# दिबांग वैली में मवेशियों के खुरपका-मुंहपका रोग को रोकने के लिए केंद्र और अरुणाचल सरकार का संयुक्त अभियान

> दिबांग वैली में मवेशियों के बीच खुरपका-मुंहपका रोग फैलने के बाद केंद्रीय और राज्य पशुचिकित्सा टीमों ने व्यापक रोकथाम अभियान शुरू किया है। रैपिड रिस्पॉन्स टीमें प्रभावित क्षेत्रों में बीमार पशुओं का इलाज करने के साथ-साथ सैंपल एकत्र कर रही हैं और पशुपालकों को जागरूक कर रही हैं।

**Type:** article · **Category:** अरुणाचल प्रदेश · **Published:** 2026-08-16 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/arunachal-pradesh/dibang-valley-men-maveshiyon-ke-khurapaka-munhapaka-roga-ko-rokane-ke-lie-kendra-aura-arunachal-sarakara-ka-snyukta-abhiyana-17341 · **Language:** Hindi
**Tags:** दिबांग वैली, अरुणाचल प्रदेश, खुरपका मुंहपका रोग, पशुपालन, अनिनी, मिथुन पालन

अरुणाचल प्रदेश के दिबांग वैली जिले में पालतू मवेशियों के बीच फैले खुरपका-मुंहपका रोग (FMD) को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार और राज्य प्रशासन ने एक व्यापक संयुक्त अभियान शुरू किया है। इस आपातकालीन मोर्चे पर राज्य का पशुपालन एवं पशुचिकित्सा विभाग, स्थानीय जिला प्रशासन, विशेष रैपिड रिस्पॉन्स टीमें (RRT) और केंद्र से आई विशेषज्ञ टीम मिलकर काम कर रही हैं। अभियान का मुख्य उद्देश्य बीमार पशुओं का त्वरित इलाज करना, प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ाना, संक्रमण को फैलने से रोकना और प्रयोगशाला जांच के लिए जरूरी सैंपल एकत्र करना है।

 

## विशेषज्ञ टीमों की तैनाती और मैदानी मूल्यांकन
 बीमारी के लक्षण सामने आने के तुरंत बाद जमीनी स्तर पर राहत कार्य शुरू कर दिए गए थे। जिला पशुचिकित्सा अधिकारी डॉ डी रीबा ने जानकारी दी कि ईटानगर से एक रैपिड रिस्पॉन्स टीम आवश्यक दवाओं की खेप लेकर 8 अगस्त को अनिनी पहुंची। इसके बाद स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तीन समर्पित टीमों का गठन किया गया और उन्हें प्रभावित क्षेत्रों में तैनात कर दिया गया।

 बीमारी के प्रसार का सटीक अध्ययन करने के लिए लोहित जिले के तेजू से एक जिला सूचना अधिकारी 11 अगस्त को अनिनी पहुंचे। उन्होंने मैदानी निरीक्षण करने, महामारी से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण करने और विभिन्न स्थानों से रक्त व अन्य नमूने एकत्र करने में स्थानीय टीम का मार्गदर्शन किया।

 

## केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल का प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक सर्वेक्षण
 संयुक्त आयुक्त डॉ वी के तेवतिया के नेतृत्व में केंद्र सरकार का एक उच्चस्तरीय दल 13 अगस्त को दिबांग वैली पहुंचा। इस विशेषज्ञ टीम ने 14 और 15 अगस्त को जिले के विभिन्न दुर्गम इलाकों का दौरा किया। उन्होंने अचेसो, एंग्रिम वैली, अरापो से लेकर चेगु कैंप, मिपी सर्किल, मारो, 9 किलो तथा मातु कैंप जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में जाकर स्थिति का प्रत्यक्ष जायजा लिया।

 सर्वेक्षण के दौरान पशुचिकित्सकों की टीमों ने बीमार मवेशियों का उपचार किया, पशुपालकों को दवाएं बांटीं और मिथुन, सुअर तथा बकरियों से जरूरी सैंपल लिए। जहां भी पशुओं की मौत की सूचना मिली, वहां मौत के कारणों का पता लगाने के लिए शव परीक्षण (पोस्टमार्टम) भी संपन्न कराए गए।

 

## सुरक्षा बल के शिविर का निरीक्षण और जनसंपर्क
 जैव-सुरक्षा उपायों के तहत केंद्रीय दल ने अचेसो में स्थित भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के शिविर का भी दौरा किया। वहां पाले जा रहे बकरियों के रक्त के नमूने लिए गए और सुरक्षाकर्मियों को संक्रामक बीमारियों की रोकथाम और लोक स्वास्थ्य से जुड़ी सावधानियों की जानकारी दी गई।

 इस महामारी पर काबू पाने के लिए जनभागीदारी पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों ने मिथुन पालकों, स्थानीय गाँव बूढ़ा और पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कीं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस अभियान में पूरा सहयोग दिया है। अनिनी के विधायक मोपी मिहू ने दवाएं और आवश्यक साजो-सामान उपलब्ध कराने के साथ-साथ पशुपालकों की आजीविका की सुरक्षा का आश्वासन दिया। इसके अतिरिक्त दिबांग वैली जिला परिषद अध्यक्ष साधु मिहू और अचेसो-एंग्रिम वैली जिला परिषद सदस्य एटा मिहू ने विशेषज्ञ टीम के साथ विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण कर ग्रामीणों से संवाद स्थापित कराया।

 

## प्रयोगशाला जांच और भविष्य की रोकथाम योजनाएं
 प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा करने के उद्देश्य से अधिकारियों की टीम ने अनिनी स्थित जिला पशुचिकित्सा कार्यालय, पशु औषधालय और मवेशी प्रजनन फार्म का विस्तृत निरीक्षण किया। मैदानी कार्य पूरा करने के बाद केंद्रीय टीम रविवार को एकत्र किए गए सभी सैंपलों के साथ अनिनी से रवाना हो गई, जिन्हें विस्तृत जांच के लिए उन्नत प्रयोगशालाओं में भेजा जाएगा।

 डॉ रीबा ने स्पष्ट किया कि जब तक खुरपका-मुंहपका रोग पर पूरी तरह काबू नहीं पा लिया जाता, तब तक रैपिड रिस्पॉन्स टीमें क्षेत्र में ही तैनात रहेंगी और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टीमों को भी भेजा जाएगा। पशुपालन विभाग ने दोहराया है कि वर्ष में दो बार दी जाने वाली FMD वैक्सीन ही इस संक्रामक बीमारी से बचाव का सबसे पक्का माध्यम है। विभाग ने सभी पशुपालकों से अपील की है कि वे आने वाले टीकाकरण अभियानों में सहयोग करें, बीमारी के लक्षण दिखते ही सूचना दें और स्वच्छता व पशु अपशिष्ट निपटान के नियमों का कड़ाई से पालन करें।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** पशुपालकों के लिए समय पर खुरपका-मुंहपका (FMD) का टीकाकरण कराने और जैविक सुरक्षा मानकों का पालन करने की आवश्यकता पर बल मिलता है।

  - **दिबांग वैली में:** प्रभावित मवेशियों और मिथुन को त्वरित चिकित्सा सहायता मिल रही है, जिससे स्थानीय किसानों की आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

## सवाल-जवाब

### 1. दिबांग वैली में आपातकालीन पशुचिकित्सा अभियान क्यों शुरू किया गया?
मवेशियों और मिथुन में खुरपका-मुंहपका रोग (FMD) का प्रकोप फैलने के बाद केंद्रीय और राज्य पशुचिकित्सा टीमों ने त्वरित इलाज और संक्रमण रोकने के लिए संयुक्त अभियान शुरू किया।

### 2. केंद्रीय विशेषज्ञ टीम ने किन-किन क्षेत्रों का दौरा किया?
डॉ वी के तेवतिया के नेतृत्व में टीम ने अचेसो, एंग्रिम वैली, अरापो, चेगु कैंप, मिपी सर्किल, मारो, 9 किलो और मातु कैंप का सर्वेक्षण कर पशुओं का उपचार और सैंपल कलेक्शन किया।

### 3. अभियान में स्थानीय जनप्रतिनिधियों का क्या सहयोग रहा?
अनिनी के विधायक मोपी मिहू ने दवाएं और रसद सहायता दी, जबकि जिला परिषद अध्यक्ष साधु मिहू और सदस्य एटा मिहू ने विशेषज्ञ टीम को ग्रामीणों से जोड़ने में मदद की।

### 4. खुरपका-मुंहपका रोग से बचाव का मुख्य साधन क्या है?
पशुपालन विभाग के अनुसार वर्ष में दो बार दी जाने वाली FMD वैक्सीन ही इस बीमारी से बचाव का प्राथमिक और सबसे प्रभावी उपाय है।

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