# कंधार में सीमाबंदी से अफगान अंगूर किसानों पर टूटा कहर, रिकॉर्ड पैदावार के बाद किशमिश के दाम भी क्रैश

> अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा बंद होने से कंधार में अंगूर की बंपर फसल बर्बादी के कगार पर पहुंच गई है। निर्यात ठप होने और स्थानीय बाजारों में दाम गिरने से परेशान किसान फसलों को किशमिश में तब्दील करने को मजबूर हैं।

**Type:** article · **Category:** एशिया · **Published:** 2026-08-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/asia/kandahar-men-simabndi-se-afghan-angura-kisanon-para-tuta-kahara-rikorda-paidavara-ke-bada-kishamisha-ke-dama-bhi-kraisha-18495 · **Language:** Hindi
**Tags:** अफगानिस्तान, पाकिस्तान सीमा, कंधार अंगूर, अफगान अर्थव्यवस्था, फल निर्यात, तालिबान पाकिस्तान विवाद, किशमिश व्यापार

दक्षिण अफगानिस्तान के कंधार प्रांत में इस वर्ष अंगूर की पैदावार अत्यंत शानदार रही है, परंतु यह बंपर फसल स्थानीय किसानों के लिए खुशहाली लाने के बजाय आर्थिक तबाही का सबब बन गई है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के मध्य सीमा मार्गों के पूरी तरह बंद हो जाने के कारण अफगान उत्पादकों के लिए सबसे बड़ा पड़ोसी बाजार पहुंच से बाहर हो चुका है। ताजे अंगूरों को समय पर बाजार न भेज पाने की मजबूरी में किसान अपनी पैदावार को सुखाकर किशमिश में तब्दील कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच सीमावर्ती पहाड़ी इलाकों पर पिछले कई महीनों से लगातार गोलीबारी और सैन्य झड़पें जारी हैं, जिसमें सैकड़ों जिंदगियां खत्म हो चुकी हैं। सुरक्षा कारणों और राजनीतिक तनाव का सीधा असर अब द्विपक्षीय व्यापार पर पड़ा है, जिससे कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर गई है।

 

## सीमा पर बढ़ता संघर्ष और व्यापारिक मार्गों की पूर्ण बंदी

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रिश्तों में आई कड़वाहट का मुख्य कारण सीमा सुरक्षा से जुड़े गंभीर मतभेद हैं। पाकिस्तान का दावा है कि अफगानिस्तान में शासन चला रही तालिबान सरकार उन चरमपंथी गुटों को शरण दे रही है, जो पाकिस्तानी सीमा के भीतर आतंकी घटनाओं को अंजाम देते हैं। हालांकि, अफगानिस्तान प्रशासन इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करता आ रहा है। इस द्विपक्षीय तनाव के परिणामस्वरूप दोनों देशों को जोड़ने वाले मुख्य व्यापारिक और पारगमन रास्ते पूरी तरह सील कर दिए गए हैं। सीमा मार्ग बंद होने से कंधार और आसपास के क्षेत्रों से पाकिस्तान जाने वाला फल व्यापार पूरी तरह ठप हो गया है। व्यापारी और उत्पादक अपनी उपज को सीमाओं के पार भेजने में असमर्थ हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में कृषि संकट गहरा गया है।

 

## कंधार के जरी जिले में किशमिश गोदामों का संकटपूर्ण परिदृश्य

कंधार प्रांत के जरी जिले में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बनी हुई है। यहां अंगूर के विशाल सुखाने वाले गोदामों में किसान दिन-रात अपनी फसल को बचाने की कवायद में जुटे हैं। इन लंबे गोदामों के भीतर बड़े-बड़े पंखे लगातार गर्म हवा घुमाते हैं, जबकि लकड़ियों के ढांचों पर लटके हरे-भरे अंगूर धीरे-धीरे सूखकर किशमिश में बदलते हैं। जब ताजे अंगूरों को पाकिस्तान भेजना असंभव हो गया, तो किसानों ने उन्हें अफगानिस्तान के घरेलू बाजारों में बेचना शुरू किया। हालांकि, स्थानीय बाजारों में अंगूरों की भारी आवक होने के कारण कीमतें तेजी से गिर गईं। बाजार में आपूर्ति अत्यधिक बढ़ने और खरीदारों की कमी के चलते ताजे अंगूर कौड़ियों के भाव बिकने लगे। इस स्थिति से बचने के लिए किसानों ने बड़े पैमाने पर किशमिश बनाना शुरू किया, लेकिन अब किशमिश की आपूर्ति बढ़ने से उसके दाम भी ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ पहुंचे हैं।

 

## लागत से कम कीमतें और किसानों के परिवारों पर गहराता आर्थिक संकट

जरी जिले में अंगूर के बाग का स्वामित्व रखने वाले साखी जान के अनुसार, उनकी आजीविका पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। उनके परिवार में 10 सदस्य हैं, जिनका भरण-पोषण करना अब एक दुर्गम चुनौती बन गया है। साखी जान ने बताया कि पूर्व में 7 किलोग्राम किशमिश की बिक्री लगभग 1000 से 1200 अफगानी में आसानी से हो जाती थी। इसके विपरीत, वर्तमान समय में उतनी ही मात्रा यानी 7 किलोग्राम किशमिश के लिए व्यापारियों से केवल 400 से 450 अफगानी ही मिल पा रहे हैं। कीमतों में इस 60 प्रतिशत से अधिक की गिरावट ने किसानों की कमर तोड़ दी है। साखी जान ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा

 
> "हम अपनी सरकार और पाकिस्तान, दोनों से आग्रह करते हैं कि इन रास्तों को खोलें और किसी समझौते पर पहुंचें।"
 साखी जान का कहना है कि पहले संघर्ष इतना तीव्र नहीं था और लोगों को नियमित रूप से काम मिल जाता था। किसान अपने अंगूर बेचकर परिवार का गुजारा कर लेते थे, परंतु मौजूदा परिस्थितियों ने हर नागरिक के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है। द्विपक्षीय रास्तों का बंद होना आम जनता के लिए अत्यंत कष्टकारी साबित हो रहा है।

 

## आधिकारिक आंकड़े: फल निर्यात में 99 प्रतिशत से अधिक की महागिरावट

कंधार चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इन्वेस्टमेंट के डिप्टी डायरेक्टर अब्दुल बाकी बीना ने सीमा बंदी से हुए आर्थिक नुकसान का विस्तृत ब्योरा साझा किया है। उनके अनुसार, सीमा बंद होने से अफगानिस्तान के समग्र फल निर्यात को अपूरणीय क्षति पहुंची है। इस गतिरोध का प्रभाव केवल अंगूर के कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि अनार के व्यापार पर भी इसका व्यापक नकारात्मक असर पड़ा है।

 अब्दुल बाकी बीना द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में दक्षिणी अफगानिस्तान के 5 प्रमुख अंगूर उत्पादक प्रांतों ने कुल मिलाकर 44,225 टन अंगूर का अंतरराष्ट्रीय निर्यात किया था। उस दौरान इस कुल निर्यात का अनुमानित मूल्य लगभग 13.8 मिलियन डॉलर दर्ज किया गया था। वर्ष 2025 के उस कुल निर्यात में से अकेले 43,000 टन अंगूर पाकिस्तान के बाजारों में भेजे गए थे, जबकि शेष बची मात्रा का निर्यात बांग्लादेश, इराक और भारत को किया गया था। इसकी तुलना में, वर्तमान वर्ष में स्थिति बेहद भयावह हो चुकी है। इस साल अब तक केवल 256 टन अंगूर ही निर्यात किए जा सके हैं, जिसकी कुल कीमत महज 1 लाख डॉलर के आसपास रही है। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि निर्यात व्यापार व्यावहारिक रूप से शून्य के करीब पहुंच गया है।

 

## रोजगार के अवसरों का पतन: 1500 से घटकर 15 पर सिमटी मजदूरों की संख्या

अंतरराष्ट्रीय व्यापार ठप होने की मार सिर्फ खेत मालिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने कृषि आधारित दिहाड़ी मजदूरों को भी बेरोजगारी के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। अंगूर तोड़ने और उनकी छंटाई का काम करने वाले मजदूर कुदरतुल्लाह पोपल ने इस भयावह स्थिति का आंखों देखा हाल बताया है। कुदरतुल्लाह पोपल के अनुसार, जिस बाग में वे पिछले वर्ष काम करते थे, वहां फसल कटाई के सीजन में लगभग 1500 मजदूर कार्यरत रहते थे। लेकिन इस वर्ष स्थिति इतनी खराब है कि उसी बाग में काम करने वाले श्रमिकों की संख्या घटकर केवल 15 के आसपास रह गई है। कुदरतुल्लाह पोपल ने स्थिति को रेखांकित करते हुए कहा

 
> "जब रास्ते बंद हो जाते हैं और व्यापार रुक जाता है, तो व्यापारियों, मजदूरों और बाग मालिकों समेत सभी की रोजी-रोटी ठप हो जाती है।"
 कुदरतुल्लाह पोपल का कहना है कि इस साल अंगूर की गुणवत्ता और मात्रा दोनों ही बेहतरीन हैं, लेकिन निर्यात के दरवाजे बंद होने से यह उपज बेकार साबित हो रही है। जब माल को विदेशी बाजारों में भेजने के रास्ते बंद हो जाते हैं, तो घरेलू बाजारों में सरप्लस जमा हो जाता है, जिससे पूरी आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े हर व्यक्ति की दैनिक आय समाप्त हो जाती है।

 

## व्यापक सामाजिक संकट: गरीबी और कुपोषण के बीच छिनती आजीविका

अफगानिस्तान लंबे समय से व्यापक गरीबी, बुनियादी संसाधनों की कमी और गंभीर आर्थिक विषमता से जूझ रहा है। देश की एक बड़ी आबादी और विशेषकर कमजोर वर्ग पहले से ही कुपोषण और खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। ऐसे नाजुक दौर में किसानों, ग्रामीण दिहाड़ी मजदूरों और छोटे व्यापारियों की आय में 60 से 90 प्रतिशत तक की गिरावट आना अत्यंत घातक सिद्ध हो रहा है। कंधार के कृषि क्षेत्र के लिए इस वर्ष की मुख्य त्रासदी फसल का खराब होना नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच का पूरी तरह कट जाना है। शानदार पैदावार के बावजूद निर्यात ठप होने से स्थानीय बाजारों में माल की भरमार हो गई, जिसने कीमतों को धराशायी कर दिया। सुखाकर किशमिश बनाने का विकल्प भी गिरते दामों के कारण किसानों को आर्थिक राहत देने में विफल रहा है, जिससे पूरा ग्रामीण समुदाय अनिश्चित भविष्य के साये में जीने को मजबूर है।

## इसका आप पर असर
**दक्षिण एशियाई फल बाजार पर:** अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा बंद होने से ताजे अंगूरों की क्षेत्रीय आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे भारत और पड़ोसी देशों के फल आयातकों व व्यापारियों पर असर पड़ा है।

**कंधार की कृषि अर्थव्यवस्था पर:** अफगान किसानों और खेतिहर मजदूरों की आय में 60 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका और खाद्य सुरक्षा का गंभीर संकट पैदा हो गया है।

## सवाल-जवाब

### 1. कंधार में इस साल अंगूर किसानों पर क्या संकट आया है?
अंगूर की बंपर पैदावार होने के बावजूद अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा बंद रहने के कारण किसान अपना माल निर्यात नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उनकी फसल बर्बादी की कगार पर है।

### 2. किसान अंगूर सुखाकर किशमिश क्यों बना रहे हैं?
ताजे अंगूर पाकिस्तान न भेजे जाने से स्थानीय बाजारों में भारी भरमार हो गई और दाम गिर गए। अंगूरों को सड़ने से बचाने के लिए किसान उन्हें गोदामों में सुखाकर किशमिश बना रहे हैं।

### 3. कंधार में किशमिश की कीमतों में कितनी गिरावट आई है?
जरी जिले के किसानों के अनुसार, पहले 7 किलोग्राम किशमिश 1000 से 1200 अफगानी में बिकती थी, जो अब घटकर केवल 400 से 450 अफगानी रह गई है।

### 4. पिछले साल की तुलना में इस साल अंगूर निर्यात का क्या आंकड़ा रहा है?
वर्ष 2025 में 44,225 टन (13.8 मिलियन डॉलर) अंगूर का निर्यात हुआ था, जबकि 2026 में अब तक केवल 256 टन (लगभग 1 लाख डॉलर) ही निर्यात हो पाया है।

### 5. सीमा बंद होने से बागान मजदूरों के रोजगार पर क्या असर पड़ा है?
व्यापार ठप होने से मजदूरों की भारी छंटनी हुई है। उदाहरण के लिए, जिस बागान में पिछले साल 1500 मजदूर काम करते थे, वहां इस साल सिर्फ 15 मजदूर ही रह गए हैं।

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