# अरुणाचल प्रदेश में सीमावर्ती इलाकों को रोशन करेगी भू-तापीय ऊर्जा, लद्दाख मॉडल से ले रहा सीख

> अरुणाचल प्रदेश अपने दूरदराज और रणनीतिक सीमावर्ती क्षेत्रों में स्वच्छ बिजली पहुंचाने के लिए भू-तापीय ऊर्जा की संभावनाएं तलाश रहा है।

**Type:** article · **Category:** अरुणाचल प्रदेश · **Published:** 2026-10-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/arunachal-pradesh/arunachal-pradesh-men-simavarti-ilakon-ko-roshana-karegi-bhu-tapiya-urja-ladakh-modala-se-le-raha-sikha-42630 · **Language:** Hindi
**Tags:** अरुणाचल प्रदेश, भू-तापीय ऊर्जा, तवांग, दसांगलू पुल, ओएनजीसी, लद्दाख पुगा वैली, सीईएसएचएस, स्वच्छ ऊर्जा

अरुणाचल प्रदेश अपने रणनीतिक और दूरदराज के सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भू-तापीय ऊर्जा (जियोथर्मल एनर्जी) की संभावनाएं तलाश रहा है। राज्य की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री दसांगलू पुल ने इस पहल की जानकारी देते हुए बताया कि सीमाई बस्तियों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए यह एक बेहद महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

## लद्दाख के पुगा वैली प्रोजेक्ट का दौरा और तकनीकी समझ
इस योजना को व्यावहारिक रूप देने के लिए अरुणाचल प्रदेश की एक उच्चस्तरीय टीम ने लद्दाख का दौरा किया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री दसांगलू पुल के साथ सेंटर फॉर अर्थ साइंसेज एंड हिमालयन स्टडीज (सीईएसएचएस) के निदेशक ताना तागे और विभागीय भूवैज्ञानिकों ने पुगा वैली में स्थित ओएनजीसी के भू-तापीय प्रोजेक्ट का जायजा लिया। इस दौरान टीम ने हिमालय के अत्यधिक ऊंचाई वाले और दुर्गम माहौल में भू-तापीय खोज, ड्रिलिंग तकनीकों और बिजली उत्पादन की पूरी प्रक्रिया का बारीकी से अध्ययन किया। इस तकनीकी अनुभव का इस्तेमाल अरुणाचल प्रदेश अपनी आगामी योजनाओं में करेगा। दसांगलू पुल ने इस दौरान ओएनजीसी और उसकी कार्यकारी सहयोगी कंपनी सेरोस (SEROS) का तकनीकी जानकारी साझा करने के लिए आभार भी जताया।

## तवांग के मागो-थिमबू बेल्ट में 10 से 15 मेगावाट क्षमता का अनुमान
राज्य में तवांग जिले का मागो-थिमबू क्षेत्र भू-तापीय ऊर्जा उत्पादन के लिए सबसे प्रमुख केंद्र के रूप में देखा जा रहा है। शुरुआती आकलनों के मुताबिक इस पूरे बेल्ट में लगभग 10 से 15 मेगावाट तक बिजली उत्पादन की क्षमता मौजूद है। अरुणाचल प्रदेश में पिछले कई वर्षों से भू-तापीय संसाधनों पर लगातार अध्ययन चल रहा है। मार्च 2024 में सीईएसएचएस ने नॉर्वेजियन जियोटेक्निकल इंस्टीट्यूट और आइसलैंड की संस्था जियोट्रोपी के साथ मिलकर मागो, थिमबू सहित आसपास के गर्म पानी के झरनों (हॉट स्प्रिंग्स) वाले इलाकों में मैपिंग और फील्ड सर्वे किया था।

## बिजली के अलावा हीटिंग, कूलिंग और खेती में होगा इस्तेमाल
अध्ययनों में यह भी देखा जा रहा है कि इन प्राकृतिक गर्म स्रोतों का उपयोग केवल बिजली पैदा करने तक सीमित न रहे। स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस ऊर्जा का उपयोग घरों को गर्म रखने (हीटिंग), ठंडा रखने (कूलिंग) और कृषि उत्पादों को सुखाने जैसे अन्य जरूरी कार्यों में भी किया जा सकता है। इसके अलावा सीईएसएचएस और ऑयल इंडिया लिमिटेड ने तवांग के मागो, थिमबू, दमटेंग और त्सेचु में सतह व उपसतह की जांच से जुड़े प्री-फीजिबिलिटी अध्ययन किए हैं। जिले के पांच प्रमुख भू-तापीय स्थलों दमटेंग, ग्रेंगखार, मागो, थिमबू और त्सेचु से जियोकेमिकल जांच के लिए नमूने भी एकत्र किए गए हैं।

> “अरुणाचल प्रदेश अपार प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है, और हमारा प्रयास एक स्थायी भविष्य के लिए इस क्षमता का जिम्मेदारी से दोहन करना है।”
दसांगलू पुल ने कहा कि पुगा परियोजना से मिले अनुभवों से अरुणाचल प्रदेश को विशेष रूप से दूरदराज के संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में भू-तापीय ऊर्जा का मजबूत ढांचा विकसित करने में बड़ी मदद मिलेगी।

## इसका आप पर असर
अरुणाचल प्रदेश के सुदूर सीमाई क्षेत्रों में भू-तापीय ऊर्जा के विकास से स्थानीय बस्तियों और रणनीतिक चौकियों को निर्बाध व स्वच्छ ऊर्जा मिलने की राह आसान होगी।

- **भारत में:** हिमालयी राज्यों में नवीकरणीय ऊर्जा के नए विकल्प तैयार होंगे। इससे देश की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ेगी और पारंपरिक ग्रिड पर निर्भरता घटेगी।
- **अरुणाचल प्रदेश में:** तवांग के सीमावर्ती गांवों को स्थानीय स्तर पर 24 घंटे बिजली और हीटिंग की सुविधा मिल सकेगी। इससे कड़ाके की ठंड में जीवन आसान होगा और कृषि उत्पादों को सुखाने में मदद मिलेगी।
- **स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर:** किसानों को अपनी उपज सुखाने और संरक्षित करने के लिए स्थानीय स्तर पर ग्रीन एनर्जी उपलब्ध होगी। इससे सुदूर पहाड़ी इलाकों में आजीविका और व्यापार को मजबूती मिलेगी।
- **सीमा सुरक्षा और बुनियादी ढांचा:** रणनीतिक रूप से संवेदनशील चौकियों को विश्वसनीय बिजली आपूर्ति मिलने से सीमावर्ती बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी। कठिन मौसम में भी संपर्क और ऊर्जा व्यवस्था बनी रहेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
अरुणाचल प्रदेश के अत्यधिक ऊंचाई वाले सीमावर्ती क्षेत्र भौगोलिक विषमताओं और कठिन मौसम के कारण मुख्य ग्रिड से अक्सर कटे रहते हैं, जिसके चलते वहां 24 घंटे बिजली और हीटिंग के स्थानीय स्रोतों की सख्त जरूरत है।

- **कठिन भौगोलिक परिस्थितियां:** तवांग जैसे दूरदराज के क्षेत्रों में पारंपरिक ट्रांसमिशन लाइनें बिछाना और सर्दियों में उनकी देखरेख करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। जमीन के नीचे मौजूद प्राकृतिक गर्म स्रोत स्थानीय स्तर पर बिना रुकावट बिजली और गर्मी दे सकते हैं।
- **लद्दाख पुगा प्रोजेक्ट की तकनीकी सीख:** लद्दाख की पुगा वैली में ओएनजीसी द्वारा अत्यधिक ऊंचाई पर की गई सफल ड्रिलिंग और अन्वेषण ने दिखाया है कि हिमालयी इलाकों में भू-तापीय परियोजनाएं व्यावहारिक हैं। इसी आधार पर अरुणाचल प्रदेश ने तकनीकी अध्ययन को आगे बढ़ाया है।
- **संसाधनों के अध्ययन में प्रगति:** मार्च 2024 में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ किए गए सर्वे और ऑयल इंडिया के साथ संयुक्त जांच में तवांग के 5 प्रमुख स्थलों पर मजबूत संभावनाएं पाई गई हैं। इसी सकारात्मक रिपोर्ट के बाद राज्य सरकार ने इसे धरातल पर उतारने की प्रक्रिया तेज की है।

## सवाल-जवाब

### 1. अरुणाचल प्रदेश में भू-तापीय ऊर्जा की संभावनाएं किन प्रमुख क्षेत्रों में तलाशी जा रही हैं?
तवांग जिले के मागो-थिमबू बेल्ट, दमटेंग, ग्रेंगखार और त्सेचु जैसे क्षेत्रों में भू-तापीय ऊर्जा के प्रमुख स्रोत मौजूद हैं।

### 2. तवांग के मागो-थिमबू बेल्ट में कितनी ऊर्जा क्षमता का अनुमान है?
मागो-थिमबू क्षेत्र में लगभग 10 से 15 मेगावाट भू-तापीय विद्युत उत्पादन क्षमता का अनुमान लगाया गया है।

### 3. अरुणाचल प्रदेश की टीम ने किस प्रोजेक्ट का तकनीकी दौरा किया था?
टीम ने लद्दाख की पुगा वैली में स्थित ओएनजीसी के भू-तापीय प्रोजेक्ट का दौरा कर उच्च ऊंचाई वाली ड्रिलिंग तकनीकों का अध्ययन किया।

### 4. बिजली बनाने के अलावा इस भू-तापीय ऊर्जा का उपयोग किन कार्यों में किया जा सकेगा?
इसका इस्तेमाल घरों को गर्म या ठंडा रखने (हीटिंग-कूलिंग) और स्थानीय कृषि उत्पादों को सुखाने जैसे कार्यों में किया जाएगा।

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