पेमा खांडू ने अरुणाचल के मछली पालकों को दिए इलेक्ट्रिक रिक्शा, बिचौलियों से मिलेगी राहत अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने नाहरलागुन में मत्स्य ई-वाहिनी योजना के तहत इलेक्ट्रिक रिक्शा लॉन्च किए, ताकि मछली पालक नए बाजारों तक पहुंच सकें और बिचौलियों पर निर्भरता घटे। अरुणाचल प्रदेश के मछली पालकों को अब अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने के लिए एक नया साधन मिल गया है। मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने सोमवार को नाहरलागुन में एक कार्यक्रम के दौरान मत्स्य ई-वाहिनी नाम की योजना के तहत इलेक्ट्रिक ई-रिक्शा का बेड़ा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह योजना उस पुरानी दिक्कत को दूर करने के मकसद से लाई गई है, जिसमें ताजा मछली को अच्छे दाम देने वाले खरीदारों तक पहुंचाने से पहले ही उसकी कीमत रास्ते में गिर जाती थी। मछली पालकों के लिए ई-रिक्शा क्यों जरूरी थे तालाबों और फार्म से मछली को बाजार तक ले जाने के लिए अब तक किसान महंगे या भरोसेमंद न होने वाले साधनों पर निर्भर रहते थे, जिसकी वजह से उन्हें अक्सर पास के बिचौलिए को ही जल्दी और सस्ते दाम पर माल बेचना पड़ता था। मत्स्य ई-वाहिनी के वाहन किसानों को अपना सस्ता और बैटरी से चलने वाला परिवहन साधन देकर यह तस्वीर बदलने की कोशिश करते हैं, ताकि वे अपनी उपज दूर तक ले जा सकें, बेचने की जगह खुद तय कर सकें और मोलभाव में मजबूत स्थिति में रहें। इको फ्रेंडली वाहनों से क्या बदलाव आएगा राज्य सरकार के मुताबिक, ये इलेक्ट्रिक रिक्शा मछली पालकों को अपने इलाके से बाहर के बाजारों तक पहुंचने, सीधे ग्राहकों को माल बेचने और बिचौलियों पर निर्भरता घटाने में मदद करेंगे, जो आमतौर पर बिक्री कीमत का एक हिस्सा अपने पास रख लेते हैं। अधिकारियों ने बताया कि बेहतर परिवहन और सीधी बाजार पहुंच किसानों को ढुलाई से जुड़ी दिक्कतों से निपटने और अपनी उपज का बेहतर दाम पाने में मदद करेगी, वहीं इको फ्रेंडली वाहनों के इस्तेमाल से मछली पालन से जुड़ी ढुलाई भी साफ-सुथरी और टिकाऊ बनेगी। खांडू ने सोशल मीडिया पर क्या लिखा पेमा खांडू ने एक्स पर लिखा, "मत्स्य ई-वाहिनी और ई-रिक्शा पहल की शुरुआत की, ताकि हमारे मछली पालकों को बाजार तक बेहतर पहुंच और अपनी आमदनी बढ़ाने के मजबूत मौके मिल सकें।" कार्यक्रम में 12 किसान सम्मानित नाहरलागुन के इस कार्यक्रम में 12 प्रगतिशील मछली पालकों को भी सम्मानित किया गया। इन्हें उनकी मेहनत, नयापन और आधुनिक मछली पालन तरीकों को अपनाने के लिए चुना गया। अधिकारियों ने कहा कि इनका उदाहरण राज्य के बाकी मछली पालकों को भी नए तरीके और तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित कर सकता है। उसी दिन किसानों के लिए नया हब भी शुरू उसी दिन खांडू ने नाहरलागुन में राज्य कृषि सूचना हब-सह-किसान छात्रावास का भी उद्घाटन किया। यह केंद्र किसानों को कृषि से जुड़ी जानकारी और बाकी जरूरी सुविधाएं एक ही जगह देने के मकसद से बनाया गया है, ताकि शहर आने पर उन्हें मार्गदर्शन के लिए एक तय ठिकाना मिल सके। कृषि और मत्स्य पालन को आधुनिक बनाने की बड़ी कोशिश का हिस्सा ये दोनों पहल राज्य सरकार की उस बड़ी योजना का हिस्सा हैं, जिसके तहत अरुणाचल प्रदेश में खेती और मछली पालन को आधुनिक बनाकर किसानों की कमाई के मौके बढ़ाए जा रहे हैं। मत्स्य ई-वाहिनी योजना असल में एक कल्याणकारी और स्वरोजगार योजना है, जिसमें इलेक्ट्रिक ई-रिक्शा के साथ-साथ इको फ्रेंडली मोबाइल फिश वेंडिंग कियोस्क भी शामिल किए गए हैं, ताकि राज्य में मछली की मार्केटिंग और वितरण व्यवस्था मजबूत हो सके। अधिकारियों ने बताया कि परिवहन और मार्केटिंग ढांचे में यह सुधार उत्पादकों को ग्राहकों से सीधे जोड़ने और मछली पालन की पूरी वैल्यू चेन को बेहतर बनाने में मदद करेगा, और नया सूचना हब भी ग्रामीण आजीविका के लिए मजबूत सहयोग व्यवस्था बनाने की इसी कोशिश का हिस्सा है। इसका आप पर असर यह योजना नाहरलागुन और अरुणाचल प्रदेश के मछली पालकों के लिए सीधा आर्थिक फायदा लेकर आई है, साथ ही यह भी दिखाती है कि परिवहन आधारित मॉडल दूसरे राज्य भी अपना सकते हैं। • भारत में: यह लॉन्च उस बढ़ते रुझान का हिस्सा है, जिसमें राज्य सरकारें छोटे किसानों की आखिरी छोर तक की ढुलाई की दिक्कत सुलझाने के लिए सस्ते इलेक्ट्रिक वाहनों का सहारा ले रही हैं। अगर अरुणाचल प्रदेश में यह मॉडल कामयाब रहता है, तो बाकी राज्यों में भी मछली या दूसरी उपज के किसानों के लिए ऐसी ई-रिक्शा या ई-वेंडिंग योजनाएं अपनाई जा सकती हैं। • नाहरलागुन और अरुणाचल प्रदेश में: यहां के मछली पालक अब मत्स्य ई-वाहिनी के रिक्शों से अपनी मछली दूर के बाजारों तक ले जा सकते हैं या सीधे ग्राहकों को बेच सकते हैं, बजाय इसके कि पास के व्यापारियों को कम दाम पर बेचना पड़े। वाहन या नाहरलागुन के नए राज्य कृषि सूचना हब-सह-किसान छात्रावास का फायदा लेने के इच्छुक किसान पात्रता जानने के लिए राज्य के कृषि या मत्स्य विभाग से संपर्क कर सकते हैं। • सम्मानित 12 किसानों के लिए: कार्यक्रम में मिली पहचान से उन्हें आगे सरकारी मदद या मॉडल किसान के तौर पर पहचान मिल सकती है, और बाकी किसान उनके तरीकों को आधुनिक मछली पालन अपनाने के व्यावहारिक उदाहरण के तौर पर देख सकते हैं। सवाल-जवाब 1. मत्स्य ई-वाहिनी योजना क्या है? यह अरुणाचल प्रदेश सरकार की एक योजना है जिसके तहत मछली पालकों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने के लिए इलेक्ट्रिक रिक्शा दिए जा रहे हैं। 2. योजना की शुरुआत कब और कहां हुई? मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने सोमवार को नाहरलागुन में इसे लॉन्च किया। 3. इस योजना से मछली पालकों को क्या फायदा होगा? वे नए बाजारों तक पहुंच सकेंगे, सीधे ग्राहकों को बेच सकेंगे और बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी। 4. कार्यक्रम में और क्या हुआ? 12 प्रगतिशील मछली पालकों को सम्मानित किया गया और राज्य कृषि सूचना हब-सह-किसान छात्रावास का उद्घाटन हुआ। 5. मत्स्य-वाहिनी योजना में क्या शामिल है? इसमें इलेक्ट्रिक ऑटोरिक्शा के साथ इको फ्रेंडली मोबाइल फिश वेंडिंग कियोस्क भी शामिल हैं। 6. नया हब किसानों की कैसे मदद करेगा? यह किसानों को कृषि से जुड़ी जानकारी और जरूरी सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध कराएगा। https://trendkia.com/arunachal-pradesh/pema-khandu-ne-arunachal-ke-machhali-palakon-ko-die-ilektrika-riksha-bichauliyon-se-milegi-rahata-28941 TrendKia — Har trend, sabse pehle.