# तवांग में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन: मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने वैश्विक शांति के लिए बुद्ध के मध्यम मार्ग को अपनाने पर दिया जोर

> अरुणाचल प्रदेश के तवांग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन में मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने दुनिया भर में बढ़ते तनाव के बीच भगवान बुद्ध की करुणा और मध्यम मार्ग की सीख को अपनाने का आह्वान किया।

**Type:** article · **Category:** अरुणाचल प्रदेश · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/arunachal-pradesh/tawang-men-antararashtriya-bauddha-sammelana-mukhyamntri-pema-khandu-ne-vaishvika-shanti-ke-lie-buddha-ke-madhyama-marga-ko-apanan-55655 · **Language:** Hindi
**Tags:** पेमा खांडू, तवांग, अरुणाचल प्रदेश, बौद्ध धर्म, अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ, भगवान बुद्ध, तवांग मठ

दुनिया भर में फैलते तनाव, असहिष्णुता और विभाजनकारी प्रवृत्तियों के बीच भगवान बुद्ध के विचार आज भी पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शन का सबसे बड़ा जरिया हैं। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया है कि वैश्विक शांति और आपसी सद्भाव की स्थापना के लिए बुद्ध की शिक्षाओं, विशेष रूप से करुणा, ज्ञान और मध्यम मार्ग को दैनिक जीवन में अपनाना बेहद जरूरी है। वे तवांग स्थित कलावंगपो हॉल में आयोजित एक उच्चस्तरीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।

 

## तवांग में जुटा अंतरराष्ट्रीय बौद्ध विद्वानों का मंच

सोमवार को तवांग में 'बौद्ध धर्म: हिमालयी क्षेत्र और उससे आगे प्रसार' विषय पर एक विशेष अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत हुई। इस गरिमामयी आयोजन की व्यवस्था अरुणाचल प्रदेश सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के साथ मिलकर की है, जिसमें केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय का भी पूर्ण सहयोग शामिल रहा। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा मंगलवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, खांडू ने इस बात को रेखांकित किया कि भगवान बुद्ध के संदेश मानव समाज के समग्र कल्याण और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के लिए एक स्थायी दार्शनिक आधार तैयार करते हैं।

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 सम्मेलन के महत्व को साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने X पर लिखा कि इस ऐतिहासिक विरासत की सुरक्षा केवल स्मारकों के संरक्षण तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य करुणा, नीतिपरक आचरण और शांतिपूर्ण जीवन के मूल्यों को वास्तव में जीने में तब्दील होना चाहिए।

 

## आध्यात्मिक विरासत का जीवंत केंद्र और पवित्र अवशेष

तवांग के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने इस सीमांत जिले को बौद्ध संस्कृति का एक अत्यंत समृद्ध और जीवंत केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि सदियों पुराना तवांग मठ लंबे अरसे से बौद्ध दर्शन, ज्ञान और शिक्षा के प्रकाश स्तंभ के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि इस बार यह अंतरराष्ट्रीय आयोजन क्षेत्र के लिए और भी अधिक पवित्र बन गया है, क्योंकि वर्तमान समय में भगवान बुद्ध के पावन अवशेष स्वयं तवांग शहर में दर्शनार्थ मौजूद हैं।

 खांडू ने स्पष्ट किया कि बौद्ध दर्शन केवल एक पारंपरिक धर्म नहीं है, बल्कि यह प्रज्ञा, करुणा और मध्यम मार्ग पर आधारित जीवन जीने की एक संपूर्ण वैज्ञानिक और नैतिक शैली है। उनके अनुसार, पूरे तवांग और आसपास की घाटियों में फैले मठ, ननरी, मंदिर और ध्यान केंद्र महज पूजा-अर्चना के स्थल नहीं हैं, बल्कि वे सदियों से ज्ञान, दर्शन और शिक्षण के ऐसे सशक्त संस्थान रहे हैं जिन्होंने इस पूरे हिमालयी भूभाग की अनमोल सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखा है।

 

## विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की आवश्यकता

अरुणाचल प्रदेश को सदियों से बौद्ध दर्शन, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं के आदान-प्रदान का एक सजीव सेतु बताते हुए मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के संकल्प को दोहराया। उन्होंने बल देकर कहा कि आधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण और आर्थिक विकास इस तरह आगे बढ़ना चाहिए जिससे स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं और नाजुक हिमालयी पर्यावरण की सुरक्षा पर कोई आंच न आए। उन्होंने कहा कि यह बौद्ध विरासत केवल आंतरिक आत्मबल का स्रोत नहीं है, बल्कि यह विभिन्न समुदायों, राष्ट्रों और सभ्यताओं को परस्पर जोड़ने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण कड़ी भी है।

 सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के महासचिव शारत्से खेनसुर रिनपोछे चांगचुप छोएदेन और तवांग गादेन नामग्याल ल्हात्से मठ के मठाधीश रेव द्रमेद सुनग्राब तुल्कु ने भी अपने महत्वपूर्ण विचार रखे। उद्घाटन सत्र के समापन के बाद विभिन्न तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इनमें पहले एक विशेष परिचर्चा हुई जिसमें अरुणाचल प्रदेश, दिल्ली, श्रीलंका और म्यांमार के वक्ताओं ने भाग लिया। इसके बाद के सत्रों में जर्मनी, इंडोनेशिया, नेपाल, मलेशिया सहित भारत के अलग-अलग हिस्सों से आए प्रख्यात विद्वानों और विचारकों ने भावी पीढ़ियों तक बुद्ध के विचारों को पहुंचाने पर गहन मंथन किया।

## इसका आप पर असर
यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन हिमालयी सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर मजबूत करता है और क्षेत्र में आध्यात्मिक पर्यटन व संवाद को नई गति देता है।

- **भारत में:** देश की प्राचीन बौद्ध धरोहर और कूटनीतिक सॉफ्ट पावर को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत पहचान मिलती है। इससे दुनिया भर के देशों के साथ भारत के सदियों पुराने सांस्कृतिक और दार्शनिक संबंध और अधिक प्रगाढ़ होते हैं।
- **अरुणाचल प्रदेश में:** तवांग जैसे सीमांत पर्वतीय क्षेत्रों में आध्यात्मिक पर्यटन, स्थानीय हस्तशिल्प और आतिथ्य सत्कार से जुड़े रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे। इसके साथ ही सीमावर्ती इलाकों में सांस्कृतिक संरक्षण और बुनियादी ढांचे के विकास के बीच संतुलित तालमेल सुनिश्चित होगा।
- **छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए:** हिमालयी दर्शन और बौद्ध पांडुलिपियों पर अध्ययन करने वाले अध्येताओं को अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ सीधा अकादमिक संपर्क बनाने का मौका मिलता है। इससे प्राचीन पांडुलिपियों और ऐतिहासिक मठों के संरक्षण में मदद मिलेगी।
- **स्थानीय नागरिकों के लिए:** तवांग में पवित्र अवशेषों की उपस्थिति और विद्वानों के समागम से क्षेत्र की पहचान एक सुरक्षित और समृद्ध सांस्कृतिक तीर्थस्थल के रूप में सुदृढ़ होती है। इससे स्थानीय युवाओं को अपनी अनूठी विरासत से जुड़ने की नई प्रेरणा मिलेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन बढ़ते वैश्विक संघर्षों के बीच शांति के प्राचीन भारतीय दर्शन को रेखांकित करने और हिमालयी बौद्ध विरासत के संरक्षण के साझा प्रयासों के तहत आयोजित किया गया है।

- **वैश्विक तनाव और संघर्ष:** वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में बढ़ती असहिष्णुता, युद्ध और वैचारिक टकराव के समाधान के रूप में बौद्ध दर्शन के अहिंसा और मध्यम मार्ग को एक व्यावहारिक उत्तर माना जा रहा है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए वैश्विक विचारकों को एक मंच पर लाया गया।
- **सांस्कृतिक व ऐतिहासिक संबंध:** अरुणाचल प्रदेश और हिमालयी क्षेत्र सदियों से तिब्बत, मध्य एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच विचारों के आदान-प्रदान के केंद्र रहे हैं। राज्य सरकार और अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ ने इस ऐतिहासिक सेतु को आधुनिक समय में भी जीवंत रखने के लिए हाथ मिलाया है।
- **पवित्र अवशेषों की मेजबानी:** तवांग में भगवान बुद्ध के पावन अवशेषों के आगमन ने इस अंतरराष्ट्रीय सभा के आयोजन को एक विशेष आध्यात्मिक संदर्भ प्रदान किया, जिससे दुनिया भर के भिक्षुओं और विद्वानों की भागीदारी संभव हो सकी।

## सवाल-जवाब

### 1. तवांग में किस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया गया?
तवांग के कलावंगपो हॉल में 'बौद्ध धर्म: हिमालयी क्षेत्र और उससे आगे प्रसार' विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन हुआ।

### 2. इस सम्मेलन का आयोजन किन संस्थाओं ने मिलकर किया है?
यह सम्मेलन अरुणाचल प्रदेश सरकार और अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ द्वारा केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से आयोजित किया गया है।

### 3. मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने वैश्विक शांति के लिए किन बौद्ध मूल्यों पर जोर दिया?
उन्होंने वैश्विक संघर्षों के समाधान के लिए भगवान बुद्ध की करुणा, प्रज्ञा और मध्यम मार्ग की शिक्षाओं को अपनाने का आह्वान किया।

### 4. सम्मेलन के दौरान तवांग में कौन सा विशेष आध्यात्मिक आयोजन हो रहा है?
सम्मेलन के समय भगवान बुद्ध के पावन अवशेष विशेष रूप से तवांग शहर में दर्शनार्थ रखे गए हैं।

### 5. इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में किन देशों के प्रतिनिधियों और विद्वानों ने भाग लिया?
इसमें भारत के अलावा श्रीलंका, म्यांमार, जर्मनी, इंडोनेशिया, नेपाल और मलेशिया के विद्वान व विशेषज्ञ शामिल हुए।

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