तिब्बत में 5 तीव्रता का भूकंप, भारी तबाही झेल रहे नेपाल के पास फिर कांपी धरती नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बीच पड़ोसी क्षेत्र तिब्बत में 5.0 तीव्रता का भूकंप आया है। वहीं नेपाल में आपदा से मरने वालों की संख्या 1,243 पहुंच गई है और भारत राहत सामग्री के साथ लगातार मदद भेज रहा है। नेपाल में प्राकृतिक आपदा के चलते बनी भयानक स्थिति के बीच उसके पड़ोसी इलाके तिब्बत में भी धरती हिल गई है। तिब्बत में गुरुवार को रिक्टर पैमाने पर 5.0 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया। यह झटका ऐसे समय में आया है जब नेपाल में आए विनाशकारी सैलाब और बाढ़ के कारण अब तक 1,243 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और 5 हजार से ज्यादा लोग लापता हैं। इस भीषण त्रासदी से निपटने के लिए नेपाल में सेना और पुलिस की मदद से व्यापक स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है। तिब्बत में भूकंप के झटके और सीस्मोलॉजी रिपोर्ट नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, तिब्बत के क्षेत्र में भूकंप गुरुवार दोपहर 1 बजकर 46 मिनट पर दर्ज किया गया। इस सीस्मिक गतिविधि का केंद्र जमीन की सतह से लगभग 14 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। भौगोलिक आंकड़ों के मुताबिक, इस भूकंपीय घटना का अक्षांश 31.479 उत्तर तथा देशांतर 80.370 पूर्व मापा गया है। यद्यपि इस भूकंप से तुरंत किसी बड़े नुकसान या जानमाल की हानि की सूचना सामने नहीं आई है, लेकिन नेपाल में जारी संकट के बीच इस घटना ने सीमावर्ती इलाकों में चिंता बढ़ा दी है। नेपाल में सैलाब का कहर और भारतीय मदद नेपाल में आई महाबाढ़ के कारण हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। मृतकों की संख्या बढ़कर 1,243 हो गई है और 5,000 से अधिक लापता लोगों की तलाश जारी है। लापता लोगों में कैलाश मानसरोवर की धार्मिक यात्रा पर गए सैकड़ों भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। राहत कार्यों में सहायता देने के लिए भारतीय सेना की एक विशेषज्ञ रेस्क्यू टीम एक जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे श्रमिकों और नागरिकों को बाहर निकालने में जुटी हुई है। इसके साथ ही भारत सरकार ने नेपाल के लिए राहत सामग्री की 5वीं खेप भेजी है, जिसमें 11 विशेषज्ञों की टीम, 5.5 टन आवश्यक सामग्री और आपातकालीन दवाएं शामिल हैं। इस समय पर मिली सहायता के लिए नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भारत का आभार व्यक्त किया है। जलवायु परिवर्तन पर पीएम बालेन शाह का बयान और नदियों का जलस्तर इस भीषण आपदा के कारणों पर चर्चा करते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने नेपाली संसद के समक्ष कहा कि देश में आई यह जलप्रलय सामान्य वर्षा का परिणाम नहीं है। उन्होंने इस तबाही के लिए जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार ठहराते हुए स्पष्ट किया कि भोटकोशी नदी में आए उफान ने यह साबित कर दिया है कि हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाली आबादी के लिए पर्यावरण बदलाव के खतरे बेहद गंभीर रूप ले चुके हैं। इस बीच, बारिश के कारण चितवन क्षेत्र में नारायणी और त्रिशूली नदियों का पानी उफान पर है, जबकि सुन कोशी, बूढ़ी गंडकी और महाकाली नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। प्रशासन ने मध्य, पूर्वी और पश्चिमी नेपाल के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाने की सख्त सलाह जारी की है। इसका आप पर असर नेपाल में भीषण बाढ़ और तिब्बत में आए भूकंप के कारण सीमावर्ती इलाकों तथा यात्रा मार्गों पर गंभीर असर पड़ा है। • भारत में: नेपाल सीमा से सटे भारतीय राज्यों में नदियों के बढ़ते जलस्तर को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है। निचले इलाकों में रहने वाले निवासियों और सीमावर्ती आवाजाही करने वाले लोगों को सावधानी बरतने की आवश्यकता है। • नेपाल में: मध्य, पूर्वी और पश्चिमी इलाकों के निचले क्षेत्रों को खाली कराया जा रहा है। प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत शिविरों और सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर शरण लेनी पड़ रही है। • कैलाश मानसरोवर यात्रियों के लिए: यात्रा मार्ग पर फंसे या यात्रा की योजना बना रहे तीर्थयात्रियों के परिजनों को हेल्पलाइन और सरकारी बुलेटिन पर नजर रखनी चाहिए। उड़ानों और सडक़ मार्गों में व्यवधान के कारण यात्रा कार्यक्रम स्थगित किए जा रहे हैं। • राहत एवं पुनर्वास: भारत द्वारा भेजी गई दवाइयों और 5.5 टन सहायता सामग्री से प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी चिकित्सा और खाद्य आपूर्ति में तेजी आएगी। सवाल-जवाब 1. तिब्बत में आए भूकंप की तीव्रता कितनी थी? नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार तिब्बत में आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.0 मापी गई और इसका केंद्र जमीन से 14 किलोमीटर नीचे था। 2. नेपाल में आई बाढ़ से अब तक कितने लोगों की मौत हुई है? नेपाल में आई इस भीषण फ्लैश फ्लड की वजह से 1,243 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 5,000 से ज्यादा लोग लापता हैं। 3. भारत ने नेपाल की मदद के लिए क्या कदम उठाए हैं? भारत ने 11 विशेषज्ञ अधिकारियों की टीम के साथ 5.5 टन राहत सामग्री और दवाओं की 5वीं खेप भेजी है, जबकि भारतीय सेना की टीम टनल में फंसे लोगों को निकालने में जुटी है। 4. नेपाल के प्रधानमंत्री ने बाढ़ का क्या कारण बताया है? नेपाली पीएम बालेन शाह ने संसद में कहा कि भोटकोशी नदी का उफान सामान्य बारिश से नहीं आया था, और उन्होंने इस तबाही के लिए जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार ठहराया। 5. नेपाल में कौन-कौन सी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं? नेपाल में सुन कोशी, बूढ़ी गंडकी, महाकाली, नारायणी और त्रिशूली नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। https://trendkia.com/asia/tibet-men-5-tivrata-ka-bhuknpa-bhari-tabahi-jhela-rahe-nepal-ke-pasa-phira-kanpi-dharati-27034 TrendKia — Har trend, sabse pehle.