# असम और नगालैंड सीमा पर विवाद सुलझाने के लिए विधायकों ने रखी संयुक्त शांति समिति की रूपरेखा

> असम के सरुपथार और नगालैंड के भंडारी क्षेत्र के विधायकों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव घटाने और विकास को गति देने के लिए साझा शांति समिति गठित करने की पहल की है।

**Type:** article · **Category:** असम · **Published:** 2026-09-20 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/assam/assam-aura-nagaland-sima-para-vivada-sulajhane-ke-lie-vidhayakon-ne-rakhi-snyukta-shanti-samiti-ki-ruparekha-35262 · **Language:** Hindi
**Tags:** असम, नगालैंड, सीमा विवाद, बिस्वजीत फुकन, अच्युम्बेमो किकोन, नुमालीगढ़ रिफाइनरी, गोलाघाट

असम और नगालैंड की अंतरराज्यीय सीमा पर लंबे समय से चले आ रहे विवादों को सुलझाने और स्थानीय समुदायों के बीच आपसी तालमेल मजबूत करने के उद्देश्य से दोनों राज्यों के विधायकों ने मिलकर एक साझा शांति और समन्वय समिति बनाने का प्रस्ताव पेश किया है। असम के सरुपथार विधानसभा क्षेत्र के विधायक बिस्वजीत फुकन और नगालैंड के भंडारी विधानसभा क्षेत्र के विधायक अच्युम्बेमो किकोन ने एक संयुक्त बयान जारी कर सीमावर्ती इलाकों में शांति, सामाजिक सद्भाव और समग्र खुशहाली कायम रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। दोनों जनप्रतिनिधियों ने सीमावर्ती बस्तियों के सदियों पुराने सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्तों पर जोर देते हुए कहा कि स्थानीय मसलों का समाधान प्रशासनिक व्यवस्थाओं, कानून के दायरे और आपसी बातचीत से ही निकाला जाना चाहिए।

## उरियामघाट के पास सांस्कृतिक मिलन समारोह में हुई घोषणा
विधायक बिस्वजीत फुकन ने इस पहल की घोषणा गोलाघाट जिला प्रशासन की ओर से 19 सितंबर को उरियामघाट के निकट हाथीदुबी में आयोजित एक मैत्री और सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम के दौरान की। इस आयोजन ने विवादित क्षेत्र बेल्ट (डीएबी) में रहने वाले दोनों राज्यों के निवासियों को एक साझा मंच प्रदान किया, जिसमें स्थानीय कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी शामिल थीं। यह आयोजन असम के प्रसिद्ध सांस्कृतिक हस्ताक्षर जुबीन गर्ग की पहली पुण्यतिथि के दिन आयोजित हुआ, जहां लोगों ने उनकी विरासत और योगदान को भी श्रद्धापूर्वक याद किया।

## अफवाहों और टकराव को रोकने के लिए व्यापक सहयोग की अपील
दोनों विधायकों द्वारा जारी किए गए संयुक्त बयान में सीमावर्ती नागरिकों, नागरिक समाज संगठनों, ग्राम पंचायतों तथा प्रशासनिक अधिकारियों से आपसी समन्वय के साथ काम करने की अपील की गई है। बयान में स्पष्ट कहा गया है कि किसी भी प्रकार की गलत सूचना या अफवाहों से पैदा होने वाले टकराव को रोकना शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के लिए सबसे जरूरी शर्त है। इसके अलावा, सीमांत आबादी के बीच दूरियां घटाने के लिए संगीत, पारंपरिक कला, साहित्य, खेलकूद, युवा गतिविधियों और स्थानीय त्योहारों के जरिए नियमित सांस्कृतिक आदान-प्रदान शुरू करने का भी खाका तैयार किया गया है, जिसमें युवाओं की सक्रिय भागीदारी पर खास ध्यान दिया जाएगा।

## मुख्यमंत्रियों का सीमा सम्मेलन और बांस की खेती की बड़ी योजना
विधायक बिस्वजीत फुकन के अनुसार, विवादित क्षेत्र बेल्ट में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा और नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो के बीच एक सीमा सम्मेलन आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है, जिसके दौरान एक औपचारिक पौधारोपण अभियान भी शुरू किया जाएगा। आर्थिक मोर्चे पर वैध और पर्यावरण अनुकूल गतिविधियों को बढ़ावा देते हुए, असम सरकार ने इस सीमावर्ती पट्टी में रोपण के लिए पांच लाख टिश्यू-कल्चर बांस के पौधे उपलब्ध कराने का फैसला किया है। यह बांस नुमालीगढ़ रिफाइनरी के बांस आधारित बायो-रिफाइनरी संयंत्र के लिए कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल होगा। इस पहल के तहत लगभग 50 लाख रुपये मूल्य के एक लाख बांस के पौधे नगा निवासियों को बिना किसी शुल्क के बांटे जाएंगे, ताकि सीमांत किसानों को सीधे आर्थिक संबल मिल सके।

## इसका आप पर असर
यह पहल असम और नगालैंड सीमा पर रहने वाले ग्रामीणों के लिए टकराव के डर को कम कर सुरक्षित माहौल और नए रोजगार के अवसर तैयार करेगी।

- **भारत में:** यह कदम पूर्वोत्तर के दो महत्वपूर्ण राज्यों के बीच लंबे समय से जारी सीमा तनाव को शांतिपूर्ण संवाद और आर्थिक सहयोग से सुलझाने का एक राष्ट्रीय मॉडल पेश करता है। इससे दोनों राज्यों के बीच व्यापार, आवागमन और अंतरराज्यीय परियोजनाओं की सुरक्षा बेहतर होगी।
- **असम और नगालैंड में:** विवादित क्षेत्र बेल्ट (डीएबी) में रहने वाले निवासियों को अनावश्यक विवादों, अफवाहों और प्रशासनिक तनाव से राहत मिलेगी। साथ ही, नगा आबादी को 50 लाख रुपये मूल्य के एक लाख मुफ्त बांस के पौधे मिलेंगे, जिससे वे नुमालीगढ़ रिफाइनरी के लिए बांस उगाकर सीधी आय अर्जित कर सकेंगे।
- **किसानों और स्थानीय युवाओं के लिए:** नियमित खेल, कला और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से दोनों पक्षों के युवाओं में आपसी तालमेल बढ़ेगा। पर्यावरण अनुकूल बांस की खेती स्थानीय स्तर पर दीर्घकालिक आजीविका का ठोस जरिया बनेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
असम और नगालैंड की सीमा पर दशकों से जमीन और सीमांकन को लेकर स्थानीय स्तर पर विवाद और तनाव पैदा होते रहे हैं, जिसे सुलझाने के लिए दोनों राज्यों के जनप्रतिनिधियों ने साझा प्रयास शुरू किया है।

- **सीधे टकराव की पृष्ठभूमि:** सीमावर्ती पट्टी में गलत सूचना, जमीन पर स्थानीय विवाद और प्रशासनिक तालमेल की कमी के कारण अक्सर दोनों समुदायों के बीच टकराव की स्थिति बन जाती है। इसी कारण जनप्रतिनिधियों ने कानून के दायरे में रहकर बातचीत से समाधान खोजने पर जोर दिया है।
- **सांस्कृतिक संवाद की कमी:** लंबे समय तक संवादहीनता रहने से सीमांत बस्तियों में गलतफहमियां पनपती रही हैं, जिसे दूर करने के लिए गोलाघाट जिला प्रशासन ने उरियामघाट के हाथीदुबी में संयुक्त सांस्कृतिक बैठक का आयोजन किया।
- **आर्थिक निर्भरता का अभाव:** दोनों राज्यों के लोगों को साझा लाभ वाले आर्थिक तंत्र से नहीं जोड़ा गया था, जिसे हल करने के लिए अब नुमालीगढ़ रिफाइनरी के जैव-ईंधन संयंत्र हेतु बांस की साझा खेती का खाका तैयार किया गया है।

## सवाल-जवाब

### 1. असम और नगालैंड के किन विधायकों ने शांति समिति का प्रस्ताव रखा है?
असम के सरुपथार क्षेत्र के विधायक बिस्वजीत फुकन और नगालैंड के भंडारी क्षेत्र के विधायक अच्युम्बेमो किकोन ने यह संयुक्त प्रस्ताव रखा है।

### 2. यह घोषणा किस स्थान और कार्यक्रम में की गई?
यह घोषणा 19 सितंबर को उरियामघाट के पास हाथीदुबी में गोलाघाट जिला प्रशासन द्वारा आयोजित मैत्री और सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम में की गई।

### 3. सीमावर्ती क्षेत्र में बांस की खेती की क्या योजना है?
असम सरकार पांच लाख बांस के पौधे उपलब्ध कराएगी, जिसका उत्पादन नुमालीगढ़ रिफाइनरी के बायो-रिफाइनरी संयंत्र के लिए कच्चे माल के रूप में उपयोग होगा।

### 4. नगा निवासियों को कितने पौधे मुफ्त दिए जाएंगे?
लगभग 50 लाख रुपये मूल्य के एक लाख टिश्यू-कल्चर बांस के पौधे नगा निवासियों को मुफ्त बांटे जाएंगे।

### 5. किन दो मुख्यमंत्रियों के बीच सम्मेलन की तैयारी की जा रही है?
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा और नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो के बीच विवादित क्षेत्र में सीमा सम्मेलन और पौधारोपण अभियान आयोजित करने की योजना है।

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