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  "type": "article",
  "title": "यूरोपीय संघ में एप्पल बदलेगा ऐप ट्रैकिंग कंसेंट स्क्रीन, जर्मनी की जांच के बाद नियमों में ढील",
  "summary": "जर्मनी के प्रतिस्पर्धा नियामक की बहुवर्षीय जांच के बाद एप्पल यूरोपीय संघ के पांच देशों में ऐप ट्रैकिंग कंसेंट प्रॉम्प्ट के नियमों में बदलाव करने पर सहमत हो गया है। नए प्रारूप में 'ट्रैक' शब्द हटेगा और डेवलपर्स को एक साल बाद दोबारा अनुमति मांगने की छूट मिलेगी।",
  "content": "जर्मनी के संघीय प्रतिस्पर्धा नियामक और अन्य यूरोपीय प्राधिकरणों की लंबी एंटीट्रस्ट जांच के दबाव में एप्पल ने अपने ऐप ट्रैकिंग नियमों में बड़ा बदलाव स्वीकार कर लिया है। आईफोन निर्माता कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद डेवलपर्स के लिए उस कंसेंट स्क्रीन की शर्तों को बदलने पर सहमति जताई है, जिसके जरिए ऐप्स उपयोगकर्ताओं से दूसरी वेबसाइटों और ऐप्स पर उनकी ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने की अनुमति मांगते हैं। नियामकों का स्पष्ट मानना था कि ऐप ट्रैकिंग ट्रांसपेरेंसी (ATT) नाम की यह व्यवस्था थर्ड पार्टी डेवलपर्स के मुकाबले एप्पल को अनुचित लाभ पहुंचाती है, क्योंकि एप्पल अपने स्वयं के ऐप्स को बिना किसी कंसेंट स्क्रीन के यूजर डेटा का इस्तेमाल करने की छूट देता है।\n\nकंसेंट स्क्रीन के डिजाइन और भाषा में बड़े बदलाव\nयूरोपीय संघ के प्रतिस्पर्धा प्राधिकरणों के साथ हुए इस नए समझौते के तहत यूजर से अनुमति मांगने की जरूरत को पूरी तरह समाप्त नहीं किया गया है, और न ही प्रॉम्प्ट दिखाने के समय में कोई बदलाव हुआ है। इसके बजाय, यूरोपीय संघ में ऐप वितरित करने वाले डेवलपर्स को अब एक वैकल्पिक कंसेंट स्क्रीन प्रदर्शित करने की अनुमति दी जाएगी। इस नई व्यवस्था में स्क्रीन के फॉर्मेट, भाषा और डिजाइन में आधा दर्जन से अधिक बदलाव शामिल हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य कंसेंट स्क्रीन को उपयोगकर्ताओं के लिए कम डरावना और अधिक संतुलित बनाना है।\n\nइन नए संशोधनों के तहत कंसेंट प्रॉम्प्ट अब एक छोटे पॉप-अप के रूप में दिखने के बजाय फुल-पेज स्क्रीन के रूप में सामने आएगा। इस स्क्रीन से 'ट्रैक' शब्द को पूरी तरह हटा दिया जाएगा। इसके अलावा, चयन बटनों के शब्दों को भी बदला गया है, जहां पहले 'अलाउ' और 'आस्क ऐप नॉट टू ट्रैक' लिखा होता था, वहां अब सीधे 'अलाउ' और 'रिजेक्ट' के विकल्प दिए जाएंगे। स्क्रीन के रंगों और समग्र फॉर्मेटिंग को भी बदला जा रहा है। इसके साथ ही, ऐप डेवलपर्स को एक क्लिक करने योग्य लिंक जोड़ने की सुविधा मिलेगी, जिसके माध्यम से वे अतिरिक्त जानकारी देकर उपयोगकर्ताओं को समझा सकेंगे कि यह अनुमति क्यों मांगी जा रही है और उनके डेटा का उपयोग किस तरह किया जाएगा।\n\nपांच यूरोपीय देशों तक सीमित रहेगी नई व्यवस्था\nविधिक आवश्यकताओं के चलते यह वैकल्पिक सिस्टम प्रॉम्प्ट केवल जर्मनी, फ्रांस, इटली, पोलैंड और रोमानिया में वितरित होने वाले ऐप्स के लिए ही उपलब्ध कराया जाएगा। आमतौर पर जब उपयोगकर्ताओं के सामने पारंपरिक ट्रैकिंग कंसेंट स्क्रीन आती है, तो वे ऐप्स को ट्रैक न करने का विकल्प चुनते हैं। इस व्यवहार से मेटा जैसी विज्ञापन आधारित कंपनियों और स्वतंत्र डेवलपर्स के राजस्व को भारी नुकसान पहुंचता है, जबकि एप्पल के अपने विज्ञापन कारोबार को फायदा होता है। ऐप्स यह अनुमति इसलिए मांगते हैं ताकि वे पर्सनलाइज्ड विज्ञापन दिखा सकें, जिससे अधिक आय अर्जित होती है और डेवलपर्स का कारोबार चलता है।\n\nएप्पल का यह तर्क रहा है कि ये कंसेंट स्क्रीन उपभोक्ता की प्राइवेसी की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं, भले ही कंपनी अपने स्वयं के इकोसिस्टम से एकत्र डेटा के आधार पर अपने ऐप्स में पर्सनलाइज्ड विज्ञापन दिखाने की छूट रखती हो। कंपनी ने यह भी घोषणा की है कि वह यूरोपीय संघ में ऐप वितरित करने वाले डेवलपर्स को एक महत्वपूर्ण राहत देगी। इसके तहत डेवलपर्स उपयोगकर्ता द्वारा दिए गए पिछले फैसले के एक साल बीत जाने के बाद उनसे ऐप ट्रैकिंग ट्रांसपेरेंसी कंसेंट स्क्रीन पर दोबारा अनुमति मांग सकेंगे।\n\nइसका आप पर असर\nयूरोपीय संघ के उपयोगकर्ताओं को अब आईफोन पर ऐप्स खोलते समय कम आक्रामक और अधिक स्पष्ट डेटा अनुमति स्क्रीन देखने को मिलेगी।\n\n• यूरोपीय संघ के आईफोन उपयोगकर्ताओं के लिए: जर्मनी, फ्रांस, इटली, पोलैंड और रोमानिया के यूजर्स को अब पॉप-अप के बजाय फुल-पेज कंसेंट स्क्रीन दिखेगी जिसमें 'ट्रैक' शब्द नहीं होगा। आपको अब 'अलाउ' और 'रिजेक्ट' के सीधे विकल्प मिलेंगे और डेवलपर्स एक साल बाद आपसे दोबारा अनुमति मांग सकेंगे।\n• ऐप डेवलपर्स और डिजिटल व्यवसायों के लिए: थर्ड पार्टी ऐप्स अब उपयोगकर्ताओं को सीधे लिंक देकर समझा सकेंगे कि विज्ञापन डेटा क्यों जरूरी है। इससे विज्ञापनों की ट्रैकिंग सहमति दर में सुधार हो सकता है, जिससे ऐप डेवलपर्स और विज्ञापन कंपनियों की कमाई को सहारा मिलेगा।\n• भारत और अन्य वैश्विक उपयोगकर्ताओं के लिए: यह बदलाव फिलहाल केवल यूरोपीय संघ के पांच चुनिंदा देशों के लिए ही लागू किया गया है। भारत समेत दुनिया के अन्य हिस्सों में उपयोगकर्ताओं को पहले की तरह पुराना पॉप-अप और 'आस्क ऐप नॉट टू ट्रैक' का विकल्प ही दिखता रहेगा।\n• उपभोक्ता डेटा नियंत्रण के लिए: उपयोगकर्ताओं के पास अब भी ऐप्स की ट्रैकिंग अनुमति को अस्वीकार करने का पूरा अधिकार सुरक्षित रहेगा। नई स्क्रीन पर डेवलपर्स की प्राइवेसी नीतियों को पढ़कर यूजर अधिक जागरूक फैसला ले सकेंगे।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह फैसला जर्मनी के प्रतिस्पर्धा नियामक द्वारा कई वर्षों से चलाई जा रही एंटीट्रस्ट जांच और यूरोपीय संघ के कड़े प्रतिस्पर्धा नियमों के बाद सामने आया है।\n\n• नियामकीय असमानता के आरोप: जर्मन और यूरोपीय प्रतिस्पर्धा अधिकारियों ने पाया कि एप्पल का मूल ऐप ट्रैकिंग ट्रांसपेरेंसी सिस्टम थर्ड पार्टी ऐप्स पर कड़ी पाबंदियां लगाता था, जबकि एप्पल की अपनी सेवाओं को बिना प्रॉम्प्ट यूजर डेटा इस्तेमाल करने की छूट थी। इसी असमानता को दूर करने के लिए नियामकों ने कड़े कदम उठाए।\n• विज्ञापन उद्योग का वित्तीय दबाव: 'आस्क ऐप नॉट टू ट्रैक' जैसे कड़े शब्दों वाले पुराने प्रॉम्प्ट के कारण अधिकांश उपयोगकर्ता ट्रैकिंग को अस्वीकार कर देते थे, जिससे मेटा जैसी विज्ञापन आधारित कंपनियों और छोटे डेवलपर्स के राजस्व को भारी नुकसान हुआ। उद्योग संघों ने निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा की मांग को लेकर नियामकों से शिकायत की थी।\n• कानूनी अनुपालन की बाध्यता: यूरोपीय संघ के कड़े डिजिटल बाजार नियमों और प्रतिस्पर्धा जांच से बचने के लिए एप्पल को अपने कंसेंट सिस्टम के डिजाइन और भाषा में नरमी बरतने पर सहमत होना पड़ा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. एप्पल ऐप ट्रैकिंग नियमों में बदलाव क्यों कर रहा है?\nजर्मनी के प्रतिस्पर्धा नियामक और अन्य यूरोपीय प्राधिकरणों की बहुवर्षीय एंटीट्रस्ट जांच के बाद एप्पल इन बदलावों पर सहमत हुआ है।\n\n2. नई कंसेंट स्क्रीन में क्या बदलाव देखने को मिलेंगे?\nयह स्क्रीन छोटे पॉप-अप की जगह फुल-पेज होगी, 'ट्रैक' शब्द हटाया जाएगा, और 'अलाउ' व 'रिजेक्ट' के स्पष्ट विकल्प मिलेंगे।\n\n3. यह नई व्यवस्था किन देशों में लागू की जा रही है?\nयह वैकल्पिक सिस्टम प्रॉम्प्ट केवल जर्मनी, फ्रांस, इटली, पोलैंड और रोमानिया में वितरित होने वाले ऐप्स में उपलब्ध होगा।\n\n4. क्या ऐप डेवलपर्स दोबारा ट्रैकिंग की अनुमति मांग सकते हैं?\nहां, यूरोपीय संघ के डेवलपर्स को उपयोगकर्ता के पिछले फैसले के एक साल बीत जाने के बाद दोबारा प्रॉम्प्ट दिखाने की छूट मिलेगी।",
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  "category": "ऐप्स",
  "publishedAt": "2026-09-20",
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    "एप्पल",
    "ऐप ट्रैकिंग",
    "यूरोपीय संघ",
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    "स्मार्टफोन",
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