# असम के 93वें नलबाड़ी रास महोत्सव की तैयारियां तेज, 24 नवंबर से सजेगा धार्मिक मंच

> असम के नलबाड़ी में 24 नवंबर से 6 दिसंबर तक चलने वाले 93वें रास महोत्सव की तैयारियों की समीक्षा बैठक हुई, जिसमें विभिन्न समितियों को समय पर काम पूरा करने के निर्देश दिए गए।

**Type:** article · **Category:** असम · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/assam/assam-ke-93ven-nalbari-raas-mahotsav-ki-taiyariyan-teja-24-navnbara-se-sajega-dharmika-mncha-55667 · **Language:** Hindi
**Tags:** नलबाड़ी रास महोत्सव, असम समाचार, श्री श्री हरि मंदिर, जयंत मल्ला बरुआ, रास लीला, सांस्कृतिक उत्सव असम

असम के प्रसिद्ध और पारंपरिक आयोजनों में शुमार नलबाड़ी रास महोत्सव के 93वें संस्करण को लेकर प्रशासनिक और संगठनात्मक स्तर पर तैयारियां जोर पकड़ने लगी हैं। यह वार्षिक सांस्कृतिक व धार्मिक उत्सव इस वर्ष 24 नवंबर से शुरू होकर 6 दिसंबर तक चलेगा। पूरे 13 दिनों तक चलने वाले इस भव्य आयोजन को लेकर नलबाड़ी के ऐतिहासिक श्री श्री हरि मंदिर परिसर में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें उत्सव से जुड़ी सभी जरूरी व्यवस्थाओं की विस्तार से पड़ताल की गई।

## समितियों के कामकाज की समीक्षा और दिशा-निर्देश
श्री श्री हरि मंदिर परिसर में आयोजित इस बैठक में विभिन्न उप-समितियों के संयोजकों, सह-संयोजकों और सदस्यों ने भाग लिया। बैठक के दौरान प्रत्येक समिति द्वारा अब तक किए गए कार्यों की प्रगति जांची गई और आयोजन को निर्बाध व व्यवस्थित रखने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। असम सरकार के मंत्री और नलबाड़ी के विधायक जयंत मल्ला बरुआ ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए सभी समितियों के बीच मजबूत आपसी समन्वय बनाए रखने पर खास जोर दिया, ताकि सभी प्रबंध तय समय सीमा के भीतर पूरे किए जा सकें।

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बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि उत्सव में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं और दर्शकों की सुविधा के लिए सभी स्तरों पर व्यवस्थाएं सुचारू होनी चाहिए। जयंत मल्ला बरुआ ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि नलबाड़ी की सांस्कृतिक पहचान का प्रिय प्रतीक यह रास महोत्सव सामूहिक प्रतिबद्धता की मांग करता है। उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी पक्षों से इस उत्सव को सफल बनाने के लिए एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया।

## 1933 से जारी है ऐतिहासिक परंपरा
नलबाड़ी का रास महोत्सव असम के सबसे विशाल और प्रतिष्ठित धार्मिक-सांस्कृतिक पर्वों में गिना जाता है। इस महोत्सव का इतिहास नौ दशकों से भी अधिक पुराना है। इसकी शुरुआत वर्ष 1933 में नलबाड़ी के ऐतिहासिक श्री श्री हरि मंदिर में हुई थी, और तब से लेकर आज तक हर साल यह परंपरा निरंतर जारी है।

भगवान श्रीकृष्ण की पारंपरिक रास लीला पर आधारित यह 13 दिवसीय महोत्सव केवल नलबाड़ी ही नहीं, बल्कि समूचे असम और राज्य के बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण केंद्र रहता है। इस वर्ष भी लाखों की संख्या में भक्तों और दर्शकों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए मंदिर और मेला परिसर के सभी बुनियादी इंतजामों को समय रहते दुरुस्त किया जा रहा है।

## इसका आप पर असर
नलबाड़ी रास महोत्सव के शुरू होने से श्रद्धालुओं और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों को सीधा लाभ मिलेगा।

- **श्रद्धालुओं के लिए:** 24 नवंबर से 6 दिसंबर तक चलने वाले इस 13 दिवसीय महोत्सव में लोगों को पारंपरिक रास लीला देखने का अवसर मिलेगा। मंदिर परिसर में बुनियादी सुविधाओं और भीड़ प्रबंधन पर विशेष काम किया जा रहा है ताकि दर्शन सुगम रहें।
- **असम में:** पूरे राज्य से आने वाले पर्यटकों और भक्तों के कारण अंतर-जिला परिवहन सेवाओं में मांग बढ़ेगी। लंबी दूरी से आने वाले यात्रियों को अपनी यात्रा और ठहरने की योजना पहले से बना लेनी चाहिए।
- **नलबाड़ी में:** उत्सव के दौरान भारी भीड़ जुटने से स्थानीय व्यापारियों, हस्तशिल्प विक्रेताओं और खान-पान के स्टॉलों को बड़ा आर्थिक बढ़ावा मिलेगा। शहर में यातायात डायवर्जन और प्रशासनिक सुरक्षा व्यवस्थाएं बढ़ाई जाएंगी।
- **सामुदायिक भागीदारी:** विभिन्न उप-समितियों के माध्यम से स्थानीय नागरिक और स्वयंसेवक आयोजन को सुचारू बनाने में सीधे सक्रिय रहेंगे। इससे क्षेत्र के सांस्कृतिक ताने-बाने और पर्यटन को मजबूती मिलेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यह समीक्षा बैठक नलबाड़ी रास महोत्सव के 93वें संस्करण की शुरुआत से पहले सभी जरूरी व्यवस्थाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए बुलाई गई थी।

- **तैयारियों का समयबद्ध निष्पादन:** महोत्सव 24 नवंबर से शुरू होना है, जिसके चलते बुनियादी ढांचे, मंच निर्माण और स्वच्छता के कार्यों को समय पर पूरा करना अनिवार्य है। बैठक का प्राथमिक उद्देश्य विभिन्न उप-समितियों की प्रगति की समीक्षा करना था।
- **बड़े पैमाने पर श्रद्धालुओं का आगमन:** असम का यह प्रमुख धार्मिक पर्व हर साल हजारों दर्शकों को आकर्षित करता है। बड़ी संख्या में आने वाले लोगों के प्रबंधन के लिए प्रशासनिक समन्वय और पूर्व तैयारी जरूरी होती है।
- **1933 से चली आ रही परंपरा का संरक्षण:** यह महोत्सव 1933 से लगातार श्री श्री हरि मंदिर में आयोजित हो रहा है। नलबाड़ी की पहचान बन चुकी इस ऐतिहासिक विरासत की भव्यता और मर्यादा बनाए रखने के लिए विस्तृत योजना बनाई गई है।

## सवाल-जवाब

### 1. नलबाड़ी रास महोत्सव का 93वां संस्करण कब से कब तक आयोजित होगा?
यह महोत्सव 24 नवंबर से शुरू होकर 6 दिसंबर तक कुल 13 दिनों तक आयोजित किया जाएगा।

### 2. यह धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव कहां मनाया जाता है?
यह वार्षिक उत्सव असम के नलबाड़ी स्थित ऐतिहासिक श्री श्री हरि मंदिर परिसर में आयोजित होता है।

### 3. नलबाड़ी रास महोत्सव का इतिहास कितना पुराना है?
इस महोत्सव की शुरुआत वर्ष 1933 में हुई थी और तब से यह हर साल नियमित रूप से मनाया जा रहा है।

### 4. आयोजन की तैयारियों की समीक्षा बैठक किसने ली?
असम सरकार के मंत्री और नलबाड़ी के विधायक जयंत मल्ला बरुआ ने आयोजन समितियों के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।

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