# असम के बाढ़ प्रभावित जिलों को जनगणना मकान सूचीकरण के लिए मिला अतिरिक्त समय

> असम के चराईदेव और शिवसागर जिलों में बाढ़ के कारण रुकी जनगणना प्रक्रिया को पूरा करने के लिए भारत के महारजिस्ट्रार ने समय-सीमा को बढ़ाकर 31 अक्टूबर कर दिया है।

**Type:** article · **Category:** असम · **Published:** 2026-09-18 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/assam/assam-ke-barha-prabhavita-jilon-ko-janaganana-makana-suchikarana-ke-lie-mila-atirikta-samaya-33221 · **Language:** Hindi
**Tags:** असम, जनगणना 2027, शिवसागर, चराईदेव, मकान सूचीकरण

बाढ़ के संकट से जूझ रहे असम के चराईदेव और शिवसागर जिलों में रहने वाले लोगों के लिए राहत की खबर है। भारत के महारजिस्ट्रार ने इन दोनों आपदा प्रभावित क्षेत्रों में जनगणना 2027 के पहले चरण, यानी मकान सूचीकरण और आवास जनगणना (HLO) की समय-सीमा को लगभग एक महीने के लिए आगे बढ़ा दिया है। अब इन जिलों में यह काम अक्टूबर के अंत तक पूरा किया जा सकेगा।

## महारजिस्ट्रार द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना
भारत के महारजिस्ट्रार और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण द्वारा जारी एक आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, इन दो विशिष्ट जिलों में मकान सूचीकरण अभियान और आवास जनगणना की प्रक्रिया अब 31 अक्टूबर तक चालू रहेगी। पहले के कार्यक्रम के तहत राज्य के अन्य हिस्सों में इस काम को तय अवधि में पूरा किया जाना था, लेकिन इन दोनों जिलों में गंभीर प्राकृतिक परिस्थितियों को देखते हुए विशेष छूट दी गई है।

## बाढ़ के कारण बाधित हुआ था काम
असम के बाकी हिस्सों में इस जनगणना अभ्यास का पहला चरण 17 अगस्त से 15 सितंबर के बीच आयोजित किया गया था। हालांकि, अगस्त के महीने में शिवसागर और चराईदेव जिलों में आई भयानक बाढ़ के कारण वहां की परिस्थितियां अत्यंत गंभीर हो गई थीं। इस प्राकृतिक आपदा की वजह से जनगणना से जुड़े प्रशिक्षण सत्रों और अन्य प्रारंभिक तैयारियों को पूरी तरह से रोकना पड़ा था। इसी वजह से प्रशासन समय पर इस अभियान को आगे नहीं बढ़ा पाया। अब एक विशेष प्रावधान के तहत इन दोनों जिलों में मकान सूचीकरण के काम को 31 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।

## जनगणना 2027 की रूपरेखा और दो चरण
यह दशकीय जनगणना मूल रूप से साल 2021 में आयोजित होने वाली थी, लेकिन COVID-19 महामारी के देशव्यापी प्रकोप और उसके बाद उत्पन्न हुई परिस्थितियों के कारण इसे स्थगित करना पड़ा था। अब जनगणना 2027 को दो अलग-अलग चरणों में पूरा करने की योजना बनाई गई है। इसके पहले चरण में अप्रैल और सितंबर 2026 के बीच मकानों की सूची तैयार करने और आवासों की गणना करने का काम किया जाएगा। इसके बाद, दूसरे चरण के तहत फरवरी 2027 में वास्तविक जनसंख्या की गणना की जाएगी।

मकान सूचीकरण (HLO) के चरण में, प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी देश भर के सभी ढांचों, मकानों और परिवारों का एक व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार करते हैं। यह विस्तृत रूपरेखा तैयार होने के बाद ही जनसंख्या की मुख्य गणना का काम सुचारू रूप से शुरू किया जा सकता है।

## स्व-गणना का विकल्प और समय-सीमा
जनगणना आयुक्त के कार्यालय द्वारा इससे पहले जनवरी में जारी की गई एक अधिसूचना में स्पष्ट किया गया था कि मकान सूचीकरण का काम 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 के बीच किया जाना आवश्यक है। इसके तहत प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की सरकार को अपनी सुविधानुसार इस समय सीमा के भीतर किसी भी 30 दिनों की अवधि को चुनने का अधिकार दिया गया है।

इस बार की जनगणना में नागरिकों को स्व-गणना (self-enumeration) का एक आधुनिक विकल्प भी प्रदान किया जाएगा। राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, घर-घर जाकर की जाने वाली 30 दिनों की भौतिक मकान सूचीकरण प्रक्रिया शुरू होने से ठीक 15 दिन पहले तक लोगों के लिए इस स्व-गणना की सुविधा का पोर्टल खुला रहेगा, जिसका उपयोग वे खुद अपनी जानकारी दर्ज करने के लिए कर सकते हैं।

## इसका आप पर असर
इस समय-सीमा विस्तार से यह सुनिश्चित होगा कि आपदा-प्रवण क्षेत्रों के निवासी आगामी राष्ट्रीय जनगणना डेटाबेस से बाहर न छूटें।

- **असम के शिवसागर और चराईदेव में:** बाढ़ से प्रभावित परिवारों को जनगणना कर्मियों के सामने अपनी जानकारी दर्ज कराने से पहले संभलने का अतिरिक्त समय मिलेगा। इसका सीधा मतलब यह है कि स्थानीय निवासी नए जनगणना रिकॉर्ड से जुड़े महत्वपूर्ण सरकारी लाभों को पाने से वंचित नहीं रहेंगे।
- **भारत भर में:** समय-सीमा का यह बदलाव यह दर्शाता है कि स्थानीय मौसम और आपातकालीन परिस्थितियों के अनुसार जनगणना के कार्यक्रम को बदला जा सकता है। इस लचीलेपन से भविष्य की सरकारी नीतियों को बनाने के लिए देश के पास अधिक सटीक आंकड़े उपलब्ध होंगे।

## ऐसा क्यों हुआ
जनगणना की समय-सीमा में यह बदलाव मुख्य रूप से क्षेत्र में आई प्राकृतिक आपदा के कारण हुआ है।

- **गंभीर बाढ़ की स्थिति:** अगस्त के महीने में भारी बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने शिवसागर और चराईदेव को जलमग्न कर दिया था। इस पर्यावरणीय संकट के कारण प्रशासनिक तालमेल बिठाना और यात्रा करना पूरी तरह से असंभव हो गया था।
- **प्रशिक्षण कार्यक्रम स्थगित होना:** बाढ़ के चरम स्तर पर होने के कारण स्थानीय अधिकारियों और जनगणना कर्मियों के लिए प्रशिक्षण सत्र आयोजित नहीं किए जा सके। इस वजह से मकान सूचीकरण चरण की पूरी प्रारंभिक तैयारी बीच में ही ठप हो गई थी।
- **महामारी का प्रभाव:** मूल रूप से 2021 में होने वाली इस जनगणना में COVID-19 महामारी के कारण पहले ही बड़ी देरी हो चुकी है। इस वजह से अब कार्यक्रम को इस प्रकार व्यवस्थित किया जा रहा है कि कोई भी क्षेत्र छूटने न पाए।

## सवाल-जवाब

### 1. चराईदेव और शिवसागर में जनगणना की समय-सीमा क्यों बढ़ाई गई है?
अगस्त में आई गंभीर बाढ़ के कारण इन जिलों में जनगणना से जुड़े प्रशिक्षण और तैयारी के काम ठप हो गए थे, इसलिए यह विस्तार दिया गया है।

### 2. इन दोनों जिलों में मकान सूचीकरण चरण की नई समय-सीमा क्या है?
चराईदेव और शिवसागर में मकानों की सूची बनाने और आवास जनगणना का काम अब 31 अक्टूबर 2026 तक पूरा किया जा सकता है।

### 3. असम के अन्य हिस्सों में मकान सूचीकरण का काम कब आयोजित किया गया था?
असम के बाकी हिस्सों में यह अभियान 17 अगस्त से 15 सितंबर के बीच आयोजित किया गया था।

### 4. मूल रूप से साल 2021 में होने वाली जनगणना में देरी क्यों हुई?
हर दस साल में होने वाली इस राष्ट्रीय जनगणना को COVID-19 महामारी के प्रकोप के कारण स्थगित करना पड़ा था।

### 5. नई जनगणना प्रणाली में स्व-गणना का विकल्प क्या है?
नागरिक घर-घर जाकर की जाने वाली भौतिक सूचीकरण प्रक्रिया शुरू होने से ठीक 15 दिन पहले ऑनलाइन माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं।

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