सिल्क्यारा रेस्क्यू के हीरो कर्नल मेहरा अब नेपाल की चिलिमे सुरंग में बचाव अभियान की कमान संभाल रहे हैं उत्तराखंड के सिल्क्यारा टनल हादसे में 41 मजदूरों को बचाने वाले कर्नल परीक्षित मेहरा अब नेपाल के चिलिमे इलाके में फंसे लोगों को निकालने के अभियान की अगुवाई कर रहे हैं, जहां भारतीय सेना, एनडीआरएफ और बीआरओ मिलकर वैकल्पिक रास्ता बना रहे हैं। उत्तराखंड के सिल्क्यारा टनल में फंसे 41 मजदूरों की जान बचाने वाले कर्नल परीक्षित मेहरा अब एक नई चुनौती से जूझ रहे हैं, इस बार मैदान नेपाल का है, जहां चिलिमे इलाके की एक सुरंग में कई लोग फंसे हुए हैं। 26 अगस्त को इस इलाके में आई भीषण बाढ़ के बाद से रेस्क्यू टीमें लगातार मशक्कत कर रही हैं और अब सुरंग के जिस हिस्से तक सीधी पहुंच नहीं बन पा रही, वहां तक जाने के लिए एक नया रास्ता तैयार किया जा रहा है। वैकल्पिक रास्ता बनाने में जुटीं तीन एजेंसियां भारतीय सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी एनडीआरएफ और सीमा सड़क संगठन यानी बीआरओ के जवान मिलकर सुरंग के अवरुद्ध हिस्से तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक एक्सेस रूट पर काम कर रहे हैं। बीआरओ आमतौर पर सीमावर्ती और पहाड़ी इलाकों में सड़कें और ढांचागत काम संभालता है, जबकि एनडीआरएफ प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बचाव के लिए विशेष प्रशिक्षित टीम है। मकसद साफ है, जहां सीधे पहुंचना मुमकिन नहीं हो पा रहा, वहां एक सुरक्षित मार्ग बनाकर फंसे लोगों को बाहर निकाला जाए। यह काम बेहद संकरी जगहों में हो रहा है, इसलिए हर कदम फूंक-फूंक कर उठाया जा रहा है। एंडोस्कोपिक कैमरे से मिली अंदर की पहली झलक सुरंग के भीतर संकरे रास्तों से होकर रेस्क्यू टीम धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है और लगातार तलाशी अभियान चला रही है। भारतीय सेना और नेपाली सेना के जवानों के साथ एनडीआरएफ की टुकड़ी भी इस सर्च ऑपरेशन का हिस्सा है। इसी दौरान सुरंग के अंदर की स्थिति जानने के लिए एंडोस्कोपिक कैमरे भेजे गए, जिनसे मिली पहली तस्वीरें अब सामने आ चुकी हैं। इन तस्वीरों के जरिए बचाव दल अंदर के हालात का अंदाजा लगाने की कोशिश कर रहा है, ताकि आगे की रणनीति तय की जा सके और किसी भी कदम में जोखिम न रहे। ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स की मौजूदगी इस पूरे अभियान में ऑस्ट्रेलिया के जाने-माने सुरंग विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स भी मौके पर मौजूद हैं। वह रेस्क्यू टीम को तकनीकी सलाह दे रहे हैं और सुरंग के भीतर की भूगर्भीय और संरचनात्मक परिस्थितियों को समझते हुए बचाव दल का मार्गदर्शन कर रहे हैं। डिक्स की मौजूदगी को अभियान के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के दौरान छोटी सी चूक भी बड़ा खतरा बन सकती है। सिल्क्यारा से सेला तक का अनुभव अब नेपाल के काम आ रहा कर्नल परीक्षित मेहरा इस रेस्क्यू ऑपरेशन की अगुवाई कर रहे हैं। इससे पहले उत्तराखंड के सिल्क्यारा टनल हादसे में फंसे 41 मजदूरों को सुरक्षित निकालने वाले अभियान में उनकी भूमिका बेहद अहम रही थी। सिल्क्यारा में 18 दिनों तक चला वह ऑपरेशन आखिरकार कामयाब रहा और सभी मजदूर सुरक्षित बाहर निकाले गए थे। इसके अलावा कर्नल मेहरा अरुणाचल प्रदेश की सेला टनल के निर्माण कार्य से भी जुड़े रह चुके हैं। उनके इसी अनुभव के चलते नेपाल के चिलिमे में चल रहे मौजूदा रेस्क्यू अभियान में उन्हें अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। अभी भी जारी है फंसे लोगों तक पहुंचने की जद्दोजहद फिलहाल तीनों एजेंसियों का पूरा फोकस टनल में फंसे लोगों तक जल्द से जल्द पहुंचने और उन्हें सुरक्षित बाहर लाने पर टिका है। वैकल्पिक रास्ता पूरी तरह तैयार होने के बाद उम्मीद है कि रेस्क्यू टीमों की रफ्तार और तेज होगी। तब तक भारतीय सेना, एनडीआरएफ और बीआरओ की टीमें बिना रुके काम में जुटी हुई हैं और फंसे लोगों तक पहुंचने का हर संभव प्रयास कर रही हैं। इसका आप पर असर यह हादसा सीधे तौर पर भारत के किसी शहर से नहीं जुड़ा, लेकिन भारतीय सेना, एनडीआरएफ और बीआरओ की भागीदारी की वजह से इसका असर देश की आपदा-राहत साख पर भी पड़ता है। • फंसे लोगों के परिजनों के लिए: वैकल्पिक रूट बनने से रेस्क्यू में तेजी आने की उम्मीद बंधी है। एंडोस्कोपिक कैमरों से मिली पहली तस्वीरों के बाद परिवारों को कुछ राहत मिली है, हालांकि सुरक्षित निकासी अभी बाकी है। • भारत की आपदा-राहत टीमों के लिए: यह ऑपरेशन सिल्क्यारा जैसे अनुभव को नई परिस्थिति में इस्तेमाल करने का मौका है। कर्नल मेहरा जैसी टीमों की भूमिका भारत की तकनीकी साख को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करती है। • सुरंग परियोजनाओं से जुड़े इंजीनियरों और मजदूरों के लिए: यह घटना दिखाती है कि पहाड़ी इलाकों की सुरंगों में बाढ़ या भूस्खलन के दौरान वैकल्पिक निकासी रास्ते कितने जरूरी हैं, जिससे आगे की परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों पर ध्यान बढ़ सकता है। सवाल-जवाब 1. चिलिमे टनल में लोग कैसे फंसे? 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ के कारण सुरंग का एक हिस्सा मलबे और पानी से अवरुद्ध हो गया, जिससे अंदर लोग फंस गए। 2. रेस्क्यू ऑपरेशन में कौन-कौन सी एजेंसियां शामिल हैं? भारतीय सेना, एनडीआरएफ, बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन यानी बीआरओ और नेपाली सेना की टीमें इस अभियान में जुटी हैं। 3. रेस्क्यू ऑपरेशन की कमान कौन संभाल रहा है? कर्नल परीक्षित मेहरा इस ऑपरेशन की अगुवाई कर रहे हैं, जिन्होंने पहले सिल्क्यारा टनल रेस्क्यू का नेतृत्व किया था। 4. अर्नोल्ड डिक्स कौन हैं? वह ऑस्ट्रेलिया के जाने-माने सुरंग विशेषज्ञ हैं, जो इस ऑपरेशन में तकनीकी सलाह दे रहे हैं। 5. क्या अब तक किसी को सुरक्षित निकाला गया है? फिलहाल रेस्क्यू टीमें अवरुद्ध हिस्से तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक रास्ता बना रही हैं, निकासी की पुष्टि नहीं की गई है। 6. सिल्क्यारा टनल हादसे में क्या हुआ था? वहां 41 मजदूर फंस गए थे और 18 दिनों के ऑपरेशन के बाद उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया था। 7. कर्नल मेहरा का सेला टनल से क्या संबंध है? वह अरुणाचल प्रदेश की सेला टनल के निर्माण कार्य से भी जुड़े रह चुके हैं। https://trendkia.com/asia/silkyara-reskyu-ke-hiro-karnala-mehra-aba-nepal-ki-chilime-surnga-men-bachava-abhiyana-ki-kamana-snbhala-rahe-hain-28712 TrendKia — Har trend, sabse pehle.