# भारत और चीन के सैन्य कमांडरों ने अरुणाचल के किबिथू में सीमा पर तनाव कम करने के लिए बैठक की

> अरुणाचल प्रदेश के किबिथू स्थित वाचा-दमई बॉर्डर पॉइंट पर रविवार को भारत और चीन के कोर कमांडरों की मुलाकात हुई, जिसमें एलएसी पर हालात की समीक्षा की गई। यह बैठक अजित डोभाल और वांग यी की बीजिंग वार्ता के कुछ दिन बाद हुई।

**Type:** article · **Category:** अरुणाचल प्रदेश · **Published:** 2026-09-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/arunachal-pradesh/india-aura-china-ke-sainya-kamandaron-ne-arunachal-ke-kibithoo-men-sima-para-tanava-kama-karane-ke-lie-baithaka-ki-29016 · **Language:** Hindi
**Tags:** भारत चीन सीमा, एलएसी, अरुणाचल प्रदेश, किबिथू, कोर कमांडर वार्ता, अजित डोभाल, वांग यी, लद्दाख गतिरोध

अरुणाचल प्रदेश के किबिथू इलाके में रविवार को भारत और चीन की सेना के बड़े अधिकारियों की मुलाकात हुई, जिसमें वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर मौजूदा हालात की समीक्षा की गई और सीमा पर शांति बनाए रखने के तरीकों पर बातचीत हुई। यह जानकारी मामले से जुड़े लोगों ने दी। जमीन पर तैनात कमांडरों के बीच होने वाली ऐसी मुलाकातें दोनों सेनाओं के लिए विवादित सीमा पर तनाव कम करने के सबसे सीधे जरियों में से एक मानी जाती हैं।

## कहां हुई बातचीत, किसने की अगुवाई
यह कोर कमांडर स्तर की बैठक किबिथू सेक्टर के वाचा-दमई सीमा बिंदु पर हुई। भारतीय पक्ष की अगुवाई लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया ने की, जो दीमापुर मुख्यालय वाली सेना की 3 कोर के कमांडर हैं। भारतीय सेना की ओर से इस बैठक को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

## बीजिंग वार्ता के तुरंत बाद हुई मुलाकात
यह सीमा बैठक ऐसे समय हुई जब कुछ दिन पहले ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी, जो दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधि के तौर पर काम करते हैं, बीजिंग में सीमा विवाद और सीमा पार सहयोग पर चर्चा कर चुके थे। रविवार की यह मुलाकात बीजिंग वार्ता के बाद इस सेक्टर में हुई पहली कोर कमांडर स्तर की बैठक थी। बीजिंग में हुई बातचीत में भारत और चीन आठ बिंदुओं पर सहमत हुए थे, जिनमें सीमा प्रबंधन मजबूत करने के मकसद से वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की मुलाकात के लिए दो और जगहों की पहचान करना भी शामिल था।

## तकसिन में तनाव की खबरें
रविवार की बातचीत ऐसी खबरों के बीच हुई जिनमें कहा गया था कि अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले के दूरदराज इलाके तकसिन में भारतीय सेना और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के जवानों के बीच तनातनी हुई है। इस इलाके में असल हालात अभी साफ नहीं हैं। मामले से जुड़े लोगों ने पहले बताया था कि तकसिन में दोनों देशों के जवानों के बीच कई बार आमना-सामना हुआ था और जुलाई के आखिर तक यह स्थिति और गंभीर हो गई थी।

## शांति की बात इतनी अहम क्यों
25 अगस्त को हुई विशेष प्रतिनिधियों की बैठक में भारत ने साफ कहा था कि भारत-चीन सीमा पर शांति बनाए रखना दोनों देशों के रिश्तों में आगे बढ़ने के लिए बेहद जरूरी है। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी ब्योरे में भी कहा गया था कि सीमावर्ती इलाकों में शांति बने रहना दोनों देशों के रिश्ते आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है। सैन्य स्तर की यह ताजा बातचीत ऐसे समय हुई है जब नई दिल्ली और बीजिंग, 2020 में पूर्वी लद्दाख में हुए सैन्य टकराव के बाद से रिश्तों को पटरी पर लाने की कोशिश में जुटे हैं। डोभाल और वांग यी की अगस्त वाली मुलाकात असल में अक्टूबर 2024 में दोनों देशों के बीच लद्दाख गतिरोध सुलझाने पर बनी सहमति के बाद हुई विशेष प्रतिनिधियों की बातचीत का तीसरा दौर थी। उस लंबे टकराव ने भारत-चीन रिश्तों को 1962 की जंग के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा दिया था।

## इसका आप पर असर
ज्यादातर पाठकों के लिए असल सवाल यह है कि भारत-चीन सीमा के इस संवेदनशील हिस्से में तनाव आगे बढ़ने से रुकेगा या नहीं।

- **भारत में:** कोर कमांडर स्तर की लगातार बातचीत उन तरीकों में से एक है जिनसे भारत-चीन के बड़े रिश्ते, जैसे व्यापार और कूटनीतिक बातचीत, सीमा पर तनाव की वजह से बिगड़ने से बचते हैं। अगर सेना के बीच यह संपर्क बना रहता है तो 2020 के लद्दाख टकराव जैसी अचानक बढ़ने वाली घटना का खतरा कम रहता है, जिसका सीधा असर देश की सुरक्षा नीति और रक्षा बजट पर पड़ता है।
- **अरुणाचल प्रदेश में:** किबिथू और अपर सुबनसिरी जिले के तकसिन इलाके के आसपास रहने वाले लोग और वहां तैनात सुरक्षाबल इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, क्योंकि जुलाई से वहां जवानों के बीच हुई आमना-सामने की घटनाओं का मतलब है ज्यादा सैन्य मौजूदगी और आवाजाही पर सख्ती। इन सीमावर्ती गांवों के आसपास रहने या जाने वालों को सेना की गतिविधियां और आवाजाही में पाबंदियां जारी रहने की उम्मीद रखनी चाहिए।
- **नीति पर नजर रखने वालों के लिए:** सैन्य कमांडरों की मुलाकात के लिए दो और जगहों पर सहमति बनने का मतलब है कि दोनों देश ज्यादा नियमित संपर्क बिंदु बना रहे हैं, यानी सीमा से जुड़ी नई जानकारियां आगे भी आधिकारिक और अनौपचारिक जरियों से आती रहेंगी।

## सवाल-जवाब

### 1. भारत-चीन के सैन्य अधिकारियों की मुलाकात कहां हुई?
यह मुलाकात रविवार को अरुणाचल प्रदेश के किबिथू सेक्टर स्थित वाचा-दमई सीमा बिंदु पर हुई।

### 2. भारतीय पक्ष की अगुवाई किसने की?
भारतीय पक्ष की अगुवाई दीमापुर मुख्यालय वाली सेना की 3 कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया ने की।

### 3. यह बैठक अभी क्यों हुई?
यह बैठक कुछ दिन पहले बीजिंग में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी की मुलाकात के बाद हुई, और तकसिन में तनाव की खबरों के बीच हुई।

### 4. तकसिन में क्या हो रहा है?
अपर सुबनसिरी जिले के दूरदराज इलाके तकसिन में भारतीय सेना और चीन की पीएलए के जवानों के बीच आमना-सामना होने की खबरें आई थीं, जो जुलाई के आखिर तक और गंभीर हो गईं, हालांकि वहां का सही मौजूदा हाल साफ नहीं है।

### 5. बीजिंग में भारत और चीन के बीच क्या सहमति बनी?
दोनों देश आठ बिंदुओं पर सहमत हुए, जिनमें वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की बैठक के लिए दो और जगहों की पहचान करना शामिल है।

### 6. क्या भारतीय सेना ने रविवार की बैठक पर आधिकारिक बयान दिया?
नहीं, भारतीय सेना की ओर से इस बैठक को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

### 7. इसका 2020 के लद्दाख गतिरोध से क्या संबंध है?
यह मुलाकात 2020 में पूर्वी लद्दाख में हुए सैन्य टकराव के बाद भारत-चीन रिश्तों को स्थिर करने की लगातार कोशिशों का हिस्सा है, जिस टकराव ने रिश्तों को 1962 की जंग के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा दिया था।

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