इलाके को पार कर चुका है। मौसम विज्ञानियों की ताजा चेतावनी के मुताबिक इस मौसमी तंत्र की वजह से समुद्र तटीय इलाकों में तेज आंधी और भारी वर्षा की स्थिति बनी हुई है। जमीन से टकराने की प्रक्रिया के दौरान हवा की रफ्तार बहुत तीव्र दर्ज की गई, जिससे तटीय बस्तियों में जनजीवन पर गहरा असर पड़ा है। इस प्राकृतिक आपदा के बीच राहत और बचाव कार्यों के लिए राष्ट्रीय तथा राज्य स्तरीय बचाव बलों को अग्रिम मोर्चे पर सक्रिय कर दिया गया है। ओंगोल के करीब लैंडफॉल और हवा की तीव्रता मौसम विभाग के बुलेटिन के अनुसार यह चक्रवात नेल्लोर और नरसपुर के मध्यवर्ती तटीय क्षेत्र में ओंगोल के पास से होकर गुजरा। समुद्र तट को पार करते वक्त निरंतर चलने वाली हवाओं का वेग 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा मापा गया। आंधी के प्रचंड झोंके 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंच रहे थे। पिछले छह घंटों के दौरान यह चक्रवाती तंत्र करीब आठ किलोमीटर प्रति घंटे की धीमी गति से उत्तर-उत्तर-पश्चिम की तरफ आगे बढ़ा था। सुबह साढ़े पांच बजे दर्ज किए गए आंकड़ों के आधार पर तूफान का केंद्र ओंगोल के निकट मौजूद था। भौगोलिक दूरी के लिहाज से यह बापटला से लगभग 40 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम, कावली से 80 किलोमीटर उत्तर-उत्तर-पूर्व, मछलीपट्टनम से 120 किलोमीटर पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम तथा नेल्लोर से 130 किलोमीटर उत्तर में केंद्रित पाया गया। कमजोर पड़ने का अनुमान और आगे की दिशा मौसम के आकलन के अनुसार चक्रवात मुरासु उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में ही अपनी यात्रा जारी रखेगा। जैसे-जैसे यह मौसमी तंत्र अंतर्देशीय भूभाग के भीतर पहुंचेगा, इसकी तीव्रता में धीरे-धीरे कमी दर्ज होगी। दोपहर के समय तक यह एक सामान्य चक्रवाती तूफान में तब्दील हो सकता है, जिसमें हवा की रफ्तार घटकर 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटा और झोंकों में 100 किलोमीटर प्रति घंटा रहने का अनुमान है। इसके बाद भी वायुमंडलीय दबाव में बदलाव का क्रम जारी रहेगा। विभाग के अनुमान के मुताबिक मंगलवार आधी रात के आसपास तक यह और कमजोर पड़ते हुए डीप डिप्रेशन की श्रेणी में समा जाएगा। हालांकि इसके कमजोर होने की प्रक्रिया के दौरान भी प्रभावित जिलों में लगातार निगरानी बरती जा रही है। केंद्र सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का भरोसा आपदा की इस घड़ी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के साथ टेलीफोन के जरिए स्थिति का जायजा लिया। गृह मंत्री ने तटीय जिलों में तूफान के प्रभाव की पूरी जानकारी प्राप्त की और राज्य को आवश्यक संसाधन मुहैया कराने का वचन दिया। गृह मंत्री ने स्थिति पर कहा, “एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें पहले से ही जमीन पर हैं, और प्रभावित लोगों की मदद कर रही हैं।” उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्र सरकार आंध्र प्रदेश के नागरिकों की सुरक्षा के लिए पूरी मजबूती से उनके साथ खड़ी है और किसी भी परिस्थिति से निपटने में मदद करेगी। इसका आप पर असर तटीय आंध्र प्रदेश में चक्रवात मुरासु के लैंडफॉल से रेल, सड़क और विद्युत सेवाओं में रुकावट की संभावना है। • भारत में: बंगाल की खाड़ी के रूटों पर चलने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों और उड़ानों पर चक्रवाती मौसम का असर पड़ सकता है। अन्य राज्यों से तटीय आंध्र की ओर यात्रा करने वाले यात्रियों को अपने सफर से पहले शेड्यूल जांचना चाहिए। • आंध्र प्रदेश में: ओंगोल, बापटला, कावली, मछलीपट्टनम और नेल्लोर जिलों के निवासियों को आंधी और बारिश से सुरक्षित ठिकानों पर रहने की सलाह दी गई है। निचले इलाकों में रहने वाले लोग आपातकालीन राहत शिविरों और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। • मछुआरों और तटीय कामगारों के लिए: समुद्र में 100 से 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने के कारण तटीय गतिविधियों पर रोक रहेगी। मछुआरों को समुद्र से दूर रहने और अपनी नौकाओं को सुरक्षित बांधने की जरूरत है। • बिजली व संचार व्यवस्था पर: तेज हवाओं के चलते पेड़ गिरने और बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त होने से कुछ इलाकों में आपूर्ति बाधित हो सकती है। लोग पीने के पानी, जरूरी दवाइयों और मोबाइल चार्जिंग की वैकल्पिक व्यवस्था दुरुस्त रखें। ऐसा क्यों हुआ बंगाल की खाड़ी के पश्चिमी-मध्य क्षेत्र में बना गंभीर चक्रवाती तंत्र अनुकूल मौसमी दशाओं के चलते तट की ओर अग्रसर हुआ और अंततः जमीन से टकराया। • समुद्री दबाव प्रणाली: खाड़ी के मध्य हिस्से में विकसित हुआ कम दबाव का क्षेत्र धीरे-धीरे सघन होकर गंभीर चक्रवाती तूफान मुरासु में तब्दील हो गया। इस मौसमी तंत्र ने उत्तर-उत्तर-पश्चिम की दिशा पकड़ते हुए तटीय इलाकों की तरफ रुख किया। • धीमी गति से लैंडफॉल: चक्रवात पिछले छह घंटों में लगभग 8 किमी प्रति घंटा की धीमी रफ्तार से आगे बढ़ा, जिसके कारण तटीय इलाके में इसका फैलाव केंद्रित रहा। इसी धीमी गति के साथ इसने नेल्लोर और नरसपुर के बीच ओंगोल तट को पार किया। • भूभाग पर आकर क्रमिक क्षरण: जमीन से टकराने के बाद समुद्री नमी का स्रोत कट जाने से यह तूफान तेजी से शक्ति खोने लगा है। यही वजह है कि दोपहर तक इसके चक्रवाती तूफान और मंगलवार आधी रात तक डीप डिप्रेशन में तब्दील होने का अनुमान है। सवाल-जवाब 1. चक्रवात मुरासु ने किस स्थान पर तट को पार किया? तूफान ने दक्षिण आंध्र प्रदेश में नेल्लोर और नरसपुर के मध्य, ओंगोल के निकट तट को पार किया। 2. लैंडफॉल के समय हवाओं की गति कितनी दर्ज की गई? तट पार करते वक्त निरंतर हवाओं की गति 100 से 110 किमी प्रति घंटा थी, जबकि झोंकों की रफ्तार 120 किमी प्रति घंटा तक पहुंची। 3. 3 नवंबर को सुबह तूफान का केंद्र किन शहरों के पास था? सुबह साढ़े पांच बजे तूफान ओंगोल के पास था, जो बापटला से 40 किमी दक्षिण-पश्चिम और कावली से 80 किमी उत्तर-उत्तर-पूर्व में स्थित था। 4. मौसम विभाग के अनुसार आगे तूफान का क्या असर रहेगा? तूफान दोपहर तक कमजोर होकर 80-90 किमी प्रति घंटे की हवाओं वाले चक्रवात में और मंगलवार मध्यरात्रि तक डीप डिप्रेशन में बदल जाएगा। 5. राहत और बचाव के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने क्या कदम उठाए हैं? एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें प्रभावित इलाकों में तैनात हैं तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया है। https://trendkia.com/andhra-pradesh/bhishana-chakravati-tuphana-murasu-andhra-pradesh-tata-se-takaraya-kendra-ne-rahata-karyon-men-puri-madada-ka-diya-ashvasana-55605 TrendKia — Har trend, sabse pehle.