# जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने दिबांग घाटी में सीमावर्ती बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की

> केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने अरुणाचल प्रदेश के दिबांग घाटी जिले में जारी बुनियादी ढांचागत विकास परियोजनाओं और जनसुविधाओं की समीक्षा की। उन्होंने सीमावर्ती सड़कों, स्वास्थ्य सेवाओं और 4G कनेक्टिविटी में सुधार पर जोर दिया।

**Type:** article · **Category:** अरुणाचल प्रदेश · **Published:** 2026-10-28 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/arunachal-pradesh/jala-shakti-rajya-mntri-raj-bhushan-choudhary-ne-dibang-valley-men-simavarti-buniyadi-dhanche-aura-svasthya-sevaon-ki-samiksha-ki-52713 · **Language:** Hindi
**Tags:** राज भूषण चौधरी, दिबांग घाटी, अरुणाचल प्रदेश, अनिणि, सीमा विकास, रोइंग अनिणि बाईपास, जल शक्ति मंत्रालय

केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती जिले दिबांग घाटी का दौरा कर वहां जारी विभिन्न विकास परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लिया। अनिणि में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान मंत्री ने दुर्गम सीमांत क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और जनसुविधाओं की स्थिति में सुधार लाने पर विशेष जोर दिया।

## सीमावर्ती सड़कों और 4G नेटवर्क का विस्तार
मंगलवार को संपन्न हुई इस बैठक में केंद्रीय मंत्री ने सड़क संपर्क, चिकित्सा सेवाओं, पेयजल आपूर्ति, कृषि, बागवानी और दूरसंचार से जुड़ी परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमावर्ती सड़कों के निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए। इस दौरान प्रस्तावित रोइंग-अनिणि ग्रीनफील्ड बाईपास के काम को गति देने, दूरदराज के इलाकों में 4G कनेक्टिविटी का दायरा बढ़ाने और वन स्वीकृतियों से जुड़े लंबित मामलों को जल्द सुलझाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया ताकि निर्माण कार्य बिना किसी रुकावट के पूरे हो सकें।

## पर्यटन और कृषि क्षेत्र से आजीविका के अवसर
दिबांग घाटी की प्राकृतिक सुंदरता और कृषि संभावनाओं को रेखांकित करते हुए राज भूषण चौधरी ने स्थानीय युवाओं से इको-टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों में रोजगार तलाशने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देते समय इस क्षेत्र के प्राकृतिक संतुलन और पर्यावरण को बनाए रखना बेहद जरूरी है। कृषि और बागवानी के विकास पर बात करते हुए उन्होंने उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती को प्रोत्साहन देने, किसानों के लिए बेहतर बाजार संपर्क प्रणाली विकसित करने और कोल्ड स्टोरेज की सुविधाएं बढ़ाने की आवश्यकता बताई, जिससे किसानों की आय में सुधार हो सके।

## स्वास्थ्य और पेयजल सुविधाओं की चुनौतियों पर मंथन
बैठक में सीमांत जिले के नागरिकों को दरपेश दैनिक समस्याओं और चुनौतियों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। मंत्री ने क्षेत्र में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की सीमाओं, पीने के पानी की अधूरी व्यवस्था और नवीकरणीय ऊर्जा पहलों को आगे बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया। इस समीक्षा बैठक में उपायुक्त यशवंत मीणा, पुलिस अधीक्षक जेम्स के लेगो, अपर उपायुक्त, सर्कल अधिकारी और विभिन्न विभागों के प्रमुख शामिल हुए। चौधरी ने सभी विभागों से आपसी समन्वय के साथ काम करने का आग्रह करते हुए दोहराया कि केंद्र सरकार विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के तहत देश के अंतिम छोर पर बसे इलाकों के निवासियों का जीवन स्तर सुधारने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

## इसका आप पर असर
इस सरकारी समीक्षा का मुख्य उद्देश्य दिबांग घाटी जैसे सीमावर्ती जिले में बुनियादी सुविधाओं और जनसेवाओं के अभाव को दूर करना है।

- **भारत में:** देश के सीमांत इलाकों में बुनियादी ढांचे का विस्तार होने से राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र मजबूत होता है और दूरदराज के क्षेत्रों का मुख्यधारा से जुड़ाव बढ़ता है। इससे देश के अंतिम छोर तक सरकारी योजनाओं का समान लाभ पहुंचना सुनिश्चित होता है।
- **अरुणाचल प्रदेश (दिबांग घाटी) में:** विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती और आपातकालीन सेवाओं के सुदृढ़ीकरण से स्थानीय नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। इसके अलावा, रोइंग-अनिणि ग्रीनफील्ड बाईपास के बनने और 4G नेटवर्क का विस्तार होने से दैनिक आवागमन तथा स्थानीय व्यापार को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
विकसित भारत 2047 के विजन के तहत सीमांत इलाकों में प्रशासनिक प्रगति का आकलन करने और बुनियादी ढांचागत बाधाओं को दूर करने के लिए यह समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी।

- **सीमावर्ती बुनियादी ढांचे पर ध्यान:** दिबांग घाटी जैसे दूरदराज के क्षेत्रों में कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और अतीत से चले आ रहे अलगाव को समाप्त करने के लिए विकास कार्यों की गति तेज करना आवश्यक है।
- **विभागीय समन्वय की कमी:** निर्माण कार्यों में होने वाली देरी का मुख्य कारण अक्सर वन स्वीकृतियों का लंबित होना और विभिन्न विभागों के बीच तालमेल का अभाव होता है।
- **सामाजिक-आर्थिक आवश्यकताएं:** पर्यटन और कृषि के जरिए युवाओं को स्थानीय स्तर पर आजीविका प्रदान करने के लिए स्वास्थ्य, दूरसंचार और कोल्ड स्टोरेज जैसी प्राथमिक सुविधाओं का होना अनिवार्य है।

## सवाल-जवाब

### 1. दिबांग घाटी में समीक्षा बैठक की अध्यक्षता किसने की?
केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने इस समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।

### 2. यह उच्च स्तरीय बैठक कहां आयोजित की गई थी?
यह बैठक अरुणाचल प्रदेश के दिबांग घाटी जिले में स्थित अनिणि में आयोजित की गई थी।

### 3. किस प्रमुख सड़क परियोजना के निर्माण में तेजी लाने पर जोर दिया गया?
प्रस्तावित रोइंग-अनिणि ग्रीनफील्ड बाईपास परियोजना के निर्माण कार्य को जल्द से जल्द गति देने का निर्देश दिया गया।

### 4. स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में किन मुख्य समस्याओं पर चर्चा हुई?
बैठक के दौरान विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में मौजूद कमियों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

### 5. मंत्री के अलावा इस बैठक में कौन-कौन से वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे?
बैठक में उपायुक्त यशवंत मीणा, पुलिस अधीक्षक जेम्स के लेगो, अपर उपायुक्त, सर्कल अधिकारी और विभिन्न विभागों के प्रमुख मौजूद थे।

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