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  "type": "article",
  "title": "असम के इस जिले में शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव, एक भी घर में नहीं हुआ बच्चा",
  "summary": "असम के बजाली जिले ने स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में सौ प्रतिशत संस्थागत प्रसव दर्ज किए हैं। इस दौरान क्षेत्र में एक भी घरेलू प्रसव का मामला सामने नहीं आया है।",
  "content": "असम का बजाली जिला मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक मिसाल बनकर उभरा है। जिले के स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में चालू वित्त वर्ष के शुरुआती चार महीनों के दौरान शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव दर्ज किए गए हैं, और अप्रैल से जुलाई के बीच एक भी घर में बच्चे के जन्म की घटना सामने नहीं आई है।\n\nवर्ष-दर-वर्ष बेहतर होते आंकड़े\n\nजिले में पिछले कुछ वर्षों से संस्थागत प्रसव के ग्राफ में लगातार सुधार देखा जा रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 99.65 प्रतिशत था, जो इसके अगले वर्ष 2025-26 में बढ़कर 99.81 प्रतिशत तक पहुंच गया। अब चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में यह आंकड़ा पूरे सौ प्रतिशत के मुकाम पर पहुंच गया है।\n\nसमीक्षा अवधि के दौरान दर्ज मामलों की संख्या भी इस बदलाव की गवाही देती है। जिला आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 के दौरान कुल 3,167 संस्थागत प्रसव हुए थे, जबकि वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 3,321 हो गई। इसके अलावा, चालू वर्ष के अप्रैल से जुलाई के चार महीनों के भीतर कुल 713 संस्थागत प्रसव दर्ज किए गए हैं।\n\nघरेलू प्रसव मामलों में आई भारी गिरावट\n\nसंस्थागत प्रसवों में आई इस तेजी के साथ-साथ जिले में घरेलू प्रसव के मामलों में भी भारी कमी दर्ज की गई है। पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान जहां घर पर प्रसव के 11 मामले रिकॉर्ड किए गए थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या घटकर केवल छह रह गई। इसके बाद, अप्रैल से जुलाई 2026 की अवधि के दौरान एक भी घरेलू प्रसव की सूचना नहीं मिली है।\n\nचिकित्सकों का मानना है कि अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव होने से जच्चा और बच्चा दोनों को प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मियों की देखरेख मिलती है। किसी भी प्रकार की जटिलता आने पर समय पर उचित इलाज मिल जाता है, जिससे मातृ और शिशु स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से यह उपलब्धि बेहद अहम हो जाती है।\n\nमुख्यमंत्री कार्यालय की प्रतिक्रिया\n\nराज्य के मुख्यमंत्री कार्यालय ने इन आंकड़ों को सार्वजनिक करते हुए बजाली जिले में एक भी घर में प्रसव न होने की बात पर विशेष जोर दिया। कार्यालय की ओर से इस सफलता को असम की स्वास्थ्य सेवाओं की यात्रा में एक और बड़ी उपलब्धि बताया गया है, जो मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और संस्थागत प्रसव की पहुंच बढ़ाने के निरंतर प्रयासों का परिणाम है।\n\nयह प्रगति राज्य भर में मां और नवजात शिशु के स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने तथा बिना चिकित्सीय निगरानी के होने वाले प्रसवों से जुड़े जोखिमों को कम करने के व्यापक प्रयासों को भी दर्शाती है।\n\nइसका आप पर असर\nयह उपलब्धि दर्शाती है कि ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सेवाओं और जागरूकता का दायरा तेजी से बढ़ रहा है।\n\n• भारत में: देश भर के अन्य जिलों के लिए यह एक सकारात्मक उदाहरण है कि कैसे प्रशासनिक प्रयासों और जागरूकता अभियानों से घरेलू प्रसवों को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है।\n\n• बजाली में: स्थानीय गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को अब प्रसव के दौरान प्रशिक्षित डॉक्टरों और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की पूरी सुरक्षा मिल रही है, जिससे मातृ मृत्यु दर में कमी आएगी।\n\n• स्वास्थ्य सुरक्षा: अस्पताल में सुरक्षित प्रसव होने से किसी भी आपात स्थिति या जटिलता के समय तुरंत चिकित्सीय सहायता उपलब्ध हो जाती है।\n\n• योजनाओं का लाभ: शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव होने से सरकार द्वारा चलाई जाने वाली मातृ कल्याण योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचना सुनिश्चित होता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nबजाली जिले में शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव का यह मुकाम प्रशासनिक पहलों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के समन्वित प्रयासों और लोगों में बढ़ती जागरूकता के कारण संभव हो पाया है। पिछले कुछ वर्षों में स्थानीय स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीण इलाकों में संस्थागत प्रसव के फायदों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं।\n\n• जागरूकता अभियान: स्वास्थ्य विभाग और मैदानी कार्यकर्ताओं ने गर्भवती महिलाओं को अस्पतालों में पंजीकरण कराने और नियमित जांच करवाने के लिए प्रेरित किया।\n\n• बुनियादी ढांचे का विस्तार: जिला प्रशासन ने प्रसव केंद्रों और अस्पतालों तक गर्भवती महिलाओं की पहुंच को आसान बनाने के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर किया।\n\n• निगरानी प्रणाली: जिले में हर एक गर्भावस्था की ट्रैकिंग सुनिश्चित की गई, जिससे किसी भी महिला को घरेलू प्रसव की स्थिति में जाने से पहले चिकित्सीय दायरे में लाया जा सके।\n\n• सरकारी प्रोत्साहन: विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के तहत मिलने वाले लाभों और सुरक्षित प्रसव के संदेश ने पारंपरिक रूप से घरों में होने वाले प्रसवों के प्रति लोगों की सोच को बदला है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बजाली जिले ने कितने प्रतिशत संस्थागत प्रसव दर्ज किए हैं?\nबजाली जिले ने चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में सौ प्रतिशत संस्थागत प्रसव दर्ज किए हैं।\n\n2. अप्रैल से जुलाई के बीच जिले में कितने घरेलू प्रसव हुए?\nअप्रैल से जुलाई के बीच की अवधि में जिले में एक भी घरेलू प्रसव दर्ज नहीं किया गया।\n\n3. वित्तीय वर्ष 2024-25 में जिले में कितने संस्थागत प्रसव हुए थे?\nवर्ष 2024-25 के दौरान जिले में कुल 3,167 संस्थागत प्रसव दर्ज किए गए थे।\n\n4. वर्ष 2025-26 में घर पर होने वाले प्रसवों की संख्या कितनी थी?\nवर्ष 2025-26 के दौरान घर पर प्रसव के मामलों की संख्या घटकर छह रह गई थी।\n\n5. इस उपलब्धि का मुख्य लाभ क्या है?\nसंस्थागत प्रसव होने से माताओं और नवजात शिशुओं को प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मियों की देखरेख और जटिलताओं के समय समय पर उचित देखभाल मिलती है।",
  "url": "https://trendkia.com/assam/assam-district-achieves-100-institutional-deliveries-with-zero-home-births-32509",
  "category": "असम",
  "publishedAt": "2026-09-15",
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    "बजाली जिला",
    "असम स्वास्थ्य",
    "संस्थागत प्रसव",
    "मातृ स्वास्थ्य",
    "शिशु देखभाल"
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  "site": "TrendKia"
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