# लगातार चार विफलताओं के बाद सेना में भर्ती हुआ बेटा, आंध्र प्रदेश के मुस्लिम दंपति ने पंडाल सजाकर की गणपति पूजा

> पार्वतीपुरम मान्यम जिले के सालूर में मुस्लिम परिवार ने बेटे के भारतीय सेना में चुने जाने पर मांगी गई मन्नत पूरी करते हुए विधि-विधान से भगवान गणेश की विशेष पूजा कराई।

**Type:** article · **Category:** आंध्र प्रदेश · **Published:** 2026-10-10 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/andhra-pradesh/lagatara-chara-viphalataon-ke-bada-sena-men-bharti-hua-beta-andhra-pradesh-ke-muslim-dnpati-ne-pndala-sajakara-ki-ganesh-puja-45844 · **Language:** Hindi
**Tags:** आंध्र प्रदेश, पार्वतीपुरम मान्यम, सालूर, भारतीय सेना, सांप्रदायिक सौहार्द, गणेश उत्सव, मन्नत, धार्मिक सद्भाव

आंध्र प्रदेश के पार्वतीपुरम मान्यम जिले से सांप्रदायिक सद्भाव और आपसी विश्वास की एक अनूठी मिसाल सामने आई है। सालूर शहर के वड्डी स्ट्रीट इलाके में रहने वाले एक मुस्लिम परिवार ने सामाजिक और धार्मिक बंधनों से परे जाकर भगवान गणेश की विधिवत पूजा-अर्चना कराई। मोहम्मद अब्दुल हक और उनकी पत्नी मोहम्मद सलमा ने अपने आवास के निकट गणेश उत्सव के अवसर पर भव्य पंडाल का निर्माण कराया और पारंपरिक तौर-तरीकों से अनुष्ठान पूरे किए। परिवार के इस फैसले के पीछे उनके बेटे के सेना में चयन को लेकर रखी गई एक खास मन्नत थी, जिसके पूरा होने पर उन्होंने इस धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया।

## चार बार की नाकामी के बाद टूटा नहीं हौसला
मोहम्मद अब्दुल हक के बेटे का बचपन से ही भारतीय सेना का हिस्सा बनकर राष्ट्र की रक्षा करने का गहरा सपना था। अपने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए उसने लगातार चार बार सेना भर्ती प्रक्रियाओं में हिस्सा लिया और कड़े शारीरिक परीक्षणों के साथ-साथ लिखित परीक्षाएं भी दीं। हर बार वह बेहतरीन प्रदर्शन करता, लेकिन अंतिम मेरिट सूची जारी होने पर किसी न किसी वजह से उसका नाम चयन सूची में दर्ज होने से रह जाता था। लगातार चार बार मिली असफलता ने युवक का मनोबल तोड़ दिया था और वह गहरे तनाव व निराशा के दौर से गुजर रहा था।

## दोस्त बने संबल और मांगी गई विशेष मन्नत
जब पांचवीं बार सेना भर्ती की अधिसूचना जारी हुई, तो मोहल्ले के हमउम्र साथियों और दोस्तों ने युवक को फिर से प्रयास करने के लिए प्रेरित किया। दोस्तों के सुझाव पर भरोसा जताते हुए युवक ने भगवान गणेश के समक्ष प्रार्थना की और मन्नत मांगी कि यदि उसका चयन इस बार सेना में हो गया, तो वह पूरे विधि-विधान और धूमधाम से गणपति उत्सव आयोजित कराएगा। इसके बाद युवक ने दिन-रात कड़ी मेहनत की और अपनी तैयारी में कोई कसर नहीं छोड़ी।

## पांचवें प्रयास में चयन और प्रशिक्षण के लिए रवानगी
युवक का कड़ा अभ्यास रंग लाया और पांचवें प्रयास में उसका अंतिम चयन भारतीय सेना के लिए हो गया। चयन प्रक्रिया पूरी होने के तत्काल बाद उसे अनिवार्य सैन्य प्रशिक्षण के लिए रवाना कर दिया गया। प्रशिक्षण केंद्र जाने से पहले उसने अपने पिता मोहम्मद अब्दुल हक से आग्रह किया कि उसने ईश्वर के समक्ष जो मन्नत रखी थी, उसे परिवार की ओर से पूरा किया जाए ताकि उसका संकल्प अधूरा न रहे।

## पंडाल में खुद बैठकर माता-पिता ने संपन्न कराए अनुष्ठान
बेटे के संकल्प और इच्छा का सम्मान करते हुए मोहम्मद अब्दुल हक और मोहम्मद सलमा ने बिना किसी संकोच के वड्डी स्ट्रीट में भगवान गणेश की आकर्षक प्रतिमा स्थापित करवाई। मुस्लिम दंपति ने पूजा मंडप में स्वयं बैठकर प्रथम पूजा के सभी जरूरी धार्मिक विधान संपन्न किए। इसके साथ ही उन्होंने उत्सव के दौरान आयोजित होने वाले वसंत पूजा के पारंपरिक अनुष्ठानों को भी पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ निभाया।

## सामाजिक सीमाओं से परे आस्था और भाईचारे का संदेश
मोहम्मद अब्दुल हक का कहना है कि सच्ची आस्था, निष्ठा और समर्पण के मार्ग में जाति अथवा मजहब की दीवारें कभी बाधक नहीं बन सकतीं। वे लंबे समय से सामाजिक सौहार्द से जुड़े रहे हैं और इससे पूर्व स्थानीय कनक महालक्ष्मी मंदिर में आयोजित होने वाले विभिन्न धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों में भी सक्रिय रूप से भाग लेते रहे हैं। उनका मानना है कि मानवीय संबंध, आपसी आदर और ईश्वर के प्रति निष्ठा किसी भी औपचारिक पहचान से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। इस आयोजन की पूरे इलाके में व्यापक सराहना की जा रही है।

## इसका आप पर असर
यह घटना दर्शाती है कि व्यक्तिगत लक्ष्य और आस्था सामाजिक सीमाओं से परे जाकर समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

- **भारत में:** यह पहल देश भर में विभिन्न समुदायों के बीच आपसी सम्मान और सौहार्दपूर्ण वातावरण को मजबूत करने का संदेश देती है। इससे स्थानीय स्तर पर साझा सांस्कृतिक उत्सवों में सभी वर्गों की भागीदारी को प्रोत्साहन मिलता है।
- **आंध्र प्रदेश में:** पार्वतीपुरम मान्यम और आस-पास के क्षेत्रों में यह कदम नागरिक सद्भाव और परस्पर विश्वास का एक बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है। इससे स्थानीय युवाओं को असफलताओं से निराश हुए बिना अपने लक्ष्यों के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा मिलती है।
- **सेना भर्ती उम्मीदवारों के लिए:** लगातार चार असफलताओं के बाद मिली यह सफलता तैयारी कर रहे युवाओं के लिए धैर्य का प्रमाण है। यह दिखाती है कि निरंतर अभ्यास और सही मार्गदर्शन से अंतिम मेरिट में स्थान बनाया जा सकता है।
- **सामुदायिक जीवन में:** स्थानीय त्योहारों में विभिन्न पृष्ठभूमियों के परिवारों का जुड़ाव सामाजिक दूरियों को मिटाने में मदद करता है। यह पड़ोसियों और मित्रों के बीच आपसी भावनात्मक सहयोग की अहमियत को रेखांकित करता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह विशेष पूजा एक युवा उम्मीदवार की सेना में चयन की मन्नत पूरी होने और परिवार द्वारा उसके संकल्प को सम्मान देने के कारण आयोजित की गई।

- **लगातार चार प्रयासों में असफलता:** युवक लंबे समय से भारतीय सेना में जाने का प्रयास कर रहा था, लेकिन चार बार लिखित और शारीरिक परीक्षा देने के बाद भी अंतिम मेरिट सूची में स्थान नहीं पा सका था। इस लगातार नाकामी से वह काफी निराश हो गया था।
- **दोस्तों की सलाह और मन्नत:** पांचवें प्रयास से पहले मोहल्ले के साथियों ने उसका ढांढस बंधाया और उसने सफल होने पर गणपति पूजा कराने का संकल्प लिया।
- **पांचवें प्रयास में चयन और प्रशिक्षण:** पांचवीं बार में सफलता मिलने के बाद जब युवक को तुरंत प्रशिक्षण पर जाना पड़ा, तो उसने अपने माता-पिता से अपनी मन्नत पूरी करने का आग्रह किया, जिसे उन्होंने सहर्ष पूरा किया।

## सवाल-जवाब

### 1. यह मामला किस स्थान से सामने आया है?
यह आंध्र प्रदेश के पार्वतीपुरम मान्यम जिले के सालूर शहर स्थित वड्डी स्ट्रीट इलाके का है।

### 2. मुस्लिम परिवार ने विशेष गणेश पूजा क्यों आयोजित कराई?
उनके बेटे ने चार बार असफल होने के बाद पांचवीं बार सेना में चुने जाने पर गणपति पूजा कराने की मन्नत मांगी थी, जिसे पूरा करने के लिए यह आयोजन किया गया।

### 3. युवक को सेना में चयन के लिए कितने प्रयास करने पड़े?
युवक चार बार मेरिट सूची में आने से चूक गया था और उसे पांचवें प्रयास में सफलता मिली।

### 4. पूजा की रस्में किसने संपन्न कराईं?
युवक के प्रशिक्षण पर जाने के कारण उसके पिता मोहम्मद अब्दुल हक और माता मोहम्मद सलमा ने स्वयं बैठकर पूजा की रस्में पूरी कीं।

### 5. क्या परिवार पहले भी ऐसे आयोजनों से जुड़ा रहा है?
हां, मोहम्मद अब्दुल हक पहले भी स्थानीय कनक महालक्ष्मी मंदिर के आयोजनों और कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग ले चुके हैं।

## प्रेरणा और सबक
यह कहानी विपरीत परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने और साझा मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पण की उत्कृष्ट सीख देती है।

- **असफलताओं से न हारें:** चार बार चयन न होने के बावजूद पांचवीं बार प्रयास करना सिखाता है कि निरंतर प्रयास से अंततः लक्ष्य प्राप्त होता है।
- **सकारात्मक मित्रों का महत्व:** निराशा के समय सही साथियों और शुभचिंतकों का संबल व्यक्ति को फिर से खड़ा होने की ऊर्जा देता है।
- **वचनों और संकल्पों का सम्मान:** माता-पिता द्वारा बेटे के संकल्प को अपना मानकर पूरा करना पारिवारिक सहयोग और विश्वास की मिसाल है।
- **सौहार्द और खुलापन:** सामाजिक सीमाओं से परे जाकर आस्था का आदर करना समाज में एकता और प्रेम की भावना को दृढ़ करता है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._