अरुणाचल प्रदेश में 11,200 मेगावाट की सियांग जलविद्युत परियोजना के विरोध में तीन जिलों में 2 नवंबर को बंद का ऐलान अरुणाचल प्रदेश के सियांग, अपर सियांग और ईस्ट सियांग जिलों में बांध विरोधी प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी के खिलाफ 2 नवंबर को पूर्ण बंद रहेगा। युवा संगठन साया ने पैतृक जमीन, सियांग नदी और आदि समुदाय की पहचान बचाने के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन का आह्वान किया है। अरुणाचल प्रदेश की विशाल प्रस्तावित सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना (SUMP) को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध और तेज हो गया है। बांध विरोधी आंदोलन से जुड़े लोगों की हालिया गिरफ्तारियों और परियोजना प्रभावित इलाकों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती के विरोध में सियांग, अपर सियांग और ईस्ट सियांग जिलों में 2 नवंबर को बंद रखने का निर्णय लिया गया है। इस बंद का मुख्य मकसद स्थानीय समुदायों की आवाज दबाए जाने के प्रयासों का लोकतांत्रिक तरीके से मुकाबला करना है। गिरफ्तारियों और सर्वेक्षण कार्य के विरोध में आपात बैठक इस आंदोलन की अगुवाई कर रहे एसयूएमपी अफेक्टेड एरिया यूथ एसोसिएशन (साया) ने 29 अक्टूबर को एक आपातकालीन कार्यकारी बैठक बुलाई थी। इस बैठक में परियोजना से प्रभावित गांवों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और सर्वसम्मति से बंद का प्रस्ताव पारित किया। साया ने स्पष्ट किया कि यह कदम सियांग इंडिजिनस फार्मर फोरम (एसआईएफएफ), स्थानीय समुदाय आधारित संगठनों, युवा मंचों और प्रभावित बाशिंदों के साथ मिलकर उठाया जा रहा है। स्थानीय लोग कथित जबरन सर्वेक्षण और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती का कड़ा विरोध कर रहे हैं। पैतृक जमीन और आदि पहचान की रक्षा का संकल्प बोगुम बोकांग-टूटिंग क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाली बोगुम बोकांग वेलफेयर सोसाइटी (बीबीडब्ल्यूएस) के अध्यक्ष को भेजे एक पत्र में, साया ने बंद के लिए समर्थन मांगा है। संगठन ने पूरे आंदोलन को पूरी तरह शांतिपूर्ण, अहिंसक और लोकतांत्रिक बनाए रखने पर जोर दिया है। साया के अनुसार, यह प्रदर्शन मात्र एक परियोजना का विरोध नहीं है, बल्कि यह उनकी पुरखों की जमीन, सियांग नदी के प्राकृतिक स्वरूप, भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य और मूल आदि समुदाय की विशिष्ट पहचान की रक्षा की लड़ाई है। संगठन ने क्षेत्र के सभी निवासियों और सामाजिक संस्थाओं से एकजुट रहने की अपील की है। भारत की सबसे बड़ी पनबिजली पहलों में शामिल है परियोजना सियांग नदी पर प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की यह विशाल जलविद्युत परियोजना देश की सबसे बड़ी ऊर्जा पहलों में गिनी जाती है। हालांकि, इसकी योजना बनने के समय से ही स्थानीय आबादी में गंभीर असंतोष देखा जा रहा है। विशेष रूप से प्रस्तावित डूब क्षेत्र और प्रभावित हिस्सों में रहने वाले आदि समुदाय के विभिन्न वर्ग कई वर्षों से इस परियोजना के संभावित पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों को लेकर लगातार असहमति जताते आ रहे हैं। इसका आप पर असर इस बंद और बांध विरोधी प्रदर्शन से क्षेत्र में आम जनजीवन और दैनिक आवागमन पर सीधा असर पड़ने की संभावना है। • स्थानीय स्तर पर: सियांग, अपर सियांग और ईस्ट सियांग जिलों में 2 नवंबर को सामान्य जनजीवन, बाजार और स्थानीय परिवहन पूरी तरह ठप रह सकते हैं। प्रभावित इलाकों में रहने वाले नागरिकों और यात्रियों को उस दिन किसी भी जरूरी आवाजाही या खरीददारी की योजना पहले से बनाने की सलाह है। • देश भर में: 11,200 मेगावाट की देश की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में से एक के निर्माण में बार-बार सामाजिक और पर्यावरणीय रुकावटें आ सकती हैं। इसके चलते देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से में ऊर्जा उत्पादन और ग्रिड विस्तार की योजनाओं में लंबा विलंब हो सकता है। • आदि समुदाय पर: परियोजना क्षेत्र में सर्वेक्षण और सुरक्षा बलों की तैनाती को लेकर आदि समुदाय में सांस्कृतिक और सामाजिक अस्मिता की चिंताएं बढ़ रही हैं। स्थानीय निवासी अपनी पैतृक भूमि और प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए कानूनी और लोकतांत्रिक संघर्ष तेज कर रहे हैं। • प्रशासनिक स्तर पर: कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की जा सकती है। इससे आंदोलनकारियों और प्रशासन के बीच बातचीत के रास्ते तलाशना प्राथमिक चुनौती बन गया है। ऐसा क्यों हुआ यह बंद प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना के विरोध में जुटे स्थानीय आंदोलनकारियों की हालिया गिरफ्तारी और सुरक्षा बलों की तैनाती के बाद बुलाया गया है। • तात्कालिक कारण: परियोजना स्थल पर कथित जबरन भूमि सर्वेक्षण का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी के विरोध में यह बंद आहूत किया गया है। स्थानीय युवा संगठन इसे आदिवासी समुदाय की जायज आवाज को कुचलने की प्रशासनिक कोशिश मान रहे हैं। • सुरक्षा बलों की उपस्थिति: परियोजना से प्रभावित क्षेत्रों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती ने स्थानीय निवासियों और संगठनों में असंतोष को और गहरा कर दिया है। ग्रामीण इसे अपनी स्वायत्तता और शांतिपूर्ण जीवन में दखल मान रहे हैं। • दीर्घकालिक भूमि विवाद: सियांग नदी पर प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की परियोजना के खिलाफ आदि समुदाय वर्षों से अपनी पैतृक भूमि और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है। स्थानीय लोग मानते हैं कि बड़े बांध से उनकी नदी, प्राकृतिक आवास और सांस्कृतिक पहचान हमेशा के लिए खतरे में पड़ जाएगी। सवाल-जवाब 1. अरुणाचल प्रदेश के किन जिलों में बंद का आह्वान किया गया है? यह बंद सियांग, अपर सियांग और ईस्ट सियांग जिलों में 2 नवंबर के लिए बुलाया गया है। 2. इस बंद का आह्वान किस संगठन द्वारा किया गया है? इस बंद की घोषणा एसयूएमपी अफेक्टेड एरिया यूथ एसोसिएशन (साया) ने अन्य किसान और युवा संगठनों के सहयोग से की है। 3. बंद बुलाने का मुख्य कारण क्या है? परियोजना विरोधी प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी, केंद्रीय सशस्त्र बलों की तैनाती और कथित जबरन सर्वेक्षण के विरोध में यह कदम उठाया गया है। 4. प्रस्तावित सियांग अपर परियोजना की क्षमता कितनी है? सियांग नदी पर प्रस्तावित यह बहुउद्देशीय परियोजना 11,200 मेगावाट क्षमता की है। 5. स्थानीय समुदाय इस विशाल बांध का विरोध क्यों कर रहे हैं? स्थानीय आदि समुदाय अपनी पैतृक भूमि, सियांग नदी के संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों की पहचान को बचाने के लिए इसका विरोध कर रहे हैं। https://trendkia.com/arunachal-pradesh/arunachal-pradesh-men-11-200-megavata-ki-siang-jalavidyuta-pariyojana-ke-virodha-men-tina-jilon-men-2-navnbara-ko-bnda-ka-ailana-54293 TrendKia — Har trend, sabse pehle.