जॉर्डन में जान गंवाने वाले सैनिकों का अमेरिका ने लिया बदला, ईरान पर लगातार 8वीं रात बरपाया कहर मध्य पूर्व में युद्ध के हालात बन गए हैं। जॉर्डन में अपने सैनिकों की मौत के बाद अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य और परमाणु ठिकानों को भारी बमबारी कर तबाह कर दिया है, जिसके जवाब में ईरान ने भी कुवैत में मौजूद अमेरिकी बेस को निशाना बनाया है। जॉर्डन के भीतर अमेरिकी सैनिकों पर हुए एक जानलेवा हमले के बाद मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति बेहद विस्फोटक हो गई है। इस घटना के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सीधा टकराव शुरू हो गया है। अमेरिकी सेना ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए लगातार आठवीं रात ईरानी सीमा के भीतर घुसकर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस बात की पुष्टि की है कि इन सघन सैन्य अभियानों का एकमात्र मकसद जॉर्डन में तैनात अमेरिकी सैनिकों की जान लेने के लिए जिम्मेदार ईरानी बलों को कड़ा दंड देना था। यह भारी बमबारी दोनों देशों के बीच तनाव को एक नए और बेहद खतरनाक मुकाम पर ले गई है, जहां अब बात छिटपुट झड़पों से आगे बढ़कर सीधे सैन्य टकराव तक आ पहुंची है। परमाणु ऊर्जा परियोजना और रणनीतिक ठिकाने तबाह अमेरिकी वायुसेना द्वारा की गई इस बमबारी का दायरा बहुत बड़ा रहा है, जिसका मुख्य लक्ष्य ईरान की रक्षा प्रणालियों को पंगु बनाना था। इन हवाई हमलों में ईरान के महत्वपूर्ण तटीय निगरानी केंद्रों, उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम और मिसाइलों को सुरक्षित रखने वाले बड़े गोदामों को योजनाबद्ध तरीके से नष्ट कर दिया गया है। इस पूरे सैन्य अभियान में सबसे बड़ी बात यह रही कि निर्माणाधीन डार्खोविन परमाणु ऊर्जा परियोजना को भी अमेरिकी बमवर्षकों ने अपना निशाना बनाया। परमाणु बुनियादी ढांचे पर हुए इस सीधे प्रहार से तेहरान में भारी गुस्सा है। ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने इन हमलों की तुरंत और कड़ी निंदा करते हुए अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन और उनके संप्रभु ठिकानों पर किया गया एक आक्रामक कृत्य करार दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने दी गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी यह आक्रामक सैन्य अभियान अमेरिकी सरकार के शीर्ष स्तर से दी गई कड़ी चेतावनियों के बाद शुरू हुआ है। जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों की जान जाने की घटना पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे "बेहद दुखद" बताया। स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए उन्होंने एक सख्त सार्वजनिक चेतावनी जारी की और कहा कि तेहरान को इस कृत्य का "तुरंत और कड़ा जवाब" दिया जाएगा। राष्ट्रपति के इसी निर्देश का पालन करते हुए, CENTCOM के अधिकारियों ने बताया कि रात के समय किए गए इन ताजा हमलों में ईरान के ड्रोन भंडारों और कई प्रमुख तटीय सैन्य ठिकानों को पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया गया है। अमेरिकी बमबारी की तीव्रता और नुकसान की पुष्टि करते हुए, ईरानी सरकारी मीडिया ने यह आधिकारिक रिपोर्ट दी है कि बंदर अब्बास के रणनीतिक बंदरगाह शहर और इसके पास स्थित क़ेश्म द्वीप पर कई जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। ईरान ने कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर किया पलटवार यह सशस्त्र संघर्ष बहुत तेजी से ईरानी सीमाओं के बाहर भी फैल गया है, क्योंकि तेहरान ने भी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी रणनीतिक ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। अमेरिकी हवाई हमलों के कुछ ही घंटों के भीतर, ईरानी सशस्त्र बलों ने कुवैत में स्थित अमेरिका के दो अलग-अलग सैन्य बेस पर हथियारों से लैस ड्रोन से हमला करने का दावा किया है। ईरानी सैन्य कमान द्वारा जारी किए गए आधिकारिक बयानों के अनुसार, इन जवाबी हमलों का सटीक निशाना कैंप उदैरी में स्थित मुख्य गोला-बारूद डिपो को तबाह करना था। इसके साथ ही कुवैत के अली अल सलेम एयर बेस पर सक्रिय रूप से तैनात पैट्रियट रडार रक्षा प्रणाली को भी सीधे तौर पर निशाना बनाया गया है। पूरे मध्य पूर्व में मंडराया युद्ध का संकट पिछले एक सप्ताह से लगातार बढ़ रहा यह सैन्य टकराव अब पड़ोसी खाड़ी देशों को भी एक बड़े युद्ध में धकेलने का गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। इस व्यापक क्षेत्रीय तनाव की शुरुआत तब हुई थी जब ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले वाणिज्यिक समुद्री यातायात पर आक्रामक रूप से नौसैनिक प्रतिबंध लगा दिए थे, जिसके परिणामस्वरूप अमेरिका ने अपनी सैन्य कार्रवाई का पहला दौर शुरू किया। उन शुरुआती नौसैनिक झड़पों के बाद से ही मध्य पूर्व का आसमान एक सक्रिय युद्ध क्षेत्र में तब्दील हो गया है। ईरानी बलों ने बहरीन, कुवैत, कतर और जॉर्डन सहित अपने पड़ोसी देशों की दिशा में कई लंबी दूरी के ड्रोन और मिसाइलें दागी हैं। इन बढ़ते क्षेत्रीय खतरों के जवाब में, बहरीन की सेना ने दावा किया है कि उसके जवानों ने कई ईरानी हवाई हमलों को बीच में ही रोक कर पूरी तरह से बेअसर कर दिया। क्षेत्रीय सैन्य सहयोग का एक और उदाहरण पेश करते हुए, इजरायल और जॉर्डन के एयर डिफेंस नेटवर्क ने एक संयुक्त प्रयास के तहत दक्षिणी जॉर्डन के तटीय शहर अकाबा की ओर तेजी से बढ़ रही एक मिसाइल को हवा में ही मार गिराया। अब तक, क्षेत्रीय सहयोगी देशों का यही कहना है कि हवा से आने वाले अधिकांश खतरों को उनके लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया गया है। इसका आप पर असर • वैश्विक स्तर पर: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिसका सीधा असर आम आदमी के पेट्रोल-डीजल के खर्च पर पड़ेगा। • भारतीयों के लिए: मध्य पूर्व में काम कर रहे लाखों प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं और हवाई यात्राओं के रूट में बदलाव होने से उड़ानों पर असर पड़ सकता है। सवाल-जवाब 1. अमेरिका ने ईरान पर हमला क्यों किया? जॉर्डन में हुए एक हमले में अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई थी, जिसका बदला लेने और जिम्मेदार ईरानी बलों को सजा देने के लिए अमेरिका ने यह हमला किया है। 2. अमेरिकी सेना ने ईरान के किन ठिकानों को तबाह किया? अमेरिका ने ईरान के तटीय निगरानी केंद्रों, एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल गोदामों और निर्माणाधीन डार्खोविन परमाणु ऊर्जा परियोजना पर बमबारी की है। 3. ईरान ने अमेरिका को क्या जवाब दिया है? अमेरिकी हमले के कुछ घंटों बाद, ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कुवैत में मौजूद दो अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले किए हैं। 4. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले पर क्या कहा? डोनाल्ड ट्रंप ने सैनिकों की मौत को 'बेहद दुखद' बताया और चेतावनी दी थी कि ईरान को इसका 'तुरंत और कड़ा जवाब' मिलेगा। https://trendkia.com/asia/jordan-men-jana-gnvane-vale-sainikon-ka-america-ne-liya-badala-iran-para-lagatara-8vin-rata-barapaya-kahara-8864 TrendKia — Har trend, sabse pehle.