असम के डिब्रूगढ़ में ऑयल इंडिया संयंत्र विस्फोट में मृतकों की संख्या बढ़कर तीन हुई तेंगाखात स्थित ऑयल इंडिया लिमिटेड के इंटरमीडिएट टैंक फार्म में हुए भीषण विस्फोट और आग में दो और गंभीर रूप से झुलसे कर्मियों ने दम तोड़ दिया, जिससे मृतकों की संख्या तीन हो गई है। असम के डिब्रूगढ़ जिले में सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख पेट्रोलियम कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड के एक संयंत्र में हुए भीषण विस्फोट और उसके बाद भड़की आग की घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है। शुक्रवार को तेंगाखात स्थित इंटरमीडिएट टैंक फार्म में मेंटेनेंस कार्य के दौरान यह विनाशकारी हादसा हुआ था। हादसे के बाद अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे दो कर्मियों ने शनिवार को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जबकि एक कर्मी की मौत हादसे वाले दिन ही हो गई थी। इस दुर्घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है और तीन अन्य गंभीर रूप से घायल कर्मी अब भी अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। गंभीर रूप से झुलसे दो कर्मियों ने शनिवार को तोड़ा दम शनिवार को जान गंवाने वाले कर्मियों में एक वरिष्ठ इंजीनियर और संविदा फर्म के कर्मचारी शामिल हैं। मृतकों में से एक तापस ज्योति गोगोई पेशे से इंजीनियर थे, जिन्होंने डिब्रूगढ़ के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। कंपनी के एरिया मैनेजर कमल फुकन ने उनके निधन की पुष्टि की। डिब्रूगढ़ के मिलन नगर स्थित एन गली के निवासी तापस ज्योति गोगोई पिछले तेरह वर्षों से कंपनी से जुड़े हुए थे। परिवार के अनुसार, वे इस अग्निकांड में लगभग सत्तर प्रतिशत तक झुलस गए थे और शनिवार तड़के लगभग तीन बजे उन्होंने दम तोड़ दिया। वे अपने पीछे माता-पिता, पत्नी और एक बेटी को छोड़ गए हैं। शनिवार को दम तोड़ने वाले दूसरे कर्मी की पहचान रूपम गोहेन के रूप में हुई है। रूपम गोहेन ऑयल इंडिया लिमिटेड द्वारा अनुबंधित निजी कंपनी स्पेक्ट्रॉन इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड में कार्यरत थे। विस्फोट के तुरंत बाद उन्हें बेहद गंभीर हालत में गुवाहाटी के अस्पताल में रेफर किया गया था, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इससे पहले शुक्रवार को घटना के तुरंत बाद राजू दत्ता नामक एक अन्य कर्मी की जान चली गई थी। हादसे के समय मौके पर मौजूद थे नौ कर्मचारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, शुक्रवार को जब तेंगाखात स्थित इंटरमीडिएट टैंक फार्म में मेंटेनेंस का काम चल रहा था, उस वक्त घटनास्थल पर कुल नौ कर्मचारी मौजूद थे। अचानक हुए जोरदार धमाके और उसके बाद तेजी से फैली लपटों की चपेट में आकर सात कर्मी बुरी तरह झुलस गए थे। प्रारंभिक तौर पर सभी घायलों को तुरंत डिब्रूगढ़ स्थित असम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया था। बाद में गंभीर स्थिति को देखते हुए कुछ मरीजों को विशेष इलाज के लिए निजी अस्पतालों और गुवाहाटी रेफर किया गया। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि हादसे में घायल हुए तीन अन्य कर्मियों की स्थिति अब भी बेहद नाजुक बनी हुई है और वे सघन चिकित्सा निगरानी में हैं। प्रशासनिक सक्रियता और सहायता राशि की घोषणा इस भीषण औद्योगिक दुर्घटना के बाद असम सरकार और केंद्र सरकार दोनों स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने अपने प्रमुख सचिव को निर्देश दिया कि वे ऑयल इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक रंजीत रथ के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखें। मुख्यमंत्री कार्यालय ने स्पष्ट किया कि प्रभावित परिवारों को यथोचित मुआवजा मिलना चाहिए और घायलों को सर्वोत्तम संभव चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर दुख व्यक्त करते हुए शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। ऑयल इंडिया लिमिटेड ने मृतकों के आश्रितों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है। सार्वजनिक उपक्रम प्रबंधन के अनुसार, प्रत्येक मृतक के निकटतम परिजन को दस लाख रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान की जाएगी, जबकि प्रत्येक घायल कर्मी को पांच लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही प्रबंधन ने असम सरकार को भरोसा दिलाया है कि घटना की पूरी तह तक जाने के लिए उच्च स्तरीय विस्तृत जांच कराई जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग डिब्रूगढ़ लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भी घटना पर गहरा दुख जताया। उन्होंने ऑयल इंडिया लिमिटेड के सीएमडी रंजीत रथ से व्यक्तिगत रूप से बात करके पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की। केंद्रीय मंत्री ने सीएमडी को निर्देश दिया कि घायलों के इलाज में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए और बिना किसी देरी के सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं। इसके साथ ही उन्होंने संयंत्र में आग लगने और धमाके के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए एक निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करने और पीड़ित परिवारों को उचित सहायता सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। इसका आप पर असर ऑयल इंडिया के तेंगाखात संयंत्र में हुए इस भीषण हादसे से पेट्रोलियम क्षेत्र में सुरक्षा ऑडिट और पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे की प्रक्रिया तत्काल शुरू हो गई है। • भारत में: सार्वजनिक क्षेत्र के सभी तेल और गैस डिपो तथा इंटरमीडिएट टैंक फार्मों में मेंटेनेंस के दौरान अपनाए जाने वाले सुरक्षा मानकों की गहन समीक्षा की जाएगी। पेट्रोलियम प्रतिष्ठानों में काम करने वाले संविदा कर्मियों और तकनीकी विशेषज्ञों की कार्यस्थल सुरक्षा और बीमा नीतियों पर नए नियम लागू किए जा सकते हैं। • असम और डिब्रूगढ़ में: हादसे के शिकार हुए प्रत्येक मृतक कर्मी के परिवार को 10 लाख रुपये और घायलों को 5 लाख रुपये की सहायता राशि तत्काल उपलब्ध कराई जा रही है। स्थानीय अस्पतालों में भर्ती तीन अन्य गंभीर रूप से झुलसे कर्मियों को कंपनी की देखरेख में उच्च स्तरीय इलाज दिया जा रहा है। • कर्मियों और श्रमिकों के लिए: खतरनाक ईंधन संयंत्रों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए हॉट-वर्क और टैंक मेंटेनेंस प्रोटोकॉल को कड़ा किया जाएगा। सभी तकनीशियनों को आपातकालीन निकासी और आग से बचाव के सुरक्षा उपकरणों का अनिवार्य प्रशिक्षण दिया जा सकता है। • ऊर्जा आपूर्ति और संचालन: क्षतिग्रस्त इंटरमीडिएट स्टोरेज यूनिट की मरम्मत पूरी होने तक कच्चे तेल के अस्थायी भंडारण और स्थानीय पाइपलाइन प्रवाह पर अतिरिक्त तकनीकी निगरानी रखी जाएगी। संचालन सुचारु रखने के लिए पास के वैकल्पिक टैंक फार्मों का अस्थायी उपयोग किया जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ तेंगाखात स्थित इंटरमीडिएट टैंक फार्म में शुक्रवार को मेंटेनेंस कार्य के दौरान यह हादसा हुआ, जहां ज्वलनशील वाष्प के संपर्क में आने से अचानक विस्फोट हुआ और भीषण आग भड़क उठी। • मेंटेनेंस के दौरान गैस रिसाव या इग्निशन: हाइड्रोकार्बन स्टोरेज टैंकों में मेंटेनेंस करते समय अवशिष्ट गैसें या वाष्प जमा हो सकती हैं, जो किसी चिंगारी या उपकरण की गर्मी से अचानक सुलग जाती हैं। प्रारंभिक विवरण बताते हैं कि टैंक के रखरखाव के दौरान अचानक विस्फोट हुआ, जिसने कर्मियों को संभलने का मौका नहीं दिया। • उच्च जोखिम वाला इंटरमीडिएट वातावरण: इंटरमीडिएट टैंक फार्म पेट्रोलियम उत्पादों के अस्थाई भंडारण के लिए बने होते हैं, जहां वाष्पशील गैसों का दबाव लगातार बना रहता है। ऐसे स्थानों पर रिपेयरिंग के दौरान वेंटिलेशन और डीगैसिंग की सूक्ष्म चूक भी गंभीर विस्फोट का कारण बन सकती है। • उच्च स्तरीय जांच की प्रक्रिया: ऑयल इंडिया लिमिटेड और पेट्रोलियम सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञ दल यह पता लगाने में जुटे हैं कि क्या मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) का पूरी तरह पालन किया गया था या कोई तकनीकी विफलता हुई थी। जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही विस्फोट के सटीक और तकनीकी कारणों की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी। सवाल-जवाब 1. ऑयल इंडिया संयंत्र में यह हादसा किस जगह और कब हुआ? यह दुर्घटना असम के डिब्रूगढ़ जिले में स्थित तेंगाखात इंटरमीडिएट टैंक फार्म में शुक्रवार को मेंटेनेंस कार्य के दौरान हुई। 2. इस अग्निकांड में अब तक कुल कितने लोगों की जान जा चुकी है? इस दुर्घटना में मृतकों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है, जिनमें से एक की मौत शुक्रवार को और दो कर्मियों की मौत शनिवार को हुई। 3. शनिवार को जान गंवाने वाले कर्मियों की पहचान क्या है? शनिवार को जान गंवाने वालों में तेरह वर्षों से कंपनी से जुड़े इंजीनियर तापस ज्योति गोगोई और स्पेक्ट्रॉन इंजीनियरिंग के कर्मचारी रूपम गोहेन शामिल हैं। 4. हादसे के समय मौके पर कितने कर्मी थे और घायलों की क्या स्थिति है? हादसे के समय मौके पर नौ कर्मी मौजूद थे, जिनमें से सात घायल हुए थे; वर्तमान में तीन घायलों की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। 5. कंपनी ने पीड़ितों के परिवारों के लिए कितने मुआवजे का ऐलान किया है? ऑयल इंडिया लिमिटेड ने मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये तथा प्रत्येक घायल कर्मी को 5 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है। https://trendkia.com/assam/assam-ke-dibrugarh-men-oil-india-snyntra-visphota-men-mritakon-ki-snkhya-barhakara-tina-hui-57840 TrendKia — Har trend, sabse pehle.