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  "type": "article",
  "title": "अरुणाचल प्रदेश में सजेगा ज़ीरो फेस्टिवल, देश-विदेश के 40 से अधिक फनकार बिखेरेंगे सुरों का जादू",
  "summary": "अरुणाचल प्रदेश की सुरम्य ज़ीरो घाटी 24 से 27 सितंबर तक 13वें ज़ीरो फेस्टिवल ऑफ म्यूजिक की मेजबानी करेगी, जिसमें दुनिया भर के 40 से ज्यादा कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।",
  "content": "अरुणाचल प्रदेश के मनोरम पहाड़ी परिदृश्य के बीच संगीत का एक भव्य समागम आयोजित होने जा रहा है। ज़ीरो घाटी में 24 से 27 सितंबर तक चलने वाले ज़ीरो फेस्टिवल ऑफ म्यूजिक के 13वें संस्करण की तैयारियां पूरी गति से चल रही हैं। चार दिनों तक खिंचने वाले इस सांस्कृतिक उत्सव में भारत के विभिन्न कोनों और सुदूर मुल्कों से 40 से अधिक फनकार अपने हुनर का प्रदर्शन करेंगे। इस आयोजन की सबसे अनूठी परंपरा यह है कि यहां मुख्य कलाकारों की कोई पारंपरिक क्रमबद्धता नहीं रखी जाती, जिससे हर पृष्ठभूमि के संगीतकार एक ही मंच की आभा साझा करते हैं।\n\nदेशभर के दिग्गजों और पूर्वोत्तर की प्रतिभाओं का संगम\nइस बार मंच पर भारतीय संगीत जगत के जाने-पहचाने नामों की एक लंबी फेहरिस्त देखने को मिलेगी। सुखबीर, स्नेहा खानवलकर, मिडीवल पुंडित्ज़, शक्तिश्री गोपालन, शंका ट्राइब और विख्यात रॉक बैंड परिक्रमा अपनी धुनों से समां बांधेंगे। इनके साथ ही भारतीय शास्त्रीय संगीत के उस्ताद सरवर हुसैन और वायलिन वादक अपूर्व कृष्णा भी मंच की शोभा बढ़ाएंगे। बिहार के लोकप्रिय रैपर शिकरीवाल, काली दुनिया, करण कंचन और स्वरा ओझा की प्रस्तुतियां भी दर्शकों को झूमने पर मजबूर करेंगी।\n\nउत्सव की आत्मा पूर्वोत्तर भारत की स्थानीय धुनों में बसती है। इस साल मंच पर त्रिपुरा के लोक गायक सुकेश शुक्लावैद्य, मणिपुर से चिंगलेईपाक कलेक्टिव और येलहोमी, सिक्किम का ट्राइबल रेन, नगालैंड के तेमसु क्लोवर, मिजोरम का मूड स्टेशन, असम के नोवो और स्थानीय राज्य अरुणाचल प्रदेश के डेविड आंगु अपनी कला का जादू बिखेरेंगे।\n\nवैश्विक धुनों और कला विनिमय का दायरा\nअंतरराष्ट्रीय फलक पर श्रीलंका की गायिका योहानी, अल्जीरिया के फाती तेनीरी, फिलिस्तीनी-फ्रांसीसी संगीत निर्माता इसाम एलियास, नेपाल का फॉसफीन्स, थाईलैंड का जीवाईएमवी, फिलीपींस का तालाहिब और दक्षिण कोरियाई समूह मोहेर अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इस वर्ष के उत्सव में दक्षिण अफ्रीका, स्विट्जरलैंड और आयरलैंड की संस्कृतियां भी सम्मिलित हो रही हैं।\n\nकलात्मक आदान-प्रदान के तहत स्विस आर्ट्स काउंसिल प्रो हेल्वेटिया के सहयोग से संचालित इलेक्ट्रॉनिक संगीत परियोजना 'सर्किट मिक्सर्स' का अंतिम पड़ाव भी यहीं संपन्न होगा। इससे पहले जोहान्सबर्ग और मॉन्ट्रो में कार्यशालाओं का आयोजन कर चुका यह मंच भारत के ज़ेक्वेंक्स, दक्षिण अफ्रीका की नालेदी चाई, और स्विट्जरलैंड के लुआ जुंगक व ओवेल को एक साथ लाएगा। वहीं दूसरी ओर, कल्चर आयरलैंड और नई दिल्ली स्थित आयरलैंड के दूतावास के सहयोग से आयरिश लोक बैंड साल्टेयर एक विशेष सांस्कृतिक रेजीडेंसी के तहत कार्यशालाएं आयोजित करेगा। यह सहयोग यूरोपीय संघ परिषद की आयरलैंड अध्यक्षता के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है।\n\nकॉसमॉस और आपातानी परंपराओं का उत्सव\nआयोजन को और अधिक जीवंत बनाने के लिए इस बार 'कॉसमॉस' नामक एक अनौपचारिक स्थल की शुरुआत की जा रही है। यह दायरा कलाकारों के बीच सहज संवाद, अनियोजित जुगलबंदी और बिना किसी पटकथा वाली तात्कालिक प्रस्तुतियों के लिए समर्पित रहेगा।\n\nयह उत्सव केवल धुनों तक सीमित न रहकर मेज़बान आपातानी जनजाति की समृद्ध परंपराओं को भी सामने लाएगा। कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक 'दामिंदा' फसल नृत्य और आपातानी विमेंस एसोसिएशन ज़ीरो (आवाज़) की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। इसके अलावा पोपी सारमिं स्टूडियो में धान की बांसुरी (एलू) बनाने और पारंपरिक मिट्टी के बर्तन तैयार करने जैसी कलाओं पर कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी। उत्सव के सह-संस्थापक और निदेशक बॉबी हानो ने रेखांकित किया कि नई प्रतिभाओं की खोज और संस्कृतियों का परस्पर मिलन ही इस महोत्सव की मूल प्रेरणा है।\n\nइसका आप पर असर\nइस बहुचर्चित संगीत समारोह से पूर्वोत्तर में पर्यटन, आतिथ्य सत्कार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को सीधा बढ़ावा मिलेगा।\n\n• देशभर के संगीत प्रेमियों के लिए: स्वतंत्र और पारंपरिक संगीत की कई शैलियों को एक ही मंच पर सुनने का अवसर मिलेगा। दर्शक अलग-अलग राज्यों और देशों से आने वाले 40 से अधिक कलाकारों की अनूठी कला से रूबरू हो सकेंगे।\n• अरुणाचल प्रदेश में: ज़ीरो घाटी के स्थानीय होमस्टे, टैक्सी संचालकों और कारीगरों की आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। चार दिवसीय आयोजन के दौरान देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के कारण पर्यटन व्यवसाय को रफ्तार मिलेगी।\n• आपातानी समुदाय पर प्रभाव: स्थानीय संस्कृति, शिल्प और लोक नृत्य को एक विशाल वैश्विक मंच पर पहचान मिलेगी। पोपी सारमिं स्टूडियो में आयोजित कार्यशालाओं से स्थानीय धान की बांसुरी और मिट्टी के बर्तनों के शिल्प को नया बाजार मिलेगा।\n• कलाकारों और संगीतकारों के लिए: स्वतंत्र कलाकारों को 'कॉसमॉस' और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के जरिए विदेशी फनकारों के साथ मिलकर काम करने का मंच प्राप्त होगा। इस तरह की साझेदारियां भविष्य में नए कलात्मक प्रयोगों और अनुबंधों के द्वार खोलती हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह वार्षिक महोत्सव संगीत, पर्यटन और स्थानीय स्वदेशी विरासत के प्रोत्साहन के लिए आयोजित किया जाता है। विभिन्न वैश्विक संस्थाओं और सांस्कृतिक मिशनों के आपसी तालमेल ने इस संस्करण को व्यापक अंतरराष्ट्रीय आयाम दिया है।\n\n• वार्षिक सांस्कृतिक परंपरा: ज़ीरो फेस्टिवल ऑफ म्यूजिक अपने 13वें संस्करण में पहुंच चुका है, जिसका उद्देश्य स्वतंत्र संगीतकारों को एक खुला मंच उपलब्ध कराना है। हर साल यह मंच स्थापित और नए कलाकारों के बीच के अंतर को पाटकर संवाद स्थापित करता है।\n• अंतरराष्ट्रीय राजनयिक सहयोग: यूरोपीय संघ परिषद की आयरलैंड अध्यक्षता को चिह्नित करने के लिए नई दिल्ली स्थित आयरिश दूतावास और कल्चर आयरलैंड ने विशेष रेजीडेंसी साझेदारी की है। इसी तरह स्विस आर्ट्स काउंसिल प्रो हेल्वेटिया ने इलेक्ट्रॉनिक संगीतकारों के सहयोग के लिए सर्किट मिक्सर्स परियोजना को आगे बढ़ाया।\n• सामुदायिक भागीदारी: मेज़बान आपातानी समुदाय के योगदान और सहमति से ही इस पर्यावरण-अनुकूल उत्सव का आयोजन संभव हो पाता है। स्थानीय आपातानी विमेंस एसोसिएशन और क्षेत्रीय कारीगर मिलकर इस आयोजन को केवल संगीत तक सीमित न रखकर संपूर्ण सांस्कृतिक अनुभव में बदलते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ज़ीरो फेस्टिवल 2026 कब और कहां आयोजित किया जा रहा है?\nयह उत्सव अरुणाचल प्रदेश की ज़ीरो घाटी में 24 सितंबर से 27 सितंबर तक आयोजित होगा।\n\n2. इस उत्सव में कुल कितने कलाकार और बैंड हिस्सा ले रहे हैं?\nइस चार दिवसीय आयोजन में भारत और विदेशों से 40 से अधिक कलाकार और संगीत समूह भाग लेंगे।\n\n3. इस वर्ष के उत्सव में 'कॉसमॉस' क्या है?\n'कॉसमॉस' एक अनौपचारिक स्थल है, जिसे कलाकारों के बीच सहज संवाद, अनियोजित जुगलबंदी और अनस्क्रिप्टेड प्रस्तुतियों के लिए बनाया गया है।\n\n4. किन-किन देशों के अंतरराष्ट्रीय कलाकार इस महोत्सव में शामिल हो रहे हैं?\nइसमें अल्जीरिया, थाईलैंड, फिलिस्तीन, स्विट्जरलैंड, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, नेपाल, आयरलैंड, फिलीपींस और श्रीलंका के कलाकार भाग लेंगे।\n\n5. स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए उत्सव में क्या विशेष रखा गया है?\nकार्यक्रम में आपातानी समुदाय का दामिंदा फसल नृत्य, आवाज़ संघ की प्रस्तुतियां तथा एलू बांसुरी और मिट्टी के बर्तन बनाने की कार्यशालाएं शामिल हैं।",
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  "category": "अरुणाचल प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-09-20",
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