# किशोरों में डिप्रेशन और ईटिंग डिसऑर्डर फैलाने के आरोप पर स्नैप ने किया कानूनी समझौता

> सोशल मीडिया की लत और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर दो किशोरों द्वारा दायर मुकदमे में स्नैप ने अदालत के बाहर समझौता कर लिया है।

**Type:** article · **Category:** ऐप्स · **Published:** 2026-11-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/apps/snap-settles-lawsuit-alleging-app-fueled-teen-depression-and-eating-disorders-55305 · **Language:** Hindi
**Tags:** स्नैप, स्नैपचैट, सोशल मीडिया, मेंटल हेल्थ, कानूनी समझौता, टेक कानून

स्नैपचैट की मूल कंपनी स्नैप ने दो किशोरों द्वारा दायर किए गए उस मुकदमे का अदालत के बाहर निपटारा कर लिया है, जिसमें प्लेटफॉर्म पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। दोनों वादियों का आरोप था कि कंपनी ने अपने ऐप को जानबूझकर लत लगाने वाले तरीके से डिजाइन किया, जिसके चलते वे डिप्रेशन, गंभीर घबराहट और ईटिंग डिसऑर्डर जैसी मानसिक समस्याओं के शिकार हुए। दोनों किशोर इससे पहले मेटा, टिकटॉक और यूट्यूब के साथ भी इसी प्रकार के विवादों में समझौते कर चुके थे।

## परीक्षण के दौरान टला अदालती टकराव
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के युवा उपयोगकर्ताओं पर पड़ने वाले बुरे असर को लेकर चल रही कानूनी मुकदमों की व्यापक लहर में यह स्नैप के लिए पहला अदालती परीक्षण बनने जा रहा था। कंपनी ने सुनवाई के लिए तय अपने अन्य मामलों को पहले ही सुलझा लिया था। इस मुकदमे में व्यक्तिगत रूप से स्नैप के सीईओ इवान स्पीगेल को भी गवाही के लिए कठघरे में बुलाया जाना तय था, लेकिन समझौते के बाद यह स्थिति टल गई।

## कम उम्र में स्क्रीन की आदत और लत लगाने वाले फीचर्स
मुकदमा दायर करने वाले किशोरों ने अपनी स्थिति साझा करते हुए बताया कि उन्होंने महज 3 साल की उम्र में यूट्यूब देखना शुरू कर दिया था, जबकि लगभग 9 साल की उम्र तक आते-आते वे अन्य सोशल मीडिया नेटवर्क्स का भी इस्तेमाल करने लगे थे। उनका कहना है कि वे अनिवार्य रूप से स्क्रीन देखने की लत में फंस गए, जिसके लिए उन्होंने प्लेटफॉर्म के ऑटोप्ले और इनफिनिट स्क्रॉलिंग जैसे खास फीचर्स को जिम्मेदार ठहराया।

## सुरक्षा उपायों पर कंपनी का रुख
मामले के समाधान के बाद स्नैप के प्रवक्ता ने आधिकारिक बयान देते हुए कहा कि दोनों पक्ष इस मामले को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने में सफल रहे हैं और वे इससे संतुष्ट हैं। कंपनी के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि उन्होंने सुरक्षा के कड़े उपाय किए हैं, सुरक्षा ट्यूटोरियल पेश किए हैं और विशेषज्ञों के साथ साझेदारी की है। प्रवक्ता के मुताबिक सुरक्षा की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती, इसलिए वे अपने समुदाय की सुरक्षा, प्राइवेसी और भलाई को लगातार मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

## हजारों मुकदमों का सामना कर रही हैं टेक कंपनियां
मौजूदा समय में सोशल मीडिया क्षेत्र की बड़ी कंपनियां अमेरिकी संघीय और राज्य अदालतों में हजारों मुकदमों का सामना कर रही हैं। इन सभी मुकदमों में मुख्य आरोप यही है कि टेक कंपनियों ने युवा उपयोगकर्ताओं को बांधकर रखने के लिए जानबूझकर प्लेटफॉर्म्स को ऐसा रूप दिया, जिससे किशोरों के बीच घबराहट, अवसाद और आत्महत्या जैसी गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का संकट पैदा हुआ।

## इसका आप पर असर
यह कानूनी फैसला सोशल मीडिया कंपनियों पर बच्चों और किशोरों की सुरक्षा को लेकर कड़े नियम लागू करने का दबाव बढ़ाएगा।

- **अभिभावकों के लिए:** टेक प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों की सुरक्षा और स्क्रीन समय सीमित करने वाले नए सुरक्षा फीचर्स तेजी से देखने को मिलेंगे। माता-पिता को अब इन ऐप्स पर ऑटोप्ले और स्क्रॉलिंग पर नियंत्रण के अधिक विकल्प मिल सकते हैं।
- **किशोरों और युवाओं पर:** सोशल नेटवर्क्स पर लत लगाने वाले एल्गोरिदम और लगातार चलने वाले वीडियो फीचर्स में बदलाव हो सकता है। इससे युवा उपयोगकर्ताओं के डिजिटल स्क्रीन समय और मानसिक तनाव में कमी आने की संभावना है।
- **टेक प्लेटफॉर्म्स के लिए:** टेक कंपनियों को किशोरों से जुड़े मुकदमों में अदालती जवाबदेही से बचने के लिए सुरक्षा ट्यूटोरियल और कड़े नियम बनाने पड़ेंगे। भविष्य में कंपनियों को कानूनी मुकदमों से बचने के लिए अरबों डॉलर के समझौते करने पड़ सकते हैं।
- **मानसिक स्वास्थ्य नीतियों पर:** सोशल मीडिया द्वारा डिप्रेशन और ईटिंग डिसऑर्डर पैदा करने के दावों को कानूनी पहचान मिलने से नीतिगत बदलाव होंगे। स्कूल और स्वास्थ्य संगठन अब डिजिटल लत को स्वास्थ्य संकट मानकर कड़े दिशा-निर्देश जारी कर सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
यह मुकदमा सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल से किशोरों में पनपी गंभीर मानसिक बीमारियों और कंपनियों की डिजाइन नीतियों के कारण शुरू हुआ था।

- **लत लगाने वाले फीचर्स की भूमिका:** वादियों के अनुसार ऑटोप्ले और इनफिनिट स्क्रॉलिंग जैसे फीचर्स ने उन्हें स्क्रीन से चिपके रहने पर मजबूर कर दिया। इस लगातार स्क्रीन समय ने उनके मानसिक संतुलन को बिगाड़कर अवसाद और ईटिंग डिसऑर्डर का रूप ले लिया।
- **अत्यधिक कम उम्र में शुरुआत:** दोनों बच्चों ने 3 वर्ष की उम्र से यूट्यूब और 9 वर्ष की उम्र से अन्य सोशल मीडिया ऐप्स का प्रयोग शुरू कर दिया था। इस अपरिपक्व उम्र में बिना किसी सुरक्षा घेरे के लंबे डिजिटल संपर्क ने उनकी लत को गहरा बना दिया।
- **अदालती सुनवाई से बचने का प्रयास:** स्नैप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी इवान स्पीगेल को अदालत में गवाही देनी थी, जिससे कंपनी की आंतरिक नीतियों की जांच सार्वजनिक हो सकती थी। सार्वजनिक बदनामी और जूरी ट्रायल के जोखिम से बचने के लिए स्नैप ने अदालत के बाहर समझौता करना बेहतर समझा।

## सवाल-जवाब

### 1. स्नैप के खिलाफ मुकदमा किसने दायर किया था?
यह मुकदमा दो किशोरों द्वारा दायर किया गया था, जिन्होंने प्लेटफॉर्म पर डिप्रेशन और ईटिंग डिसऑर्डर को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था।

### 2. किशोरों ने अपनी सोशल मीडिया की आदत के बारे में क्या बताया?
उन्होंने बताया कि उन्होंने 3 साल की उम्र से यूट्यूब और 9 साल की उम्र से अन्य सोशल मीडिया का इस्तेमाल शुरू कर दिया था।

### 3. वादी किशोरों ने किस बात को लत का कारण बताया?
उन्होंने प्लेटफॉर्म के ऑटोप्ले और इनफिनिट स्क्रॉलिंग जैसे फीचर्स को अपनी बाध्यकारी उपयोग की आदत के लिए जिम्मेदार ठहराया।

### 4. क्या अन्य सोशल मीडिया कंपनियों के साथ भी ऐसे समझौते हुए हैं?
हाँ, इन दो किशोरों ने स्नैप से पहले मेटा, टिकटॉक और यूट्यूब के साथ भी कानूनी समझौते किए थे।

### 5. इस मुकदमे की सुनवाई में किसे गवाही देनी थी?
मुकदमे के दौरान स्नैप के सीईओ इवान स्पीगेल को अदालत में गवाही के लिए उपस्थित होना था।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._