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  "title": "अरुणाचल में 11,000 मेगावाट की सियांग परियोजना पर मंत्री बोले, सीमा सुरक्षा और बाढ़ नियंत्रण से समझौता मुमकिन नहीं",
  "summary": "अरुणाचल प्रदेश के मंत्री ओजिंग तासिंग ने सियांग बहुउद्देशीय परियोजना का समर्थन करते हुए साफ किया कि सीमा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों पर कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। उन्होंने दावा किया कि संभावित प्रभावित इलाकों की बहुसंख्यक आबादी विकास कार्यों के पक्ष में है।",
  "content": "अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित 11,000 मेगावाट की विशाल सियांग अपर बहुउद्देशीय पनबिजली परियोजना को लेकर चल रहे गतिरोध के बीच राज्य सरकार ने रणनीतिक सुरक्षा को सर्वोपरि करार दिया है। पांगिन विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले अरुणाचल प्रदेश के मंत्री ओजिंग तासिंग ने स्पष्ट किया कि सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा और रणनीतिक आवश्यकताएं केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती हैं, जिन पर कोई भी राज्य समझौता नहीं कर सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि तिब्बत की ओर चीन द्वारा किए जा रहे बड़े पैमाने के बुनियादी ढांचे के निर्माण को देखते हुए इस परियोजना की भूमिका केवल बिजली पैदा करने तक सीमित नहीं रह जाती, बल्कि यह जल प्रबंधन और सीमाओं की निगरानी के लिए भी बेहद अहम साबित होगी।\n\nराष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता की अनिवार्यता\nमंत्री ओजिंग तासिंग ने वस्तुस्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, “राष्ट्रीय सुरक्षा एक केंद्रीय विषय है, और इस तरह के मामलों में राज्य सरकार का कोई दखल नहीं होता।” उन्होंने आगे रेखांकित किया कि शांति और सुदृढ़ कानून व्यवस्था ही किसी भी पर्वतीय अंचल में टिकाऊ प्रगति की पहली शर्त होती है। उनके अनुसार, बुनियादी ढांचे के सरकारी कार्यक्रमों में अड़चन डालने से संपूर्ण इलाके की आर्थिक गति मंद पड़ सकती है। तासिंग ने यह भी जोड़ा कि बांध से प्रभावित होने वाले गांवों के लगभग 80 प्रतिशत से अधिक नागरिक इस निर्माण कार्य के समर्थन में खड़े हैं, लिहाजा कुछ आपत्तियों के कारण पूरी प्रक्रिया को ठप नहीं किया जाना चाहिए।\n\nस्थानीय असंतोष और पर्यावरणीय चिंताएं\nविशाल जलविद्युत परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी एनएचपीसी लिमिटेड को सौंपी जानी प्रस्तावित है। हालांकि, मुख्य रूप से स्वदेशी आदि समुदाय के प्रभाव वाले सियांग इलाके में इसके खिलाफ लगातार विरोध के स्वर भी उठते रहे हैं। क्षेत्र के कई स्थानीय समूहों और जनजातीय संगठनों ने इस निर्माण से उत्पन्न होने वाले संभावित सामाजिक और पारिस्थितिक नुकसान पर सवाल खड़े किए हैं।\n\nविरोध का नेतृत्व कर रहे संगठनों, विशेष रूप से सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम ने आगाह किया है कि इस बड़े बांध के निर्माण से भूकंपीय संवेदनशीलता बढ़ेगी और नदी घाटी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ सकता है। मंच का तर्क है कि परियोजना की जद में आने से सियांग घाटी के 25 से अधिक ग्रामीण बस्तियां और उपजाऊ खेती योग्य जमीनें जलमग्न होने का जोखिम झेल रही हैं, जिससे सदियों पुरानी बस्तियों के अस्तित्व पर संकट मंडरा सकता है।\n\nप्रशासनिक स्थिति और जमीनी प्रभाव का आकलन\nजनता के बीच बढ़ती आशंकाओं को दूर करने के लिए सियांग के उपायुक्त ताई ताग्गू ने ग्रामीणों से सरकारी तंत्र के साथ सहयोग करने का अनुरोध किया। प्रशासनिक प्रमुख के अनुसार, जमीनी हकीकत का अध्ययन यह दर्शाता है कि सियांग जिले की रिहायशी बस्तियों पर इस योजना का सीधा भौतिक प्रभाव बहुत सीमित दायरे में रहेगा। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि ऊपरी सियांग जिले के गेकू और यिंगकियोंग जैसे कुछ चुनिंदा इलाकों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।\n\nउपायुक्त ताग्गू ने स्पष्ट किया कि पारोंग और सितांग जैसी जगहों पर जिन ढांचों के प्रभावित होने की संभावना है, उनकी संख्या महज 10 से 15 प्रतिशत के आसपास है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इनमें से अधिकांश इकाइयां व्यावसायिक दुकानें या अस्थायी कारोबारी प्रतिष्ठान हैं, न कि पुश्तैनी रिहायशी मकान। उन्होंने दावा किया कि पारोंग, रीगा, रियू, पांगकांग (कुमकू), जोरकोंग और सितांग जैसे महत्वपूर्ण गांवों में 90 प्रतिशत से ज्यादा बाशिंदे परियोजना के क्रियान्वयन के पक्ष में हैं। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक तकनीकी अध्ययनों के लिए सहमति ज्ञापनों पर पहले ही हस्ताक्षर किए जा चुके हैं, और व्यापक विरोध का दावा धरातल की सच्चाई से मेल नहीं खाता।\n\nतकनीकी व्यवहार्यता और मुख्यमंत्री का रुख\nपरियोजना के भविष्य को लेकर शीर्ष नेतृत्व का दृष्टिकोण भी काफी सतर्क रहा है। इससे पहले 29 सितंबर को सियांग जिले के बोलेंग में प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने आश्वासन दिया था कि प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट पूरी होने के बाद यदि तकनीकी विशेषज्ञ परियोजना को अव्यवहारिक पाते हैं, तो सरकार इसे जबरन आगे नहीं बढ़ाएगी। राज्य प्रशासन का जोर इस बात पर बना हुआ है कि तकनीकी सुरक्षा और स्थानीय हितों की पुष्टि के बाद ही अंतिम निर्माण कदम उठाए जाएं।\n\nइसका आप पर असर\nसियांग परियोजना से सीमावर्ती बुनियादी ढांचे, बिजली आपूर्ति और स्थानीय बस्तियों के पुनर्व्यवस्थापन पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।\n\n• राष्ट्रीय स्तर पर: इस परियोजना से 11,000 मेगावाट स्वच्छ ऊर्जा राष्ट्रीय ग्रिड में जुड़ेगी। इससे देश के पूर्वोत्तर हिस्से में बिजली की कमी दूर होगी और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा।\n• अरुणाचल प्रदेश में: स्थानीय नदियों के बहाव और बाढ़ के खतरों को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा। इससे सीमाई क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन की क्षमता मजबूत होगी और नए रोजगार पैदा होंगे।\n• सियांग घाटी के बाशिंदों के लिए: नदी किनारे बसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और खेती योग्य भूखंडों का सर्वे किया जा रहा है। प्रभावित दुकानदारों और किसानों के लिए उचित मुआवजे तथा पुनर्वास की व्यवस्था तय होगी।\n• सीमावर्ती सुरक्षा के लिए: ऊपरी धारा में चीन द्वारा बनाए जा रहे ढांचों की निगरानी और जल सुरक्षा सुनिश्चित होगी। इससे क्षेत्र में रणनीतिक सड़क नेटवर्क और संपर्क तंत्र मजबूत होगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nसियांग बहुउद्देशीय परियोजना को आगे बढ़ाने के पीछे ऊर्जा जरूरतें, बाढ़ नियंत्रण और सीमा पार के रणनीतिक निर्माण मुख्य वजहें हैं।\n\n• रणनीतिक दबाव: चीन द्वारा ऊपरी जलधारा पर बुनियादी ढांचे के विस्तार ने जल सुरक्षा की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस विशाल बांध के जरिए भारत नदी के बहाव का प्रभावी प्रबंधन और सीमा सुरक्षा सुदृढ़ करना चाहता है।\n• जल संरक्षण और बाढ़ नियंत्रण: मानसून के दौरान सियांग घाटी में आने वाले भयंकर सैलाब से बस्तियों को बचाना जरूरी हो गया है। एक बड़े जलाशय के निर्माण से अचानक आने वाले पानी को रोककर निचले इलाकों की सुरक्षा की जा सकेगी।\n• स्थानीय विरोध और विस्थापन की आशंका: आदि समुदाय और किसान संगठनों को अपनी 25 से अधिक बस्तियों और पुश्तैनी कृषि भूमि के डूबने का डर है। इसी अविश्वास को पाटने के लिए प्रशासनिक अधिकारी ग्राम स्तर पर संवाद कर रहे हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. प्रस्तावित सियांग परियोजना की कुल बिजली उत्पादन क्षमता कितनी है?\nयह एक विशाल जलविद्युत परियोजना है, जिसकी प्रस्तावित उत्पादन क्षमता 11,000 मेगावाट है।\n\n2. सियांग परियोजना के निर्माण की जिम्मेदारी किस एजेंसी को दी गई है?\nइस बहुउद्देशीय परियोजना के क्रियान्वयन की योजना एनएचपीसी लिमिटेड द्वारा बनाई गई है।\n\n3. स्थानीय किसान संगठन इस परियोजना का विरोध क्यों कर रहे हैं?\nसंगठनों को डर है कि बांध बनने से 25 से अधिक ग्रामीण बस्तियां और उपजाऊ खेती योग्य जमीनें डूब सकती हैं, साथ ही भूकंपीय जोखिम बढ़ सकता है।\n\n4. सियांग के उपायुक्त के अनुसार कितने ढांचे प्रभावित हो सकते हैं?\nउपायुक्त के अनुसार पारोंग और सितांग जैसे क्षेत्रों में केवल 10 से 15 प्रतिशत ढांचे प्रभावित होंगे, जिनमें ज्यादातर व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं।\n\n5. तकनीकी रिपोर्ट प्रतिकूल आने पर मुख्यमंत्री पेमा खांडू का क्या रुख रहेगा?\nमुख्यमंत्री पेमा खांडू ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट में परियोजना अव्यवहारिक पाई जाती है, तो इसे आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।",
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  "publishedAt": "2026-10-05",
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