# पाकिस्तान में सुलग उठा खैबर पख्तूनख्वा, इमरान खान की रिहाई और राज्यपाल शासन को लेकर सड़कों पर संग्राम

> पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में राज्यपाल शासन लागू होने और आपातकाल के विरोध में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तीखी झड़पें हुईं, जिसके बाद शहबाज शरीफ सरकार ने सेना को मैदान में उतार दिया है।

**Type:** article · **Category:** एशिया · **Published:** 2026-10-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/asia/khyber-pakhtunkhwa-erupts-as-protests-over-imran-khan-release-and-governor-rule-spark-clashes-in-pakistan-47110 · **Language:** Hindi
**Tags:** इमरान खान, खैबर पख्तूनख्वा, शहबाज शरीफ, पाकिस्तान संकट, राज्यपाल शासन

पाकिस्तान की सियासत में इस समय भारी उबाल देखा जा रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों विशेष तौर पर खैबर पख्तूनख्वा में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे उनके समर्थकों और पुलिस के बीच तीखा संघर्ष हुआ है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को बल प्रयोग करना पड़ा, जिसमें गोलियां चलाने और प्रदर्शनकारियों की पिटाई की घटनाएं सामने आई हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि कई संवेदनशील इलाकों में शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली सरकार को सेना की तैनाती करनी पड़ी है ताकि व्यवस्था को संभाला जा सके।

 

## राज्यपाल शासन और मंत्रियों पर कार्रवाई

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत खैबर पख्तूनख्वा में राज्यपाल शासन लागू किए जाने के बाद हुई। सरकार ने इमरान खान की रिहाई के लिए चलाए जा रहे आंदोलन और उनके समर्थकों के लॉन्ग मार्च को विफल करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इसके तहत प्रांतीय सरकार को निलंबित कर दिया गया है और चीफ मिनिस्टर सुहैल आफरीदी समेत कई प्रमुख मंत्रियों को प्रिवेंटिव कस्टडी में ले लिया गया है। राजधानी इस्लामाबाद पहुंचने का प्रयास कर रहे समर्थकों को रास्ते में ही खदेड़ दिया गया, जिससे प्रदर्शनकारियों का गुस्सा और अधिक भड़क गया और वे सड़कों पर उतर आए।

 

## पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच खूनी संघर्ष

प्रशासनिक कार्रवाई से आक्रोशित भीड़ ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया, जिसके जवाब में सुरक्षा बलों ने गोलियां चलाईं। खैबर पख्तूनख्वा में नियंत्रण बनाए रखना स्थानीय पुलिस के लिए बेहद मुश्किल साबित हो रहा है। एक तरफ जहाँ आंतरिक अशांति अपने चरम पर है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था भी बदहाली के दौर से गुजर रही है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश को कर्ज मिलने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद सरकार और सेना का पूरा ध्यान केवल इमरान खान के समर्थकों को कुचलने पर केंद्रित है, जिसकी वजह से देश को गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।

 

## आपातकाल के खिलाफ कानूनी चुनौती

इससे पहले रविवार को राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने प्रांतीय क्षेत्र में आपातकाल की घोषणा की थी। उन्होंने बढ़ते आतंकवादी हमलों, संवैधानिक व्यवस्था के पूरी तरह ठप होने और बिगड़ती कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 232(1) और 234(1) के तहत यह कदम उठाया। पीटीआई के अनुसार, इस विवादास्पद फैसले को चुनौती देते हुए सोमवार को पेशावर हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने अदालत में तर्क दिया है कि यह आपातकाल और राज्यपाल शासन पूरी तरह से अवैध, असंवैधानिक और दुर्भावनापूर्ण है, जो नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन करता है।

## इसका आप पर असर
यह राजनीतिक संकट आम नागरिकों के दैनिक जीवन और सुरक्षा को सीधे प्रभावित कर रहा है।

- **पाकिस्तान में:** आम जनता को भारी यातायात बाधाओं, इंटरनेट और आवागमन पर प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है। राजनीतिक अस्थिरता के कारण आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है।

- **खैबर पख्तूनख्वा में:** प्रांतीय स्तर पर कर्फ्यू जैसे हालात और सेना की तैनाती से स्थानीय व्यापार, स्कूल और दैनिक गतिविधियां पूरी तरह से ठप हो गई हैं। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच संघर्ष से नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।

## ऐसा क्यों हुआ
पाकिस्तान में उपजा यह ताजा संकट कई महीनों से चल रहे राजनीतिक गतिरोध और संवैधानिक संघर्ष का परिणाम है। सरकार द्वारा उठाए गए सख्त कदमों के पीछे प्रशासनिक नियंत्रण बनाए रखने की रणनीति है।

- **राज्यपाल शासन का निर्णय:** प्रांतीय क्षेत्र में बढ़ते आतंकवादी हमलों और कानून-व्यवस्था के चरमराने का हवाला देकर राष्ट्रपति ने आपातकाल और राज्यपाल शासन लागू किया।

- **लॉन्ग मार्च रोकने की कोशिश:** इमरान खान के समर्थकों द्वारा राजधानी की ओर बढ़ाए जा रहे मार्च को कुचलने के लिए सरकार ने प्रांतीय सरकार को बर्खास्त किया।

- **संवैधानिक टकराव:** सरकार के इन दमनात्मक उपायों को अदालत में चुनौती दी गई है, क्योंकि इससे लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक प्रक्रियाओं का हनन होता है।

## सवाल-जवाब

### 1. खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल किसने और क्यों लगाया?
राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने बढ़ते आतंकवादी हमलों और बिगड़ती कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए आपातकाल लगाया।

### 2. राज्यपाल शासन के बाद कौन हिरासत में लिया गया?
चीफ मिनिस्टर सुहैल आफरीदी समेत कई मंत्रियों को प्रिवेंटिव कस्टडी में लिया गया है।

### 3. राष्ट्रपति के फैसले को कहाँ चुनौती दी गई है?
पीटीआई के अनुसार इस फैसले के खिलाफ सोमवार को पेशावर हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है।

### 4. इस संकट के पीछे मुख्य राजनीतिक मांग क्या है?
यह पूरा संघर्ष और विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर हो रहा है।

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