# गोदावरी की गोद में 10 हजार एकड़ में फैला नर्सरी हब, 10 रुपये की पौध से लेकर लाखों के पेड़ तक सप्लाई करता है कडियम

> आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले का कडियम देश का सबसे बड़ा नर्सरी क्लस्टर बन चुका है, जहां 10 हजार एकड़ में फैले हजारों किस्मों के पौधे देश के बड़े प्रोजेक्ट्स से लेकर खाड़ी देशों तक भेजे जाते हैं।

**Type:** article · **Category:** आंध्र प्रदेश · **Published:** 2026-10-16 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/andhra-pradesh/godavari-ki-god-mein-10-hajar-acre-mein-phaila-nursery-hub-10-rupaye-ki-paudh-se-lekar-lakhon-ke-ped-tak-supply-karta-hai-kadiyam-48122 · **Language:** Hindi
**Tags:** कडियम, आंध्र प्रदेश, पूर्वी गोदावरी, नर्सरी हब, प्लांट कैपिटल, राजमहेंद्रवरम, बागवानी, कृषि व्यापार

आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में राजमहेंद्रवरम के निकट बसा कडियम आज पूरे भारत में पेड़-पौधों और हरियाली की सबसे बड़ी राजधानी के रूप में पहचान बना चुका है। इसे आमतौर पर भारत का सबसे बड़ा नर्सरी केंद्र या प्लांट कैपिटल कहा जाता है। यह कोई एकल बाज़ार या एक-दो दुकानों तक सीमित इलाका नहीं है, बल्कि आसपास के कई गांवों को जोड़कर बना एक बहुत बड़ा उत्पादक नेटवर्क है। कडियापुलंका, बुर्रिलंका और वीरवरम समेत दर्जनों गांवों के किसान और बागवान पूरी तरह से इस हरियाली उद्योग को संभाल रहे हैं। लगभग 10,000 एकड़ के विशाल भूभाग पर फैली सैकड़ों नर्सरियों के कारण इस पूरे क्षेत्र में चारों ओर विविध रंगों के फूल, सजावटी वनस्पति और बड़े छांवदार पेड़ ही नजर आते हैं।

## गोदावरी की उपजाऊ मिट्टी और एक सदी पुराना इतिहास
इस हरित क्षेत्र की सबसे बड़ी मजबूती गोदावरी नदी के कछार की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी तथा साल भर मिलने वाला प्रचुर जल संसाधन है। लगभग 100 वर्ष पहले स्थानीय किसानों ने अपनी सामान्य पारंपरिक फसलों की खेती के साथ पौधों की कलम बांधने और सजावटी पौधों को तैयार करने की साधारण शुरुआत की थी। धीरे-धीरे किसानों की यह रुचि और तकनीकी कौशल एक विशाल व्यावसायिक तंत्र में बदल गया। वर्तमान में यहां आम फलदार वृक्षों से लेकर विदेशी इनडोर पौधे, बोनसाई, कैक्टस, ऑर्किड और राजमार्गों के किनारे रोपे जाने वाले छायादार विशालकाय पेड़ों की हजारों किस्में तैयार की जाती हैं। नर्सरी की कर्मचारी रंगा गुलकांती के मुताबिक कडियम की सबसे प्रमुख विशेषता यह है कि यहां सामान्य खरीदारों के लिए 10 से 20 रुपये के किफायती पौधे भी उपलब्ध हैं और शौकीनों के लिए लाखों रुपये मूल्य के दुर्लभ बोनसाई तथा दशकों पुराने सजावटी वृक्ष भी मिल जाते हैं।

## मेट्रो, एयरपोर्ट से लेकर खाड़ी देशों तक पौधों की मांग
भारत के प्रमुख महानगरों में बन रहे आधुनिक बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में कडियम की वनस्पति को पहली प्राथमिकता दी जाती है। नए हवाई अड्डों, मेट्रो स्टेशनों, राष्ट्रीय राजमार्गों, कॉर्पोरेट आईटी पार्कों और आलीशान होटलों के लैंडस्केपिंग कार्यों के लिए भारी मात्रा में पौधे सीधे इसी इलाके से ऑर्डर किए जाते हैं। घरेलू मांग के अतिरिक्त खाड़ी देशों तक इस नर्सरी हब के सजावटी व विशेष पौधों का निर्यात किया जाता है। पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ यह इलाका स्थानीय अर्थव्यवस्था का भी मुख्य आधार बन गया है।

## 50 हजार से अधिक कामगारों को प्रत्यक्ष रोजगार
कडियम का यह हरा-भरा ताना-बाना क्षेत्र के हजारों परिवारों के जीवनयापन का साधन है। स्थानीय स्तर पर 50 हजार से अधिक लोग पौधों की कलम तैयार करने, खेतों की सिंचाई, पौधों की सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स तथा परिवहन जैसे दैनिक कार्यों से आजीविका कमाते हैं। पौधों के इस विस्तृत कारोबार के सहारे इलाके में गमला निर्माण, जैविक खाद, मिट्टी की तैयारी और पैकेजिंग का भी एक बड़ा सहायक बाजार विकसित हो चुका है, जिससे यह क्लस्टर प्राकृतिक संपदा और मानव श्रम के तालमेल का प्रमुख उदाहरण बन गया है।

## इसका आप पर असर
कडियम का विस्तार देश के बागवानी प्रेमियों, शहरी बुनियादी ढांचे और स्थानीय श्रमिकों को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।

- **भारत भर में:** गृह वाटिका के शौकीनों और शहरी खरीदारों को देश भर में बेहद किफायती दरों से लेकर दुर्लभ किस्मों के पौधे आसानी से सुलभ होते हैं। मेट्रो, हाईवे और नए हवाई अड्डों के लिए थोक आपूर्ति यहीं से होने से प्रमुख शहरों में हरित आवरण तैयार करने में मदद मिलती है।
- **आंध्र प्रदेश में:** पूर्वी गोदावरी क्षेत्र के हजारों ग्रामीण परिवारों को नियमित रोजगार और स्थिर आजीविका प्राप्त होती है। नर्सरी के साथ गमले, खाद और ढुलाई जैसे स्थानीय सहायक व्यवसायों को लगातार काम मिलता रहता है।
- **उपभोक्ता बजट:** आम बागबानों के लिए 10 से 20 रुपये में बुनियादी पौध मिल जाने से हरियाली बढ़ाना बेहद किफायती बना रहता है। बड़े सजावटी पौधे या विदेशी किस्में खरीदने वालों को भी एक ही स्थान पर सभी विकल्प मिल जाते हैं।
- **निर्यात और विस्तार:** खाड़ी देशों तक होने वाली आपूर्ति से भारतीय बागवानी को वैश्विक बाजार और विदेशी मुद्रा का लाभ मिलता है। इससे देश के अन्य कृषि क्लस्टरों के लिए संगठित बागवानी का एक व्यावहारिक मॉडल तैयार होता है।

## ऐसा क्यों हुआ
कडियम का देश के सबसे बड़े प्लांट क्लस्टर के रूप में उभरना अनुकूल प्राकृतिक भौगोलिक परिस्थितियों और एक सदी की संगठित मानव मेहनत का संयुक्त परिणाम है।

- **प्राकृतिक संसाधन:** गोदावरी नदी के कछार में मौजूद अत्यंत उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी और निरंतर पानी की उपलब्धता ने पौधों की विविध प्रजातियों को उगाने के लिए आदर्श पारिस्थितिकी तैयार की। इस अनुकूल परिवेश के कारण सामान्य फसलों की तुलना में पौधों की कलम तेजी से जड़ पकड़ती है।
- **ऐतिहासिक शुरुआत:** लगभग 100 वर्ष पूर्व स्थानीय किसानों ने पारंपरिक अनाजों के साथ-साथ कलम बांधने और सजावटी पौधों को उगाने का प्रारंभिक अभ्यास शुरू किया था। समय के साथ यह प्रयोगात्मक रुचि पीढ़ी-दर-पीढ़ी निखरती हुई एक संगठित कुटीर उद्योग में तब्दील हो गई।
- **शहरीकरण की मांग:** देश भर में नए एयरपोर्ट, मेट्रो लाइनें, हाइवे और बड़े कॉर्पोरेट परिसरों के निर्माण से लैंडस्केपिंग की मांग में भारी बढ़ोतरी हुई। कडियम के किसानों ने इस विशाल व्यावसायिक अवसर को पहचानते हुए बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू किया।
- **व्यापक उत्पाद श्रृंखला:** 10-20 रुपये के सामान्य पौधों से लेकर लाखों रुपये के पुराने बोनसाई और विदेशी किस्मों की एक साथ उपलब्धता ने इसे सभी प्रकार के ग्राहकों के लिए देश का सबसे पसंदीदा केंद्र बना दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. कडियम नर्सरी हब किस राज्य और जिले में स्थित है?
यह आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में राजमहेंद्रवरम के समीप स्थित है।

### 2. कडियम नर्सरी क्लस्टर कितने बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है?
यह नर्सरी क्लस्टर कडियापुलंका, बुर्रिलंका और वीरवरम जैसे कई गांवों के करीब 10,000 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है।

### 3. कडियम में पौधों की कीमतें किस सीमा में उपलब्ध हैं?
यहां 10 से 20 रुपये के छोटे पौधे से लेकर लाखों रुपये मूल्य के दुर्लभ बोनसाई और पुराने सजावटी पेड़ आसानी से मिल जाते हैं।

### 4. कडियम से पौधे किन बड़े प्रोजेक्ट्स और स्थानों पर भेजे जाते हैं?
यहां के पौधे देश भर के नए हवाई अड्डों, मेट्रो स्टेशनों, हाईवे, कॉर्पोरेट पार्कों, होटलों और खाड़ी देशों तक भेजे जाते हैं।

### 5. कडियम नर्सरी हब से कितने लोगों को आजीविका मिलती है?
स्थानीय स्तर पर 50 हजार से अधिक लोग कलम बांधने, सिंचाई, पौधों की देखभाल और परिवहन जैसे कार्यों में लगे हैं।

### 6. कडियम में नर्सरी का काम कब और कैसे शुरू हुआ था?
करीब 100 साल पहले किसानों ने गोदावरी नदी की जलोढ़ मिट्टी और पानी की मदद से पारंपरिक खेती के साथ कलम बांधने की शुरुआत की थी।

## प्रेरणा और सबक
कडियम के किसानों की सफलता पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर विशिष्ट व्यावसायिक कौशल अपनाने का उत्कृष्ट उदाहरण पेश करती है।

- **कौशल आधारित बदलाव:** किसानों ने पारंपरिक अन्न उत्पादन की सीमाओं को पहचानते हुए कलम बांधने और नर्सरी तकनीक जैसी विशेषज्ञता विकसित की। अपने काम में नई तकनीक और विशेषज्ञता जोड़ने से कृषि कार्य अधिक लाभदायक बन सकता है।
- **सामूहिक क्लस्टर निर्माण:** कई गांवों के किसानों ने अलग-अलग काम करने के बजाय एक संगठित हब तैयार किया। जब पूरा इलाका किसी एक विशिष्ट उत्पाद के लिए प्रसिद्ध हो जाता है, तो बाजार और ग्राहक अपने आप वहां खिंचे चले आते हैं।
- **हर वर्ग के ग्राहक पर ध्यान:** 10 रुपये के साधारण पौधे से लेकर लाखों रुपये के दुर्लभ पेड़ों तक की पेशकश से यह साबित होता है कि हर बजट के ग्राहक को सेवा देने वाला व्यापार ज्यादा मजबूत होता है।
- **पारिस्थितिकी और व्यापार का मेल:** प्राकृतिक संसाधनों का बुद्धिमानी से इस्तेमाल करते हुए पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना टिकाऊ आर्थिक विकास हासिल किया जा सकता है।

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