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  "title": "अरुणाचल प्रदेश ने आईसीएआर से की कीवी अनुसंधान संस्थान और पर्वतीय कृषि के लिए जल्द रोडमैप बनाने की मांग",
  "summary": "अरुणाचल प्रदेश के कृषि मंत्री गेब्रियल डी वांगसू ने आईसीएआर से पर्वतीय कृषि रोडमैप में तेजी लाने, 10 नए केवीके स्वीकृत करने और राज्य में सेंट्रल कीवी रिसर्च इंस्टीट्यूट स्थापित करने की मांग की है।",
  "content": "अरुणाचल प्रदेश ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से राज्य के कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए एक विशेष कार्ययोजना में तेजी लाने, कीवी फल के लिए समर्पित संस्थान स्थापित करने और दूरदराज के पहाड़ी इलाकों तक तकनीकी सहायता बढ़ाने का आग्रह किया है। नई दिल्ली में मंगलवार को आयोजित आईसीएआर की 97वीं वार्षिक आम बैठक को संबोधित करते हुए कृषि और बागवानी मंत्री गेब्रियल डी वांगसू ने जोर देकर कहा कि विषम पर्वतीय भौगोलिक स्थिति और बिखरी हुई ग्रामीण आबादी को ध्यान में रखते हुए विशेष वैज्ञानिक समाधान लागू करना आवश्यक है।\n\nसमयबद्ध कृषि रोडमैप की तैयारी में तेजी लाने पर जोर\nमंत्री ने 30 जून को केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के राज्य दौरे के दौरान हुई विस्तृत चर्चा का संदर्भ दिया। उस बैठक के बाद राज्य के लिए एक व्यापक कृषि विकास खाका तैयार करने की जिम्मेदारी एनईएच रीजन के लिए बने आईसीएआर अनुसंधान परिसर के निदेशक को सौंपी गई थी। गेब्रियल डी वांगसू ने संस्था से इस प्रक्रिया को तेज करने की अपील की और कहा कि यह रोडमैप व्यावहारिक होने के साथ-साथ एक निश्चित समयसीमा के भीतर मापने योग्य परिणाम देने वाला होना चाहिए।\n\nदेश के 60 प्रतिशत कीवी उत्पादन के लिए समर्पित संस्थान की मांग\nबागवानी क्षेत्र के विकास पर बल देते हुए गेब्रियल डी वांगसू ने राज्य में आईसीएआर सेंट्रल कीवी रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थापना की अपनी पुरानी मांग को दोहराया। इस प्रस्ताव को पहले 96वीं आईसीएआर वार्षिक आम बैठक में भी प्रस्तुत किया गया था। इस फसल के महत्व को रेखांकित करते हुए मंत्री ने बताया कि भारत के कुल कीवी उत्पादन में अरुणाचल प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत है। यह उच्च मूल्य वाली फसल राज्य के समशीतोष्ण क्षेत्रों में रहने वाले किसानों की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार बन चुकी है।\n\nकृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से जमीनी स्तर तक विस्तार\nतकनीकी सहायता और अनुसंधान को किसानों के दरवाजे तक पहुंचाने के लिए मंत्री ने 10 नए कृषि विज्ञान केंद्र स्वीकृत करने का अनुरोध किया। ये केंद्र उन जिलों में स्थापित किए जाएंगे जहां फिलहाल ऐसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। अरुणाचल प्रदेश में वर्तमान में 17 कृषि विज्ञान केंद्र कार्यरत हैं, जबकि 10 अतिरिक्त केंद्रों के प्रस्ताव गुवाहाटी स्थित आईसीएआर-अटारी को पहले ही भेजे जा चुके हैं। वांगसू ने कहा कि कठिन इलाके और बिखरी आबादी के कारण जमीनी स्तर पर तकनीकी मार्गदर्शन देना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जलवायु-अनुकूल और तकनीक-आधारित कृषि अर्थव्यवस्था के निर्माण में आईसीएआर को एक रणनीतिक ज्ञान भागीदार मानती है।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: देशी कीवी उत्पादन और वैज्ञानिक तकनीकों के विस्तार से बाजार में बेहतर गुणवत्ता वाले भारतीय कीवी की उपलब्धता बढ़ेगी और आयात पर निर्भरता कम होगी।\n• अरुणाचल प्रदेश में: नए कृषि विज्ञान केंद्रों और समर्पित कीवी संस्थान से स्थानीय पहाड़ी किसानों को सीधी तकनीकी सहायता, बेहतर पैदावार और उच्च आय के अवसर प्राप्त होंगे।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अरुणाचल प्रदेश समर्पित कीवी अनुसंधान संस्थान की मांग क्यों कर रहा है?\nअरुणाचल प्रदेश भारत के कुल कीवी उत्पादन का लगभग 60 प्रतिशत पैदा करता है, इसलिए पैदावार और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए एक विशेष शोध संस्थान की मांग की गई है।\n\n2. राज्य द्वारा मांगी गई कृषि कार्ययोजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?\nइसका उद्देश्य अरुणाचल प्रदेश के कठिन पर्वतीय इलाकों और बिखरी हुई ग्रामीण आबादी के लिए व्यावहारिक, समयबद्ध और परिणाम-उन्मुख वैज्ञानिक समाधान तैयार करना है।\n\n3. अरुणाचल प्रदेश के लिए कृषि रोडमैप तैयार करने की जिम्मेदारी किसे दी गई है?\n30 जून को हुई बैठकों के बाद एनईएच रीजन के लिए बने आईसीएआर अनुसंधान परिसर के निदेशक को यह कार्ययोजना तैयार करने का दायित्व सौंपा गया था।\n\n4. अरुणाचल प्रदेश ने आईसीएआर से कितने नए कृषि विज्ञान केंद्रों की मांग की है?\nराज्य ने उन जिलों के लिए 10 नए कृषि विज्ञान केंद्रों की स्वीकृति मांगी है जहां अभी यह सुविधा उपलब्ध नहीं है।\n\n5. वर्तमान में अरुणाचल प्रदेश में कितने कृषि विज्ञान केंद्र कार्यरत हैं?\nवर्तमान में अरुणाचल प्रदेश में 17 कृषि विज्ञान केंद्र संचालित हो रहे हैं।",
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  "category": "अरुणाचल प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-08-19",
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    "अरुणाचल प्रदेश",
    "आईसीएआर",
    "कीवी खेती",
    "गेब्रियल डी वांगसू",
    "कृषि विज्ञान केंद्र",
    "पर्वतीय कृषि"
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