# फिगमा ने भारत में पहले कॉन्फिग इवेंट के दौरान एआई एजेंट्स के लिए नए फीचर्स किए पेश

> डिजाइन प्लेटफॉर्म फिगमा ने भारत में आयोजित अपने पहले कॉन्फिग इवेंट में फिगमा स्पेक्स, कोड लेयर्स का ओपन बीटा और पेलोड सीएमएस इंटीग्रेशन समेत कई नए फीचर्स पेश किए हैं।

**Type:** article · **Category:** ऐप्स · **Published:** 2026-10-15 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/apps/figma-ne-india-men-pahale-config-iventa-ke-daurana-ai-ejentsa-ke-lie-nae-phicharsa-kie-pesha-47873 · **Language:** Hindi
**Tags:** फिगमा, फिगमा स्पेक्स, एआई एजेंट्स, कॉन्फिग इंडिया, कोड लेयर्स, पेलोड सीएमएस, सर्वम

लोकप्रिय डिजाइन प्लेटफॉर्म फिगमा ने सॉफ्टवेयर टीमों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई एजेंट्स के काम करने के तरीके को नया रूप देने के उद्देश्य से कई बड़े फीचर्स की घोषणा की है। भारत में आयोजित कंपनी के पहले कॉन्फिग कार्यक्रम के दौरान पेश किए गए इन नए टूल्स में मार्कडाउन आधारित नया एडिटर, कोड लेयर्स का व्यापक विस्तार और हेडलेस कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम पेलोड का इंटीग्रेशन शामिल है। इन सभी बदलावों का मुख्य मकसद यह तय करना है कि फिगमा के अपने एजेंट्स और थर्ड पार्टी एआई बॉट्स किसी भी ब्रांड के डिजाइन नियमों, कोड लाइब्रेरी और दिशा-निर्देशों का सटीक पालन करते हुए काम कर सकें।

## डिजाइन सिस्टम को अनुशासित करेगा फिगमा स्पेक्स
कंपनी ने 'फिगमा स्पेक्स' नाम से एक नया फीचर पेश किया है। यह एक मार्कडाउन एडिटर है जो डिजाइनरों और सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को अपनी डिजाइन भाषा को बेहद सरल तरीके से परिभाषित करने की सुविधा देता है। यह दस्तावेज पूरी टीम के साथ-साथ स्वचालित एजेंट्स के लिए एक केंद्रीय संदर्भ बिंदु के रूप में काम करता है। फिगमा स्पेक्स को कैनवस के भीतर एक अलग फाइल के रूप में रखा जा सकता है या फिर इसे मुख्य कैनवस पर ही साथ-साथ चलाया जा सकता है।

केवल एक सामान्य टेक्स्ट एडिटर बनने से इतर यह टूल कई तरह के डिजाइन तत्वों को सीधे जोड़ने की क्षमता देता है। उपयोगकर्ता कैनवस पर मौजूद किसी भी घटक का संदर्भ दे सकते हैं, साथ ही फिजजैम डायग्राम, कोड लेयर्स और पूरे डिजाइन को इस दस्तावेज में एम्बेड कर सकते हैं। इसके माध्यम से टीमें डिजाइन लाइब्रेरी, कोड लाइब्रेरी और ब्रांड गाइडलाइंस को एक ही सिस्टम में लाकर संदर्भ को नियंत्रित कर सकती हैं। एआई की अनिश्चित प्रकृति को देखते हुए यह ढांचा मॉडल को तय नियमों में बांधकर अधिक सटीक और अनुमानित परिणाम देने में मदद करता है।

## कोड लेयर्स अब सभी के लिए ओपन बीटा में उपलब्ध
फिगमा ने अपने 'कोड लेयर्स' फीचर को सार्वजनिक तौर पर ओपन बीटा में जारी कर दिया है। यह फीचर कैनवस पर सीधे डिजाइन के साथ कोडिंग जोड़ने की अनुमति देता है, जिससे टीमें बेहद इंटरैक्टिव और वास्तविक प्रोटोटाइप तैयार कर सकती हैं। कंपनी ने इस टूल को जून के महीने में प्राइवेट बीटा के तहत पेश किया था, जिसे अब भारत में आयोजित इस सम्मेलन के जरिए व्यापक यूजर बेस के लिए खोल दिया गया है।

इस सुविधा की मदद से उपयोगकर्ता अब एआई एजेंट से किसी डिजाइन को सीधे कोड में बदलने का अनुरोध कर सकते हैं। इसके अलावा प्रोटोटाइप पर तेजी से काम करने के लिए कोड के किसी खास हिस्से में बदलाव करने का निर्देश भी एजेंट को दिया जा सकता है। फिगमा के चीफ डिजाइन ऑफिसर लोरडाना क्रिज़न के अनुसार, सॉफ्टवेयर टीमें फिगमा का उपयोग यह तय करने के लिए करती हैं कि उन्हें क्या बनाना और जारी करना है। लोरडाना क्रिज़न ने कहा, "There are 17-times more lines of code being produced today than in the past. But when you’re looking at releases, only 1.3-times more releases." उन्होंने स्पष्ट किया कि इनमें से अधिकांश कोड तुरंत लॉन्च करने के लिए नहीं, बल्कि उत्पाद के डिजाइन और उसकी उपयोगिता को समझने के लिए लिखा जा रहा है।

## एमसीपी टूल्स का विस्तार और पेलोड इंटीग्रेशन
प्लेटफॉर्म ने अपने मॉडल कॉन्टेक्स्ट प्रोटोकॉल यानी एमसीपी के साथ 20 से अधिक नए टूल्स को जोड़ने की घोषणा की है। इनमें ओपन कोड, डिया, ग्रॉक बॉट और भारतीय एआई स्टार्टअप सर्वम शामिल हैं। इन टूल्स के जुड़ने से डेवलपर्स को अपने मौजूदा वर्कफ़्लो में विभिन्न एआई क्षमताओं को जोड़ने में काफी आसानी होगी।

इसके साथ ही पिछले वर्ष अधिग्रहित किए गए ओपन सोर्स हेडलेस सीएमएस पेलोड का इंटीग्रेशन अब 'फिगमा मेक' के साथ कर दिया गया है। इसकी मदद से टीमें सीधे प्लेटफॉर्म के अंदर से डायनामिक वेबसाइट बना सकती हैं और कंटेंट का लाइव प्रबंधन कर सकती हैं। कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 12 महीनों में पेलोड के डाउनलोड में छह गुना की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

## भारतीय बाजार में फिगमा का तेजी से बढ़ता नेटवर्क
फिगमा के लिए भारतीय बाजार रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण बन चुका है। कंपनी ने पिछले साल के अंत में भारत में अपना पहला कार्यालय खोला था, जहां से सेल्स, पार्टनरशिप, गो-टू-मार्केट और प्रोडक्ट सपोर्ट से जुड़े काम संचालित किए जाते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद भारत यूजर्स की संख्या के मामले में फिगमा का सबसे बड़ा बाजार बन चुका है। इसके अलावा बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध भारत की शीर्ष 100 कंपनियों में से 40 प्रतिशत कंपनियां वर्तमान में फिगमा प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल अपने उत्पादों को तैयार करने के लिए कर रही हैं।

## इसका आप पर असर
फिगमा के इन नए टूल्स से उत्पाद डिजाइनरों और सॉफ्टवेयर इंजीनियरों के लिए वास्तविक कोडिंग और प्रोटोटाइपिंग का काम काफी तेज और सुगम हो जाएगा।

- **भारत में:** देश में तेजी से बढ़ रहे यूआई/यूएक्स डिजाइनर्स और टेक स्टार्टअप्स अब सीधे कैनवस पर कोड आधारित प्रोटोटाइप तैयार कर सकेंगे। इससे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की शीर्ष 40 प्रतिशत कंपनियों में काम करने वाले डेवलपर्स और डिजाइन टीमों के बीच आपसी निर्भरता घटेगी और काम तेज होगा।
- **वैश्विक स्तर पर:** सॉफ्टवेयर कंपनियों में काम करने वाले प्रोफेशनल्स अब एआई एजेंट्स को अपनी कंपनी की डिजाइन गाइडलाइंस के अनुसार नियंत्रित कर सकेंगे। इससे एआई द्वारा गलत या बेसिरपैर के डिजाइन बनाने की समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
- **वेबसाइट निर्माताओं के लिए:** पेलोड सीएमएस के फिगमा मेक के साथ जुड़ने से डायनामिक वेबसाइट्स बनाना और उनका कंटेंट मैनेज करना अब एक ही जगह संभव होगा। इसके लिए अलग से जटिल कंटेंट सिस्टम संभालने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- **एआई डेवलपर्स के लिए:** सर्वम और ग्रॉक बॉट जैसे 20 से अधिक एमसीपी टूल्स का समर्थन मिलने से इंजीनियर अपनी पसंद के एआई मॉडल से सीधे डिजाइन का कोड बनवा सकेंगे। इससे प्रोटोटाइप को लाइव उत्पाद में बदलने का समय काफी घट जाएगा।

## ऐसा क्यों हुआ
एआई टूल्स की बढ़ती लोकप्रियता के बीच डिजाइन टीमों को सबसे बड़ी चुनौती यह आ रही थी कि एआई बॉट्स अक्सर स्थापित डिजाइन नियमों और ब्रांड दिशा-निर्देशों से भटक जाते थे।

- **एआई की अनिश्चितता को नियंत्रित करना:** जनरेटिव एआई मॉडल कई बार अप्रत्याशित परिणाम देते हैं, जिन्हें ठीक करने के लिए एक सख्त संदर्भ प्रणाली की आवश्यकता थी। फिगमा स्पेक्स के जरिए कोड और डिजाइन लाइब्रेरी को एक जगह बांधकर एआई को सटीक दिशा दी जा सकेगी।
- **कोड और प्रोटोटाइप के बीच का अंतर पाटना:** उद्योग में कोड उत्पादन 17 गुना बढ़ चुका है लेकिन वास्तविक उत्पाद रिलीज केवल 1.3 गुना बढ़ी है। इसलिए डिजाइन के दौरान ही कोड लेयर्स जोड़कर यह समझने का प्रयास किया जा रहा है कि उत्पाद वास्तव में कैसा दिखेगा और काम करेगा।
- **भारतीय बाजार की मजबूत पकड़:** अमेरिका के बाहर भारत फिगमा का सबसे बड़ा यूजर बेस बन चुका है और बीएसई की 40% शीर्ष फर्में इसे इस्तेमाल कर रही हैं। इसी रणनीतिक महत्व को देखते हुए कंपनी ने अपने पहले भारतीय कॉन्फिग सम्मेलन में इन टूल्स को सार्वजनिक रूप से पेश किया।

## सवाल-जवाब

### 1. फिगमा स्पेक्स क्या है और यह कैसे काम करता है?
फिगमा स्पेक्स एक मार्कडाउन आधारित एडिटर है, जिसमें टीमें अपनी डिजाइन भाषा, कोड लाइब्रेरी और दिशा-निर्देश दर्ज करती हैं ताकि डिजाइनर और एआई एजेंट्स इनका सही संदर्भ ले सकें।

### 2. कोड लेयर्स फीचर से डिजाइनरों को क्या लाभ मिलेगा?
कोड लेयर्स की मदद से कैनवस पर सीधे कोडिंग की जा सकती है, जिससे अधिक इंटरैक्टिव प्रोटोटाइप बनते हैं और एआई एजेंट से डिजाइन को कोड में बदलवाया जा सकता है।

### 3. फिगमा ने किस हेडलेस सीएमएस का इंटीग्रेशन पेश किया है?
फिगमा ने पेलोड हेडलेस सीएमएस का इंटीग्रेशन फिगमा मेक के साथ किया है, जिससे सीधे डायनामिक वेबसाइट्स और उनके कंटेंट का प्रबंधन किया जा सकता है।

### 4. भारत में फिगमा की मौजूदगी कितनी मजबूत है?
अमेरिका के बाहर भारत फिगमा का सबसे बड़ा यूजर मार्केट है, और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड टॉप 100 कंपनियों में से 40% कंपनियां फिगमा का उपयोग करती हैं।

### 5. फिगमा के एमसीपी सपोर्ट में कौन से नए टूल्स शामिल किए गए हैं?
फिगमा ने 20 से अधिक टूल्स को जोड़ा है, जिनमें ओपन कोड, डिया, ग्रॉक बॉट और भारतीय एआई स्टार्टअप सर्वम शामिल हैं।

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