# अरुणाचल प्रदेश के वालोंग में तितलियों की 85 प्रजातियां दर्ज, जैव विविधता खोज अभियान में दुर्लभ जीव कैमरे में कैद

> अरुणाचल प्रदेश के अंजॉ जिले के वालोंग क्षेत्र में दो दिवसीय प्रकृति अन्वेषण के दौरान 85 तितली प्रजातियों की पहचान की गई, जिनमें एम्प्रेस जैसी दुर्लभ प्रजातियां शामिल हैं।

**Type:** article · **Category:** अरुणाचल प्रदेश · **Published:** 2026-08-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/arunachal-pradesh/arunachal-pradesh-ke-walong-men-titaliyon-ki-85-prajatiyan-darja-jaiva-vividhata-khoja-abhiyana-men-durlabha-jiva-kaimare-men-kaid-18317 · **Language:** Hindi
**Tags:** अरुणाचल प्रदेश, वालोंग, तितली सर्वेक्षण, अंजॉ जिला, पूर्वी हिमालय, जैव विविधता, दुर्लभ प्रजातियां

अरुणाचल प्रदेश के अंजॉ जिले में स्थित सुदूर वालोंग क्षेत्र में दो दिवसीय प्रकृति अन्वेषण के दौरान तितलियों की लगभग 85 प्रजातियां दर्ज की गई हैं। पूर्वी हिमालय के इस अनोखे क्षेत्र में किए गए सर्वेक्षण के दौरान तितलियों की कई ऐसी प्रजातियां देखी गईं जो बेहद दुर्लभ हैं और सामान्य अवलोकनों में कम ही नजर आती हैं। यह खोज इलाके की समृद्ध जैविक विविधता को समझने में बेहद मददगार साबित होगी।

## दुर्लभ तितलियों की तस्वीरें और मुख्य अवलोकन
मैदानी खोज के दौरान शोधकर्ताओं ने तितलियों की ऐसी कई दुर्लभ प्रजातियों को अपने कैमरों में कैद किया जिन्हें आम तौर पर देखना कठिन होता है। इन महत्वपूर्ण प्रजातियों में एम्प्रेस (सासाकिया फुनेब्रिस), चाइनीज येलो स्वैलोटेल (पैपिलियो जुथस) और फॉल्स तिब्बतन क्युपिड (तोंगिया सूडोजुथस) शामिल हैं। इन दुर्लभ तितलियों के स्पष्ट विजुअल रिकॉर्ड तैयार होने से पूर्वोत्तर भारत के कीट विज्ञान अध्ययन को एक नया आधार मिला है।

अभियान के अनुभवों को साझा करते हुए दल के सदस्य देबोजीत सोनोवाल ने इन निष्कर्षों के महत्व पर जोर दिया। देबोजीत सोनोवाल ने कहा, "एम्प्रेस, चाइनीज येलो स्वैलोटेल और अन्य कई प्रजातियों को देखना एक बेहतरीन अनुभव था।"

## सर्वेक्षण दल और स्थानीय सहयोग
इस प्रकृति सर्वेक्षण का संचालन असम के वन्यजीव प्रेमियों और शोधकर्ताओं की एक समर्पित टीम द्वारा किया गया था। विकी लव्स बटरफ्लाई पहल से जुड़े बोंगाईगांव के वन्यजीव फोटोग्राफर महेश बरुआ ने नाहरकटिया के प्रकृति प्रेमी व फोटोग्राफर देबोजीत सोनोवाल के साथ मिलकर इस दस्तावेज कार्य की अगुवाई की। इस दल में पक्षी निरीक्षक अनुपम नहारडेका, ज्योति कल्प फुकन और देबोजीत नहारडेका भी शामिल थे। मैदानी दौरों और अन्वेषण को सुगम बनाने के लिए अनुनिमाई गेस्ट हाउस के मालिक ने टीम को महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक सहायता प्रदान की।

## पारिस्थितिक महत्व और वालोंग का प्राकृतिक परिवेश
वालोंग का अनूठा प्राकृतिक परिवेश तितलियों की विविध आबादी को आश्रय देने में बड़ी भूमिका निभाता है। यह क्षेत्र पर्वतीय वनों, नदी घाटियों, बरसाती नालों और घनी वनस्पतियों से समृद्ध है, जो कीटों और तितलियों के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करते हैं। शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि तितलियां पर्यावरण की सेहत मापने के लिए मुख्य पारिस्थितिक संकेतक होती हैं। उनकी संख्या और प्रजातियों की विविधता में बदलाव से पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

## भविष्य के संरक्षण और शोध का मार्ग
दो दिनों के इस अन्वेषण से प्राप्त आंकड़े अंजॉ जिले में भविष्य के जैव विविधता अनुसंधान और संरक्षण कार्यों के लिए बेसलाइन डेटा का काम करेंगे। शोध दल ने वालोंग में नियमित और व्यवस्थित जैव विविधता सर्वेक्षण कराने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके साथ ही उन्होंने स्थानीय निवासियों और पर्यटकों के बीच वनों तथा तितलियों के प्राकृतिक आवासों के संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की अपील की है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** पूर्वी हिमालय के सुदूर क्षेत्रों में जैविक विविधता का यह दस्तावेजीकरण देश के वन्यजीव अनुसंधान और पर्यावरण संरक्षण प्रयासों को मजबूती देता है।

**अरुणाचल प्रदेश में:** अंजॉ जिले के वालोंग क्षेत्र में 85 तितली प्रजातियों की खोज से स्थानीय इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा और वनों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।

## सवाल-जवाब

### 1. वालोंग में तितली सर्वेक्षण का आयोजन कितने दिनों तक चला?
वालोंग क्षेत्र में तितली सर्वेक्षण और मैदानी अन्वेषण का आयोजन दो दिनों तक चला।

### 2. इस सर्वेक्षण के दौरान तितलियों की कुल कितनी प्रजातियां दर्ज की गईं?
शोधकर्ताओं ने दो दिवसीय अभियान के दौरान तितलियों की लगभग 85 प्रजातियों को दर्ज किया।

### 3. वालोंग में तितलियों की कौन सी दुर्लभ प्रजातियां देखी गईं?
सर्वेक्षण के दौरान एम्प्रेस, चाइनीज येलो स्वैलोटेल और फॉल्स तिब्बतन क्युपिड जैसी दुर्लभ प्रजातियों को देखा और कैमरे में कैद किया गया।

### 4. वालोंग किस जिले और राज्य में स्थित है?
वालोंग पूर्वोत्तर भारत के अरुणाचल प्रदेश राज्य के अंजॉ जिले में स्थित है।

### 5. सर्वेक्षण दल में कौन-कौन से सदस्य शामिल थे?
टीम में महेश बरुआ, देबोजीत सोनोवाल, अनुपम नहारडेका, ज्योति कल्प फुकन और देबोजीत नहारडेका शामिल थे।

### 6. पारिस्थितिकी तंत्र में तितलियों की क्या भूमिका होती है?
तितलियां महत्वपूर्ण पारिस्थितिक संकेतक होती हैं, जिनकी आबादी और विविधता पर्यावरण के स्वास्थ्य का संकेत देती है।

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