इजरायल में नई सरकार पर एविगडोर लिबरमैन की दो टूक, नेतन्याहू और अहमद तिबी दोनों से बनाई दूरी इजरायल के संसदीय चुनाव के बाद सरकार बनाने को लेकर जारी खींचतान के बीच यिस्राएल बेतेनु प्रमुख एविगडोर लिबरमैन ने बेंजामिन नेतन्याहू और अरब पार्टियों के साथ गठबंधन करने से साफ इनकार कर दिया है। इजरायल में हालिया संसदीय चुनाव संपन्न होने के बाद नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक गतिरोध गहराता जा रहा है। यिस्राएल बेतेनु पार्टी के नेता एविगडोर लिबरमैन ने स्पष्ट शब्दों में घोषणा की है कि वह प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू या जॉइंट लिस्ट के प्रमुख अहमद तिबी में से किसी के साथ भी हाथ नहीं मिलाएंगे। पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए लिबरमैन ने जोर देकर कहा कि चुनाव से पहले लिया गया उनका यह फैसला अब और अधिक दृढ़ हो चुका है। नेतन्याहू को इजरायली सियासत में आम तौर पर 'बीबी' के नाम से जाना जाता है, और लिबरमैन के इस रुख ने संसद में बहुमत जुटाने के समीकरणों को बेहद पेचीदा बना दिया है। वर्तमान राजनीतिक हालात पर लिबरमैन का रुख संसदीय चुनाव के नतीजों के बाद उपजी अनिश्चितता पर बात करते हुए एविगडोर लिबरमैन ने कहा कि इस समय जेरूसलम में कई तेजी से बदलते घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। उनका मानना है कि जल्दबाजी में कोई भी कदम उठाने के बजाय स्थिति के सामान्य और स्पष्ट होने का इंतजार करना सबसे बेहतर रणनीति होगी। लिबरमैन का पुराना स्टैंड रहा है कि वह न तो बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में शामिल होंगे और न ही ऐसे किसी गठबंधन का हिस्सा बनेंगे जिसे सत्ता चलाने के लिए अरब राजनीतिक दलों की बैसाखियों की जरूरत पड़े। राष्ट्रीय सुरक्षा और मतदान से पहले का विजन मतदान से पहले के प्रचार अभियान के दौरान भी लिबरमैन ने विपक्षी खेमे के उस रुख का खुलकर समर्थन किया था, जिसमें मौजूदा प्रधानमंत्री को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा करार दिया गया था। मतदाताओं से अपील करते हुए उन्होंने कहा था कि बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ दिया गया हर वोट वास्तव में एक मजबूत इजरायल के निर्माण की दिशा में उठाया गया कदम होगा। वोटिंग से महज एक दिन पहले उन्होंने अपने पोते के साथ एक तस्वीर साझा करते हुए देश के सामाजिक और लोकतांत्रिक ढांचे को लेकर एक भावनात्मक संदेश भी जनता के सामने रखा था। पोते के भविष्य को लेकर सामाजिक संदेश अपने संदेश में लिबरमैन ने देश की व्यवस्था में बुनियादी बदलावों की वकालत की थी। उन्होंने लिखा था कि उनका प्यारा पोता एक समृद्ध, जायोनी, समझदार और मजबूत इजरायल में बड़ा होगा, जहां हर नागरिक सेना या नागरिक सेवा में अपनी बराबर जिम्मेदारी निभाएगा और कानून के समक्ष सभी एक समान होंगे। इसके साथ ही उन्होंने नागरिक विवाह की अनुमति देने, सभी बच्चों को अनिवार्य आधुनिक पाठ्यक्रम पढ़ाने और आम लोगों पर किसी भी तरह की कट्टर विचारधारा या व्यवस्था जबरन न थोपने की बात कही थी। बेंजामिन नेतन्याहू के विपक्ष पर तीखे आरोप दूसरी तरफ, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने विपक्षी दलों की लामबंदी पर कड़ा प्रहार किया है। उनका तर्क है कि विरोधी दलों का एकमात्र साझा एजेंडा उन्हें किसी भी तरह सत्ता की कुर्सी से बाहर रखना है। नेतन्याहू ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को एक वामपंथी झुकाव वाले समूह के तौर पर चित्रित किया और चेतावनी दी कि यदि वे सरकार बनाने की कोशिश करेंगे, तो उन्हें अनिवार्य रूप से अरब पार्टियों पर निर्भर होना पड़ेगा। देर रात सोशल मीडिया पर अपने विचार रखते हुए नेतन्याहू ने दावा किया कि उनके राजनीतिक विरोधी देश की सुरक्षा नीतियों को कमजोर कर सकते हैं। चुनाव में विदेशी दखल और शिन बेट की जांच सरकार गठन की इस रस्साकशी के बीच इजरायल की सुरक्षा एजेंसी शिन बेट ने हालिया आम चुनाव में कथित विदेशी दखलंदाजी के आरोपों की व्यापक जांच शुरू कर दी है। यह मामला तब अचानक गरमा गया जब केंद्रीय चुनाव समिति के प्रमुख और न्यायाधीश नोआम सोलबर्ग ने शिन बेट प्रमुख डेविड जिनी को एक औपचारिक पत्र भेजकर चुनावी प्रक्रिया की शुचिता की गहन पड़ताल करने का निर्देश दिया। सुरक्षा अधिकारी इस बात की विशेष जांच कर रहे हैं कि क्या चुनाव प्रक्रिया के दौरान कतर से जुड़े तत्वों का कोई अनुचित प्रभाव या विदेशी हस्तक्षेप मौजूद था। नेतन्याहू ने घटनाक्रम को बताया चुनावी भूकंप विदेशी दखल की जांच शुरू होने पर बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे राजनीतिक हलकों के लिए एक बड़ा भूकंप करार दिया है। उन्होंने सभी जायोनी दलों से अपील की है कि वे अरब पार्टियों के साथ किसी भी स्तर पर साझेदारी न करें। नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि न्यायाधीश सोलबर्ग के बयानों से संकेत मिलता है कि बाहरी ताकतों ने मतदाताओं को प्रभावित करने और उन्हें रिश्वत देने का प्रयास किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य दक्षिणपंथी शासन को गिराकर नेसेट पर कब्जा जमाना और सेना को विभिन्न मोर्चों, विशेषकर ईरान के खिलाफ अभियान में पीछे धकेलना है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों से त्वरित कार्रवाई की मांग नेतन्याहू ने जोर देकर कहा कि जब यह बात सतह पर आ चुकी है कि बाहरी ताकतों ने नेसेट पर प्रभाव डालने की कोशिश की, तो किसी भी जायोनी समूह को रआम या जॉइंट लिस्ट का सहारा नहीं लेना चाहिए। उन्होंने धनबल के सहारे नेसेट के स्पीकर को बदलने या देश के लिए जोखिम भरी सरकार बनाने के प्रयासों की निंदा की। प्रधानमंत्री ने मांग उठाई कि शिन बेट और इजरायली पुलिस को अपने सभी उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए इन गंभीर चुनावी अपराधों की जांच में बिना किसी देरी के तेजी लानी चाहिए। विपक्ष का पलटवार और जांच प्रक्रिया का समर्थन नेतन्याहू के इन बयानों के बाद विपक्षी खेमे ने उन पर चुनावी व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थानों पर अविश्वास पैदा करने की कोशिश का आरोप लगाया। हालांकि, निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विपक्ष ने भी किसी भी वास्तविक संदेह की पूरी पड़ताल का समर्थन किया है। खुद एविगडोर लिबरमैन ने न्यायाधीश सोलबर्ग के पत्र को एक नाटकीय और अभूतपूर्व कदम बताते हुए कहा कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों को तेजी से काम करना चाहिए ताकि सच्चाई जल्द से जल्द देश के सामने आ सके। 26वीं नेसेट के गठन को लेकर गादी आइजनकोट का बयान इस पूरे घटनाक्रम पर याशर पार्टी के प्रमुख और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजनकोट ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि शिन बेट की जांच अपनी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत चलती रहनी चाहिए, लेकिन इसकी आड़ में किसी भी पक्ष को 26वीं नेसेट के विधिवत गठन में बेवजह रुकावट डालने या देरी करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। उल्लेखनीय है कि मतदान संपन्न होने के बाद सामने आए एग्जिट पोल्स में भी किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलता दिखाई नहीं दिया था, जिससे जेरूसलम में राजनीतिक गतिरोध लगातार जटिल बना हुआ है। इसका आप पर असर इजरायल में नई सरकार के गठन को लेकर जारी गतिरोध और चुनावी जांच का असर मध्य पूर्व की कूटनीति और वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिरता पर सीधे तौर पर पड़ सकता है। • वैश्विक कूटनीति पर: इजरायल में स्थिर सरकार न बनने से क्षेत्रीय शांति प्रयासों और कूटनीतिक समझौतों में देरी हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को नीतिगत निर्णयों के लिए जेरूसलम में नेतृत्व की स्थिति स्पष्ट होने की प्रतीक्षा करनी होगी। • सुरक्षा नीतियों पर: चुनावी गतिरोध के चलते ईरान और अन्य मोर्चों पर इजरायल की रणनीतिक दिशा को लेकर अनिर्णय की स्थिति बन सकती है। अंतरिम व्यवस्था के कारण बड़े सैन्य और रक्षा संबंधी नीतिगत फैसलों में विलंब देखा जा सकता है। • प्रवासी समुदाय पर: इजरायल में रहने वाले विभिन्न देशों के नागरिकों और कामगारों के लिए वीजा या प्रशासनिक नीतियों में तुरंत कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। हालांकि संसद की कार्यवाही शुरू होने तक नए विधायी सुधार और नागरिक कानून लटके रहेंगे। • चुनावी शुचिता पर: शिन बेट द्वारा विदेशी दखल की जांच से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की सुरक्षा को लेकर नई बहस छिड़ गई है। भविष्य में चुनावी सुरक्षा प्रोटोकॉल को और अधिक सख्त बनाने के लिए कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ इजरायल में संसदीय चुनाव के बाद किसी भी प्रमुख राजनीतिक गुट को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने और पुरानी राजनीतिक असहमतियों के कारण यह संकट पैदा हुआ है। • खंडित जनादेश: चुनाव नतीजों और एग्जिट पोल्स में दक्षिणपंथी या विपक्षी गठबंधनों में से किसी को भी नेसेट में स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं हो सका। सीटों के इस कड़े मुकाबले ने सरकार बनाने के लिए छोटे दलों की सौदेबाजी की ताकत को काफी बढ़ा दिया। • कट्टर वैचारिक मतभेद: एविगडोर लिबरमैन ने बेंजामिन नेतन्याहू और अरब राजनीतिक दलों दोनों के साथ सरकार में शामिल होने से इनकार कर दिया है। सेना में अनिवार्य भर्ती और नागरिक विवाह जैसे मुद्दों पर धर्मनिरपेक्ष और दक्षिणपंथी दलों के बीच गहरी खाई मौजूद है। • विदेशी दखल की जांच: केंद्रीय चुनाव समिति के निर्देश पर शिन बेट द्वारा कतर और बाहरी तत्वों के संभावित दखल की जांच ने राजनीतिक अविश्वास को और गहरा कर दिया है। नेतन्याहू ने इन आरोपों को लेकर विरोधियों पर कड़े हमले किए हैं, जबकि विपक्ष ने इसे संसद गठन को टालने की कोशिश बताया है। सवाल-जवाब 1. एविगडोर लिबरमैन ने सरकार गठन को लेकर क्या ऐलान किया है? लिबरमैन ने स्पष्ट किया है कि वह बेंजामिन नेतन्याहू या अरब पार्टियों के नेता अहमद तिबी के साथ मिलकर सरकार नहीं बनाएंगे। 2. इजरायल में शिन बेट किस मामले की जांच कर रही है? सुरक्षा एजेंसी शिन बेट हाल ही में संपन्न हुए संसदीय चुनाव में कतर और अन्य विदेशी तत्वों के कथित हस्तक्षेप की जांच कर रही है। 3. बेंजामिन नेतन्याहू ने विपक्षी दलों पर क्या आरोप लगाए हैं? नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि विपक्ष उन्हें सत्ता से बाहर रखने के लिए अरब दलों पर निर्भर रहने वाली खतरनाक सरकार बनाना चाहता है। 4. गादी आइजनकोट ने 26वीं नेसेट के गठन को लेकर क्या कहा? पूर्व सैन्य प्रमुख आइजनकोट ने कहा कि शिन बेट की जांच चलती रहे, लेकिन इसके कारण नई संसद के गठन की प्रक्रिया में देरी नहीं होनी चाहिए। https://trendkia.com/asia/ijarayala-men-nai-sarakara-para-avigdor-lieberman-ki-do-tuka-benjamin-netanyahu-aura-ahmad-tibi-donon-se-banai-duri-53250 TrendKia — Har trend, sabse pehle.