अरुणाचल प्रदेश में रचा गया स्वास्थ्य इतिहास, नाहरलगुन के TRIHMS में पहली सफल किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी संपन्न नाहरलगुन स्थित टोमो रीबा इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड मेडिकल साइंसेज में राज्य का पहला गुर्दा प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने अस्पताल पहुंचकर मरीज, अंगदाता बहन और पूरी चिकित्सा टीम को बधाई दी। अरुणाचल प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की गई है। राज्य के नाहरलगुन स्थित टोमो रीबा इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड मेडिकल साइंसेज (TRIHMS) में पहला सफल किडनी ट्रांसप्लांट (गुर्दा प्रत्यारोपण) किया गया। यह जटिल सर्जरी स्थानीय चिकित्सा टीम द्वारा नई दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल के विशेषज्ञों के सहयोग से सफलतापूर्वक पूरी की गई, जिससे राज्य में ही उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक नया अध्याय शुरू हुआ है। बहन ने भाई को दिया नया जीवन इस ऐतिहासिक प्रक्रिया के दौरान एक बहन ने अपने छोटे भाई को नया जीवन देने के लिए अपनी एक किडनी दान की। सफल ऑपरेशन के बाद अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने खुद टोमो रीबा इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड मेडिकल साइंसेज का दौरा किया। उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीज और उनकी बड़ी बहन से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य का हाल जाना और बहन के इस त्यागमय कदम की सराहना की। मुख्यमंत्री ने इस जटिल ऑपरेशन को अंजाम देने वाले डॉक्टरों, नर्सों, तकनीशियनों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की पूरी टीम से बातचीत की। उन्होंने चिकित्साकर्मियों के समर्पण और कड़ी मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि उनकी इस सफलता ने राज्य की चिकित्सा क्षमता को एक नई पहचान दी है। तीन वर्षों के प्रशिक्षण और सहयोग का परिणाम यह सफलता रातों-रात नहीं मिली, बल्कि इसके पीछे तीन साल की लंबी तैयारी और निरंतर प्रशिक्षण का हाथ रहा है। अरुणाचल प्रदेश सरकार पिछले तीन वर्षों से नई दिल्ली स्थित सर गंगा राम अस्पताल के साथ मिलकर काम कर रही थी। इसका उद्देश्य टोमो रीबा इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड मेडिकल साइंसेज के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की क्षमताओं का निर्माण करना था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी संदेश में मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा कि सर गंगा राम अस्पताल की विशेषज्ञ टीम के मार्गदर्शन और हैंडहोल्डिंग की बदौलत ही संस्थान यह उपलब्धि हासिल कर सका है। उन्होंने कहा कि इस सहयोग से राज्य में अंग प्रत्यारोपण जैसी जटिल प्रक्रियाओं को संभव बनाया जा सका है। विशेषज्ञों और सहयोगी संस्थाओं का आभार मुख्यमंत्री ने प्रसिद्ध ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ हर्षा जौहरी और सर गंगा राम अस्पताल की पूरी टीम के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि डॉ जौहरी के अनुभव, मार्गदर्शन और अटूट प्रतिबद्धता ने राज्य की स्थानीय टीम को इस स्तर तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके अलावा, उन्होंने डॉ रश्मी सलूजा और प्रोग्रो इंटरनेशनल को भी दोनों संस्थानों के बीच साझेदारी को मजबूत करने के लिए धन्यवाद दिया। पेमा खांडू ने सर गंगा राम अस्पताल के प्रबंधन से अनुरोध किया कि वे इस हैंडहोल्डिंग कार्यक्रम को आगे भी जारी रखें, ताकि स्थानीय मेडिकल टीम धीरे-धीरे इन जटिल प्रक्रियाओं में पूर्ण विशेषज्ञता हासिल कर सके। इस सफल प्रत्यारोपण ने यह साबित कर दिया है कि राज्य के डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी अब अति-विशिष्ट चिकित्सा सेवाओं को देने में पूरी तरह सक्षम हैं। इसका आप पर असर अरुणाचल प्रदेश में पहला सफल किडनी ट्रांसप्लांट राज्य के निवासियों के लिए महंगी और कठिन यात्राओं के बिना स्थानीय स्तर पर उच्चस्तरीय इलाज पाने का मार्ग प्रशस्त करता है। • अरुणाचल प्रदेश में: स्थानीय मरीजों को अब गुर्दा प्रत्यारोपण जैसी जटिल सर्जरी के लिए दिल्ली या अन्य बड़े शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। इससे मरीजों और उनके परिवारों का यात्रा खर्च और मानसिक तनाव काफी हद तक कम होगा। • नाहरलगुन में: टोमो रीबा इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड मेडिकल साइंसेज में इस सेवा की शुरुआत से आसपास के मरीजों को उन्नत स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। इससे स्थानीय अस्पताल पर लोगों का भरोसा और बढ़ेगा। • पूर्वोत्तर भारत में: पूर्वोत्तर राज्यों के मरीजों को अपने ही क्षेत्र में सुपर-स्पेशलिटी चिकित्सा सुविधाएं मिलने से समय पर इलाज संभव हो सकेगा। यह क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। • आर्थिक राहत: राज्य में ही इलाज उपलब्ध होने से गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर इलाज का वित्तीय बोझ कम होगा। सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ भी स्थानीय स्तर पर आसानी से मिल सकेगा। ऐसा क्यों हुआ टोमो रीबा इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड मेडिकल साइंसेज में यह ऐतिहासिक किडनी ट्रांसप्लांट तीन साल के संस्थागत सहयोग और गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम का परिणाम है। • तीन साल की साझेदारी: अरुणाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में सुपर-स्पेशलिटी सेवाएं विकसित करने के लिए नई दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल के साथ करार किया था। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य स्थानीय डॉक्टरों और नर्सों का क्षमता निर्माण करना था। • विशेषज्ञों का निरंतर मार्गदर्शन: सर गंगा राम अस्पताल की विशेषज्ञ टीम और डॉ हर्षा जौहरी ने नाहरलगुन की मेडिकल टीम को तकनीकी प्रशिक्षण और हैंडहोल्डिंग प्रदान की। इस निरंतर सहयोग ने स्थानीय सर्जनों को जटिल सर्जरी करने में सक्षम बनाया। • संस्थागत समर्थन: प्रोग्रो इंटरनेशनल और डॉ रश्मी सलूजा के सहयोग से दोनों अस्पतालों के बीच प्रशासनिक और तकनीकी समन्वय स्थापित हुआ। इसी रणनीतिक मार्गदर्शन से राज्य में पहली बार अंग प्रत्यारोपण संभव हो सका। सवाल-जवाब 1. अरुणाचल प्रदेश में पहली किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी कहाँ आयोजित की गई? यह ऐतिहासिक सर्जरी नाहरलगुन स्थित टोमो रीबा इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड मेडिकल साइंसेज (TRIHMS) में संपन्न हुई। 2. इस सफल ट्रांसप्लांट सर्जरी में किस अस्पताल ने सहयोग दिया? नई दिल्ली स्थित सर गंगा राम अस्पताल की विशेषज्ञ टीम ने इस सर्जरी के लिए तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया। 3. मरीज के लिए किडनी किसने दान की? मरीज की बड़ी बहन ने अपने भाई की जान बचाने के लिए अपनी एक किडनी दान की। 4. इस चिकित्सा अभियान के लिए डॉक्टरों को कितने समय से प्रशिक्षित किया जा रहा था? अरुणाचल प्रदेश सरकार और सर गंगा राम अस्पताल के बीच पिछले तीन वर्षों से प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण का कार्यक्रम चल रहा था। 5. सर्जरी के बाद मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने क्या घोषणा की? मुख्यमंत्री ने मेडिकल टीम को बधाई दी और सर गंगा राम अस्पताल से अनुरोध किया कि वे स्थानीय डॉक्टरों की पूर्ण विशेषज्ञता के लिए इस हैंडहोल्डिंग कार्यक्रम को आगे भी जारी रखें। प्रेरणा और सबक यह सफलता पारिवारिक समर्पण और निरंतर प्रयास से मिली चिकित्सा आत्मनिर्भरता की एक प्रेरणादायक मिसाल है। • निस्वार्थ पारिवारिक प्रेम: बहन द्वारा अपने भाई को किडनी दान करने का फैसला दिखाता है कि निस्वार्थ मानवीय रिश्ते किसी का जीवन बचा सकते हैं। यह समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक बेहतरीन उदाहरण है। • सतत प्रशिक्षण से सफलता: तीन साल तक लगातार प्रशिक्षण और नई तकनीक सीखने के प्रति डॉक्टरों का समर्पण यह साबित करता है कि सही मार्गदर्शन से कोई भी कठिन लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। • स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भरता: बाहरी विशेषज्ञों के साथ मिलकर अपनी क्षमता बढ़ाना यह सिखाता है कि सही साझेदारी से दुर्गम क्षेत्रों में भी विश्वस्तरीय सुविधाएं तैयार की जा सकती हैं। https://trendkia.com/arunachal-pradesh/arunachal-pradesh-men-racha-gaya-svasthya-itihasa-naharlagun-ke-trihms-men-pahali-saphala-kidani-transaplanta-sarjari-snpanna-39952 TrendKia — Har trend, sabse pehle.