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  "type": "article",
  "title": "अरुणाचल प्रदेश की पर्यावरण एक्टिविस्ट भानु तातक पर एफसीआरए उल्लंघन के आरोप में सीबीआई ने दर्ज किया केस",
  "summary": "केंद्रीय जांच ब्यूरो ने अरुणाचल प्रदेश की वकील और एक्टिविस्ट भानु तातक के खिलाफ विदेशी योगदान नियमन अधिनियम के कथित उल्लंघन को लेकर मामला दर्ज किया है।",
  "content": "केंद्रीय जांच एजेंसी ने अरुणाचल प्रदेश की एक जानी-मानी वकील और पर्यावरण कार्यकर्ता भानु तातक के खिलाफ एफसीआरए नियमों के कथित उल्लंघन का मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसी के पास दर्ज एफआईआर में यह आरोप लगाया गया है कि उन्होंने विदेशी संस्थाओं और विदेशी नागरिकों से मिलने वाले पैसे सीधे अपने निजी बचत बैंक खाते में मंगवाए, जिसके लिए कानून के तहत जरूरी पंजीकरण या पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी।\n\nविदेशीFunding और मनी ट्रेल के आरोप\n\nजांच एजेंसी के दस्तावेजों के अनुसार, यह विदेशी राशि फिलीपींस स्थित एशिया इंडिजिनस पीपल्स नेटवर्क ऑन एक्सट्रैक्टिव इंडस्ट्रीज एंड एनर्जी, इंडिजिनस पीपल्स राइट्स इंटरनेशनल, आयरलैंड स्थित फ्रंट लाइन और यूनाइटेड किंगडम स्थित ह्यूमन राइट्स रिसोर्स सेंटर जैसी संस्थाओं से भेजी गई थी। प्रारंभिक जांच में यह भी दावा किया गया है कि इस पैसे का इस्तेमाल अरुणाचल प्रदेश में बड़े पैमाने पर प्रस्तावित जलविद्युत परियोजनाओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को आयोजित करने और उन्हें जारी रखने के लिए किया गया था।\n\nकिन धाराओं के तहत हुई कार्रवाई\n\nइस एफआईआर में भानु तातक के अलावा कुछ अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। उन पर विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 की धाराओं 11(1), 17, 19 और 35 के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है। वित्तीय मामलों की जांच में यह बात भी सामने आई कि उन्होंने वित्तीय वर्ष 2017-18 से लेकर 2025-26 के दौरान अपने आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किए थे और इन विदेशी संगठनों से प्राप्त धनराशि का खुलासा भी नहीं किया था।\n\nजलविद्युत परियोजनाओं का विरोध\n\nभानु तातक वर्तमान में सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम की कानूनी सलाहकार हैं और इसके साथ ही वह दिबांग रेजिस्टेंस नामक नागरिक समाज संगठन की समन्वयक की जिम्मेदारी भी संभालती हैं। ये दोनों ही संगठन राज्य में बनने वाली कई प्रस्तावित पनबिजली परियोजनाओं के मुखर विरोधी रहे हैं। सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम सियांग नदी पर बनने वाली 12,500 मेगावाट क्षमता वाली सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट का विरोध कर रहा है, जबकि दिबांग रेजिस्टेंस संगठन ने 2,880 मेगावाट की दिबांग मल्टीपर्पज हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के खिलाफ अपना अभियान चलाया हुआ है। इन दोनों ही ऊर्जा परियोजनाओं को लेकर स्थानीय आदिवासी समुदायों और पर्यावरणविदों की तरफ से लगातार चिंताएं जताई जाती रही हैं, जिनका मुख्य तर्क इन योजनाओं के संभावित सांस्कृतिक, पर्यावरणीय और सुरक्षा संबंधी बुरे प्रभावों से जुड़ा है।\n\nइसका आप पर असर\nइस कानूनी कार्रवाई का असर पर्यावरण कार्यकर्ताओं और विदेशी फंडिंग लेने वाले गैर-सरकारी संगठनों पर पड़ सकता है।\n\n• भारत में: विदेशी चंदे के नियम तोड़ने वाले कार्यकर्ताओं और संगठनों पर जांच एजेंसियों की नजर और अधिक कड़ी हो जाएगी।\n\n• अरुणाचल प्रदेश में: बड़े जलविद्युत प्रोजेक्ट्स का विरोध कर रहे स्थानीय संगठनों की गतिविधियों और उनकी फंडिंग की जांच तेज हो सकती है।\n\n• वित्तीय पारदर्शिता: सामाजिक कार्यकर्ताओं को अपने विदेशी फंड और बैंक खातों के नियमों का पालन अधिक सख्ती से करना होगा।\n\n• कानूनी अनुपालन: आयकर रिटर्न समय पर दाखिल न करने वाले लोगों के खिलाफ जांच का दायरा बढ़ सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह मामला विदेशी चंदे के नियमों के उल्लंघन और बिना पंजीकरण के विदेशी संस्थाओं से सीधे बैंक खाते में पैसे मंगवाने के आरोपों के बाद दर्ज किया गया है।\n\n• प्रत्येक कारण: भानु तातक पर आरोप है कि उन्होंने एफसीआरए के तहत अनिवार्य पंजीकरण या पूर्व अनुमति लिए बिना विदेशी संस्थाओं से 17.6 लाख रुपये सीधे अपने निजी खाते में प्राप्त किए।\n\n• संदिग्ध गतिविधियां: प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई कि इस विदेशी पैसे का उपयोग राज्य में प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को आयोजित करने के लिए किया गया था।\n\n• कर विवरण की अनदेखी: जांच एजेंसी के मुताबिक उन्होंने वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2025-26 के बीच अपने आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किए थे, जिससे विदेशी आय की जानकारी छिपाई गई।\n\n• संगठनों की भूमिका: वह उन स्थानीय मंचों से जुड़ी हैं जो राज्य में बांध परियोजनाओं का कड़ा विरोध कर रहे हैं, जिसके कारण जांच एजेंसियों का ध्यान इस ओर गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. भानु तातक के खिलाफ किस एजेंसी ने मामला दर्ज किया है?\nकेंद्रीय जांच ब्यूरो ने उनके खिलाफ विदेशी योगदान नियमन अधिनियम के उल्लंघन का मामला दर्ज किया है।\n\n2. भानु तातक पर मुख्य आरोप क्या है?\nउन पर बिना पंजीकरण या पूर्व अनुमति के विदेशी संस्थाओं से 17.6 लाख रुपये अपने निजी बैंक खाते में लेने का आरोप है।\n\n3. किन विदेशी संगठनों से पैसे मिलने का दावा किया गया है?\nफिलीपींस, आयरलैंड और यूनाइटेड किंगडम के कुछ मानवाधिकार और पर्यावरण संगठनों से पैसे मिलने की बात कही गई है।\n\n4. भानु तातक किन स्थानीय संगठनों से जुड़ी हैं?\nवह सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम की कानूनी सलाहकार और दिबांग रेजिस्टेंस की समन्वयक हैं।\n\n5. यह फंड किस उद्देश्य के लिए इस्तेमाल होने का आरोप है?\nजांच एजेंसी का आरोप है कि इस पैसे का उपयोग अरुणाचल प्रदेश में जलविद्युत परियोजनाओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को चलाने के लिए किया गया था।\n\n6. किन जलविद्युत परियोजनाओं का विरोध किया जा रहा है?\nसियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट और दिबांग मल्टीपर्पज हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का विरोध किया जा रहा है।",
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  "category": "अरुणाचल प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-09-15",
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    "सीबीआई",
    "भानु तातक",
    "एफसीआरए",
    "अरुणाचल प्रदेश",
    "जलविद्युत परियोजना"
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