# अरुणाचल प्रदेश में चकमा मतदाताओं को एसआईआर सुनवाई से रोकने पर एनएचआरसी का दरवाजा खटखटाया गया

> अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग जिले में एसआईआर सुनवाई के दौरान चकमा मतदाताओं को रोके जाने और हिंसा के बाद, चकमा डेवलपमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से हस्तक्षेप की मांग की है।

**Type:** article · **Category:** अरुणाचल प्रदेश · **Published:** 2026-09-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/arunachal-pradesh/arunachal-pradesh-men-chakama-matadataon-ko-sir-sunavai-se-rokane-para-nhrc-ka-daravaja-khatakhataya-gaya-27721 · **Language:** Hindi
**Tags:** चकमा मामला, अरुणाचल प्रदेश, मानवाधिकार आयोग, एसआईआर सुनवाई, चांगलांग जिला

अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग जिले के बोर्डमसा इलाके में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की सुनवाई के दौरान चकमा समुदाय के मतदाताओं को कथित तौर पर कार्यवाही में शामिल होने से रोके जाने का मामला सामने आया है। इस घटनाक्रम के बाद चकमा डेवलपमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का रुख किया है और इस मामले में तुरंत दखल देने की अपील की है।

## राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से गुहार

संगठन की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से आग्रह किया है कि वह वर्ष 1996 के उस ऐतिहासिक सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सख्ती से लागू करवाए, जो नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन बनाम अरुणाचल प्रदेश राज्य से जुड़ा हुआ है। उस फैसले में राज्य सरकार को यह स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि वह राज्य में रहने वाले सभी चकमा लोगों के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा सुनिश्चित करे।

## बोर्डमसा में विरोध प्रदर्शन और हिंसा

संगठन के अनुसार, ऑल अरुणाचल प्रदेश स्टूडेंट्स यूनियन के सदस्यों ने शुक्रवार को बोर्डमसा में चल रही एसआईआर सुनवाई के दौरान जमकर विरोध प्रदर्शन किया, जिसके कारण मजबूरन प्रशासनिक कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। इस दौरान चुनावी पंजीकरण अधिकारी के कार्यालय को भी नुकसान पहुंचाए जाने की बात सामने आई है। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि प्रशासनिक मशीनरी तय प्रक्रिया को पूरी नहीं कर सकी।

## लगातार दो दिनों तक बाधित रही प्रक्रिया

यह हिंसा और गतिरोध केवल शुक्रवार तक सीमित नहीं था, बल्कि बृहस्पतिवार को भी इसी तरह के तनाव के कारण सुनवाई पूरी नहीं हो पाई थी। संगठन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, कार्यवाही रोके जाने से पहले चुनावी पंजीकरण अधिकारी केवल 252 फॉर्म 6 आवेदनों में से 222 और 303 अन्य आवेदनों में से सिर्फ 150 को ही सुन पाने में सक्षम हो पाए थे। लगातार दो दिनों तक इस प्रकार की बाधाओं के आने से प्रशासनिक कार्यों पर बड़ा असर पड़ा है।

## फाउंडेशन के संस्थापक की प्रतिक्रिया

इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए चकमा डेवलपमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया के संस्थापक सुहास चकमा ने कहा, कल की घटनाओं के बाद आज फिर से हिंसा का दोहराया जाना हर मोर्चे पर अरुणाचल प्रदेश सरकार की पूरी तरह से विफलता को बेनकाब करता है।

## सुरक्षा और शांति बहाली की मांग

शांति और कानून व्यवस्था बहाल करने के उद्देश्य से संगठन ने आयोग के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें मांग की गई है कि 1996 के उच्चतम न्यायालय के आदेश का कड़ाई से पालन हो। उस आदेश में कहा गया था कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करे कि प्रत्येक चकमा नागरिक के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा हो और ऑल अरुणाचल प्रदेश स्टूडेंट्स यूनियन जैसे संगठित समूहों द्वारा जबरन बेदखल करने या खदेड़ने के किसी भी प्रयास को पुलिस या अर्धसैनिक बलों की मदद से सख्ती से रोका जाए। यदि अतिरिक्त सुरक्षा बलों की आवश्यकता हो, तो केंद्र सरकार से मांग करके बल तैनात किए जाने चाहिए ताकि लोगों के अधिकारों की रक्षा की जा सके।

## विभिन्न मंत्रालयों और आयोग से निर्देश की मांग

संगठन ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से यह भी अनुरोध किया है कि वह केंद्रीय गृह मंत्रालय, राज्य सरकार और भारत निर्वाचन आयोग को आवश्यक निर्देश जारी करे। इसका उद्देश्य चल रही एसआईआर प्रक्रिया के दौरान चकमा और हाजोंग समुदायों के लोगों के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को पूरी तरह सुरक्षित रखना है।

## इसका आप पर असर
इस प्रशासनिक और राजनीतिक घटनाक्रम का असर स्थानीय नागरिकों की नागरिक प्रक्रिया और रोजमर्रा की सुरक्षा पर सीधा पड़ रहा है।

- **भारत में:** देश भर में चुनावी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के दौरान समावेशिता और सुरक्षा के नियमों का कड़ाई से पालन करने को लेकर बहस तेज हो गई है।

- **अरुणाचल प्रदेश में:** चांगलांग जिले के बोर्डमसा में रहने वाले चकमा और हाजोंग समुदायों के लोगों के बीच अपनी पहचान से जुड़ी दस्तावेजों की प्रक्रिया और सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।

## सवाल-जवाब

### 1. इस मामले में एनएचआरसी का दरवाजा किसने खटखटाया है?
चकमा डेवलपमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से हस्तक्षेप की मांग की है।

### 2. यह घटना अरुणाचल प्रदेश के किस जिले में हुई है?
यह घटना अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग जिले के बोर्डमसा इलाके में हुई है।

### 3. किस प्रक्रिया के दौरान यह विरोध प्रदर्शन और हिंसा हुई?
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की सुनवाई के दौरान यह विरोध प्रदर्शन हुआ।

### 4. किस छात्र संगठन ने इस प्रक्रिया का विरोध किया है?
ऑल अरुणाचल प्रदेश स्टूडेंट्स यूनियन के सदस्यों ने सुनवाई का विरोध किया।

### 5. बृहस्पतिवार की सुनवाई में कितने आवेदन सुने जा चुके थे?
चुनावी पंजीकरण अधिकारी 252 में से 222 फॉर्म 6 और 303 में से 150 अन्य आवेदन सुन पाए थे।

### 6. सुहास चकमा किस संगठन से जुड़े हैं?
सुहास चकमा चकमा डेवलपमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया के संस्थापक हैं।

### 7. संगठन ने किस पुराने फैसले को लागू करने की मांग की है?
संगठन ने सुप्रीम कोर्ट के 1996 के मानवाधिकार आयोग बनाम अरुणाचल प्रदेश राज्य के फैसले को लागू करने की मांग की है।

### 8. इस मामले में किन प्रमुख निकायों से निर्देश जारी करने की मांग की गई है?
केंद्रीय गृह मंत्रालय, अरुणाचल प्रदेश सरकार और भारत निर्वाचन आयोग से निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया है।

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