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  "type": "article",
  "title": "असम के आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता प्रणब डोले पर लगा रासुका रद्द, गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने दिया रिहाई का आदेश",
  "summary": "गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता प्रणब डोले के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत के आदेश को निरस्त कर दिया है। 117 दिनों की जेल के बाद 7 या 8 नवंबर तक उनकी रिहाई संभव है।",
  "content": "गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने असम के आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता प्रणब डोले के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत की गई हिरासत को रद्द कर दिया है। 117 दिनों तक जेल में रहने के बाद अब उनकी रिहाई का मार्ग पूरी तरह साफ हो गया है। प्रणब डोले के वकील दीपेश अगरवाला के अनुसार, उच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद उन्हें 7 या 8 नवंबर तक जेल से रिहा किए जाने की संभावना है।\n\nहिरासत के आदेश में पाई गईं गंभीर खामियां\nउच्च न्यायालय की एक खंडपीठ के समक्ष याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रणब डोले के अधिवक्ता दीपेश अगरवाला ने राज्य सरकार की कार्रवाई को चुनौती दी थी। अदालत ने पाया कि प्रशासन द्वारा उद्धृत पुराने आपराधिक मामलों और वर्तमान निरोधात्मक हिरासत के बीच कोई सीधा या हालिया संबंध नहीं था। इसके अलावा, प्राधिकारियों ने डोले को मामले से जुड़े सभी प्रासंगिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए थे और उनकी हिरासत को चुनौती देने वाले दूसरे अभ्यावेदन पर भी विचार करने में विफलता बरती थी। इन कानूनी खामियों को आधार बनाते हुए अदालत ने रासुका आदेश को खारिज कर दिया।\n\nकाजीरंगा होटल परियोजना के खिलाफ आंदोलन\nग्रेटर काजीरंगा लैंड एंड ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन कमेटी (GKLHRPC) के संयोजक प्रणब डोले को 12 जुलाई को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। वह काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की सीमा पर स्थित इंगले पथर गांव में प्रस्तावित एक लक्जरी हयात होटल परियोजना के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे। स्थानीय आदिवासी समुदाय पिछले चार वर्षों से इस पांच सितारा होटल परियोजना का विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है कि यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर स्थल के आसपास इस तरह के निर्माण से उनकी पारंपरिक भूमि के अधिकारों और आजीविका के साधनों पर गंभीर असर पड़ेगा।\n\nगिरफ्तारी और रासुका लगाने का घटनाक्रम\nपुलिस ने डोले पर आरोप लगाया था कि उन्होंने विरोध प्रदर्शन के दौरान टी ट्राइब्स म्यूजियम और असम टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (ATDC) हयात परियोजना स्थल में घातक हथियारों के साथ गैरकानूनी प्रवेश किया था। इसके बाद, गोलाघाट की एक सत्र अदालत ने 29 जुलाई को डोले को जमानत दे दी थी। अदालत ने टिप्पणी की थी कि जांच अधिकारी पहले ही मुख्य गवाहों के बयान दर्ज कर चुके हैं, इसलिए साक्ष्यों से छेड़छाड़ की कोई गुंजाइश नहीं है। हालांकि, जमानत मिलने के ठीक एक दिन बाद, 30 जुलाई को असम सरकार ने NSA लागू कर उन्हें जेल में ही रोक लिया। सरकार का दावा था कि डोले संदिग्ध विदेशी वित्तीय लेन-देन में शामिल थे, जो फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट यानी FCRA का उल्लंघन था।\n\nनागरिक संगठनों और अंतरराष्ट्रीय समुदायों का समर्थन\nराष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत प्रशासन किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के 12 महीने तक निवारक हिरासत में रख सकता है। प्रणब डोले की गिरफ्तारी और निरोध के खिलाफ व्यापक विरोध दर्ज कराया गया था। देश भर के 60 से अधिक अधिकार समूहों, ट्रेड यूनियनों और नागरिक समाज संगठनों ने उनकी हिरासत वापस लेने की मांग की थी। इसके साथ ही केन्या के 26 आदिवासी समुदायों ने भी डोले की रिहाई के समर्थन में आवाज उठाई थी।\n\nइसका आप पर असर\nयह फैसला भारत में नागरिक अधिकारों की रक्षा और असम में स्थानीय समुदायों के भूमि अधिकारों के लिए महत्वपूर्ण कानूनी संदेश देता है।\n\n• भारत में: यह निर्णय स्पष्ट करता है कि बिना पर्याप्त कानूनी आधार या हालिया साक्ष्यों के निरोधात्मक हिरासत कानूनों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इससे नागरिकों के व्यक्तिगत स्वतंत्रता अधिकारों को सुरक्षा मिलती है।\n• असम में: काजीरंगा क्षेत्र के स्थानीय और आदिवासी समुदायों को अपनी पारंपरिक जमीनों और आजीविका की रक्षा के लिए कानूनी बल मिलेगा। होटल निर्माण से जुड़े पर्यावरण और भूमि विवादों पर स्थानीय लोगों का रुख मजबूत होगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nउच्च न्यायालय द्वारा रासुका आदेश को रद्द करने का मुख्य कारण प्रक्रियात्मक कमियां और साक्ष्यों का अभाव रहा।\n\n• पुराने मामलों से संबंध का अभाव: अदालत ने पाया कि पुलिस द्वारा डोले के खिलाफ दिए गए पुराने आपराधिक मामलों का उनकी वर्तमान हिरासत से कोई तात्कालिक या प्रत्यक्ष संबंध नहीं था।\n• दस्तावेजों की आपूर्ति न होना: अधिकारियों ने कानून के अनुसार डोले को अपने बचाव के लिए आवश्यक सभी संबंधित दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं कराए थे।\n• अभ्यावेदन की अनदेखी: राज्य सरकार ने हिरासत आदेश को दी गई डोले की दूसरी चुनौती याचिका पर विचार करने में विफलता दिखाई, जो संवैधानिक प्रक्रिया का उल्लंघन था।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. प्रणब डोले कौन हैं?\nप्रणब डोले असम के एक आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता हैं और ग्रेटर काजीरंगा लैंड एंड ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन कमेटी के संयोजक हैं।\n\n2. अदालत ने प्रणब डोले के खिलाफ रासुका आदेश क्यों रद्द किया?\nअदालत ने पाया कि उनके खिलाफ दर्ज पुराने मामलों और हिरासत के बीच कोई सीधा संबंध नहीं था तथा आवश्यक दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए गए थे।\n\n3. प्रणब डोले कितने समय से जेल में बंद थे?\nवह 117 दिनों से जेल में बंद थे और 7 या 8 नवंबर तक उनकी रिहाई होने की उम्मीद है।\n\n4. उन्हें किस विरोध प्रदर्शन के बाद गिरफ्तार किया गया था?\nउन्हें काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के पास प्रस्तावित एक लक्जरी हयात होटल परियोजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के बाद गिरफ्तार किया गया था।",
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