# अरुणाचल प्रदेश के अपर सियांग में प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना पर भड़की हिंसा, सीएपीएफ शिविर में लगाई गई आग

> अपर सियांग जिले में प्रस्तावित सियॉन्ग अपर बहुउद्देशीय परियोजना के सर्वेक्षण कार्य के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बल के शिविर और गाड़ियों को निशाना बनाया।

**Type:** article · **Category:** अरुणाचल प्रदेश · **Published:** 2026-10-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/arunachal-pradesh/arunachal-pradesh-ke-upper-siang-men-prastavita-jalavidyuta-pariyojana-para-bharaki-hinsa-capf-shivira-men-lagai-gai-aga-43091 · **Language:** Hindi
**Tags:** अरुणाचल प्रदेश, अपर सियांग, पेमा खांडू, जलविद्युत परियोजना, सीएपीएफ, एसयूएमपी

अरुणाचल प्रदेश के अपर सियांग जिले में प्रस्तावित सियॉन्ग अपर बहुउद्देशीय परियोजना (एसयूएमपी) को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन अचानक उग्र हो गया, जहाँ सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के एक कैंप में आग लगा दी और कई गाड़ियों में तोड़फोड़ की। इस प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना को लेकर पिछले कई दिनों से इलाके में भारी असंतोष देखा जा रहा था, जो प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट (पीएफआर) की गतिविधियों के चलते इस हिंसक टकराव में बदल गया।

## सर्वेक्षण रोकने और संवाद की मांग
स्थानीय स्तर पर आंदोलन कर रहे समूहों की मुख्य मांग है कि इलाके में चल रहे तकनीकी सर्वेक्षण कार्य को तत्काल प्रभाव से रोका जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि परियोजना से प्रभावित होने वाले समुदायों और ग्रामीणों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किए बिना प्रशासन को आगे नहीं बढ़ना चाहिए। इसी मुद्दे पर स्थानीय संगठनों और अधिकारियों के बीच गतिरोध लगातार गहराता जा रहा है, जिसके चलते सोमवार को शांतिपूर्ण विरोध ने हिंसक रूप ले लिया और सुरक्षा बलों के शिविर को निशाना बनाया गया।

## मुख्यमंत्री की बातचीत की पहल और संगठनों का रुख
यह अप्रिय घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने विरोध कर रहे संगठनों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया था। मुख्यमंत्री ने पीएफआर को लेकर उठ रही शंकाओं को दूर करने और सहमति बनाने के उद्देश्य से 5 अक्टूबर को चर्चा की पेशकश की थी। हालांकि, बांध विरोध की अगुवाई कर रहे स्थानीय समूह सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम (एसआईएफएफ) ने सोमवार की बैठक में शामिल न होने का फैसला किया। फोरम ने साझा रुख तय करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग करते हुए 11 अक्टूबर के बाद बातचीत आयोजित करने का प्रस्ताव रखा था।

## सरकार का स्पष्टीकरण: निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ
तनाव के बीच मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने बार-बार स्पष्ट किया है कि वर्तमान में चल रही पीएफआर प्रक्रिया का यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि बांध निर्माण शुरू हो गया है या परियोजना पर कोई अंतिम निर्णय ले लिया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, मौजूदा गतिविधियां केवल प्रारंभिक तकनीकी आकलनों तक सीमित हैं, जिनमें चट्टानों के नमूने एकत्र करना शामिल है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस चरण में न तो कोई भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है और न ही किसी कृषि अथवा वन भूमि का नुकसान हो रहा है।

## परियोजना निर्माण से पहले जरूरी होंगे कई चरण
मुख्यमंत्री ने आगे स्पष्ट किया कि यदि पीएफआर अध्ययन में यह परियोजना तकनीकी और आर्थिक रूप से व्यावहारिक पाई भी जाती है, तब भी वास्तविक निर्माण शुरू होने से पहले कई वैधानिक चरणों से गुजरना अनिवार्य होगा। इन चरणों में सामाजिक प्रभाव आकलन, पर्यावरण प्रभाव आकलन और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि किसी भी अंतिम फैसले से पहले जनता और स्थानीय समुदायों के साथ व्यापक सार्वजनिक परामर्श आयोजित किए जाएंगे। बहरहाल, सोमवार की हिंसा के बाद अपर सियांग में कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं।

## इसका आप पर असर
अपर सियांग में भड़की हिंसा से स्थानीय कानून-व्यवस्था और सरकारी ढांचागत परियोजनाओं की गति पर सीधा असर पड़ेगा।

- **भारत में:** देश की रणनीतिक सीमावर्ती ऊर्जा परियोजनाओं को लेकर स्थानीय सहमति बनाने की नीतियां और कड़ी हो सकती हैं। इससे केंद्र और राज्य स्तर पर बुनियादी ढांचा विकास की समीक्षा प्रक्रिया में अतिरिक्त सुरक्षा कदम जोड़े जा सकते हैं।
- **अरुणाचल प्रदेश में:** अपर सियांग और आसपास के क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से सुरक्षा जांच और गश्त बढ़ाई जाएगी। स्थानीय निवासियों के आवागमन और सार्वजनिक सभाओं पर प्रशासन कड़ी निगरानी रख सकता है।
- **परियोजना वार्ता पर:** सरकारी बातचीत की तारीख अब 11 अक्टूबर के बाद खिसकने की पूरी संभावना बन गई है। दोनों पक्षों के बीच संवाद बहाल होने तक सर्वेक्षण और प्रशासनिक कार्य रुके रह सकते हैं।
- **स्थानीय समुदायों के लिए:** किसान संगठनों और ग्राम स्तर पर एकजुटता की रणनीति तय करने के लिए अतिरिक्त बैठकें होंगी। ग्रामीणों को अपनी जमीन और वन संपदा संबंधी चिंताओं पर आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार रहेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह घटना प्रस्तावित सियॉन्ग अपर बहुउद्देशीय परियोजना के प्रारंभिक सर्वेक्षण कार्य और ग्रामीणों की सहमति के अभाव के बीच टकराव के कारण हुई।

- **सीधा कारण:** प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट (पीएफआर) के तहत पत्थरों के नमूने जुटाने और तकनीकी सर्वेक्षण करने की सरकारी कवायद का स्थानीय स्तर पर कड़ा विरोध हो रहा था, जिसने सोमवार को हिंसक रूप ले लिया।
- **वार्ता में गतिरोध:** मुख्यमंत्री द्वारा 5 अक्टूबर को बुलाई गई बैठक में प्रमुख आंदोलनकारी संगठन एसआईएफएफ शामिल नहीं हुआ और 11 अक्टूबर के बाद चर्चा का समय मांगा, जिससे जमीनी स्तर पर तनाव कम नहीं हो सका।
- **भूमि और आजीविका की चिंता:** स्थानीय समुदायों को आशंका है कि बांध बनने से उनकी कृषि भूमि और जंगलों पर असर पड़ेगा, हालांकि प्रशासन का कहना है कि वर्तमान सर्वेक्षण में कोई जमीन अधिग्रहित नहीं की जा रही है।
- **आगामी प्रक्रिया:** प्रशासन फिलहाल इलाके में कानून-व्यवस्था बहाल करने और 11 अक्टूबर के बाद स्थानीय निकायों के साथ नए सिरे से बातचीत की रूपरेखा तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।

## सवाल-जवाब

### 1. अपर सियांग में हिंसा की मुख्य वजह क्या है?
प्रस्तावित सियॉन्ग अपर बहुउद्देशीय परियोजना (एसयूएमपी) के प्रारंभिक व्यवहार्यता सर्वेक्षण को रोकने की मांग को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान यह हिंसा भड़की।

### 2. प्रदर्शनकारियों ने किन संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया?
प्रदर्शनकारियों ने एक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के शिविर में आग लगा दी और कई वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया।

### 3. विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कौन सा संगठन कर रहा है?
इस परियोजना के विरोध में सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम (एसआईएफएफ) प्रमुख रूप से आगे रहा है।

### 4. मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने बातचीत के लिए कौन सी तारीख तय की थी?
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने विरोधी संगठनों को 5 अक्टूबर को बातचीत के लिए आमंत्रित किया था, लेकिन एसआईएफएफ ने 11 अक्टूबर के बाद वार्ता की मांग की।

### 5. क्या मौजूदा सर्वेक्षण के तहत भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है?
मुख्यमंत्री के अनुसार, मौजूदा पीएफआर केवल चट्टानों के नमूने लेने तक सीमित है और इसमें कोई भूमि अधिग्रहण या कृषि-वन भूमि का नुकसान शामिल नहीं है।

### 6. बांध निर्माण से पहले किन अनुमतियों की आवश्यकता होगी?
निर्माण कार्य पर विचार करने से पहले सामाजिक प्रभाव आकलन, पर्यावरण प्रभाव आकलन, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और सार्वजनिक परामर्श अनिवार्य होंगे।

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