पूर्वोत्तर में बिजली ढांचे को मजबूत करने के लिए चौना मीन ने मनोहर लाल खट्टर से मांगी मदद अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चौना मीन ने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर से पूर्वोत्तर में पावर इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रांसमिशन नेटवर्क के आधुनिकीकरण के लिए वित्तीय मदद जारी रखने की अपील की है। पूर्वोत्तर भारत में विद्युत वितरण नेटवर्क को सुदृढ़ और आधुनिक बनाने के प्रयासों को गति देने के लिए मंगलवार को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक के दौरान अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चौना मीन ने केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात की और क्षेत्र के ऊर्जा ढांचे के आधुनिकीकरण के लिए केंद्र सरकार से निरंतर वित्तीय सहायता प्रदान करने का आग्रह किया। यह मांग ऐसे समय में की गई है जब राज्य अपनी ऊर्जा उत्पादन क्षमता को तेजी से बढ़ा रहा है, जिससे एक मजबूत और आधुनिक ट्रांसमिशन नेटवर्क की आवश्यकता अधिक प्रासंगिक हो गई है। पूर्वोत्तर ग्रिड के आधुनिकीकरण के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता की मांग पूर्वोत्तर राज्यों की संयुक्त चिंताओं और जरूरतों को पूर्वोत्तर क्षेत्रीय विद्युत समिति (NERPC) के माध्यम से केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखा गया। इस महत्वपूर्ण बैठक में क्षेत्र के विभिन्न राज्यों के ऊर्जा मंत्रियों के साथ-साथ मेघालय के बिजली मंत्री और NERPC के अध्यक्ष मेतबाह लिंगदोह भी उपस्थित थे। प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय विद्युत मंत्रालय से मांग की कि वह क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रणाली सुधार और आधुनिक तकनीकों को लागू करने के लिए वित्तीय मदद जारी रखे। बैठक में सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन/एनर्जी मैनेजमेंट सिस्टम (SCADA/EMS) और इमरजेंसी रिस्टोरेशन सिस्टम (ERS) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को लागू करने पर विशेष जोर दिया गया। चौना मीन ने स्पष्ट किया कि संपूर्ण पूर्वोत्तर के बिजली ग्रिड की विश्वसनीयता, सुरक्षा और सहनशीलता को बढ़ाने के लिए ये तकनीकी उपाय बेहद जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि एक मजबूत विद्युत नेटवर्क ही पूर्वोत्तर भारत में आर्थिक प्रगति, बेहतर कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे के विकास के नए चरण का मुख्य आधार बनेगा। किमिन में बिजली संकट दूर करने के लिए विशेष बुनियादी ढांचा परियोजनाएं क्षेत्रीय मुद्दों के अलावा, उपमुख्यमंत्री चौना मीन ने अरुणाचल प्रदेश की स्थानीय विद्युत समस्याओं के समाधान पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने किमिन में 132/33 केवी (kV) सबस्टेशन और उससे जुड़ी लूप इन-लूप आउट (LILO) ट्रांसमिशन लाइनों के निर्माण से जुड़ी प्राथमिकता वाली परियोजना को तुरंत पूरा करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस कदम का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही बिजली कटौती और वोल्टेज की अस्थिरता को समाप्त करना है। वर्तमान समय में किमिन और आसपास के क्षेत्र 33 केवी के एक लंबे फीडर पर निर्भर हैं, जिसकी तकनीकी सीमाओं के कारण स्थानीय निवासियों को बार-बार वोल्टेज के उतार-चढ़ाव और अघोषित बिजली कटौती का सामना करना पड़ता है। चौना मीन ने कहा कि 132/33 केवी सबस्टेशन और LILO लाइन परियोजना के शुरू होने से इन ढांचागत बाधाओं को दूर किया जा सकेगा, जिससे नागरिकों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी। जलविद्युत क्षमता का दोहन और ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार अरुणाचल प्रदेश के बिजली और जलविद्युत विभागों का प्रभार संभाल रहे चौना मीन ने राज्य में जलविद्युत की विशाल संभावनाओं और आगामी विद्युत परियोजनाओं की रूपरेखा भी पेश की। राज्य में कई नई बिजली उत्पादन परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं, जो आने वाले समय में चालू होने वाली हैं। ऐसे में उत्पादित बिजली की सुगम निकासी के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क का समय पर विस्तार और सुदृढ़ीकरण अनिवार्य हो गया है। उन्होंने कहा कि आने वाले बिजली संयंत्रों से उत्पादित ऊर्जा को क्षेत्रीय ग्रिड में सुचारू रूप से स्थानांतरित करने के लिए एक आधुनिक ट्रांसमिशन अवसंरचना का होना अत्यंत आवश्यक है। मजबूत ग्रिड और ट्रांसमिशन नेटवर्क न केवल राज्य की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि अरुणाचल प्रदेश और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र को बुनियादी ढांचा संचालित विकास और औद्योगिक समृद्धि के नए युग में ले जाने में अहम भूमिका निभाएगा। इसका आप पर असर • भारत में: पूर्वोत्तर भारत में पावर ग्रिड मजबूत होने से राष्ट्रीय ग्रिड की स्थिरता बढ़ेगी और स्वच्छ जलविद्युत ऊर्जा की आपूर्ति सुगम होगी। • अरुणाचल प्रदेश में: किमिन और आसपास के इलाकों में वोल्टेज की समस्या और बार-बार होने वाली बिजली कटौती से राहत मिलेगी। सवाल-जवाब 1. नई दिल्ली में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ बैठक में कौन-कौन शामिल हुए? बैठक में अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चौना मीन, पूर्वोत्तर क्षेत्रीय विद्युत समिति (NERPC) के अध्यक्ष एवं मेघालय के बिजली मंत्री मेतबाह लिंगदोह और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के ऊर्जा मंत्री शामिल हुए। 2. पूर्वोत्तर राज्यों ने बैठक के दौरान केंद्र सरकार से क्या मुख्य मांग रखी? पूर्वोत्तर राज्यों ने ऊर्जा ढांचे के आधुनिकीकरण और SCADA/EMS तथा ERS जैसी प्रणाली सुधार परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए विद्युत मंत्रालय से वित्तीय सहायता जारी रखने का आग्रह किया। 3. चौना मीन ने अरुणाचल प्रदेश के किमिन क्षेत्र के लिए किस विशेष परियोजना पर जोर दिया? उन्होंने किमिन में 132/33 केवी (kV) सबस्टेशन और उससे जुड़ी लूप इन-लूप आउट (LILO) ट्रांसमिशन लाइनों के निर्माण की परियोजना को प्राथमिकता देने की बात कही। 4. किमिन में नया सबस्टेशन प्रोजेक्ट क्यों जरूरी है? वर्तमान में काम कर रहे 33 केवी के लंबे फीडर की सीमाओं के कारण होने वाली बार-बार की बिजली कटौती और वोल्टेज उतार-चढ़ाव की समस्या को हल करने के लिए यह परियोजना आवश्यक है। 5. अरुणाचल प्रदेश को उन्नत ट्रांसमिशन नेटवर्क की आवश्यकता क्यों है? राज्य में आगामी जलविद्युत परियोजनाओं से उत्पन्न होने वाली बिजली की सुगम निकासी और ग्रिड को सुरक्षित रखने के लिए उन्नत ट्रांसमिशन नेटवर्क आवश्यक है। https://trendkia.com/arunachal-pradesh/northeast-men-bijali-dhanche-ko-majabuta-karane-ke-lie-chowna-mein-ne-manohar-lal-khattar-se-mangi-madada-22297 TrendKia — Har trend, sabse pehle.