सरकारी आदेश पर पोस्ट की पहुंच घटी या नहीं, एक्स अब सीधे यूजर को देगा जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स ने अपने ट्रांसपेरेंसी फीचर का दायरा बढ़ाते हुए अब यूजर्स को यह बताने की व्यवस्था शुरू की है कि स्थानीय कानूनों के दबाव में उनकी पोस्ट की रीच घटाई गई है या नहीं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अब यह देखना संभव हो गया है कि किसी देश की सरकार या स्थानीय कानूनों के कारण किसी यूजर की पोस्ट की पहुंच सीमित की गई है या नहीं। कंपनी ने सोमवार को आधिकारिक तौर पर इस नए कदम की घोषणा की, जिसके तहत अगर किसी एकाउंट या विशिष्ट पोस्ट को कानूनी बाध्यताओं के चलते कम लोगों तक पहुंचाया जा रहा है, तो इसकी जानकारी पारदर्शी तरीके से सामने लाई जाएगी। डिजिटल दुनिया में इस तरह की पाबंदी को आम बोलचाल में शैडोबैन कहा जाता है, जहां यूजर को बिना सीधे सूचित किए उसकी ऑनलाइन दृश्यता घटा दी जाती है। यह नया बदलाव कंपनी के उस मौजूदा ट्रांसपेरेंसी टूल का ही विस्तार है जिसे 'अंडर द हुड' नाम दिया गया है। इस व्यवस्था के जरिए लोग पहले से यह देख सकते थे कि उनके एकाउंट या पोस्ट पर कोई ऐसा लेबल तो नहीं लगाया गया है जिससे उनकी पहुंच पर असर पड़ा हो। अब इसमें एक अहम पहलू यह जोड़ दिया गया है कि यदि सरकारी नियमों या कानूनी नोटिस के तहत किसी सामग्री को डाउनरैंक किया गया है, तो वह विवरण भी उपयोगकर्ताओं के सामने स्पष्ट तौर पर दर्ज रहेगा। डेटा डाउनलोड और जांचने की पूरी प्रक्रिया एक्स की इस प्रणाली का लाभ उठाने के लिए एक तय पैमाना रखा गया है। जिन यूजर्स ने महीने के दौरान कम से कम 10 बार पोस्ट किया है, वे ऐप की सेटिंग्स में जाकर 'अंडर द हुड' विकल्प का उपयोग कर सकते हैं। वहां से यूजर अपनी समग्र जानकारी एक JSON फाइल के रूप में डाउनलोड कर सकते हैं। जो लोग तकनीकी कोड या डेटा फॉर्मेट को सीधे नहीं समझ पाते, वे इस फाइल को किसी भी एआई चैटबॉट में अपलोड करके बेहद आसान भाषा में समझ सकते हैं कि उनके एकाउंट की स्थिति क्या है। इसी डाउनलोड की गई फाइल में अब यह साफ लिखा होगा कि किसी खास देश के कानूनी निर्देश का पालन करने के लिए क्या पोस्ट की विजिबिलिटी घटाई गई। सिर्फ इतना ही नहीं, फाइल में यह ब्योरा भी शामिल रहेगा कि किस विशिष्ट कानूनी मांग के चलते पोस्ट को किसी देश में रोका गया और वह मांग किस देश की तरफ से भेजी गई थी। पारंपरिक तौर-तरीकों से अलग कदम अतीत में एक्स पर यह पता लगाने का कोई सीधा साधन नहीं था कि किसी व्यक्ति के एकाउंट या पोस्ट को कब और किस आधार पर लेबल किया जा रहा था या उनकी रैंकिंग घटाई जा रही थी। पूर्व में ट्विटर के नाम से पहचानी जाने वाली इस कंपनी पर कई बार यूजर्स यह आरोप लगाते रहे हैं कि उनकी आवाज को चुपके से दबाया गया है। अमूमन ज्यादातर तकनीकी कंपनियां सरकारी अनुरोधों से जुड़े आंकड़े केवल एक संयुक्त रिपोर्ट के रूप में जारी करती हैं, जिससे आम यूजर को यह कभी पता नहीं चलता कि व्यक्तिगत स्तर पर उसके एकाउंट या पोस्ट पर क्या असर हुआ। अगस्त के महीने में इस दिशा में पहली बार बड़ा बदलाव देखा गया था जब कंपनी ने आंतरिक मॉडरेशन निर्णयों को स्पष्ट करने के लिए यह टूल पेश किया था। यह पहल उस सिलसिले का हिस्सा है जिसके तहत प्लेटफॉर्म ने अपने रिकमेंडेशन सिस्टम को सार्वजनिक करने की कोशिशें की हैं। कानूनी बंदिशों और कोड ओपन-सोर्सिंग की पृष्ठभूमि विभिन्न देशों की सरकारें सोशल मीडिया पोस्ट पर रोक लगाने के लिए कई तरह के कानूनी आधार बताती हैं। इनमें नफरत भरे भाषण पर रोक, आतंकवाद से जुड़ी सामग्री पर नियंत्रण और चुनावी नियमों के पालन जैसे तर्क शामिल होते हैं। दूसरी ओर, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पैरोकार और आलोचक यह चिंता जताते रहे हैं कि कई बार सत्ताधारी तंत्र राजनीतिक विरोधियों की आवाज दबाने के लिए भी इन कानूनों का सहारा लेता है। ऐसे में संबंधित देश और कानूनी मांग की सीधी जानकारी मिलने से स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। यह ताजा कदम एक्स की व्यापक तकनीकी पारदर्शिता योजनाओं से जुड़ा है। कंपनी ने मुख्य टाइमलाइन की सामग्री तय करने वाले 'फॉर यू' एल्गोरिदम और कोडबेस के अहम हिस्सों को पहले ही ओपन-सोर्स किया था। इसमें मॉडल कॉन्फ़िगरेशन, कंटेंट फिल्टरिंग और रैंकिंग सिस्टम से जुड़े बुनियादी मानकों को सार्वजनिक किया गया था ताकि लोग समझ सकें कि किन सिग्नल्स के आधार पर कौन सी पोस्ट स्क्रीन पर दिखाई जाती है। उस ओपन-सोर्सिंग के समय एक्स के वाइस प्रेसिडेंट ऑफ प्रोडक्ट, कीथ कोलमैन ने स्पष्ट किया था कि लोग इस बात से हैरान होंगे कि कंपनी किस स्तर का आंतरिक डेटा सार्वजनिक कर रही है। अब उसी कड़ी में सरकारी दबाव की जानकारी सीधे यूजर तक पहुंचाई जा रही है। इसका आप पर असर इस नए फीचर से एक्स यूजर्स को सीधे यह जानने का अधिकार मिलेगा कि उनकी आवाज पर किसी देश के कानून का असर पड़ा है या नहीं। • आम यूजर्स के लिए: अब यह साफ हो जाएगा कि किसी पोस्ट पर कम व्यूज स्वाभाविक थे या फिर सरकारी नियमों के चलते उसकी विजिबिलिटी घटाई गई थी। यूजर सेटिंग्स में जाकर JSON फाइल डाउनलोड कर किसी एआई टूल की मदद से इसे आसानी से पढ़ सकते हैं। • कंटेंट क्रिएटर्स और पत्रकारों के लिए: संवेदनशील मुद्दों पर लिखने वाले लोग तुरंत जान सकेंगे कि किस देश में उनकी पोस्ट रोकी गई है। इससे उन्हें यह समझने में मदद मिलेगी कि किन कानूनी वजहों से उनकी डिजिटल पहुंच प्रभावित हो रही है। • डेटा पारदर्शिता के स्तर पर: कंपनियों द्वारा जारी होने वाली अस्पष्ट वार्षिक रिपोर्टों के बजाय अब सीधे व्यक्तिगत एकाउंट के स्तर पर जानकारी मिलेगी। किसी भी यूजर को यह जांचने के लिए महीने में कम से कम 10 पोस्ट करने की जरूरत होगी। • गोपनीयता और जवाबदेही: किसी देश की सरकार द्वारा की गई शिकायत और उस पर हुई कार्रवाई का रिकॉर्ड सार्वजनिक होने से मनमानी सेंसरशिप पर सवाल उठाना संभव होगा। इससे यूजर अपने अधिकारों और पोस्ट की स्थिति को लेकर अधिक जागरूक रह सकेंगे। ऐसा क्यों हुआ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बिना बताए सामग्री की पहुंच सीमित करने के आरोपों और विभिन्न देशों के सख्त कानूनी दबाव के चलते एक्स ने यह कदम उठाया है। • गुप्त पाबंदियों के आरोप: लंबे समय से यूजर्स कंपनी पर बिना सूचना दिए शैडोबैन लगाने और राजनीतिक या वैचारिक कारणों से पहुंच घटाने का आरोप लगाते रहे हैं। व्यक्तिगत स्तर पर डेटा देकर कंपनी इन आरोपों का तकनीकी जवाब देना चाहती है। • सरकारी फिल्टरिंग के बढ़ते नियम: दुनिया भर में हेट स्पीच, आतंकवाद विरोधी कानूनों और चुनावी आचार संहिता के नाम पर सरकारों द्वारा सोशल मीडिया पोस्ट हटाने के आदेश बढ़ रहे हैं। एक्स इन कानूनी आदेशों की जिम्मेदारी सीधे सरकारों पर डालकर स्थिति साफ करना चाहता है। • एल्गोरिदम को खुला करने की मुहिम: कंपनी पहले से ही अपने 'फॉर यू' फीड के कोड और रैंकिंग सिग्नल्स को ओपन-सोर्स कर रही है। उसी तकनीकी पारदर्शिता अभियान के अगले चरण के तहत यह व्यक्तिगत डेटा टूल पेश किया गया है। सवाल-जवाब 1. एक्स पर यह नया फीचर क्या दिखाता है? यह फीचर दिखाता है कि स्थानीय सरकारी कानूनों के अनुपालन के चलते आपकी पोस्ट या एकाउंट की पहुंच घटाई गई है या नहीं, और किस देश ने ऐसा अनुरोध किया था। 2. इस सुविधा का इस्तेमाल कौन से यूजर्स कर सकते हैं? वे सभी यूजर्स जिन्होंने पिछले महीने के दौरान कम से कम 10 बार पोस्ट किया है, वे सेटिंग्स के 'अंडर द हुड' विकल्प में जाकर यह जानकारी देख सकते हैं। 3. यूजर को यह डेटा किस रूप में प्राप्त होगा? यूजर को उनकी जानकारी एक मानक JSON डेटा फाइल के रूप में मिलेगी, जिसे समझने के लिए किसी भी एआई चैटबॉट में डाला जा सकता है। 4. सरकारें सोशल मीडिया पोस्ट की पहुंच रोकने के लिए क्या कारण देती हैं? सरकारें आमतौर पर नफरत भरे भाषण, आतंकवाद से जुड़ी सामग्री और चुनाव आचार संहिता जैसे स्थानीय कानूनों का हवाला देकर ऐसी मांगें करती हैं। 5. क्या कंपनी ने अपने रैंकिंग सिस्टम से जुड़ा कोड भी साझा किया है? हां, कंपनी ने अपने मुख्य 'फॉर यू' फीड के एल्गोरिदम और कोडबेस के प्रमुख हिस्सों को पहले ही ओपन-सोर्स कर दिया है। https://trendkia.com/apps/sarakari-adesha-para-posta-ki-pahuncha-ghati-ya-nahin-x-aba-sidhe-yujara-ko-dega-janakari-36301 TrendKia — Har trend, sabse pehle.