असम में अवैध कब्जों पर प्रशासन का कड़ा एक्शन, तीन जिलों में मुक्त कराई गई 638 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि राज्य के तीन जिलों में चलाए गए विशेष अभियानों के दौरान 638 हेक्टेयर से अधिक अतिक्रमण वाली भूमि को खाली कराया गया है। असम प्रशासन ने राज्य के तीन प्रमुख जिलों में सख्त कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में अवैध रूप से कब्जाई गई जमीन को मुक्त करा लिया है। अधिकारियों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों के दौरान चलाए गए इन व्यापक अभियानों में कुल 638 हेक्टेयर से ज्यादा भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है, जिससे वन क्षेत्रों को अवैध कब्जों से बचाया जा सके। किन जिलों में हुई कार्रवाई और कितने लोग प्रभावित यह पूरी कार्रवाई मुख्य रूप से गोलाघाट, होजाई और नगांव जिलों में अंजाम दी गई। इन इलाकों में लंबे समय से संरक्षित और वन भूमि पर अवैध कब्जा जमाए बैठे लोगों के खिलाफ प्रशासन का बुलडोजर चला। प्राप्त जानकारी के अनुसार इन अभियानों की जद में करीब 1,000 परिवार आए, जिन्हें इन संरक्षित क्षेत्रों से बाहर निकाला गया। राज्य सरकार का यह कदम सरकारी और वन भूमि की सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का बयान असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया पर इस पूरी कार्रवाई के परिणाम साझा किए। उन्होंने अपने आधिकारिक संदेश में स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रशासन का रुद्र रूप उन लोगों पर बरपा है जो गोलाघाट, होजाई और नगांव में बड़े पैमाने पर जमीन पर अवैध कब्जा जमाए हुए थे। उन्होंने आगे कहा कि सरकार असम के हितों की रक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसे कदम लगातार उठाती रहेगी और भविष्य में भी अतिक्रमणकारियों के खिलाफ नरमी नहीं बरती जाएगी। अतिक्रमण हटाने के अभियानों का सिलसिला राज्य सरकार द्वारा इस तरह के बेदखली अभियान लगातार चलाए जा रहे हैं जिनका मुख्य उद्देश्य राज्य के जंगलों और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों को अवैध कब्जों से मुक्त कराना है। प्रशासन का मानना है कि इन कठोर उपायों के बिना सार्वजनिक भूमि की सुरक्षा करना संभव नहीं है। अधिकारियों ने बताया कि आने वाले दिनों में भी उन तमाम इलाकों की पहचान की जा रही है जहां अवैध कब्जे अब भी मौजूद हैं, ताकि समय रहते उन्हें हटाया जा सके। इसका आप पर असर असम में चलाए गए इन बड़े बेदखली अभियानों का सीधा असर स्थानीय निवासियों, वन भूमि के अवैध कब्जाधारियों और प्रशासनिक नीतियों पर पड़ा है। • भारत में: सार्वजनिक और वन भूमि पर अवैध कब्जे के खिलाफ सख्त रुख अपनाने वाले अन्य राज्यों के प्रशासनों के लिए यह एक कड़ा संदेश है। ऐसे अभियानों से देश भर में सरकारी जमीनों की सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक चौकसियां बढ़ सकती हैं। • असम में: गोलाघाट, होजाई और नगांव जिलों में लगभग 1,000 परिवारों को अपने ठिकानों से बेदखल होना पड़ा है जिससे उनके सामने आजीविका और पुनर्वास का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों और वन अधिकारियों के बीच भूमि स्वामित्व को लेकर प्रशासनिक निगरानी और अधिक कड़ी हो जाएगी। ऐसा क्यों हुआ यह बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई संरक्षित और वन क्षेत्रों को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के उद्देश्य से की गई है। सरकार का यह कदम राज्य के प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और सार्वजनिक भूमि के संरक्षण की नीति का हिस्सा है। • अवैध कब्जे की समस्या: गोलाघाट, होजाई और नगांव के बड़े भूभागों पर लोगों द्वारा अवैध रूप से कब्जा जमाया गया था, जिससे वन क्षेत्रों का दायरा लगातार घट रहा था। • प्रशासनिक नीति: राज्य सरकार ने वन भूमि और सुरक्षित क्षेत्रों को बचाने के लिए सुनियोजित तरीके से विशेष बेदखली अभियान चलाने का निर्णय लिया था। • कानूनी अनुपालन: सरकारी संपत्तियों और पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए इस तरह के कड़े कदम उठाना प्रशासनिक अनिवार्यता बन गया था। सवाल-जवाब 1. असम में कितने हेक्टेयर जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है? असम में कुल 638 हेक्टेयर से अधिक अतिक्रमण वाली भूमि को खाली कराया गया है। 2. यह बेदखली अभियान मुख्य रूप से किन जिलों में चलाया गया? यह अभियान गोलाघाट, होजाई और नगांव जिलों में चलाया गया है। 3. इस कार्रवाई से कितने परिवार प्रभावित हुए हैं? इन ऑपरेशनों के दौरान लगभग 1,000 परिवारों को संरक्षित क्षेत्रों से हटाया गया है। 4. इस बारे में जानकारी किसने सार्वजनिक की? असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस कार्रवाई के परिणाम साझा किए। https://trendkia.com/assam/assam-administration-reclaims-over-638-hectares-of-encroached-land-across-three-districts-49745 TrendKia — Har trend, sabse pehle.