# टिकटॉक के कर्मचारियों ने उठाई थी बच्चों की सुरक्षा पर चिंता, शीर्ष अधिकारियों पर अनदेखी का आरोप

> अदालत के दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि टिकटॉक के कर्मचारियों ने बाल सुरक्षा और यौन शोषण जैसे गंभीर जोखिमों को लेकर अधिकारियों को बार-बार चेतावनी दी थी, लेकिन कंपनी की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

**Type:** article · **Category:** ऐप्स · **Published:** 2026-10-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/apps/tiktok-ke-karmachariyon-ne-utahi-thi-bachchon-ki-suraksha-par-chinta-50261 · **Language:** Hindi
**Tags:** टिकटॉक, बाल सुरक्षा, तकनीकी कंपनियां, फेडरल ट्रेड कमीशन, सोशल मीडिया, कानूनी कार्रवाई

लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टिकटॉक को अपने कर्मचारियों की ओर से बार-बारी चेतावनियां मिल रही थीं कि यह ऐप बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। अदालत के रिकॉर्ड से सामने आए दस्तावेजों से यह खुलासा हुआ है कि कर्मचारियों ने कंपनी के भीतर बच्चों की सुरक्षा से जुड़े खतरों को लेकर आवाज उठाई थी। इसमें बच्चों का यौन शोषण और आत्महत्या से जुड़ी सामग्री तक पहुंच जैसे गंभीर मुद्दे शामिल थे, लेकिन इसके बावजूद शीर्ष स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

मार्च 2026 में दायर किए गए कर्मचारियों के बयान इस सोशल मीडिया कंपनी की बाल सुरक्षा नीतियों पर एक नया प्रकाश डालते हैं। इन दस्तावेजों के अनुसार, कर्मचारियों ने आंतरिक स्तर पर चिंता जताई थी कि नाबालिग बच्चों के वीडियो और सामग्री को टिकटॉक पर पैसे देकर खरीदा जा सकता है। इससे यह आशंका जताई गई थी कि कंपनी इस संभावित अवैध गतिविधि से मुनाफा कमा रही है। इसके अलावा, यह भी सामने आया कि नाबालिग उपयोगकर्ता उम्र से जुड़ी पाबंदियों के नियमों को दरकिनार करने के लिए लूपहोल का इस्तेमाल कर रहे थे और अपनी ऑनलाइन गतिविधियों को अभिभावकों से छिपाने में सफल हो रहे थे।

عدालत के इन दस्तावेजों से एक और चौकाने वाला तथ्य यह भी सामने आया है कि कंपनी ने अपने उपयोगकर्ताओं की सही उम्र का पता लगाने के लिए कोई सर्वे नहीं कराया था। इसके पीछे मुख्य वजह यह थी कि यदि सर्वे किया जाता, तो उसके परिणाम फेडरल ट्रेड कमीशन के साथ साझा करने पड़ते, जिससे कंपनी बचना चाहती थी। कर्मचारियों की इन तमाम चिंताओं और आंतरिक चेतावनियों के बावजूद प्रबंधन का रवैया उदासीन बना रहा, जिससे अंदरूनी स्तर पर भारी नाराजगी देखने को मिली।

इन तमाम आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए एक टिकटॉक प्रवक्ता ने कहा कि ये दावे मुकदमे के वकीलों के इशारे पर चुने गए हैं और इनका इस्तेमाल हमारे इतिहास को गलत तरीके से पेश करने के लिए किया जा रहा है। प्रवक्ता ने आगे कहा कि हमने ट्रस्ट एंड सेफ्टी विभाग में अरबों डॉलर का निवेश किया है और किशोरों के लिए परिवार पेयरिंग सहित 50 से अधिक सुरक्षा, गोपनीयता और सुरक्षा सेटिंग्स शुरू की हैं। कंपनी का दावा है कि वह अपने उपयोगकर्ताओं की भलाई के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और उनके रिकॉर्ड को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है।

वर्तमान में टिकटॉक के साथ-साथ मेटा, गूगल और स्नैप जैसी बड़ी तकनीकी कंपनियां भी संघीय अदालत में सैकड़ों मुकदमों का सामना कर रही हैं। इन सभी मुकदमों में मुख्य आरोप यह लगाया गया है कि इन कंपनियों के प्लेटफॉर्म नाबालिगों को नुकसान पहुंचाते हैं और उन्होंने युवाओं के लिए मौजूद इन ज्ञात जोखिमों को जानबूझकर छिपाया है। इन विवादों के बीच टिकटॉक ने मुकदमे की नौबत आने से पहले ही कई मामलों में समझौते भी कर ली हैं, जबकि लॉस एंजिल्स में एक ज्यूरी ने फैसला सुनाया था कि मेटा और यूट्यूब ने अपने प्लेटफॉर्म्स को युवा उपयोगकर्ताओं के लिए जानबूझकर व्यसनकारी यानी एडिक्टिव बनाया है।

## इसका आप पर असर
टिकटॉक और अन्य सोशल मीडिया कंपनियों से जुड़े इस कानूनी घटनाक्रम का असर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और अभिभावकों के नियंत्रण से जुड़े नियमों पर पड़ सकता है।

- **अभिभावकों के लिए:** माता-पिता को बच्चों द्वारा उपयोग किए जाने वाले ऐप्स पर कड़ी नजर रखनी होगी क्योंकि उम्र की पाबंदी वाले फीचर्स में कमियां पाई गई हैं। आने वाले समय में सरकार इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए सख्त उम्र सत्यापन नियम लागू कर सकती है।
- **तकनीकी उद्योग पर:** इस मामले के बाद टिकटॉक और मेटा जैसी कंपनियों पर बच्चों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने का दबाव काफी बढ़ जाएगा। कंपनियों को अपनी सेफ्टी सेटिंग्स और पैरेंटल कंट्रोल फीचर्स को अधिक पारदर्शी बनाना होगा।

## ऐसा क्यों हुआ
अदालत के दस्तावेजों के सार्वजनिक होने के बाद यह मामला तूल पकड़ चुका है, जिसके पीछे कर्मचारियों की लंबे समय से अनसुनी की जा रही चिंताएं और नियामक दबाव मुख्य कारण हैं।

- **आंतरिक असंतोष:** कर्मचारियों ने बाल यौन शोषण और सुरक्षा खामियों को लेकर उच्च अधिकारियों को बार-बार आगाह किया था, लेकिन कंपनी ने व्यावसायिक हितों के चलते इन चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया।
- **नियामक जांच का डर:** कंपनी ने उपयोगकर्ताओं की उम्र का पता लगाने के लिए सर्वे कराने से परहेज किया ताकि डेटा फेडरल ट्रेड कमीशन को न सौंपना पड़े।
- **कानूनी शिकंजा:** नाबालिगों को नुकसान पहुंचाने और लत लगाने वाले डिजाइन के आरोपों को लेकर इन टेक दिग्गजों के खिलाफ संघीय अदालत में सैकड़ों मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. टिकटॉक के खिलाफ ये दस्तावेज किस अदालत या रिकॉर्ड से सामने आए हैं?
ये दस्तावेज अदालत में दायर किए गए कर्मचारियों के ब depositions से सामने आए हैं जिन्हें मार्च 2026 में फाइल किया गया था।

### 2. कर्मचारियों ने मुख्य रूप से किन खतरों की चेतावनी दी थी?
कर्मचारियों ने नाबालिगों के यौन शोषण, पैसे देकर खरीदी जाने वाली सामग्री और उम्र से जुड़ी पाबंदियों के लूपहोल का बच्चों द्वारा इस्तेमाल करने की चेतावनी दी थी।

### 3. कंपनी ने उपयोगकर्ताओं की उम्र का सर्वे क्यों नहीं करवाया था?
कंपनी को डर था कि सर्वे कराने पर उसके परिणाम फेडरल ट्रेड कमीशन के साथ साझा करने पड़ेंगे।

### 4. टिकटॉक के प्रवक्ता ने इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
प्रवक्ता ने कहा कि ये दावे वकीलों के इशारे पर चुने गए हैं और कंपनी ने ट्रस्ट एंड सेफ्टी में अरबों डॉलर का निवेश किया है।

### 5. टिकटॉक के अलावा और कौन सी कंपनियां इन मुकदमों का सामना कर रही हैं?
टिकटॉक के साथ-साथ मेटा, गूगल और स्नैप जैसी कंपनियां भी संघीय अदालत में इन मुकदमों का सामना कर रही हैं।

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