एआई एजेंट्स को पासवर्ड बताए बिना लॉगिन कराएगा वनपासवर्ड का नया सुरक्षा फीचर वनपासवर्ड ने वनपासवर्ड फॉर एजेंट्स पेश किया है, जिसकी मदद से कृत्रिम बुद्धिमत्ता वाले डिजिटल सहायक उपयोगकर्ताओं के गोपनीय क्रेडेंशियल्स जाने बिना सीधे खातों में लॉगिन कर सकेंगे। डिजिटल दुनिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई एजेंट्स पर लोगों की निर्भरता तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसके साथ ही व्यक्तिगत खातों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं भी पैदा हो रही हैं। उपभोक्ता अपने रोजमर्रा के काम निपटाने के लिए स्वायत्त डिजिटल सहायकों को निजी खातों का अधिकार सौंप रहे हैं। इस जोखिम को कम करने के लिए पासवर्ड प्रबंधन सेवा वनपासवर्ड ने गुरुवार को एक विशेष सुरक्षा टूल पेश किया है। इस नई व्यवस्था के तहत एआई एजेंट्स उपयोगकर्ता की ओर से विभिन्न खातों में प्रवेश कर सकेंगे, और खास बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में एजेंट को व्यक्ति का मुख्य पासवर्ड कभी दिखाई नहीं देगा। गोपनीयता बनाए रखने के लिए कैसे काम करेगा नया सुरक्षा तंत्र इस नई प्रणाली को वनपासवर्ड फॉर एजेंट्स नाम दिया गया है। यह व्यवस्था कृत्रिम बुद्धिमत्ता एजेंट, उपयोगकर्ता और पासवर्ड मैनेजर के बीच एक मजबूत संचार सेतु तैयार करती है। जब भी कोई डिजिटल सहायक किसी सेवा में लॉगिन करने की कोशिश करता है, तो वह सबसे पहले वनपासवर्ड को एक विशेष डिजिटल कुंजी भेजता है ताकि उसकी पहचान की पुष्टि हो सके। इसके तुरंत बाद सिस्टम संबंधित उपयोगकर्ता के पास लॉगिन प्रयास से जुड़ा एक सुरक्षा अलर्ट भेजता है। जब उपभोक्ता अपने स्तर से उस अनुरोध को मंजूरी दे देता है, तब वनपासवर्ड सीधे उस डिजिटल सहायक की तरफ से लॉगिन क्रेडेंशियल्स दर्ज कर देता है। इस तरह बॉट को पासवर्ड की वास्तविक जानकारी मिले बिना ही उसका काम पूरा हो जाता है। कई लोकप्रिय डिजिटल सहायकों के साथ काम करने की क्षमता उपयोगकर्ता अपनी पसंद के किसी भी प्रमुख एआई मॉडल के साथ इस नई सुविधा का उपयोग कर सकते हैं। इनमें एंथ्रोपिक का क्लॉड डुएट, ओपनएआई का डॉट्स और चैटजीपीटी वर्क, ग्रॉक बॉट, मेटा का म्यूज़ और टाउन नामक स्टार्टअप के सहायक शामिल हैं। सेवा प्रदाता ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में इस दायरे को और बड़ा करने के लिए अन्य तकनीकी कंपनियों के साथ बातचीत चल रही है। कंपनी ने आधिकारिक तौर पर रेखांकित किया कि किसी एजेंट को सीधे पासवर्ड थमा देना एक आसान शॉर्टकट लगता है, मगर इससे संवेदनशील डेटा ऐसी जगहों पर छूट जाता है जिस पर व्यक्ति का कोई नियंत्रण नहीं रहता। वनपासवर्ड ने बताया कि उनकी यह नई पहल लोगों को अपनी संवेदनशील सुरक्षा चाबियों पर पूर्ण नियंत्रण बनाए रखते हुए व्यक्तिगत एआई सहायकों को जिम्मेदारियां सौंपने का भरोसेमंद विकल्प देती है। वित्तीय संस्थानों की चिंता और बैंक खातों पर मंडराता खतरा इंटरनेट पर स्वायत्त बॉट्स की बढ़ती सक्रियता से बड़े वित्तीय संस्थान और बैंक लगातार असहज हो रहे हैं। अमेरिकी बैंकिंग क्षेत्र में यह देखा गया है कि स्वचालित बॉट्स ग्राहकों के खातों में सीधे प्रवेश कर रहे हैं। हालांकि यह कोई साइबर हमला या धोखे से धन चुराने की साजिश नहीं है, बल्कि कई उपभोक्ता वित्तीय फैसले लेने और लेन-देन प्रबंधन के लिए खुद अपने बॉट्स को खातों तक पहुंच दे रहे हैं। इसके बावजूद बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति जोखिम से भरी है, क्योंकि मौजूदा सुरक्षा प्रणालियां यह पहचानने में पूरी तरह सक्षम नहीं हैं कि किसी खाते में चल रही गतिविधि वास्तविक उपभोक्ता की सहमति से हो रही है या अनधिकृत रूप से। चेस के एक प्रवक्ता ने इस पूरे घटनाक्रम पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा कि ग्राहकों को अपने यूजरनेम और पासवर्ड किसी के साथ साझा नहीं करने चाहिए। इसका आप पर असर यह नया टूल इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को अपने पासवर्ड खतरे में डाले बिना आधुनिक एआई सहायकों से काम कराने की सीधी सुरक्षा प्रदान करता है। • पासवर्ड लीक से बचाव: उपभोक्ताओं को अब बॉट्स या एआई सेवाओं को अपने मुख्य पासवर्ड देने की मजबूरी नहीं रहेगी। इससे डेटाबेस लीक होने पर भी निजी क्रेडेंशियल्स पूरी तरह सुरक्षित बचे रहेंगे। • सीधा मानवीय नियंत्रण: हर बार जब भी कोई एजेंट किसी खाते में जाने का प्रयास करेगा, आपके पास एक सुरक्षा नोटिफिकेशन आएगा। आप अपने फोन से पुष्टि करके ही उसे अनुमति दे सकेंगे, जिससे अनधिकृत एक्सेस तुरंत रुक जाएगा। • बैंकिंग खातों की सुरक्षा: वित्तीय सेवाओं में सीधे पासवर्ड साझा करने से होने वाले जोखिम खत्म होंगे। बैंक खातों में लॉग इन करते समय यूजरनेम गोपनीय रहने से फ्रॉड की गुंजाइश घटेगी। • विभिन्न एआई टूल्स का सुरक्षित इस्तेमाल: अगर आप चैटजीपीटी या क्लॉड जैसे कई टूल्स का उपयोग करते हैं, तो अब एक ही सुरक्षित लेयर से सभी को संभालना संभव होगा। उपयोगकर्ताओं को अलग-अलग बॉट्स में पासवर्ड बदलने की झंझट नहीं झेलनी पड़ेगी। ऐसा क्यों हुआ उपभोक्ताओं द्वारा स्वायत्त एआई सहायकों को पासवर्ड सौंपने के बढ़ते चलन ने बड़े सुरक्षा जोखिम खड़े कर दिए थे, जिसके समाधान के लिए यह नया सुरक्षा ढांचा पेश किया गया है। • पासवर्ड साझा करने की मजबूरी: अब तक एआई एजेंट से कोई काम कराने के लिए उपयोगकर्ताओं को अपना यूजरनेम और पासवर्ड सीधे चैटबॉट में डालना पड़ता था। इस शॉर्टकट की वजह से पासवर्ड अनियंत्रित सर्वरों पर सहेज लिए जाते थे। • बैंकों की बढ़ती चिंताएं: अमेरिकी वित्तीय संस्थानों ने ग्राहकों के खातों में बॉट्स की अज्ञात गतिविधियां पकड़ना शुरू किया। बैंक यह तय नहीं कर पा रहे थे कि लेन-देन असली ग्राहक कर रहा है या कोई अनधिकृत सॉफ्टवेयर। • सुरक्षित मिडिलवेयर की अनुपस्थिति: इंटरनेट पर ऐसा कोई मानक सुरक्षा सेतु नहीं था जो बॉट को प्रमाणित भी करे और पासवर्ड को गोपनीय भी रखे। वनपासवर्ड ने इस शून्य को भरने के लिए डिजिटल टोकन और उपयोगकर्ता पुष्टि पर आधारित सिस्टम तैयार किया। सवाल-जवाब 1. वनपासवर्ड फॉर एजेंट्स क्या है? यह एक नया सुरक्षा टूल है जो एआई एजेंट्स को उपयोगकर्ता के पासवर्ड जाने बिना उनके खातों में लॉगिन करने की सुविधा देता है। 2. यह सिस्टम कैसे काम करता है? एआई एजेंट एक डिजिटल कुंजी भेजता है, फिर उपयोगकर्ता के फोन पर पुष्टि का अलर्ट आता है और मंजूरी मिलने पर वनपासवर्ड खुद लॉगिन विवरण भर देता है। 3. किन प्रमुख एआई मॉडल्स को इसका समर्थन प्राप्त है? यह क्लॉड डुएट, ओपनएआई डॉट्स, चैटजीपीटी वर्क, ग्रॉक बॉट, मेटा म्यूज़ और टाउन स्टार्टअप के सहायकों का समर्थन करता है। 4. बैंक इस एजेंटिक गतिविधि को लेकर क्यों चिंतित हैं? बैंकों के लिए यह पहचानना मुश्किल हो रहा है कि खाते में हो रही गतिविधि वास्तविक ग्राहक की अनुमति से हो रही है या अनधिकृत रूप से। https://trendkia.com/apps/1password-ka-naya-suraksha-phichara-ai-agents-bina-pasavarda-jane-karenge-logina-51132 TrendKia — Har trend, sabse pehle.