अरुणाचल प्रदेश सरकार ने सियांग बांध विरोध प्रदर्शन के चार कार्यकर्ताओं को किया रिहा अरुणाचल प्रदेश सरकार ने सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट के खिलाफ आंदोलन कर रहे चार लोगों को सद्भावना कदम के तहत जेल से रिहा कर दिया है। सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट (SUMP) के विरोध में गिरफ्तार किए गए चार आंदोलनकारियों को शनिवार को ईटानगर के पास जुली सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया। इन चारों व्यक्तियों की पहचान अदुम तयोम, ओमक परोन, ओकुत पालोह और ओसन परोन के रूप में हुई है, जिन्हें सियांग घाटी में हुए प्रदर्शनों के दौरान अरुणाचल प्रदेश गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 2014 के तहत हिरासत में लिया गया था। सद्भावना कदम और बातचीत की पहल राज्य सरकार द्वारा इन चारों को रिहा करने का फैसला शांतिपूर्ण माहौल बनाने और प्रदर्शनकारी समूहों के साथ संवाद के रास्ते खोलने के उद्देश्य से एक सद्भावना कदम के रूप में लिया गया है। इसके साथ ही सरकार ने उन गांव बुरों और गांव बुरियों की बहाली को भी मंजूरी दे दी है जिन्हें पहले निलंबित कर दिया गया था। यह पूरा घटनाक्रम सरकार द्वारा सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम (SIFF) को फिर से बातचीत की मेज पर लाने और इस गतिरोध को खत्म करने के प्रयासों के बीच सामने आया है। मुख्यमंत्री कार्यालय का पत्र और मुख्य मांगें मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा 6 नवंबर को जारी एक पत्र के जरिए फोरम को इस रिहाई के फैसले की जानकारी दी गई थी ताकि मेल-मिलाप का माहौल तैयार किया जा सके। प्रदर्शनकारियों की यह रिहाई मूल रूप से फोरम की उन प्रमुख शर्तों में शामिल थी, जिन्हें पूरा किए बिना वे सरकार के साथ किसी भी प्रकार की चर्चा में शामिल होने से इनकार कर रहे थे। इससे पहले संगठन ने पेमा खांडू के निमंत्रण को ठुकराते हुए स्पष्ट कर दिया था कि जब तक सभी हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़ा नहीं जाता और सुरक्षा बलों को नहीं हटाया जाता, तब तक वे वार्ता में हिस्सा नहीं लेंगे। तनाव कम करने की दिशा में बड़ा कदम इस ताजा घटनाक्रम से सियांग घाटी में लंबे समय से चली आ रही अशांति और तनाव को कम करने की दिशा में एक अहम सफलता मिली है। प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की इस मेगा परियोजना का स्थानीय स्तर पर लगातार विरोध हो रहा था जिसके चलते बीते कुछ महीनों के दौरान कई बार टकराव और धरने-प्रदर्शन की स्थिति पैदा हुई थी। इसका आप पर असर यह निर्णय पूर्वोत्तर क्षेत्र में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के विरोध से जुड़े स्थानीय मुद्दों और प्रशासनिक वार्ताओं को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। • भारत में: देश भर में बड़े विकास प्रोजेक्ट्स के दौरान स्थानीय विरोध और सरकार के साथ संवाद के तरीकों पर इसका असर पड़ता है। • अरुणाचल प्रदेश में: सियांग घाटी के निवासियों और आंदोलनकारी समूहों के लिए यह गतिरोध खत्म करने और बातचीत की नई शुरुआत का मार्ग प्रशस्त करता है। ऐसा क्यों हुआ यह कदम सरकार और स्थानीय समूहों के बीच महीनों से चले आ रहे गतिरोध को समाप्त करने की रणनीति के तहत उठाया गया है। • प्रमुख शर्त: सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम ने बातचीत शुरू करने से पहले गिरफ्तार लोगों की रिहाई को अपनी सबसे बड़ी शर्त बनाया था। • सद्भावना प्रयास: सरकार ने बातचीत का अनुकूल माहौल तैयार करने के लिए यूएपीए के तहत बंद लोगों को छोड़ने का निर्णय लिया। • पूर्व की स्थिति: परियोजना के विरोध में लगातार हो रहे प्रदर्शनों के कारण क्षेत्र में लगातार तनाव बना हुआ था। सवाल-जवाब 1. किन चार लोगों को रिहा किया गया है? अदुम तयोम, ओमक परोन, ओकुत पालोह और ओसन परोन को जेल से रिहा किया गया है। 2. इनकी रिहाई कहाँ से हुई? इटानगर के पास स्थित जुली सेंट्रल जेल से इन्हें रिहा किया गया। 3. किस परियोजना के विरोध में ये गिरफ्तारियां हुई थीं? यह गिरफ्तारियां 11,200 मेगावाट की सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट के विरोध के दौरान हुईं। 4. किस संगठन ने सरकार के सामने यह मांग रखी थी? सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम ने रिहाई की मांग उठाई थी। https://trendkia.com/arunachal-pradesh/arunachal-pradesh-administration-frees-four-siang-dam-protesters-in-reconciliation-push-57622 TrendKia — Har trend, sabse pehle.